जानिए हमारा कानून

क्या वकीलों को है विरोध प्रदर्शन या न्यायालय का बहिष्कार करने का अधिकार?
क्या वकीलों को है विरोध प्रदर्शन या न्यायालय का बहिष्कार करने का अधिकार?

न्यायालय, न्याय का एक ऐसा मंदिर है जहाँ एक हर कोई अपने विवाद को सुलझाने/निपटाने के लिए आता है। वकील एवं न्यायिक अधिकारी ऐसे लोगों को न्याय दिलाने में एक अहम् भूमिका निभाते हैं। यह भी अपेक्षा की जाती है कि जब कोई व्यक्ति न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाए तो हमे उसके लिए ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना चाहिए जहाँ वो बिना किसी झंझट एवं परेशानी के अपने विवाद का निपटारा कर सके। हालाँकि, अक्सर ही हम देखते हैं की वकीलों द्वारा हड़ताल बुलाई जाती है, जहाँ वे सभी प्रकार के न्यायिक कार्य से विरत...

भारत के कड़े अधिनियमों में से एक अधिनियम है एनडीपीएस एक्ट 1985, जानिए प्रमुख बातें
भारत के कड़े अधिनियमों में से एक अधिनियम है एनडीपीएस एक्ट 1985, जानिए प्रमुख बातें

भारतीय संसद में 1985 में एनडीपीएस एक्ट पारित किया गया, जिसका पूरा नाम नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 है। नारकोटिक्स का अर्थ नींद से है और साइकोट्रोपिक का अर्थ उन पदार्थों से है जो मस्तिष्क के कार्यक्रम को परिवर्तित कर देता है। कुछ ड्रग और पदार्थ ऐसे है जिनका उत्पादन और विक्रय ज़रूरी है, लेकिन उनका अनियमित उत्पादन तथा विक्रय नहीं किया जा सकता। उन पर सरकार का कड़ा प्रतिबंध होता है और रेगुलेशन है, क्योंकि ये पदार्थ अत्यधिक मात्रा में उपयोग में लाने से नशे में प्रयोग होने लगते...

प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंंचाने के मामलों पर क्या कहता है कानून?
प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंंचाने के मामलों पर क्या कहता है कानून?

कई बार देश में विरोध प्रदर्शन, हिंसक हो जाते हैं और जिसके परिणामस्वरूप लोक संपत्ति को काफी नुकसान पहुचंता है। हाल के समय में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में इसी प्रकार की हिंसा देखने को मिली, जहाँ लोक संपत्ति को नुकसान पहुंंचाया गया। हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह समझते हैं कि इस तरह की हिंसा में न केवल लोक संपत्ति को नुकसान पहुंंचता है, बल्कि टैक्स अदा करने वाले नागरिकों के धन का नुकसान होता है, सरकार के खर्चों पर बोझ बढ़ता है, अशांति फैलती है और आमजन का जीवन...

[धारा 151 CrPC] जानिए संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस की गिरफ्तार करने की शक्ति
[धारा 151 CrPC] जानिए संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस की गिरफ्तार करने की शक्ति

सामान्य अर्थ में गिरफ्तारी की शक्ति,हमेशा किसी को पुलिस हिरासत में लेने से जुड़ी रही है। हालाँकि एक मजिस्ट्रेट और एक आम व्यक्ति भी कुछ मामलों में किसी की गिरफ्तारी करने में सक्षम हैं। आपराधिक कानूनों में गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका उद्देश्य अदालत के सामने एक अपराधी को पेश करना और उसे कानून की पकड़ से भागने से रोकना है। गिरफ्तारी का मतलब किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ना है, जिसने अपराध किया है या उसके द्वारा अपराध किये जाने की संभावना है। गिरफ्तारी के जरिये, इस आशंका को खत्म किया जाता है कि...