हाईकोर्ट

जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश: अवैध शराब मामले में आरोपी को बिना वेरिफाइड सबूतों के किया था गिरफ्तार
जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश: अवैध शराब मामले में आरोपी को बिना वेरिफाइड सबूतों के किया था गिरफ्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अलीराजपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे उस जांच अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करें, जिसने अवैध शराब की ढुलाई के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यह गिरफ्तारी एक ट्रक बिक्री समझौते के आधार पर की गई थी, जिसकी जांच न तो नोटरी ने की थी और न ही गवाहों ने।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने टिप्पणी की कि जांच करना इसलिए ज़रूरी है, ताकि भविष्य की जांचों में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।कोर्ट ने कहा: "संबंधित पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक सिंगल मदर अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी आवेदन करने की हकदार है, बशर्ते पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित घोषणाएँ जमा की गई हों।पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत—विशेष रूप से पासपोर्ट आवेदन पत्र भरने के लिए दिशानिर्देशों के कॉलम 16 और पासपोर्ट मैनुअल/दिशानिर्देशों के क्लॉज़ 4.8 के तहत—एक सिंगल पेरेंट (एकल अभिभावक) निर्धारित हलफनामा/घोषणाएं जमा करके दूसरे अभिभावक की सहमति के बिना भी अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के...

समय पर मुआवज़ा दिए बिना संपत्ति से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: एनएच प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
समय पर मुआवज़ा दिए बिना संपत्ति से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: एनएच प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए ज़मीन अधिग्रहित की गई, लेकिन मुआवज़े की रकम जारी नहीं की गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि ज़मीन मालिकों को समय पर मुआवज़ा दिए बिना उनकी संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"अधिग्रहित ज़मीन के लिए मुआवज़ा पाने का अधिकार सिर्फ़ एक कानूनी हक नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 300-A से मिलने वाली एक संवैधानिक गारंटी है। समय पर मुआवज़ा...

बैंक गारंटी पर अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी एक ठीक होने योग्य कमी, इस आधार पर बोली खारिज करना मनमाना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बैंक गारंटी पर अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी एक ठीक होने योग्य कमी, इस आधार पर बोली खारिज करना 'मनमाना': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ़्ते यह टिप्पणी की कि बैंक गारंटी पर स्टाम्प ड्यूटी में कमी महज़ एक 'चूक' और एक 'ठीक होने योग्य कमी' है, और इसका इस्तेमाल किसी बोली लगाने वाले को बाहर करने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इसके परिणामस्वरूप प्रतिवादी (पूर्वोत्तर रेलवे) द्वारा तैयार की गई वित्तीय बोली की तालिका यह देखते हुए रद्द की कि उसने याचिकाकर्ता (M/S कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की तकनीकी बोली को इस 'कमज़ोर' आधार पर खारिज कर दिया...

गलत Answer Key और प्रश्नों से प्रभावित हो रही भर्ती प्रक्रिया, राजस्थान हाईकोर्ट ने SOP बनाने के दिए निर्देश
गलत Answer Key और प्रश्नों से प्रभावित हो रही भर्ती प्रक्रिया, राजस्थान हाईकोर्ट ने SOP बनाने के दिए निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गलत उत्तर कुंजी (Answer Key) और त्रुटिपूर्ण प्रश्नों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को वरिष्ठ IAS अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि समिति भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करे।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ शिक्षक ग्रेड-III लेवल-II भर्ती 2022 से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का...

भगवा ने मारा टिप्पणी पर अफसर को मिली राहत बरकरार: हाईकोर्ट ने खारिज की यूपी सरकार की याचिका
भगवा ने मारा' टिप्पणी पर अफसर को मिली राहत बरकरार: हाईकोर्ट ने खारिज की यूपी सरकार की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2018 के कासगंज हिंसा प्रकरण से जुड़े कथित फेसबुक पोस्ट के मामले में उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ अधिकारी रश्मि वरुण को दी गई राहत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज की। अदालत ने उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत लोक सेवा अधिकरण ने अधिकारी पर लगाई गई विभागीय सजा रद्द की थी।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई केवल समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर की गई, जबकि उन्होंने शुरू से ही उस खबर में उनके कथित बयान को गलत...

वर्षों तक चुप रहने वाले दावेदार को नहीं मिलेगा पुरानी अवधि का ब्याज: राजस्थान हाईकोर्ट ने बरकरार रखा कॉमर्शियल कोर्ट का फैसला
वर्षों तक चुप रहने वाले दावेदार को नहीं मिलेगा पुरानी अवधि का ब्याज: राजस्थान हाईकोर्ट ने बरकरार रखा कॉमर्शियल कोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई दावेदार लंबे समय तक अपने कथित अधिकार को लेकर निष्क्रिय बना रहता है और उचित समय के भीतर भुगतान की मांग तक नहीं करता तो वह बाद में उस अवधि के लिए ब्याज की मांग नहीं कर सकता, जब वह स्वयं बिना किसी उचित कारण के चुप बैठा रहा हो।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश मिश्रा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि कानून उन लोगों की सहायता करता है, जो अपने अधिकारों के प्रति सजग रहते हैं न कि उन लोगों की जो वर्षों तक अपने अधिकारों पर सोए रहते...

हाईकोर्ट का दिल्ली कोर्ट्स से आग्रह: अस्वाभाविक मौत से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने की अर्जियों पर तेज़ करें सुनवाई
हाईकोर्ट का दिल्ली कोर्ट्स से आग्रह: 'अस्वाभाविक मौत' से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने की अर्जियों पर तेज़ करें सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन मामलों में FIR दर्ज करने में हो रही देरी पर चिंता जताई है, जिनमें कम उम्र की शादीशुदा महिलाओं की अस्वाभाविक मौत हुई हो।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अदालतों से आग्रह किया कि वे उन अर्जियों को ज़्यादा प्राथमिकता दें, जिनमें FIR दर्ज करने की मांग की गई हो और जहां दहेज से जुड़ी प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हों, लेकिन पुलिस समय पर कार्रवाई करने में नाकाम रही हो।कोर्ट ने कहा,"इस कोर्ट को उम्मीद है कि भविष्य में FIR दर्ज करने के निर्देश मांगने वाली अर्जियों पर—खासकर उन मामलों में...

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध अनुमति के बिना कोर्ट जल अधिनियम के तहत अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध अनुमति के बिना कोर्ट 'जल अधिनियम' के तहत अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या बोर्ड द्वारा अधिकृत किसी सक्षम अधिकारी की ओर से 'जल अधिनियम' की धारा 49 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में वैध अनुमति न होने पर कोई भी आपराधिक कोर्ट इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता।अधिनियम की धारा 49 के अनुसार, कोई भी कोर्ट इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि शिकायत निम्नलिखित द्वारा न की गई हो: (क) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या उसकी ओर से इस संबंध में अधिकृत कोई अधिकारी; या(ख) कोई भी ऐसा व्यक्ति...

BNSS का पूरा नाम बताए बिना हिरासत का आधार नहीं बन सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द किया
BNSS का पूरा नाम बताए बिना हिरासत का आधार नहीं बन सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोई सामान्य नागरिक BNSS का पूरा नाम या अर्थ जानने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और संबंधित मजिस्ट्रेट स्वयं उसका पूरा विवरण न दें। अदालत ने इसी आधार पर एक निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द करते हुए इसे कानून की प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग करार दिया।जस्टिस राहुल भारती की एकल पीठ ने यह फैसला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कठुआ के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जम्मू-कश्मीर लोक सुरक्षा...

कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार, कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की दी छूट
कॉकरोच जनता पार्टी' के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार, कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की दी छूट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की गतिविधियों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के बेंगलुरु के स्थायी निवासी हैं, इसलिए उन्हें सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए था।अदालत ने यह भी पाया कि मामले का उत्तर प्रदेश से कोई प्रत्यक्ष और विशेष...

नागा चैतन्य को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अश्लील सामग्री, डीपफेक और फर्जी कारोबार पर लगाई रोक
नागा चैतन्य को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अश्लील सामग्री, डीपफेक और फर्जी कारोबार पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने तेलुगु एक्टर अक्किनेनी नागा चैतन्य के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने कई वेबसाइटों, ऑनलाइन विक्रेताओं और अज्ञात व्यक्तियों को एक्टर के नाम, तस्वीर, आवाज, इमेज और व्यक्तित्व से जुड़े अन्य पहलुओं का इस्तेमाल अश्लील सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार डीपफेक सामग्री तथा बिना अनुमति बेचे जा रहे उत्पादों के लिए करने से रोक दिया।जस्टिस ज्योति सिंह ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया एक्टर ने अपने व्यक्तित्व और प्रचार...

निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री पर सख्त हुआ राजस्थान हाईकोर्ट, औचक निरीक्षण के आदेश
निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री पर सख्त हुआ राजस्थान हाईकोर्ट, औचक निरीक्षण के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में निर्धारित समय सीमा के बाद भी खुलेआम शराब बिक्री के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनस्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। अदालत ने कहा कि नियमों की अनदेखी कर देर रात तक शराब की बिक्री संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 के उद्देश्यों को प्रभावित करती है तथा नागरिकों के सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल असर डालती है।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की खंडपीठ ने इस मामले में अंतरिम आदेश...

जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।अदालत ने LIC कर्मचारियों के संगठन द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम और उससे संबंधित नियम प्रशासन को ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार प्रदान करते हैं।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने यह निर्णय उत्तर मध्य क्षेत्र बीमा कर्मचारी संघ की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें जनगणना कार्य के लिए LIC...

श्यामला हिल्स अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने बेदखली पर रोक से किया इनकार, कहा- सरकारी जमीन पर कोई कानूनी अधिकार साबित नहीं
श्यामला हिल्स अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने बेदखली पर रोक से किया इनकार, कहा- सरकारी जमीन पर कोई कानूनी अधिकार साबित नहीं

भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में सरकारी भूमि पर रह रहे लोगों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर आगे किसी भी प्रकार की रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि पर अपना कोई कानूनी, स्वामित्व, पट्टाधिकार, किरायेदारी या वनाधिकार स्थापित करने में असफल रहे हैं। ऐसे में उनके पक्ष में कोई न्यायसंगत आधार नहीं बनता, जिसके आधार पर अदालत हस्तक्षेप करे।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता न तो भूमि के आवंटित...

विशेष विवाह अधिनियम में तलाक याचिका के लिए एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि असाधारण परिस्थितियों में माफ की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
विशेष विवाह अधिनियम में तलाक याचिका के लिए एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि असाधारण परिस्थितियों में माफ की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act) के तहत तलाक की याचिका दाखिल करने से पहले निर्धारित एक वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को असाधारण परिस्थितियों में माफ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि यदि वैवाहिक संबंध केवल औपचारिक रूप से अस्तित्व में हो, उसका कभी वास्तविक निर्वहन न हुआ हो और विवाह जारी रखने से पक्षकारों की कठिनाइयां ही बढ़ें, तो अदालत इस अवधि में छूट दे सकती है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की खंडपीठ ने पति की अपील...

बलात्कार जैसे मामलों में बरी होने पर पहचान की सुरक्षा जरूरी, नाम आधारित सर्च रिजल्ट्स हटाए जाएं: दिल्ली हाईकोर्ट
बलात्कार जैसे मामलों में बरी होने पर पहचान की सुरक्षा जरूरी, नाम आधारित सर्च रिजल्ट्स हटाए जाएं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यौन अपराधों के मामलों में यदि किसी व्यक्ति को अदालत से बरी कर दिया जाता है तो उसकी प्रतिष्ठा और निजता की रक्षा के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध नाम आधारित खोज परिणामों को हटाया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में बरी हुए व्यक्ति की पहचान को सार्वजनिक रूप से लगातार उपलब्ध रखना उसके सम्मान और गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि यौन अपराधों के आरोपों से मुक्त हो चुके निजी व्यक्तियों के मामलों में यदि उनकी पहचान...

पति के जीवित रहते मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता, तलाक का आदेश बरकरार: मद्रास हाईकोर्ट
पति के जीवित रहते मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता, तलाक का आदेश बरकरार: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि पति के जीवित रहते हिंदू पत्नी द्वारा थाली (मंगलसूत्र) हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। जस्टिस पी. वडामलाई ने पति को दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की दूसरी अपील खारिज कर दी।मामला 1977 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा था। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी लगातार उस पर अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने के आरोप लगाती रही, उसके वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजती रही और बाद में ईसाई धर्म भी अपना लिया। पत्नी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए...

CBSE ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन विवाद: NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, स्वतंत्र जांच की मांग
CBSE ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन विवाद: NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, स्वतंत्र जांच की मांग

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया। राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने इस प्रणाली में कथित व्यापक अनियमितताओं और खामियों का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और प्रभावित छात्रों को राहत देने की मांग की गई।NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि यह मामला लाखों विद्यार्थियों के हितों से जुड़ा है, जिन्होंने कक्षा 12 की परीक्षा इस डिजिटल...

हाईकोर्ट ने बढ़ाया कम उम्र में ब्याही दी गई पत्नी का गुजारा भत्ता, कहा- उसे उचित रकम देने से मना नहीं किया जा सकता
हाईकोर्ट ने बढ़ाया 'कम उम्र' में ब्याही दी गई पत्नी का गुजारा भत्ता, कहा- उसे उचित रकम देने से मना नहीं किया जा सकता

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट द्वारा महिला को दिए गए गुज़ारा भत्ते की रकम बढ़ाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह लड़कियों के अधिकारों की एक दुखद तस्वीर है, जिसमें वह महिला, जो कथित तौर पर बाल विवाह की शिकार है, उसे "बहुत कम गुज़ारा भत्ता" देकर फिर से पीड़ित किया जा रहा है।महिला की शादी कथित तौर पर 2015 में हुई थी। उस वक्त वह सिर्फ़ 13 साल की थी, उसने आरोप लगाया कि गुज़ारा भत्ता न देकर उसके साथ क्रूरता की गई। उसने यह भी कहा कि उसके पति के पास गुज़ारा करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं और वह खुद...