जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

पति SC समुदाय से है, इसलिए पत्नी के खिलाफ जातिसूचक अपशब्द कहने पर SC/ST Act लागू नहीं होगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी महिला के खिलाफ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित नहीं है तो केवल इस आधार पर SC/ST Act लागू नहीं होगा कि उसका पति अनुसूचित जाति समुदाय से है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कथित रूप से अपमानित किया गया अनुसूचित जाति का व्यक्ति घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं है तो प्रथम दृष्टया अधिनियम के तहत जातिगत अपमान से संबंधित अपराध नहीं बनता। हालांकि, जांच एजेंसी को मामले की जांच कर यह निर्धारित...

CrPC की धारा 156(3) की प्रक्रिया का पालन किए बिना मजिस्ट्रेट प्रशासनिक विवाद को आपराधिक मामला नहीं बना सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट किसी प्रशासनिक विवाद को आपराधिक कार्यवाही में नहीं बदल सकते। ऐसा वे किसी ऐसी अर्ज़ी के आधार पर FIR दर्ज करने का आदेश देकर नहीं कर सकते, जिसमें खुद FIR दर्ज करने की मांग न की गई हो, और न ही CrPC की धारा 156(3) के तहत शक्तियों के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना ऐसा कर सकते हैं।कोर्ट ने साफ़ किया कि जब किसी पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के सामने रखी गई जानकारी किसी प्रशासनिक मुद्दे से जुड़ी हो तो उसे सिर्फ़ इसलिए आपराधिक...

जमानत का दुरुपयोग न होने पर भी अवैध जमानत रद्द हो सकती है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी आरोपी को दी गई जमानत कानून के विपरीत या अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करके दी गई है, तो बाद में आरोपी द्वारा जमानत का दुरुपयोग न किए जाने के बावजूद जमानत रद्द की जा सकती है।जस्टिस एम.ए. चौधरी ने यह फैसला 24 किलोग्राम से अधिक गांजे की कथित बरामदगी के मामले में दिया। पुलवामा की विशेष एनडीपीएस अदालत ने आरोपी शबीर अहमद डार को जमानत दी थी, जिसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।NDPS कानून की धारा 37 महत्वपूर्णकोर्ट ने कहा कि...

पत्नी जहां रहती है, वहां क्रूरता के आरोपों के आधार पर तलाक के मुकदमे के लिए अधिकार क्षेत्र तय हो सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी की तलाक की अर्ज़ी में उस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर क्रूरता की घटनाओं का आरोप लगाया गया तो सिर्फ़ इसलिए अर्ज़ी वापस नहीं की जा सकती कि शादी कहीं और हुई थी या अन्य घटनाएँ कहीं और घटी थीं।कोर्ट ने कहा कि शुरुआती चरण में सवाल यह है कि क्या अर्ज़ी में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर 'कॉज़ ऑफ़ एक्शन' (मुकदमे का आधार) का कोई हिस्सा बताया गया, न कि यह कि आरोप अंततः साबित हो सकते हैं या नहीं।कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सिविल...

नाबालिग के पासपोर्ट में गलत जन्मतिथि वर्षों पुरानी होने पर भी सुधार से इनकार नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि कई वर्षों से गलत होने के आधार पर पासपोर्ट प्राधिकरण किसी नाबालिग की जन्मतिथि सुधारने के अनुरोध को खारिज नहीं कर सकता खासकर तब जब बाद में स्कूल के रिकॉर्ड सही कर दिए गए हों और पुराना जन्म प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा रद्द किया जा चुका हो।जस्टिस संजय परिहार ने मोहम्मद फाजली इलाही की ओर से उनके पिता के माध्यम से दायर याचिका मंजूर करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को सही जन्मतिथि के साथ नया पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार...

Drugs & Cosmetics Act | 28 दिन में दोबारा जांच की मांग नहीं की तो सरकारी रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी दवा के निर्माता या संबंधित व्यक्ति ने सरकारी विश्लेषक की जांच रिपोर्ट को चुनौती देने और नमूने की दोबारा जांच कराने का अधिकार तय 28 दिन के भीतर नहीं इस्तेमाल किया तो उस रिपोर्ट को अंतिम और निर्णायक साक्ष्य माना जाएगा। कोर्ट ने दवा निर्माता, स्टॉकिस्ट, वितरक और थोक विक्रेताओं की ओर से दायर तीन याचिकाएं खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।जस्टिस संजय परिहार की पीठ मैकनिम प्लस टैबलेट से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दवा के एक नमूने को जांच में 'मानक...

POCSO मामले में आरोपी को सबक सिखाने के लिए जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को सबक सिखाने या समाज की अंतरात्मा को संतुष्ट करने के लिए जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना मुकदमे से पहले ही उसे दंडित करने के समान होगा, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने यह टिप्पणी POCSO अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज मामले में आरोपी निसार अहमद जू को नियमित जमानत देते हुए की।मामला नवंबर 2024 में दर्ज एक गुमशुदगी की रिपोर्ट से जुड़ा है। जांच के दौरान नाबालिग पीड़िता बरामद...

RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत दूसरी अपीलों का निस्तारण 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि RTI Act, 2005 में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई वैधानिक समयसीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए अदालत ऐसी समयसीमा तय नहीं कर सकती। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपीलों को वर्षों तक लंबित नहीं रख सकता। उसे लंबित मामलों का बोझ कम करने और नए मामलों के शीघ्र निस्तारण के...

सह-आरोपी के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत आने से NDPS ट्रायल नहीं रोका जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी सह-आरोपी के खिलाफ बाद में सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल हुई है, ट्रायल कोर्ट NDPS मामले की सुनवाई नहीं रोक सकता।कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी के खिलाफ सबूत और सुनवाई पूरी हो चुकी है, तो ट्रायल कोर्ट को यह तय करना होगा कि नए आरोपी का ट्रायल साथ चलेगा या अलग। अगर अलग ट्रायल जरूरी है, तो मुख्य मामले का फैसला किया जा सकता है।यह टिप्पणी जस्टिस राजनेश ओसवाल की पीठ ने करीब पांच साल से जेल में बंद एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान...

फैसले से पहले वैवाहिक अदालतों को सुलह की कोशिश करनी चाहिए, तलाक की याचिकाओं पर आम प्रक्रिया लागू नहीं होती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत वैवाहिक याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली अदालतों को सबसे पहले सुलह की कोशिश करनी चाहिए, जैसा कि अधिनियम की धारा 23(2) और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 32-A की भावना के तहत ज़रूरी है। वे आपसी समझौते की गुंजाइश तलाशे बिना जवाब या आपत्तियां दाखिल करने पर ज़ोर नहीं दे सकतीं।ये टिप्पणियां भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत सुपरवाइज़री अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं। यह...

दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मी नियमित कर्मचारियों के समान तैनाती का दावा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि दैनिक वेतनभोगी (Daily Wagers) या संविदा/समेकित वेतन (Consolidated Basis) पर नियुक्त कर्मचारी किसी सरकारी कंपनी के बंद होने के बाद अन्य सरकारी विभागों में तैनाती (Deployment) के लिए नियमित या स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने यह फैसला जम्मू एंड कश्मीर सीमेंट लिमिटेड (JKCL) के एक कर्मचारी की याचिका पर सुनाया, जिसमें उसने नियमितीकरण, नियमित वेतनमान, अन्य सरकारी विभाग में तैनाती और बकाया वेतन के भुगतान की...

BNSS का पूरा नाम बताए बिना हिरासत का आधार नहीं बन सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोई सामान्य नागरिक BNSS का पूरा नाम या अर्थ जानने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और संबंधित मजिस्ट्रेट स्वयं उसका पूरा विवरण न दें। अदालत ने इसी आधार पर एक निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द करते हुए इसे कानून की प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग करार दिया।जस्टिस राहुल भारती की एकल पीठ ने यह फैसला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कठुआ के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जम्मू-कश्मीर लोक सुरक्षा...

UAPA के ट्रायल अनिश्चित काल तक नहीं चल सकते, NIA Act की धारा 19 के तहत रोज़ाना सुनवाई ज़रूरी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत अपराधों से जुड़े ट्रायल को प्राथमिकता दे। कोर्ट ने कहा कि संसद ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 19 के ज़रिए ऐसे मामलों में रोज़ाना ट्रायल करने का खास तौर पर आदेश दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमे अनिश्चित काल तक न चलें।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,“धारा 19 के पीछे संसद का मकसद साफ और स्पष्ट है। संसद ने...

जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट और पंचायती राज एक्ट में बिल्डिंग रेगुलेशन को लेकर कोई टकराव नहीं: हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट, 1970 और जम्मू-कश्मीर पंचायती राज एक्ट, 1989, के बीच बिल्डिंग बनाने की परमिशन और उनके उल्लंघन के मामले में कोई टकराव नहीं है।कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई इलाका किसी ऐसे 'नोटिफाइड एरिया' का हिस्सा है, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर लेक्स कंज़र्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA) बनाई गई तो सिर्फ़ LCMA के पास ही बिल्डिंग बनाने की परमिशन देने और यह पक्का करने का अधिकार क्षेत्र है कि ऐसी परमिशन के बिना या उसके उल्लंघन में कोई...

पति की गर्लफ्रेंड IPC की धारा 498A के तहत रिश्तेदार की परिभाषा से बाहर, क्रूरता का मुकदमा नहीं चल सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पति के साथ शादी के बाहर संबंध रखने वाली महिला रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 498-A (जो IPC की धारा 498-A के बराबर है) के तहत "रिश्तेदार" नहीं मानी जाएगी। इसलिए उस प्रावधान के तहत उस पर क्रूरता या उत्पीड़न का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस महिला पर पति की प्रेमिका होने का आरोप था और उसे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ इस मामले में आरोपी बनाया गया। इस मामले में शिकायतकर्ता पत्नी ने दहेज की...

UAPA के तहत बिना पुष्टि वाले गवाह की गवाही और फ़ोन कॉल के आधार पर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ज़मानत से तब इनकार नहीं किया जा सकता, जब अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से गवाहों के बयानों और बिना पुष्टि वाले फ़ोन कॉल पर निर्भर हो। उसके पास ऐसा कोई सामान या सबूत न हो जिससे पहली नज़र में आरोपी की संलिप्तता साबित होती हो।कोर्ट NIA Act की धारा 21 के तहत दायर एक अपील पर सुनवाई कर रहा था। इस अपील में NIA के स्पेशल जज, जम्मू के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें IPC की धारा 120-B, NDPS Act की धारा 8/21,...