झारखंड हाईकोट
झारखंड हाईकोर्ट ने जज के साथ तीखी बहस करने वाले वकील के खिलाफ शुरू किया आपराधिक अवमानना मामला
झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार (17 अक्टूबर) को वकील के खिलाफ स्वतः संज्ञान से आपराधिक अवमानना का मामला शुरू किया, जो गुरुवार को अदालती कार्यवाही के दौरान वीडियो क्लिप में सिंगल जज के साथ तीखी बहस करते हुए दिखाई दे रहा था।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर की पांच जजों की पीठ ने स्वतः संज्ञान से अवमानना मामले की सुनवाई की।हाईकोर्ट की वेबसाइट पर मामले की जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई 11 नवंबर के लिए...
झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान 'गुंडागर्दी' को लेकर वकील के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां खारिज की, उनकी माफी स्वीकार की
झारखंड हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को खारिज किया, जिन्होंने पिछले महीने अग्रिम ज़मानत मामले में बहस करते हुए "तेज़ आवाज़ में भाषण" दिया था और यह कहते हुए "अदालत को आदेश पारित करने की धमकी" दी थी कि वह इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने अपने 25 सितंबर के आदेश में कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जहां "अदालत में न्याय के समुचित प्रशासन में बाधा डालने का प्रयास किया गया" और इस तरह का हस्तक्षेप "अदालत को बदनाम करने" के समान है।...
झारखंड हाईकोर्ट ने चौकीदार भर्ती पर मुहर लगाई, कहा- नियुक्ति ज़िला स्तर पर होगी, ज़रूरी कारणों पर बीट से बाहर भी पोस्टिंग संभव
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण चौकीदार की भर्ती बीट-वार नहीं बल्कि जिला स्तर पर होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चौकीदारों को सामान्यतः उनके आवासीय बीट क्षेत्र में ही पदस्थापित किया जाना चाहिए लेकिन तर्कसंगत कारण होने पर उन्हें किसी अन्य बीट क्षेत्र में भी नियुक्त या ट्रांसफर किया जा सकता है।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह फैसला कोडरमा के डिप्टी कमिश्नर-सह-जिला दंडाधिकारी द्वारा कराई गई भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया।कोर्ट ने कहा कि...
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जेलों में बंद कैदियों की HIV जांच और इलाज के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को HIV और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के वैधानिक ढांचे के अनुरूप जेलों में HIV जांच और उपचार के लिए उचित दिशानिर्देश और नियम बनाने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही छह सप्ताह के भीतर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने दोषी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसने जेल में प्रवेश के बाद "एचआईवी जाँच कराने से इनकार कर दिया था"।अदालत ने अपने आदेश...
झारखंड हाईकोर्ट ने प्लास्टिक प्रतिबंध के क्रियान्वयन में विफलता के लिए भ्रष्टाचार को ज़िम्मेदार ठहराया, सुधारों का सुझाव दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार, बुनियादी ढांचे की कमी और कमज़ोर प्रवर्तन ने राज्य में प्लास्टिक कैरी बैग और एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध को अप्रभावी बना दिया।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ डॉ. शांतनु कुमार बनर्जी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा कानून होने के बावजूद प्लास्टिक प्रतिबंध के गंभीर क्रियान्वयन के अभाव को लेकर चिंता जताई गई।अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि प्रवर्तन को प्रणालीगत सुधारों के साथ जोड़ा...
झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: संशोधन याचिका के लिए पहले सेशन कोर्ट जाएं, 'दुर्लभ' मामलों में ही सीधे हाईकोर्ट आएं
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 397 के तहत संशोधन अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए याचिकाकर्ताओं को पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल दुर्लभ और विशेष परिस्थितियों में ही सीधे हाईकोर्ट से संपर्क किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में दायर संशोधन याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 245 के तहत अपने आरोप मुक्त होने के अनुरोध को खारिज किए जाने को चुनौती दी...
सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि में सुधार को सेवा के अंतिम चरण में अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि सेवा अभिलेखों में जन्मतिथि में सुधार को अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, भले ही इसके लिए मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र जैसे वास्तविक दस्तावेज़ ही क्यों न हों, खासकर जब ऐसा अनुरोध अत्यधिक विलंब (दो दशकों से अधिक) के बाद और सेवानिवृत्ति की तिथि के निकट किया गया हो। तथ्यअपीलकर्ता को मेसर्स भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के अंतर्गत 02.12.1986 को अस्थायी भूमिगत लोडर के रूप में नियुक्त किया गया था। अपनी...
बिना दोषसिद्धि के लंबित आपराधिक कार्यवाही पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक अधिकारों को रोकने का आधार नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि बिना दोषसिद्धि के आपराधिक कार्यवाही का लंबित रहना पेंशन, ग्रेच्युटी या अवकाश नकदीकरण रोकने का आधार नहीं हो सकता क्योंकि ये कर्मचारी के वैधानिक अधिकार हैं। तथ्यप्रतिवादी को 01.11.1984 को बी.एन.जे. कॉलेज में अस्थायी आधार पर एक वर्ष की अवधि के लिए हिंदी व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। इसमें एक प्रावधान था कि बिना कारण बताए उनकी सेवाएं कभी भी समाप्त की जा सकती हैं। उन्होंने 07.01.1985 को कॉलेज में...
झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक हुई हिरासत में मौतों का ब्योरा पेश करने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों को लेकर गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने राज्य के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफ़नामा दाख़िल करने का आदेश दिया।इस हलफ़नामे में वर्ष 2018 से अब तक हुई सभी हिरासत में मौतों का ब्योरा देना होगा। यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या इन मौतों की सूचना संबंधित मजिस्ट्रेट को जांच के लिए दी गई थी।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि 2018 से अब...
'वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान करना वैध निष्पादन का निर्णायक प्रमाण': झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि एक बार वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान कर दिए जाने पर यह निष्पादक की नियुक्ति और वसीयत के वैध निष्पादन को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देता है। न्यायालय ने दोहराया कि प्रोबेट कार्यवाही में निर्धारण का एकमात्र मुद्दा वसीयत की वास्तविकता और उचित निष्पादन है, न कि संपत्ति के स्वामित्व या अस्तित्व से संबंधित प्रश्न।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 276 सहपठित धारा 300 के तहत बीरेन पोद्दार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें...
लंबित जांच के दरमियान किसी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के समय से पहले सेवानिवृत्त करना कदाचार के बराबर: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने कहा कि विवादित अभिलेखों पर विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान, उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना, किसी कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत्त करना, अधिकारियों द्वारा कदाचार माना जाता है क्योंकि इससे नियोक्ता के हितों को नुकसान पहुंचता है। मामले में न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की सिफारिश करके और लंबित विभागीय जांच को रद्द करके, कंपनी के हितों के प्रतिकूल कार्य किया है। न्यायालय ने माना कि सीसीएल के प्रमाणित स्थायी आदेशों की...
3 लाख से 1 करोड़ तक के मूल्य वाले ट्रेडमार्क उल्लंघन विवादों की सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन) करेंगे: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में जहां किसी कमर्शियल विवाद का मूल्य 3 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक है, वहां सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग), जिसे सिविल कोर्ट के रूप में नामित किया गया है, उनको ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करने का अधिकार है।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने यह निर्णय खाद्य उत्पाद कंपनी खेमका फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील स्वीकार करते हुए दिया। यह अपील 2024 में सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)-प्रथम, जमशेदपुर द्वारा...
दलित छात्र की मौत पर झारखंड हाईकोर्ट की BIT मेसरा को फटकार, ₹20 लाख मुआवजा और रैगिंग रोकने के निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी मेसरा, पॉलिटेक्निक कॉलेज द्वारा तीसरे सेमेस्टर के छात्र के माता-पिता को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे कथित तौर पर हरिजन/दलित के नाम पर जातिवादी गालियों का शिकार होना पड़ा था और कई हिंसक हमलों के कारण उसकी मौत हो गई थी।जस्टिस संजय प्रसाद ने घटना को 'नृशंस हमला' करार देते हुए कॉलेज को उनके लापरवाह रवैये और खराब प्रशासन के लिए आड़े हाथ लिया, जिसमें आवश्यक अनुशासन बनाए रखने में उनकी विफलता भी शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप छात्र की दुखद मौत हुई। अदालत...
Order 6 Rules 17 CPC| अपीलीय स्तर पर प्रस्तावित संशोधन के जरिए याचिका में स्वीकृति के प्रभाव को कम नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अपीलीय स्तर पर याचिकाओं में संशोधन की अनुमति तब नहीं दी जा सकती जब अपीलकर्ता पक्ष देरी के लिए ठोस कारण प्रस्तुत करने में विफल रहता है और सुनवाई के दौरान पूर्व में स्वीकृत संशोधन को लागू नहीं करता है। इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि सीपीसी का आदेश VI नियम 17 न्यायालय को कार्यवाही के किसी भी चरण में विवेकाधीन अधिकार प्रदान करता है, जिससे वह किसी भी पक्ष को अपनी याचिकाओं में ऐसे तरीके से और ऐसी शर्तों पर परिवर्तन या संशोधन करने की...
स्वीकृत पदों पर 15 वर्ष से अधिक लगातार सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारी बिहार पेंशन नियमों के तहत पेंशन के हकदार: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने कहा कि नियमित वेतन वाले स्वीकृत पदों पर 15 वर्ष से अधिक की निरंतर सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारी बिहार पेंशन नियम, 1950 (झारखंड राज्य द्वारा अपनाए गए) के नियम 59 के अंतर्गत पेंशन के हकदार हैं। पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ताओं को राजस्व प्रभाग, रांची के अंतर्गत विभिन्न स्वीकृत पदों पर नियुक्त किया गया था, जैसे कि आवधिक किराया संग्राहक, लिपिक और अमीन। उनकी नियुक्तियां कार्यालय आदेशों के माध्यम से की गई थीं। उन्हें विशिष्ट वेतनमान और महंगाई भत्ता प्रदान...
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में गोमांस प्रतिबंध लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर DGP से हलफनामा मांगा
झारखंड हाईकोर्ट ने कुरैशी मोहल्ला जैसे बाजारों के साथ-साथ रांची के अन्य हिस्सों में गोवंशीय मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए उठाए गए कदमों सहित पहले के निर्देशों पर की गई कार्रवाई के संबंध में पुलिस महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है, जहां राज्य के कानून के तहत गोजातीय पशुओं का वध रोकना है।अदालत रांची की सड़कों पर पशुओं (पोल्ट्री पक्षियों सहित) को अवैध रूप से मारने और आम जनता को कंकाल दिखाने पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी संदर्भ के लिए, 2024 में एक आवेदन...
"परेशान करने वाला, विशेषाधिकार प्राप्त संचार जानने का प्रयास": झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी के वकील को रेलवे पुलिस के समन पर रोक लगाई
झारखंड हाईकोर्ट ने एक जांच अधिकारी की ओर से एक बचाव पक्ष के वकील को उस मामले में समन जारी करने, जिसमें वह अभियुक्त का प्रतिनिधित्व कर रहा था, को 'वास्तव में परेशान करने वाला' और 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। रेलवे संपत्ति (अवैध कब्ज़ा) अधिनियम, 1996 के तहत धनबाद के एक वकील (अग्निवा सरकार) को जारी किए गए समन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, जस्टिस आनंद सेन की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह विशेषाधिकार प्राप्त संचार का विवरण निकालने का प्रयास था।पीठ ने अपने आदेश में कहा,...
झारखंड हाईकोर्ट ने BJP सांसद ढुल्लू महतो की संपत्ति की SIT जांच की मांग वाली PIL खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद से भाजपा सांसद ढुल्लू महतो के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि याचिका विचारणीय नहीं है और कहा कि इसी तरह के आरोपों की पहले ही जांच की जा चुकी है और उन्हें वास्तविक जनहित का मामला न मानते हुए खारिज कर दिया गया है।अपने फैसले में, न्यायालय ने कहा, "अतः, इस न्यायालय का यह विचार है कि एक...
स्वस्थ न्यायपालिका केवल नियमों पर ही नहीं, बल्कि बेंच और बार के बीच आपसी सम्मान पर भी आधारित है: झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने शपथ ली
जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने बुधवार (23 जुलाई) को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई।झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नत होने से पहले जस्टिस चौहान हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। उनके नाम की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 मई को की थी और केंद्र सरकार ने 14 जुलाई को इसे मंजूरी दे दी थी।9 जनवरी, 1964 को हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू...
झारखंड हाईकोर्ट ने 2013 में 6 पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए दो कथित नक्सलियों को दी गई मौत की सजा पर विभाजित फैसला सुनाया
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2013 में पुलिस दल पर हुए हमले के संबंध में, जिसमें पाकुड़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और पांच अन्य पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, दो कथित नक्सली व्यक्तियों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाने वाली निचली अदालत के एक रेफरल पर विभाजित फैसला सुनाया है।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने यह कहते हुए अभियुक्तों को बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में विफल रहा है, जबकि जस्टिस संजय प्रसाद ने निचली अदालत की मृत्युदंड की सज़ा को बरकरार रखा।पीठ ने अपने 197 पृष्ठों के फैसले में,...












