जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

UAPA के तहत बिना पुष्टि वाले गवाह की गवाही और फ़ोन कॉल के आधार पर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
UAPA के तहत बिना पुष्टि वाले गवाह की गवाही और फ़ोन कॉल के आधार पर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ज़मानत से तब इनकार नहीं किया जा सकता, जब अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से गवाहों के बयानों और बिना पुष्टि वाले फ़ोन कॉल पर निर्भर हो। उसके पास ऐसा कोई सामान या सबूत न हो जिससे पहली नज़र में आरोपी की संलिप्तता साबित होती हो।कोर्ट NIA Act की धारा 21 के तहत दायर एक अपील पर सुनवाई कर रहा था। इस अपील में NIA के स्पेशल जज, जम्मू के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें IPC की धारा 120-B, NDPS Act की धारा 8/21,...

मजिस्ट्रेट संज्ञान लेने के बाद के चरण में भी CrPC की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच का निर्देश दे सकते हैं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट संज्ञान लेने के बाद के चरण में भी CrPC की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच का निर्देश दे सकते हैं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक मजिस्ट्रेट या विशेष अदालत के पास ऐसे मामले में आगे की जांच का निर्देश देने की शक्ति है, जहां की गई जांच में कोई कमी हो या कुछ पहलुओं की ठीक से जांच न की गई हो। ऐसा निर्देश संज्ञान लेने के बाद भी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 173(8) का प्रयोग करते हुए जारी किया जा सकता है।अदालत एक पूर्व नायब तहसीलदार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जम्मू के स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निरोधक) द्वारा पारित...

बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के प्रारंभिक जांच के सबूत विभागीय निष्कर्षों का आधार नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के प्रारंभिक जांच के सबूत विभागीय निष्कर्षों का आधार नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी के खिलाफ पारित बर्खास्तगी आदेश रद्द किया। कोर्ट ने माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही दोषपूर्ण थी, क्योंकि जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों पर भरोसा किया, जबकि दोषी कर्मचारी को गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया गया।कोर्ट ने दोहराया कि प्रारंभिक जांच से मिले सबूतों का इस्तेमाल नियमित विभागीय जांच में नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।कोर्ट एक...

जांच के आदेश के बाद उसी सामग्री पर समन जारी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जांच के आदेश के बाद उसी सामग्री पर समन जारी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि मजिस्ट्रेट प्रारंभिक साक्ष्य से संतुष्ट नहीं होकर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत जांच का आदेश देता है तो वह बाद में उसी सामग्री के आधार पर आरोपियों को समन जारी नहीं कर सकता।जस्टिस संजय धर ने कहा,“जब मजिस्ट्रेट प्रारंभिक साक्ष्य से संतुष्ट नहीं होता और जांच का आदेश देता है तो यह स्पष्ट है कि उपलब्ध सामग्री पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बिना किसी नए साक्ष्य के उसी आधार पर समन जारी करना उचित नहीं है।” मामला सुंदरबनी के...

आतंक गतिविधियों में इस्तेमाल वाहन का कब्जा छोड़ने वाला पंजीकृत मालिक उसकी रिहाई नहीं मांग सकता: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट:
आतंक गतिविधियों में इस्तेमाल वाहन का कब्जा छोड़ने वाला पंजीकृत मालिक उसकी रिहाई नहीं मांग सकता: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट:

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी वाहन के पंजीकृत मालिक ने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए वाहन का कब्जा किसी आरोपी को सौंप दिया है, तो वह बाद में उस वाहन की रिहाई के लिए दावा नहीं कर सकता, खासकर तब जब वाहन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में हुआ हो।यह फैसला जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने एक अपील खारिज करते हुए सुनाया। यह अपील राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 की धारा 21 के तहत दायर की गई थी, जिसमें विशेष NIA अदालत, कुपवाड़ा के उस आदेश को...

आतंकवादियों से संपर्क की झूठी खबर का मामला: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दैनिक जागरण के संपादकीय मामलों के जानकार के खिलाफ दी केस की अनुमति
'आतंकवादियों से संपर्क' की झूठी खबर का मामला: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दैनिक जागरण के 'संपादकीय' मामलों के जानकार के खिलाफ दी केस की अनुमति

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने साफ़ किया कि मानहानि का अपराध सिर्फ़ उन मामलों तक सीमित नहीं है, जहां कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता हो। कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 499 उन स्थितियों को भी अपने दायरे में लेती है, जहां कोई व्यक्ति यह जानते हुए या यह मानने का उचित कारण रखते हुए कोई आरोप प्रकाशित करता है कि ऐसा आरोप किसी दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएगा।जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी एक अख़बार में छपी ख़बर से जुड़ी...

जम्मू-कश्मीर पुलिस नियम | पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत की रिपोर्ट ज़िला मजिस्ट्रेट को न देने से कार्यवाही रद्द हो जाती है: हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर पुलिस नियम | पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत की रिपोर्ट ज़िला मजिस्ट्रेट को न देने से कार्यवाही रद्द हो जाती है: हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख के हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस नियमों के नियम 349 में दिए गए प्रावधान अनिवार्य हैं, और जब तक किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत का सार - जिस पर अपनी ड्यूटी के दौरान रणबीर दंड संहिता के तहत अपराध करने का आरोप है - ज़िला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट नहीं किया जाता, तब तक पुलिस या मजिस्ट्रेट द्वारा शुरू की गई कार्यवाही अमान्य हो जाएगी।कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें किश्तवाड़ के सेशन जज द्वारा पारित आदेश रद्द करने की मांग की गई। इस आदेश के तहत...

अनुकंपा आधार पर उच्च पद की नियुक्ति अधिकार नहीं, सरकार का विवेकाधीन अधिकार : जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाइकोर्ट
अनुकंपा आधार पर उच्च पद की नियुक्ति अधिकार नहीं, सरकार का विवेकाधीन अधिकार : जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाइकोर्ट

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अनुकंपा आधार पर उच्च पद पर नियुक्ति किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं होती बल्कि यह पूरी तरह सरकार का विवेकाधीन अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नियुक्ति केवल नियमों के अनुसार ही दी जा सकती है और इसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की अपील स्वीकार की और एकल पीठ का आदेश रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ता को पहले की तारीख से...

एयर फ़ोर्स से जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज़: सिविल सर्विस करियर बनाने के लिए नियम तोड़ने वाले एयरमैन को हाईकोर्ट ने दी राहत
एयर फ़ोर्स से जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज़: सिविल सर्विस करियर बनाने के लिए नियम तोड़ने वाले एयरमैन को हाईकोर्ट ने दी राहत

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एयरमैन को राहत दी, जो एयर फ़ोर्स से पहले डिस्चार्ज हुए बिना जम्मू एंड कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हो गया। कोर्ट ने कहा कि खास हालात में सर्विस नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सही बातों का ध्यान रखना चाहिए।कोर्ट रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता की एयर फ़ोर्स सर्विस से डिस्चार्ज की रिक्वेस्ट को खारिज करने को चुनौती दी गई और उसे जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में ऑफिसर के तौर पर काम करते रहने की इजाज़त देने के लिए निर्देश...

CAPF भर्ती में मेडिकल बोर्ड की राय आखिरी, कोर्ट गलत इरादे या प्रोसेस में कमी के अलावा अपील नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
CAPF भर्ती में मेडिकल बोर्ड की राय आखिरी, कोर्ट गलत इरादे या प्रोसेस में कमी के अलावा अपील नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPFs) की भर्ती के मामलों में कोर्ट के दखल की सीमित गुंजाइश पर ज़ोर देते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि रिव्यू मेडिकल बोर्ड का फैसला आखिरी है और प्रोसेस में गलती या गलत इरादे जैसी खास स्थितियों को छोड़कर कोर्ट द्वारा आगे रिव्यू या दोबारा जांच नहीं की जा सकती।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि CAPFs की भर्ती को कंट्रोल करने वाला कानूनी ढांचा दूसरी मेडिकल जांच के बाद दी गई मेडिकल राय को आखिरी दर्जा देता है। कोर्ट को ऐसे एक्सपर्ट फैसलों को बदलने में धीमा...

बच्चे के जेल में लगातार रहने से उसकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 12 साल की कस्टडी के बाद मां को जमानत दी
'बच्चे के जेल में लगातार रहने से उसकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है': जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 12 साल की कस्टडी के बाद मां को जमानत दी

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने किडनैपिंग और मर्डर केस में आरोपी महिला को जमानत दी, जो बारह साल से ज़्यादा समय तक कस्टडी में रही थी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी और इस हालात को देखते हुए कि उसका नाबालिग बच्चा जेल में उसके साथ रह रहा था, उसे लगातार जेल में रखना गलत था।कोर्ट ने जमानत आवेदन पर विचार करते हुए कहा कि बच्चे का जेल में लगातार रहना उसकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर असर डाल सकता है, इसलिए यह जमानत देने का एक और आधार बनता है।जस्टिस संजय धर की सिंगल जज बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद...

अतीत के आधार पर अनवरत कैद उचित नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट ने पूर्व हिजबुल मुजाहिद्दीन सदस्य को दी जमानत
अतीत के आधार पर अनवरत कैद उचित नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट ने पूर्व हिजबुल मुजाहिद्दीन सदस्य को दी जमानत

जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को पुनः रेखांकित करते हुए कहा कि किसी आरोपी के पूर्व आचरण के आधार पर जिसके लिए वह पहले ही अभियोजन और हिरासत झेल चुका हो उसे वर्तमान मामले में अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, जब तक उसके खिलाफ विश्वसनीय और प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध न हों।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अब्दुल राशिद की जमानत अपील स्वीकार की और NIA कोर्ट जम्मू द्वारा पारित जमानत...

एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल पंचायत का कबूलनामा, सह-आरोपी के खिलाफ तब तक कोई सबूत नहीं, जब तक उसे सख्ती से साबित और पक्का न किया जाए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल पंचायत का कबूलनामा, सह-आरोपी के खिलाफ तब तक कोई सबूत नहीं, जब तक उसे सख्ती से साबित और पक्का न किया जाए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के इस मुख्य सिद्धांत को मज़बूत करते हुए कि मजिस्ट्रेट के सामने रिकॉर्ड नहीं किया गया कबूलनामा कोई ठोस सबूत नहीं होता और अपने आप में किसी सह-आरोपी को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने बरी किए जाने के खिलाफ क्रिमिनल अपील यह कहते हुए खारिज की कि कथित पंचायत का कबूलनामा, जो बरी करने वाला, बिना साबित और बिना पुष्टि वाला है, दोषसिद्धि को बनाए नहीं रख सकता है।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने पुष्टि की...

बिना मदद वाले स्कूल के खिलाफ प्राइवेट सर्विस कॉन्ट्रैक्ट लागू करने के लिए रिट मेंटेनेबल नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बिना मदद वाले स्कूल के खिलाफ प्राइवेट सर्विस कॉन्ट्रैक्ट लागू करने के लिए रिट मेंटेनेबल नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका एक टीचर और एक प्राइवेट बिना मदद वाले स्कूल के बीच प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट से पैदा होने वाले सर्विस से जुड़े अधिकारों को लागू करने के लिए मेंटेनेबल नहीं है।जस्टिस संजय धर की बेंच ने दोहराया कि हालांकि प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन कुछ हालात में रिट जूरिस्डिक्शन के लिए योग्य हो सकते हैं, ज्यूडिशियल रिव्यू सिर्फ पब्लिक लॉ एलिमेंट वाले कामों तक ही लिमिटेड होगा।कॉन्ट्रैक्ट वाली सर्विस शर्तों से पैदा होने वाले पूरी तरह से प्राइवेट...

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

यह मानते हुए कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास CrPC की धारा 167 के तहत पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक कि ऐसी रिक्वेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी से न आए, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस कस्टडी पुलिस द्वारा बताई गई जांच की ज़रूरत पर आधारित होनी चाहिए, न कि प्रॉसिक्यूशन के विवेक पर।जस्टिस संजय परिहार ने राज्य द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार चार्जशीट दायर हो जाने के बाद इसका मतलब यह होता है कि कस्टडी में...

पूर्वक्रय का अधिकार अत्यंत कमजोर बिना दावा किए निषेधाज्ञा वाद दायर करना अधिकार का परित्याग माना जाएगा: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट
पूर्वक्रय का अधिकार अत्यंत कमजोर बिना दावा किए निषेधाज्ञा वाद दायर करना अधिकार का परित्याग माना जाएगा: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्वक्रय (प्री-एम्पशन) का अधिकार एक अत्यंत कमजोर अधिकार है, जिसे खरीदार विधिसम्मत तरीकों से विफल कर सकता है और जिसे पूर्वक्रेता अपने आचरण के माध्यम से भी त्याग सकता है।हाइकोर्ट ने वर्ष 2001 में जिला जज, पुंछ द्वारा पारित उस निर्णय और डिक्री को निरस्त कर दिया, जिसमें वादी के पक्ष में पूर्वक्रय अधिकार लागू करते हुए संपत्ति का कब्जा 40,000 के भुगतान पर सौंपने का आदेश दिया गया।जस्टिस संजय धर ने कहा कि यदि कोई पूर्वक्रेता बिक्री की जानकारी होने के...

S. 37 NDPS Act | BSA के तहत उचित आधार का मतलब साबित होना नहीं, यह जमानत की शक्ति को खत्म कर देगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
S. 37 NDPS Act | BSA के तहत 'उचित आधार' का मतलब 'साबित' होना नहीं, यह जमानत की शक्ति को खत्म कर देगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के तहत सख्त जमानत प्रावधानों की व्याख्या करते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने साफ किया कि धारा 37 में इस्तेमाल किया गया शब्द "उचित आधार" का मतलब भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत 'साबित' होना नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने चेतावनी दी कि "उचित आधार" को BSA के तहत सबूत के मानक के बराबर मानने से ट्रायल के दौरान जमानत देने की कोर्ट की शक्ति 'खत्म' हो जाएगी।जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की बेंच ने समझाया कि यह वाक्यांश बीच का रास्ता है, जो सिर्फ...