जानिए हमारा कानून
जानिए साक्ष्य विधि में मरने से पहले दिए गए बयान का महत्व
भारतीय साक्ष्य अधिनियम में मृत्युकालिक कथन (Dying declaration) का अत्यधिक महत्व है। मृत्युकालिक कथन याने मरने से पहले दिया गया बयान। साक्ष्य अधिनियम की धारा 32(1) के अंतर्गत मृत्युकालिक कथन का वर्णन किया गया है तथा मृत्युकालिक कथन को साक्ष्य के अंदर अधिकारिता दी गई है। साक्ष्य अधिनियम में सुसंगत तथ्य क्या होंगे इस संबंध में एक पूरा अध्याय दिया गया है, इस अध्याय के अंदर ही धारा 32 का भी समावेश है। इस धारा के अंतर्गत यह बताने का प्रयास किया गया है कोई भी कथन मृत्युकालिक कथन है तो उसे सुसंगत माना...
किसी सिविल मामले में वकील कैसे बदला जा सकता है, जानिए सम्बंधित प्रकिया एवं प्रावधान
जब भी कोई व्यक्ति न्याय प्राप्त के इरादे से अदालत की तरफ देखता है तो उसे सबसे पहले एक वकील की आवश्यकता प्रतीत होती है। वो एक बेहतर वकील की तलाश में निकल पड़ता है जो उसके मामले को अदालत में उत्तम प्रकार से प्रस्तुत करे और हरसंभव प्रयास करे कि वह व्यक्ति न्याय प्राप्त करने में सफल हो। दूसरी ओर, एक वकील का धर्म अपने मुवक्किल को न्याय दिलाना ही होता है और ऐसा करते हुए उसे न्यायालय के अहम् एवं जिम्मेदार अधिकारी के रूप में कार्य करना होता है।एक मुवक्किल जब अपने वकील को स्वयं के मामले का अदालत में...
जानिए संविधान के रक्षक भारत के सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां
भारत के सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) को संविधान का रक्षक कहा जाता है तथा समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान की रक्षा की गई है। संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से ही उच्चतम न्यायालय को इतना महत्व और इतनी शक्तियां दी गई हैं। भारत का उच्चतम न्यायालय न्यायपालिका का सर्वोच्च स्थान है। इसे संघ की न्यायपालिका भी कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत भारत के उच्चतम न्यायालय के स्थापना का उपबंध किया गया है। उच्चतम न्यायालय को संविधान के उपबंधों की व्याख्या के संबंध में अपना अंतिम...
साक्ष्य अधिनियम भाग 3 : जानिए क्या होते हैं तथ्य, विवाधक तथ्य एवं सुसंगत तथ्य
साक्ष्य अधिनियम के तहत पिछले दो आलेख में हमने देखा कि साक्ष्य में सबूत का भार किस पर होता है? इसके अलावा हमने यह भी देखा कि किस तरह एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति क्या होती है और किस प्रकार इसमें रेस जेस्टे का सिद्धांत किस प्रकार लागू होता है। साक्ष्य विधि : क्या होती है एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति, जानिए रेस जेस्टे का सिद्धांत साक्ष्य अधिनियम की इस सीरीज़ में हम अब समझेंगे कि तथ्य ,विवाधक तथ्य एवं सुसंगत तथ्य क्या होते हैं और साक्ष्य के संदर्भ में...
अभियुक्त के इन अधिकारों का उल्लेख करती है सीआरपीसी की धारा 167
सीआरपीसी की धारा 167 अभियुक्त के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस धारा के अंतर्गत अभियुक्त को जमानत तक मिल जाती है तथा अभियुक्त को कितने समय अवधि के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना है। इसकी जानकारी इस धारा के अंतर्गत दी गई है। यह धारा अभियुक्त के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस धारा को पुलिस अन्वेषण वाले अध्याय में रखा गया है। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 किया धारा 167 अभियुक्त के लिए तीन प्रकार की राहत प्रदान करती है तथा इन तीनों बातों का उल्लेख इस धारा के अंतर्गत किया गया है। 1. गिरफ्तार...
आखिर वकीलों को क्यों देनी चाहिए प्रो-बोनो (निशुल्क) कानूनी सहायता?: कुछ सुझाव
'प्रो बोनो पब्लिको' एक लैटिन वाक्यांश है जिसका अर्थ है "लोगों की भलाई के लिए"। यह आमतौर पर अपने संक्षिप्त रूप "प्रो बोनो" के रूप में उपयोग किया जाता है। कानूनी क्षेत्र में, "प्रो बोनो" शब्द का अर्थ उन कानूनी सेवाओं से है जो जनता की भलाई के लिए या तो मुफ्त में या कम शुल्क पर दी जाती हैं। नि:शुल्क कानूनी सहायता (pro bono legal service) को पारंपरिक कानूनी सहायता सेवाओं, जो कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा वकीलों के माध्यम से मुहैया करायी जाती है, से अलग समझा जाना चाहिए। यह उम्मीद की जाती है कि...
भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) के बारे में ख़ास बातें
भारत के संविधान की मसौदा समिति (Drafting Committee) ने यह देखा था कि प्रस्तावना/उद्देशिका (Preamble) को नए राष्ट्र की महत्वपूर्ण विशेषताओं को परिभाषित करने तक ही सीमित होना चाहिए और उसके सामाजिक-राजनीतिक उद्देश्यों एवं अन्य महत्वपूर्ण मामलों को संविधान में और विस्तार से समझाया जाना चाहिए। संविधान के निर्माताओं का अंतिम उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य और समतामूलक समाज का निर्माण करना था, जिसमें भारत के उन लोगों के उद्देश्य और आकांक्षाएं शामिल हों जिन्होंने देश की आजादी की प्राप्ति के लिए अपना...
साक्ष्य विधि : क्या होती है एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति, जानिए रेस जेस्टे का सिद्धांत
साक्ष्य विधि का कार्य उन नियमों का प्रतिपादन करना है, जिनके द्वारा न्यायालय के समक्ष तथ्य साबित और खारिज किए जाते हैं। किसी तथ्य को साबित करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, उसके नियम साक्ष्य विधि द्वारा तय किये जाते हैं। साक्ष्य विधि अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण विधि है। समस्त भारत की न्याय प्रक्रिया भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की बुनियाद पर टिकी हुई है। साक्ष्य अधिनियम आपराधिक तथा सिविल दोनों प्रकार की विधियों में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस साक्ष्य अधिनियम के माध्यम से ही यह तय...
क्या सांसद/विधायक वकालत कर सकते हैं, जानिए अधिवक्ता अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट का विचार
वकालत पेशे से जुड़ा हर व्यक्ति यह मानता और महसूस करता है कि वकील, मुखर प्रकृति के होते हैं और वे अपनी तार्किक सोच के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। कानून की शिक्षा ग्रहण करने के पश्च्यात, उन्हें कानून को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। अंतत: देश को कानून के शासन के अनुसार ही चलना होता है। यही कारण है कि हमारे संसद में और विभिन्न राज्यों के विधायी सदनों में हमे तमाम कानून के जानकार एवं वकील, सदस्य के रूप में दिखाई पड़ते हैं।जैसा कि हम जानते हैं, कानून बनाना विधायिका का कार्य है और इसमें...
क्या होता है सबूत का भार? जानिए साक्ष्य अधिनियम की खास बातें
साक्ष्य विधि का कार्य उन नियमों का प्रतिपादन करना है, जिनके द्वारा न्यायालय के समक्ष तथ्य साबित और खारिज किए जाते हैं। किसी तथ्य को साबित करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, उसके नियम साक्ष्य विधि द्वारा तय किये जाते हैं। साक्ष्य विधि अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण विधि है। समस्त भारत की न्याय प्रक्रिया भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की बुनियाद पर टिकी हुई है। साक्ष्य अधिनियम आपराधिक तथा सिविल दोनों प्रकार की विधियों में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस साक्ष्य अधिनियम के माध्यम से ही यह तय...
ट्रायल शुरू होने के बाद याचिका में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि साक्ष्य के स्तर पर याचिकाओं में संशोधन की अनुमति केवल तभी दी जा सकती है, जब न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो कि सम्यक तत्परता के बावजूद पक्षकार ट्रायल शुरू होने से पहले संशोधन का अनुरोध नहीं कर सका। बंटवारा के एक मुकदमे में, गवाही पहले ही शुरू हो गयी थी और उस स्तर पर, वादी ने याचिका में संशोधन की मांग को लेकर अर्जी दी थी। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए प्रतिवाद किया था कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी), 1908 के नियम-16 आदेश-6 के मद्देनजर याचिका में...
निर्भया मामला: जानिए क्यों बदली गई दोषियों को फांसी दिए जाने की तारीख?
जैसा कि हम सब जानते हैं कि निर्भया बलात्कार-हत्या के मामले में चारों दोषियों को फांसी देने की तारीख में बदलाव किया गया है। अब चारों दोषियों को 1 फरवरी, 2020 को फांसी दी जाएगी। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (7 जनवरी, 2020) को इस मामले में 4 दोषियों को फांसी की सजा के लिए 22 जनवरी को सुबह 7 बजे का वक़्त मुक़र्रर करते हुए डेथ वारंट जारी किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 जनवरी को मामले में दोषी, मुकेश और विनय की क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया था। उसी दिन, मुकेश ने दिल्ली के...
क्या वकीलों को है विरोध प्रदर्शन या न्यायालय का बहिष्कार करने का अधिकार?
न्यायालय, न्याय का एक ऐसा मंदिर है जहाँ एक हर कोई अपने विवाद को सुलझाने/निपटाने के लिए आता है। वकील एवं न्यायिक अधिकारी ऐसे लोगों को न्याय दिलाने में एक अहम् भूमिका निभाते हैं। यह भी अपेक्षा की जाती है कि जब कोई व्यक्ति न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाए तो हमे उसके लिए ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना चाहिए जहाँ वो बिना किसी झंझट एवं परेशानी के अपने विवाद का निपटारा कर सके। हालाँकि, अक्सर ही हम देखते हैं की वकीलों द्वारा हड़ताल बुलाई जाती है, जहाँ वे सभी प्रकार के न्यायिक कार्य से विरत...
ग्रेच्युटी कानून के बारे में जानिए खास बातें
ग्रेच्युटी को हिंदी भाषा में उपदान कहा जाता है। इसका अर्थ नौकरी पेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक द्वारा दी जाती है जिस नियोजक के पास में व्यक्ति नौकरी कर रहा था। ग्रेच्युटी को मोटे तौर पर इस तरह समझ सकते हैं कि कोई व्यक्ति किसी रजिस्टर्ड कंपनी में कम से कम पांच साल तक नौकरी करता है और किसी कारण वह नौकरी जारी नहीं रखता है तो वह अपने नियोक्ता से ग्रेच्युटी के रूप में एक निश्चित धनराशि पाने का हकदार...
जानिए पासपोर्ट अधिनियम 1967, कौन सी परिस्थितियों में पासपोर्ट हो सकता है ज़ब्त
पासपोर्ट एक बड़ा दस्तावेज है जो विदेशों में किसी देश के नागरिकों की नागरिकता और पहचान साबित करता है। सभी देश अपने नागरिकों को अलग-अलग तरह के पासपोर्ट प्रदान करते हैं। नागरिक इन पासपोर्ट के माध्यम से विश्व भर के अलग-अलग देशों की यात्रा करते हैं। भारत में भी इस तरह के यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट का निर्धारण किया गया है। सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले पासपोर्ट के माध्यम से भारत के नागरिकों को एवं भारत के बाहर रह रहे भारत के नागरिकों को पहचान दी जाती है। यह पहचान विश्व भर में उन लोगों को...
उत्तरप्रदेश में लागू हुई पुलिस कमिशनर प्रणाली क्या है, जानिए ख़ास बातें
उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (14-01-2020) को राज्य के 2 शहरों, लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में पुलिस आयुक्त प्रणाली (Commissionerate System of Policing) लागू करने की घोषणा की। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमारी सरकार द्वारा आज पुलिस सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर-प्रदेश कैबिनेट ने लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।" इस प्रणाली को लागू करने से दोनों ही जिलों में कानून व्यवस्था समेत तमाम प्रशासनिक...
जानिए क्या होते हैं सिविल प्रकृति के वाद
हम यह जानते हैं कि जहाँ भी और जब भी हमारे अधिकारों का हनन होता है, तो कानून के अंतर्गत उसके सम्बन्ध में हमे उपचार/उपाय भी उपलब्ध कराये गए हैं। हालाँकि हमे उन उपचारों को प्राप्त करने के लिए किस फोरम में जाना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे किस प्रकार के अधिकार का हनन हुआ है। मौजूदा लेख में हम 'सिविल प्रकृति' के उन मामलों के बारे में बात करेंगे जिनका विचारण सिविल अदालतों द्वारा किया जा सकता है। सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 9 में यह प्रावधान है कि दीवानी अदालतों के पास सभी सिविल...
क्या है पुलिस अधिनियम 1861 जानिए खास बातें
भारत में पुलिस अलग अलग राज्य सरकारों के अधीन रहती है तथा अलग-अलग राज्य विधान मंडल द्वारा पुलिस से संबंधित कानून तैयार किए जाते हैं। कुछ केंद्रीय कानून भी देश भर की पुलिस के लिए उपलब्ध है। यह कानून संपूर्ण भारत पर अधिनियमित होता है, इसे पुलिस अधिनियम 1861 कहा जाता है। इस अधिनियम का उद्देश्य पुलिस को पुनर्गठन करना और अपराधों को निर्धारित करने तथा उनका पता लगाने के लिए उसे और पुलिस को अधिक दक्ष उपकरण बनाना है। इस अधिनियम के होते हुए भी अलग-अलग राज्यों द्वारा अपनी पुलिस को शक्तियां कर्तव्य...
जानिए मृत्यु वारंट क्या होता है एवं इसके निष्पादन पर क्या है कानून?
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (7 जनवरी, 2020) को निर्भया बलात्कार-हत्या मामले में चार दोषियों को फांसी की सजा के लिए 22 जनवरी को सुबह 7 बजे डेथ वारंट जारी किया है। चार दोषियों - मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आदेश की सूचना दी गई। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश अरोड़ा उनके खिलाफ डेथ वारंट के निष्पादन की याचिका पर विचार कर रहे थे। इससे पहले दिसंबर 2018 में, निर्भया के माता-पिता ने दोषियों को मिले मृत्युदंड को निष्पादित...
जानिए संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों के बारे में ख़ास बातें (भाग 2/2)
जैसा कि आप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के 6 प्रधान अंगों को विस्तार से समझने के लिए हम 2 लेखों की एक श्रृंखला आपके सामने लेकर आये हैं। संयुक्त राष्ट्र संगठन का निर्माण करने वाले 6 प्रधान अंगों को महासभा (The General Assembly), सुरक्षा परिषद (The Security Council), न्यास परिषद (The Trusteeship Council), आर्थिक और सामाजिक परिषद (The Economic and Social Council), अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) एवं सचिवालय (The Secretariat) के नाम से जाना जाता है। इस...



















