हाईकोर्ट

दिल्ली सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस का नियमन केवल मुनाफाखोरी रोकने के लिए कर सकती है, फीस संरचना को नियंत्रित करने के लिए नहीं: हाईकोर्ट
दिल्ली सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस का नियमन केवल मुनाफाखोरी रोकने के लिए कर सकती है, फीस संरचना को नियंत्रित करने के लिए नहीं: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के शिक्षा निदेशालय (DOE) को गैर-सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की फीस संरचना को केवल मुनाफाखोरी, शिक्षा के व्यावसायीकरण और कैपिटेशन फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक सीमा तक ही विनियमित करने का अधिकार है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसे स्कूलों पर व्यापक प्रतिबंध नहीं लगा सकती या फीस वृद्धि का आदेश नहीं दे सकती।कोर्ट ने कहा,"ऐसा नहीं है कि स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस का नियमन सरकार द्वारा...

एजेंसी ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में फैसला स्वीकार किया: CBI ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया
एजेंसी ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में फैसला स्वीकार किया: CBI ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि उसने 13 दिसंबर, 2018 को स्पेशल कोर्ट का फैसला "स्वीकार" कर लिया है, जिसमें सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित "फर्जी" मुठभेड़ मामले में 22 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ से पूछे जाने पर बताया गया कि एजेंसी ने अभी तक उक्त फैसले को चुनौती देने का कोई फैसला नहीं लिया।एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने जजों को बताया कि केंद्रीय...

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: अचानक हुई ज़ब्ती का वीडियोग्राफ़ी न होना NDPS मामले में बरामदगी को अमान्य नहीं करता
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: अचानक हुई ज़ब्ती का वीडियोग्राफ़ी न होना NDPS मामले में बरामदगी को अमान्य नहीं करता

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी आरोपी से कथित मादक पदार्थ की अचानक हुई बरामदगी की वीडियोग्राफी करने या सीसीटीवी फुटेज पेश करने में विफलता मात्र से ज़ब्ती की कार्यवाही अमान्य नहीं हो जाती है।जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि यद्यपि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (NDPS Act) में ज़ब्ती की वीडियोग्राफी अनिवार्य नहीं है लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 105 अब तलाशी और ज़ब्ती को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से रिकॉर्ड करना अनिवार्य बनाती...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की बलात्कार सजा के खिलाफ अपील पर नोटिस जारी किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की बलात्कार सजा के खिलाफ अपील पर नोटिस जारी किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को जनता दल (सेक्यूलर) नेता और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना द्वारा दायर अपील पर राज्य को नोटिस जारी किया। प्रज्वल रेवन्ना ने हासन जिले के होलनारसिपुरा ग्रामीण थाना में उनके खिलाफ दर्ज पहली बलात्कार मामले में उन्हें सुनाई गई दंडनीय सजाओं और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है।जस्टिस के. एस. मुदगल और वेंकटेश नाइक टी की डिवीजन बेंच ने प्रज्वल के वकील को विस्तृत संक्षिप्त विवरण दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य के वकील से यह भी पूछा कि क्या अपील पर बहस करने के लिए विशेष...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल बाद वकील के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही रद्द की: रिहायशी बेसमेंट में ऑफ़िस चलाने का था मामला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल बाद वकील के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही रद्द की: रिहायशी बेसमेंट में ऑफ़िस चलाने का था मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत करते हुए एक वकील के ख़िलाफ़ शुरू की गई आपराधिक शिकायत और उसके बाद की सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह मामला वकील पर एक रिहायशी इमारत के बेसमेंट से अपना पेशेवर ऑफ़िस चलाने के आरोप से संबंधित था।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने अपने फैसले में मास्टर डेवलपमेंट प्लान 2001 (MDP 2001) के खंड 10 का हवाला दिया, जो कुछ शर्तों के साथ रिहायशी परिसर के गैर-रिहायशी उपयोग की अनुमति देता है।इस प्लान के तहत कोई भी निवासी अपनी पेशेवर दक्षता के आधार पर सेवाएँ...

दिल्ली हाईकोर्ट ने EVM के बजाय बैलट पेपर से चुनाव कराने की माँग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने EVM के बजाय बैलट पेपर से चुनाव कराने की माँग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के इस्तेमाल को खत्म करने और बैलट पेपर के माध्यम से आम चुनाव कराने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज की।चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने उपेंद्र नाथ दलाई द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई इस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।कोर्ट ने भोजनावकाश से पहले की कार्यवाही में याचिकाकर्ता उपेंद्र नाथ दलाई से पुनर्विचार याचिका दायर करने पर सवाल किया और कहा कि वह न्यायिक समय बर्बाद कर रहे हैं।खंडपीठ ने तब सीनियर...

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: अखिल भारतीय जनसंघ को बिहार चुनाव के लिए तुरंत कॉमन सिंबल आवंटित करे ECI
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: अखिल भारतीय जनसंघ को बिहार चुनाव के लिए तुरंत कॉमन सिंबल आवंटित करे ECI

दिल्ली हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय जनसंघ (ABJS) को बड़ी राहत देते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कॉमन चुनाव चिह्न तुरंत आवंटित करने का निर्देश दिया।जस्टिस मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने ABJS की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।न्यायालय ने कहा कि पार्टी को चुनाव प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश की ज़रूरतों के अनुसार ECI को आवश्यक आवेदन जमा करना होगा।कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि आवेदन जमा होने के बाद ECI को तत्काल साझा चिह्न आवंटित करना चाहिए ताकि...

साक्ष्य के अभाव में मौत की सज़ा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, आरोपी को किया बरी
साक्ष्य के अभाव में मौत की सज़ा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, आरोपी को किया बरी

राजस्थान हाईकोर्ट ने चौंकाने वाले फैसले में दो भाई-बहनों की हत्या और बहन के साथ कथित बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा दिए गए मृत्युदंड के फैसले पर गहरा आश्चर्य व्यक्त करते हुए राज्य द्वारा दायर मृत्युदंड संदर्भ को भी अस्वीकार कर दिया।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनूप सिंघी की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अविश्वसनीय है कि जिस मामले में न्यायालय को अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन करने वाले साक्ष्य का कोई निशान नहीं मिल रहा है,...

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आयु निर्धारण का वरीयता वाला दस्तावेज़ ईश्वरीय सत्य नहीं, अगर उसकी सामग्री अविश्वसनीय हो
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आयु निर्धारण का वरीयता वाला दस्तावेज़ 'ईश्वरीय सत्य' नहीं, अगर उसकी सामग्री अविश्वसनीय हो

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act - JJ Act) के तहत किसी पीड़िता की आयु निर्धारित करने के लिए जिन दस्तावेज़ों को वरीयता क्रम में ऊपर रखा जाता है, उन्हें तब ईश्वरीय सत्य नहीं माना जा सकता, जब उनकी सामग्री अस्थिर संदिग्ध या झूठी साबित होती हो।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने कहा,"कोई पूर्ण नियम नहीं है कि जेजे अधिनियम के तहत बच्चे की उम्र निर्धारित करने के लिए उच्च वरीयता वाले दस्तावेज़ को ईश्वरीय सत्य' माना जाए भले...

ग़लत तथ्यों पर दी गई ज़मानत को समानता का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ग़लत तथ्यों पर दी गई ज़मानत को समानता का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यदि ज़मानत देने के लिए भरोसा किया गया आदेश ग़लत तथ्यों पर आधारित है तो समानता के सिद्धांत का पालन करते हुए ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।जस्टिस संजय कुमार सिंह ने यह मत व्यक्त किया,"यदि ज़मानत देने वाले आदेश में ग़लत तथ्य शामिल हैं तो कोई जज समानता के आधार पर आरोपी को ज़मानत देने के लिए बाध्य नहीं है। यदि कोई अवैधता न्यायालय के संज्ञान में लाई जाती है तो उसे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"यह फैसला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 396 (डकैती के साथ हत्या), 412...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धन की हेराफेरी के आरोप में बर्खास्त किए गए बैंक कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश दिया, कहा- दोषसिद्धि के बिना राशि जब्त नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धन की हेराफेरी के आरोप में बर्खास्त किए गए बैंक कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश दिया, कहा- दोषसिद्धि के बिना राशि जब्त नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अक्टूबर) को बैंक कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश दिया, जिसे शाखा के कैश चेस्ट से ₹1 लाख की हेराफेरी के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि चूँकि कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चल रहा है, इसलिए बैंक ग्रेच्युटी जब्त नहीं कर सकता।मामले के तथ्यों के अनुसार, कर्मचारी ने बर्खास्तगी के बाद विभागीय अपील दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके तुरंत बाद कर्मचारी की मृत्यु हो गई और उसकी विधवा ने ग्रेच्युटी जारी करने के लिए आवेदन किया।हालांकि,...

सीनियरिटी का पुनर्मूल्यांकन किए बिना आरक्षित वर्ग को लगातार पदोन्नति का लाभ देना समानता के अधिकार का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सीनियरिटी का पुनर्मूल्यांकन किए बिना आरक्षित वर्ग को लगातार पदोन्नति का लाभ देना समानता के अधिकार का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता का सिद्धांत निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण शासन की आधारशिला है।अदालत ने कहा कि सेवा पदोन्नति के संदर्भ में यह सिद्धांत यह अनिवार्य करता है कि किसी भी कर्मचारी को - चाहे वह आरक्षित वर्ग का हो या सामान्य वर्ग का - पद में समानता प्राप्त होने के बाद स्थायी रूप से लाभ या हानि की स्थिति में नहीं रखा जाना चाहिए।वर्तमान मामले में एक कर्मचारी 13 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद रिटायर हुआ। अदालत ने हरियाणा सरकार को उसके वेतन में...

जिंदल यूनिवर्सिटी ने तीन वर्षीय LLB कोर्स को ऑनर्स डिग्री के रूप में गलत तरीके से किया पेश, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
जिंदल यूनिवर्सिटी ने तीन वर्षीय LLB कोर्स को ऑनर्स डिग्री के रूप में गलत तरीके से किया पेश, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और अन्य प्राधिकारियों से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया कि ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने अपने तीन वर्षीय LLB प्रोग्राम को कथित तौर पर "ऑनर्स" डिग्री के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया।ओ.पी. जिंदल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट निपुण गुप्ता द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि यूनिवर्सिटी ने हमेशा इस कोर्स को LLB (ऑनर्स) डिग्री प्रोग्राम बताया, जबकि याचिकाकर्ता को दी गई डिग्री केवल LLB की है।गुप्ता की ओर से पेश...

FIR दर्ज करने में 2 महीने की अस्पष्ट देरी, पीड़िता की गवाही सच्ची नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
FIR दर्ज करने में 2 महीने की अस्पष्ट देरी, पीड़िता की गवाही सच्ची नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में पीड़िता को बरी करने का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि कथित पीड़िता का बयान विश्वसनीय नहीं है और FIR दर्ज करने में 2 महीने की अस्पष्ट देरी हुई।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान यह भी कहा कि आरोपी एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में मोबाइल फोन पकड़े हुए था और उसने उसे पीछे से पकड़ लिया।अदालत ने कहा,"यह पूरी तरह से असंभव है कि कोई व्यक्ति एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में मोबाइल फोन पकड़े और उसे पीछे से पकड़कर यौन क्रिया...

विशेष धार्मिक समूह को निशाना बनाने का आरोप लगाने वाला व्हाट्सएप मैसेज BNS की धारा 353(2) के तहत दुश्मनी बढ़ाने का अपराध हो सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
विशेष धार्मिक समूह को निशाना बनाने का आरोप लगाने वाला व्हाट्सएप मैसेज BNS की धारा 353(2) के तहत दुश्मनी बढ़ाने का अपराध हो सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विशेष धार्मिक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कई लोगों को व्हाट्सएप मैसेज प्रसारित करना प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 353(2) के तहत धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी, घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने का अपराध माना जाएगा।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता (अफाक अहमद) के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने कथित तौर पर व्हाट्सएप पर कई व्यक्तियों को एक भड़काऊ...

पत्नी के व्यभिचार को साबित करने के लिए पति बच्चे को मोहरा नहीं बना सकता: मद्रास हाईकोर्ट ने NDA टेस्ट की याचिका खारिज की
पत्नी के व्यभिचार को साबित करने के लिए पति बच्चे को मोहरा नहीं बना सकता: मद्रास हाईकोर्ट ने NDA टेस्ट की याचिका खारिज की

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति की अपने बच्चे के NDA टेस्ट की मांग वाली याचिका ख़ारिज की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विवाह के दौरान दंपति के बीच पैदा हुआ बच्चा उसका नहीं है।ऐसा करते हुए जस्टिस शमीम अहमद ने स्पष्ट किया कि दशकों पहले हुई कथित बेवफाई को साबित करने के लिए NDA टेस्ट का इस्तेमाल शॉर्टकट के तौर पर नहीं किया जा सकता। अदालत ने आगे कहा कि NDA टेस्ट की आवश्यकता बच्चे के नजरिए से तय की जानी चाहिए, न कि माता-पिता के नजरिए से।अदालत ने कहा,"NDA टेस्ट का इस्तेमाल एक दशक से भी पहले या...