हाईकोर्ट

S.164 Electricity Act | पावर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं, मुआवज़े का अधिकार बना रहेगा: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं है, अगर बिजली कंपनी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 164 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी की शक्तियां दी गई हैं। [2026 LiveLaw (MP) 366]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि एक बार ऐसी शक्तियां मिल जाने के बाद कंपनी इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 (ITA) की धारा 10 और 16 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।कोर्ट...

IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक गंभीर कृत्य भी अपराध माना जा सकता है, कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि क्रूरता का एक ही गंभीर कृत्य IPC की धारा 498A के तहत अपराध माना जा सकता है और इसके लिए कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं है।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा:“पति-पत्नी के बीच हर तरह की परेशानी, असहमति या बुरे बर्ताव को IPC की धारा 498A के तहत 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता... साथ ही यह भी नहीं कहा जा सकता कि क्रूरता साबित करने के लिए हमेशा कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी है। अगर कोई एक कृत्य काफ़ी गंभीर हो और क़ानूनी परिभाषा के दायरे में आता हो, तो उसे भी क्रूरता...

सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉक्टर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड और उसमें होने वाली प्रविष्टियों की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी की होती है। अधीनस्थ कर्मचारी ने अपना काम ठीक से नहीं किया तो इससे प्रभारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।जस्टिस आनंद शर्मा ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, किशनपुर, बेराठ के प्रभारी रहे डॉक्टर की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।बता दें, डॉक्टर को एक अन्य सरकारी...

गैर-वाणिज्यिक मुकदमों में लिखित बयान की देरी माफ करने का कोई तय फार्मूला नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गैर-वाणिज्यिक दीवानी मुकदमों में लिखित बयान दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर कोई कठोर या तय फार्मूला नहीं अपनाया जा सकता। हर मामले में देरी के कारणों को उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परखा जाना चाहिए।जस्टिस सुदेश बंसल ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 8 नियम 1 के तहत लिखित बयान दाखिल करने की समय-सीमा अनिवार्य नहीं, बल्कि निर्देशात्मक है। हालांकि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद लिखित बयान दाखिल करने की अनुमति मांगने वाले पक्ष को देरी के लिए पर्याप्त...

लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जे भी हटेंगे, हाईकोर्ट ने पांच हफ्ते में कार्रवाई के दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सेशन कोर्ट के आसपास बचे सभी अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि उसके पहले के आदेशों के अनुपालन में 57 और अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। इससे पहले 14 अवैध निर्माण हटाए गए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट परिसर तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में कथित अवैध कब्जों से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।लखनऊ नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने 8 सितंबर 2026 के निर्देशों के साथ हटाए...

पूजा करना मौलिक अधिकार: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की दी अनुमति

मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में विनायक चतुर्थी के अवसर पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पूजा करना मौलिक अधिकार है और याचिकाकर्ताओं को प्रतिमा स्थापित करने से रोका नहीं जाना चाहिए।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने हिंदू मुन्नानी के कार्यकारी समिति सदस्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपुर पुलिस को उस स्थान पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया, जिसे याचिकाकर्ता और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण के बाद तय किया था।याचिकाकर्ता...

RTE Act | नियुक्ति के समय TET नहीं था 31 मार्च 2015 से पहले पास किया तो नहीं जाएगी नौकरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की योग्यता नहीं थी लेकिन उसने कानून में दी गई समय-सीमा के भीतर TET पास कर लिया तो उसकी नियुक्ति को केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि RTE Act 2009 की धारा 23 में दी गई सुरक्षा को नजरअंदाज करके राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना के आधार पर शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं की...

सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेज जुटाने के लिए Order XI का सहारा नहीं, कानून आलसी पक्षकार की मदद नहीं करता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के Order XI के नियम 12 और 14 के तहत दस्तावेजों की खोज और पेशी की प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि किसी पक्षकार को अपने विरोधी के जरिए सबूत हासिल करना सुविधाजनक लग रहा है। यदि मांगे गए दस्तावेज सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और संबंधित पक्ष उन्हें कानून के तहत खुद हासिल कर सकता है तो अदालत की प्रक्रिया को सबूत जुटाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह टिप्पणी ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने...

तमिलनाडु में अब डिजिटल जारी होंगे ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की नई योजना पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि हाईकोर्ट ने योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार 11 सितंबर को मामले की सुनवाई की। याचिका में परिवहन आयुक्त की ओर से जारी उस संचार को चुनौती दी गई, जिसके जरिए ड्राइविंग...

महाराष्ट्र के धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून को हाईकोर्ट में चुनौती, धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के उल्लंघन का आरोप

बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता (MFR) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। इसमें तर्क दिया गया कि यह कानून, जिसे 'धर्म-परिवर्तन विरोधी' कानून बताया जा रहा है, नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।यह याचिका मौलाना हलीमुल्लाह फारूक अहमद खान ने वकील अब्दुल मतीन शेख के माध्यम से MFR Act की वैधता को चुनौती देते हुए दायर की।उन्होंने तर्क दिया कि कानून के कई प्रावधान, विशेष रूप से धारा 2(a), 3, 6, 7 और 9, भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत...

यूपी सरकार दमन के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है गुंडा एक्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'गुंडा एक्ट' के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि उसके सामने आए कई मामलों से पता चलता है कि राज्य सरकार 'गुंडा एक्ट' का इस्तेमाल 'दमन के हथियार' के तौर पर करने की अपनी नीति पर अड़ी हुई।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने गोंडा के निवासी के खिलाफ जारी आदेशों को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। इन आदेशों में उसे 'यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970' के तहत 'गुंडा' घोषित किया गया और छह महीने के लिए गोंडा जिले से बाहर रहने का आदेश दिया गया।कोर्ट ने...

IT नियमों और सहयोग पोर्टल के खिलाफ कुणाल कामरा की याचिका पर सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (11 सितंबर) को कॉमेडियन कुणाल कामरा और सीनियर एडवोकेट हरेश जगतियानी की उन याचिकाओं पर सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित, जिनमें 'सहयोग पोर्टल' और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के नियम 3(1)(d) में 2025 के संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट में चल रही...

मिर्ज़ापुर फिल्म से शूरवीर गाना हटाने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें फिल्म "मिर्जापुर: द मूवी" के क्लाइमेक्स में "शूरवीर" गाने को हटाने की मांग की गई।याचिका प्रशांत कुमार सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई और वकील शशांक और शाश्वत के माध्यम से दायर की गई।जनहित याचिका में तर्क दिया गया कि यह ट्रैक मूल रूप से ऐतिहासिक प्रतीक महाराणा प्रताप को श्रद्धेय श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि इस गाने का इस्तेमाल काल्पनिक गैंगस्टरों का महिमामंडन करने के लिए अनुचित तरीके से किया गया।सिंह...

बार एसोसिएशन की सदस्यता का विवाद निजी मामला, रिट क्षेत्राधिकार में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन की सदस्यता, निलंबन या किसी सदस्य को संगठन से बाहर करने से जुड़े विवाद मूल रूप से निजी प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन और उसके सदस्यों के बीच ऐसे विवाद में कोई सार्वजनिक कानून का तत्व शामिल नहीं होता। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी लखीमपुर खीरी जिले की तहसील गोला गोकर्णनाथ स्थित सेंट्रल बार एसोसिएशन के एक...

सहारनपुर मस्जिद विध्वंस | हाईकोर्ट ने बेदखली के खिलाफ याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा, ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर में मस्जिद को गिराने और वहां से बेदखल करने के खिलाफ दायर याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। साथ ही कोर्ट ने सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर रोक लगाई।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने राज्य सरकार को 3 हफ़्ते के अंदर अपना जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता को जवाब का जवाब (रिज़ॉइंडर) दाखिल करने के लिए 1 हफ़्ते का समय दिया गया।मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर, 2026 को होगी। यह...

बालाघाट में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की मौत का मामला, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की कथित तौर पर संक्रामक बीमारियों और कुपोषण के कारण हुई मौतों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।इस मामले में दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें गंभीर बीमारियों और कुपोषण का सामना करना पड़ रहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस...

ई-रिक्शा के लिए देशभर में नीति बनाए केंद्र, 60 दिन में सभी राज्यों को भेजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को देशभर में ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के लिए 60 दिन के भीतर एक समान नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा की संख्या और उनके मार्गों को विनियमित करने की व्यवस्था जरूरी है, ताकि शहरों की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को कम किया जा सके।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें किसी शहर की सड़क पर इनकी...

किराएदार के खिलाफ बेदखली मुकदमे में स्वतंत्र मालिकाना हक जताने वाला तीसरा व्यक्ति जरूरी पक्षकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराए की संपत्ति पर स्वतंत्र मालिकाना हक का दावा करने वाला तीसरा व्यक्ति केवल इसलिए स्मॉल कॉज कोर्ट में बेदखली के मुकदमे का जरूरी या उचित पक्षकार नहीं बन जाता, क्योंकि उसका दावा मकान मालिक के मालिकाना हक से टकराता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 10 के तहत किसी तीसरे व्यक्ति को पक्षकार बनाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल सीमित अधिकार क्षेत्र वाली बेदखली कार्यवाही में अलग मालिकाना विवाद लाने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस डॉ. योगेंद्र...