जानिए हमारा कानून
जानिए संपत्ति-अंतरण अधिनियम के अंतर्गत 'संपत्ति' का अर्थ और इसकी प्रमुख विशेषताएं
संपत्ति का वास्तविक अर्थ बहुत व्यापक है। इसमें न केवल मूर्त (Tangible) वस्तुएं शामिल हैं (जैसे भूमि, आवास या दुकान इत्यादि), बल्कि आय या स्रोत के तत्व के रूप में माने जाने वाली तमाम अमूर्त (Intangible) संपत्तियां भी शामिल हैं (जैसे बौद्धिक सम्पदा)। गौरतलब है कि 'संपत्ति' शब्द के अर्थ के अंतर्गत, केवल मूर्त या अमूर्त वस्तुएं ही नहीं आती हैं, बल्कि इसके अंतर्गत उन मूर्त एवं अमूर्त वस्तुओं से सम्बंधित किसी व्यक्ति विशेष के अधिकार एवं हित भी आते हैं। सामान्य अर्थ में, संपत्ति कोई भी भौतिक या...
अर्ध-संविदा क्या होती है एवं अनुचित सम्पन्नता के सिद्धांत का इससे क्या है संबंध?
एक 'अर्ध/कल्प अनुबंध' (Quasi Contract) का अर्थ उस कानूनी रूप से वैध समझौते (Agreement) से है, जहाँ दो या अधिक पक्षों के बीच पहले से कोई संविदात्मक दायित्व (Contractual Liability) तय नहीं होता है। यह एक ऐसी संविदा है जो अदालत द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसका कानूनी प्रावधानों में भी उल्लेख मिलता है। यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार की संविदा, अदालत के आदेश द्वारा बनायी/घोषित की जाती है, न कि पक्षों के द्वारा (हालाँकि अदालत की घोषणा पक्षों के कृत्यों पर आधारित होती है)। 'Quasi' शब्द का अर्थ आभासी...
साइबर अपराध के प्रमुख प्रकार क्या हैं और कैसे दिया जाता है इन्हें अंजाम?: 'साइबर कानून श्रृंखला' (भाग 2)
पिछले लेख साइबर अपराध क्या है एवं इसे किसके विरूद्ध अंजाम दिया जाता है?: 'साइबर कानून श्रृंखला' (भाग 1) में हमने यह समझा कि साइबर अपराध क्या है एवं इसे किस के विरुद्ध अंजाम दिया जाता है। जैसा कि हमने जाना और समझा है, साइबर अपराधों को ऐसे गैरकानूनी कृत्यों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जहां कंप्यूटर का उपयोग या तो एक उपकरण या लक्ष्य या दोनों के रूप में किया जाता है। साइबर अपराध एक सामान्य शब्द है, जिसमें फ़िशिंग, स्पूफिंग, DoS हमला, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, ऑनलाइन लेन-देन धोखाधड़ी,...
साइबर अपराध क्या है एवं इसे किसके विरूद्ध अंजाम दिया जाता है?: 'साइबर कानून श्रृंखला' (भाग 1)
जिस गति से तकनीक ने उन्नति की है, उसी गति से मनुष्य की इंटरनेट पर निर्भरता भी बढ़ी है। एक ही जगह पर बैठकर, इंटरनेट के जरिये मनुष्य की पहुँच, विश्व के हर कोने तक आसान हुई है। आज के समय में हर वो चीज़ जिसके विषय में इंसान सोच सकता है, उस तक उसकी पहुँच इंटरनेट के माध्यम से हो सकती है, जैसे कि सोशल नेटवर्किंग, ऑनलाइन शॉपिंग, डेटा स्टोर करना, गेमिंग, ऑनलाइन स्टडी, ऑनलाइन जॉब इत्यादि। आज के समय में इंटरनेट का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में किया जाता है। इंटरनेट के विकास और इसके संबंधित लाभों के साथ...
क्या एक नाबालिग संविदा करने में सक्षम है ? जानिए क्या कहता है कानून
स्पर्श उपाध्यायआज के दौर में अवयस्क/नाबालिग सार्वजनिक जीवन में पहले से भी अधिक सक्रिय दिखते हैं। नाबालिग, सिनेमा हॉल में जाते हैं, टिकट पर यात्रा करते हैं, साइकिल स्टैंड का इस्तेमाल करते हैं, अपने कपड़े सिलवाने या साफ करने के लिए सेवाओं का उपयोग करते हैं, शिक्षा संस्थानों में स्वयं फीस भरते हैं और जीवन और शिक्षा से जुड़ी बहुत सारी अन्य चीज़ों का दैनिक लेनदेन करते हैं। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अवयस्कों/नाबालिगों द्वारा किये जाने वाले करार या संविदा (Agreement) की वैधता को समझें। जैसा कि...
FIR दर्ज करवाने में अगर देरी होती है तो क्या होते हैं परिणाम और अभियोजन के मामले पर क्या होता इसका असर?
स्पर्श उपाध्याय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 154 की उप-धारा (1) के तहत एक पुलिस थाने के भारसक अधिकारी को एक संज्ञेय अपराध (Cognizable offence) की दी गयी एक सूचना को, आमतौर पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के रूप में जाना जात है, हालांकि इस शब्द का उपयोग कोड में नहीं किया गया है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है। और जैसा कि इसके 'निक नेम' (FIR) से पता चलता है कि यह जल्द से जल्द, किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना है। यह आपराधिक कानून को...
रिवेंज पोर्न और भारतीय कानून, साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-3
-चित्रांगदा शर्मा और सुरभि करवा21वीं सदी में टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप में भी नए आयाम जुड़े हैं। आज रोमांटिक रिलेशनशिप के लिए कई तरह की डेटिंग साइट्स उपलब्ध हैं, जहां आप अपने पार्टनर के साथ इंटरनेट के माध्यम से जुड़े रह सकते हैं और वीडियो, फोटोज आदि शेयर कर सकते है। (यहां पार्टनर का अर्थ पति, बॉयफ्रेंड, दोस्त, डेट आदि हर तरह के अंतरंग सम्बन्ध से है।) कई बार अंतरंग फोट, न्यूड फोटोज़ भी पार्टनर एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं। यही फोटो रिवेंज पोर्न के रूप में अंतरंग...
आपराधिक मामलों की 'केस डायरी' क्या होती है और कौन कर सकता है इसका उपयोग?
स्पर्श उपाध्याय केस डायरी (अभियोग दैनिकी), एक आपराधिक मामले की दैनिक जांच का एक रिकॉर्ड है, जिसे पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाता है। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 172 के प्रावधान के तहत अन्वेषण (Investigation) करने वाले एक पुलिस अधिकारी को हर एक मामले में प्रत्येक दिन की गई जांच का रिकॉर्ड बनाए रखना आवश्यक होता है (जब वह दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 12 के तहत अन्वेषण करता है)। इस प्रावधान को दंड प्रक्रिया संहिता में शामिल किये जाने का एक कारण यह भी प्रतीत होता है कि इसके...
क्या है ऑनलाइन ट्रोलिंग पर कानून (साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-2)
चित्रांगदा शर्मा और सुरभि करवायह लेख साइबर स्पेस और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा श्रेणी में दूसरा लेख है। पिछले लेख में हमने साइबर स्टाकिंग की बात की थी। आज हम ऑनलाइन ट्रोलिंग और उससे सम्बंधित कानून पर चर्चा करेंगे।क्या है साइबर स्टॉकिंग पर कानून, साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-1क्या है ट्रोलिंग'ट्रोलिंग' का सीधे-सीधे शब्दों में अर्थ है किसी व्यक्ति को परेशान करने, खिझाने आदि उद्देश्यों से अपमानजनक सन्देश भेजना। ट्रोलिंग में जाति, लिंग, सेक्सुअल ओरिएंटेशन, धर्म आदि पूर्वाग्रहों के...
क्या है साइबर स्टॉकिंग पर कानून, साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-1
-चित्रांगदा शर्मा और सुरभि करवा इंटरनेट की शुरुआत एक लोकतान्त्रिक और समानता के सिद्धांत आधरित प्लेटफार्म के वादे के साथ हुई थी और कुछ हद तक यह उद्देश्य हमारा समाज पा भी चुका है। आज इंटरनेट ने देश के कई कोनों में पहुँचकर हाशिये पर धकेली हुई आवाजों को मुख्य धारा में आने का मौका दिया है, लेकिन जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से इंटरनेट भी अछूता नहीं रहा है। इस सन्दर्भ में यदि पितृसत्ता और लैंगिक भेदभाव की बात करें तो कई शोध कहते हैं कि वास्तविक दुनिया की पुरुष प्रधानता इंटरनेट में भी पहुँच...
आखिर क्यों आपराधिक मामले वापस लेने का फैसला अकेले सरकार नहीं कर सकती? जानिए अभियोजन वापसी के ये महत्वपूर्ण बिंदु
स्पर्श उपाध्याय अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तब चर्चा में आये, जब उन्होंने यह कहा की यदि उनकी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश राज्य में दुबारा सत्ता में आती है (2022 के चुनाव में) तो वो आजम खान (वर्तमान सांसद, रामपुर एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता) के खिलाफ दायर सभी मुक़दमे वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा, "यदि समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापस आ जाती है, तो सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर के सांसद आज़म खान के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस ले लिए...
जानिए संस्वीकृतियों की रिकॉर्डिंग के सन्दर्भ में (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164)- भाग-2
वी. राम कुमार, केरल हाईकोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीश (संस्वीकृतियों की रिकॉर्डिंग के सन्दर्भ में पहला भाग प्रकाशित किया जा चुका है, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत संस्वीकृतियों की रिकॉर्डिंग के सन्दर्भ में विस्तार से बताया गया था। यह लेख आप यहां से पढ़ सकते हैं। पेश है इसी कड़ी का दूसरा भाग।)जानिए संस्वीकृतियों की रिकॉर्डिंग के सन्दर्भ में (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164)- भाग-१कौन से स्टेज पर संस्वीकृति या बयान रिकॉर्ड किया जाता है? 7. "संस्वीकृति" या "बयान",...
किसी अपराध में जुर्माना कैसे तय किया जाता है, अर्थदंड पर क्या कहती है भारतीय दंड संहिता
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि अपराधी को सज़ा के तौर पर अर्थदंड भी लगाया जाता है। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर एक ही प्रकृति के जुर्म में अर्थदंड कम या अधिक कैसे हो सकता है? आखिर जुर्माने की राशि का निर्धारण कैसे किया जाता है? विधि द्वारा जुर्माने की राशि आखिर कैसे तय होती है? अपराध साबित होने पर भारतीय दंड संहिता 1860 में किसी अपराध के लिए सज़ा के साथ साथ अर्थदड या जुर्माने का भी प्रावधान है। अर्थदंड की राशि किसी कानून की धारा में उल्लेखित राशि द्वारा निर्धारित की जाती है। अगर किसी कानून में...
धन शोधन निवारण अधिनियम में "सतत अपराध"की परिकल्पना, जानिए क्या कहता है प्रिवेंशनऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट
धन शोधन की यह व्याख्या उपयोगी है और इससे यह भी पता चलता है कि इंटेग्रेशन के तीसरे चरण की समाप्ति के बाद ही धन शोधन का अपराध मुकम्मल होता है। अदालत ने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति इस अपराध से प्राप्त धन को छिपाकर रखता है, या इसे अपने पास रखता है या इसका प्रयोग करता है तब वह धन शोधन का अपराधी होता है। किसी भी व्यक्ति को धन शोधन के अपराध का दोषी तभी माना जाएगा जब वह इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद इस अपराध को अंजाम दिया है।
जानिए संस्वीकृतियों की रिकॉर्डिंग के सन्दर्भ में (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164)- भाग-1
वी. राम कुमार, केरल हाईकोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीशप्रस्तावना 1. जिस बात ने मुझे यह लेख लिखने के लिए प्रेरित किया वह हाल ही में केरल हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच द्वारा 25 फरवरी 2019 को सुनाए गए निर्णय अली के. बी. बनाम केरल राज्य [2019 (1) KHC 898] के मामले में दिए गए कुछ कथन हैं। 2. हाई कोर्ट के समक्ष मामला मर्डर का था। माननीय न्यायमूर्ति, PW 2 जो कि एक मात्र चश्मदीद गवाह था, उसकी गवाही पर विचार कर रहे थे। यह गवाह और कोई नहीं बल्कि मृत व्यक्ति की पुत्री थी। वर्ष 2008 में, जब यह घटना हुई वह...
भरण पोषण के मामले में ये हैं कानून के महत्वपूर्ण बिंदु, क्या कहती है Crpc की धारा 125
भारत में वैवाहिक विवाद बढ़ रहे हैं और अदालतों में दहेज़, तलाक़, भरण पोषण, घरेलू हिंसा जैसे प्रकरण लगातार बढ़ रहे हैं। यह देखा गया है कि जब भी महिला अपने पति के खिलाफ अदालत का रुख करती है, वह भरण पोषण का दावा ज़रूर करती है। पति का दायित्व है कि वह अपनी पत्नी एवं बच्चों का भरण पोषण करे और विवाद की स्थिति में भी पति को अदालत कई बार पत्नी को अंतरिम भरण पोषण का देने का आदेश देती है। Criminal Procedure Code 1973 [CrPC] - दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 के अंतर्गत पत्नी अपने से भरण पोषण पाने का...
क्या हैं संपत्ति से संबंधित हिंदू महिलाओं के अधिकार? जानिए महत्वपूर्ण बातें
सिद्धार्थ यादव अगर हम इतिहास की बात करें तो यह विडंबना रही है कि हिंदू कानून के तहत महिलाओं को एक पुत्री के रूप में या एक पत्नी के रूप में अपने पूर्वजों की अचल या चल संपत्ति में, कुछ भी हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। हालांकि, कुछ क्षमताओं में महिलाओं को संपत्ति इन्हेरिट करने का अधिकार दिया गया था, लेकिन वह केवल संपत्ति का सीमित उपयोग करने का अधिकार था। भारत के स्वतंत्र होने के बाद, संपत्ति से संबंधित हिंदू कानून को संहिताबद्ध किया गया और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 बनाया गया।...
आजीवन कारावास की सज़ा कितने साल की होती है? जानिए कानून क्या कहता है
आजीवन कारावास याने उम्रकैद (life imprisonment) की सज़ा गंभीर अपराधों के लिए दी जाती है। भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 में अपराधों के दंड के विषय में विस्तार से बताया गया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 53 में बताया गया है कि दंड कितने प्रकार के होते हैं।भारतीय दंड संहिता की धारा 53 में दंड के प्रकार बताए गए हैं। भारतीय दंड संहिता कुल पांच तरह के दंड का प्रावधान करती है। 1. मृत्यु दंड 2. आजीवन कारावास 3. कारावास : यह कारावास दो प्रकार का है, पहला सश्रम कारावास और दूसरा सादा कारावास (किसी...















