भोपाल में पेड़ काटने पर रोक: वनस्पति नष्ट करने पर हाईकोर्ट ने सीनियर अधिकारियों को तलब किया

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    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 20 नवंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भोपाल में कोई भी पेड़ बिना कोर्ट की अनुमति के न काटा जाए, न छांटा जाए और न ही स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने कहा कि अधिकारी “विकास” के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों को नष्ट कर रहे हैं।

    यह मामला तब उठा जब टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि PWD ने बिना अनुमति 488 पेड़ काट दिए। कोर्ट ने पहले भी PWD से पेड़ों की संख्या पर हलफनामा मांगा था, जिसमें बताया गया कि कुछ पेड़ों का प्रतिरोपण किया गया था, लेकिन राज्य के पास Tree Plantation Policy ही मौजूद नहीं है।

    अमाइकस क्यूरी ने बताया कि अदालत के पुराने आदेश के बावजूद भोपाल में 244 और पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अधिकारी कटाई को “पेड़ स्थानांतरण” बताकर अनुमति प्रक्रिया से बच रहे हैं।

    अदालत ने तस्वीरें देखकर कहा कि प्रतिरोपण के नाम पर पेड़ों की सभी शाखाएँ काटकर सिर्फ तना दूसरी जगह लगाया जा रहा है, जो असली प्रतिरोपण नहीं है।

    कोर्ट ने कई अधिकारियों—PWD, विधानसभा सचिवालय, नगर निगम, वन विभाग और रेलवे के—अगली सुनवाई के लिए तलब किया है।

    अगली सुनवाई 26 नवंबर 2025 को होगी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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