हाईकोर्ट
साथ न रहने और शारीरिक संबंध न बनने के कारण वैवाहिक संबंध 'कभी बन ही नहीं पाए': दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के लिए 1 साल की इंतज़ार की अवधि माफ़ की
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि जिस शादी में न तो शारीरिक संबंध बने हों और न ही पति-पत्नी साथ रहे हों, उसे किसी भी असली मायने में शादी नहीं कहा जा सकता। ऐसे हालात में तलाक़ के लिए क़ानूनी तौर पर तय इंतज़ार की अवधि पर ज़ोर देने का कोई फ़ायदा नहीं होगा।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"साथ न रहना और शारीरिक संबंध न बनना, साथ ही शादी के तुरंत बाद ही दोनों पक्षों का अलग हो जाना, यह साफ़ दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक संबंध कभी भी किसी असली मायने में बन ही...
'सरकारी ज़मीन को बंधक नहीं बनाया जा सकता': UNI न्यूज़ एजेंसी केस में दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के जाने-माने सेंट्रल दिल्ली इलाके में यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया (UNI) को अलॉट की गई ज़मीन का अलॉटमेंट रद्द करने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सरकारी ज़मीन को कोई ऐसा लाइसेंसी "बंधक" नहीं बना सकता, जो उस मकसद को ही पूरा करने में नाकाम रहा हो, जिसके लिए उसे ज़मीन अलॉट की गई थी।दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम को रफ़ी मार्ग स्थित UNI के दफ़्तर को सील किया।यह कार्रवाई तब हुई, जब जस्टिस सचिन दत्ता ने अपने 98 पन्नों के आदेश में कहा कि यह न्यूज़ एजेंसी अपनी ज़िम्मेदारियां...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए टेक-सेवी युवा वकीलों को रखने का सुझाव दिया
डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार को सरकारी वकील के दफ़्तर और हाईकोर्ट में जॉइंट डायरेक्टर, प्रॉसिक्यूशन के दफ़्तर में टेक-सेवी युवा वकीलों और नए लॉ ग्रेजुएट्स को मानद रिसर्च एसोसिएट के तौर पर रखना चाहिए।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने यह सुझाव दिया। बेंच ने कहा कि सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटलीकरण के प्रयासों को तेज़ करना और कर्मचारियों की भारी कमी को तुरंत दूर करना समय की ज़रूरत है।कोर्ट असल में एक ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा...
मृत किरायेदार के गैर-आश्रित कानूनी वारिस एक साल बाद किराया अधिनियम का संरक्षण खो देते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि मृत किरायेदार के ऐसे कानूनी वारिस जो किरायेदार पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं थे, किरायेदार की मृत्यु के एक साल से ज़्यादा समय तक दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत लगातार संरक्षण का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अधिनियम की धारा 2(L) के स्पष्टीकरण II का हवाला देते हुए कहा,“यह साफ़ है कि किसी ऐसे व्यक्ति का, जिसे उत्तराधिकार से किरायेदारी मिली हो और जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के दिन उस पर आर्थिक रूप से निर्भर न हो, किरायेदारी खत्म होने के बाद भी...
निष्कासित TMC नेता की पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए 30 दिन की नोटिस अवधि कम करने की याचिका पर विचार करे ECI: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को एक याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया। यह याचिका निष्कासित तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता हुमायूं कबीर द्वारा बनाई गई एक पार्टी ने दायर की, जिसमें राजनीतिक पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए तय 30 दिन की नोटिस अवधि को कम करने की मांग की गई।जस्टिस अमित बंसल 'आम जनता उन्नयन पार्टी' द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में 30 दिनों तक जनता से आपत्तियां मांगने की कानूनी शर्त में ढील देने की मांग की गई और प्रार्थना की गई कि इस मामले के तथ्यों को...
सड़क विक्रेताओं का 'कर्तव्य' है कि वे सफ़ाई बनाए रखें, सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा न करें: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क विक्रेताओं का यह "कर्तव्य" है कि वे अपनी बेचने की जगहों के आस-पास सफ़ाई बनाए रखें और यह पक्का करें कि वे सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा न करें या पैदल चलने वालों की आवाजाही में रुकावट न डालें।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने यह बात तब कही, जब वे एक सड़क विक्रेता की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी उसे मालवीय नगर में उसकी तय जगह पर बेचने की इजाज़त नहीं दे रहे है।याचिकाकर्ता, जिसके पास...
अगर 'गांजा' के साथ पत्तियां और डालियां भी तौली जाएं तो उसकी मात्रा ठीक-ठीक तय नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS केस में ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत बुक किए गए दो आरोपियों को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह देखते हुए ज़मानत दी कि ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थ की मात्रा ठीक-ठीक तय नहीं की जा सकती, क्योंकि उसे सूखी पत्तियों, डालियों और घास जैसी चीज़ों के साथ तौला गया। साथ ही हो सकता है कि ये चीज़ें "गांजा" की कानूनी परिभाषा के दायरे में न आती हों।जस्टिस प्रतीक जालान ने बताया कि NDPS Act की धारा 2(iii)(b) के तहत "गांजा" को "कैनबिस के पौधे के फूल वाले या फल वाले ऊपरी...
पीड़ित की लापरवाही रेल दुर्घटना में मुआवज़ा देने से मना करने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ़ कर दिया कि रेल दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ित की लापरवाही मुआवज़ा देने से मना करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई "अप्रत्याशित घटना" (Untoward Incident) साबित हो जाती है तो रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत रेलवे की ज़िम्मेदारी सख़्त हो जाती है।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने यह टिप्पणी एक महिला की अपील मंज़ूरी देते हुए की। इस महिला के मुआवज़े के दावे को रेलवे दावा अधिकरण (Railway Claims Tribunal) ने खारिज कर दिया था।अधिकरण ने यह माना था कि मृतक न तो एक...
पटना हाईकोर्ट ने दिया मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन का आदेश
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों की मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन बनाने के निर्देश जारी किए। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में एमिक्स क्यूरी (न्याय मित्र) द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने का भी निर्देश दिया।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के...
SC/ST Act के तहत आरोप तय करने वाले अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार्य नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत आरोप तय करने वाले आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह आदेश एक अंतरिम आदेश है और पक्षों के अंतिम अधिकारों का निर्धारण नहीं करता।जस्टिस जिया लाल भारद्वाज ने टिप्पणी की:"...आरोप तय करने का आदेश पूरी तरह से एक अंतरिम आदेश है, क्योंकि यह कार्यवाही को समाप्त नहीं करता, बल्कि मुकदमा तब तक चलता रहता है जब तक कि उसका परिणाम बरी होने या दोषी ठहराए जाने के रूप में सामने...
अधिकारियों की देरी, किसान कल्याण दावे को खारिज करने का आधार नहीं; लाभार्थी की दुर्दशा के प्रति उदासीनता अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं के तहत एक मृत किसान के परिवार द्वारा मांगी गई वित्तीय सहायता से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण किसी कल्याणकारी योजना के तहत ऐसी सहायता पाने के लिए किसान की विधवा को बार-बार कोर्ट के चक्कर लगवाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने टिप्पणी की,“इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई, जिसमें किसी कल्याणकारी योजना के लाभार्थी की दुर्दशा के...
संपत्ति के मालिकाना हक/टाइटल विवादों को सुलझाने के लिए सीनियर सिटिज़न्स एक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर दोहराया कि 'माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' और उसके तहत बनाए गए नियमों का इस्तेमाल उन तीसरे पक्षों के बीच संपत्ति के टाइटल और मालिकाना हक के विवादों को सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता, जिनका सीनियर सिटीजन से कोई संबंध नहीं है।कोर्ट ने कहा कि यह एक्ट सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए है, जिसे उनकी संपत्ति के वारिसों को पूरा करना होता है; यह संपत्ति के टाइटल और मालिकाना हक का फैसला करने के लिए नहीं है। संपत्ति के टाइटल और मालिकाना...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO केस में बरी करने के फ़ैसले में पीड़ित की चोटों की रिपोर्ट पर चर्चा न करने के लिए ट्रायल जज से सफ़ाई मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते की शुरुआत में एक ट्रायल कोर्ट के जज के इस काम पर सख़्त नाराज़गी जताई कि उन्होंने POCSO Act के एक मामले में आरोपी को बरी करने वाले फ़ैसले में नाबालिग पीड़ित को लगी चोटों का ज़िक्र और उन पर चर्चा नहीं की।इस चूक को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी से पीड़ित से जुड़ी मेडिको-लीगल रिपोर्ट पर विचार न करने के बारे में सफ़ाई मांगी।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-II की बेंच ने अपने आदेश में कहा,"हमें यह देखकर दुख हुआ कि ट्रायल जज ने अपने फ़ैसले में...
₹20,000 करोड़ की ज़रूरत के मुकाबले ₹1,000 करोड़ का आवंटन 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल
सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में स्कूल की इमारतों/कमरों के निर्माण/मरम्मत का पूरा रोडमैप और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीज़न बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की इस दलील पर विचार किया कि सरकारी स्कूलों में निर्माण/मरम्मत के काम के लिए...
आरोपी को गिरफ़्तारी के कारणों की जानकारी न देना, गिरफ़्तारी और रिमांड को अमान्य बनाता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को गिरफ़्तारी के कारणों की जानकारी न देना, गिरफ़्तारी और उसके बाद की रिमांड की कार्यवाही दोनों को ही अमान्य बना देता है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति का यह मौलिक अधिकार है कि उसे गिरफ़्तारी के कारणों की जानकारी दी जाए। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) से मिलता है। इस सुरक्षा उपाय का कोई भी उल्लंघन गिरफ़्तारी को गैर-कानूनी बना देता है।बेंच ने कहा,"संविधान का अनुच्छेद 21 यह अनिवार्य करता...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत के नियंत्रण वाले तालाबों को मत्स्य विभाग को सौंपने पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 मार्च के अपने आदेश से पंचायती राज विभाग द्वारा 27 अगस्त, 2025 को पारित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई। इस आदेश में संबंधित पंचायत के नियंत्रण वाले कुछ तालाबों को वापस राज्य के मत्स्य विभाग को सौंप दिया गया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, ग्राम पंचायत सोरसन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ऊपर बताए गए आदेश को चुनौती देते हुए यह आरोप लगाया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 243G और 11वीं अनुसूची...
[POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत दर्ज मामले में आरोपी को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि वैलेंटाइन डे पर किसी लड़की का किसी लड़के से दोस्ताना होना, उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं है।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि लड़की की सहमति से भी उसके सिर पर सिंदूर लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता, भले ही कानून में इसे कोई अपराध न माना गया हो।कोर्ट ने कहा,"सिर्फ़ इसलिए कि कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ताना है और वह दिन वैलेंटाइन डे है, इसका मतलब यह नहीं है कि लड़के को...
दुर्घटना में 5 माह या उससे अधिक के अजन्मे बच्चे की मृत्यु पर भी रेलवे मुआवजा देने का जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि माँ के गर्भ में पाँच महीने या उससे अधिक आयु का अजन्मा बच्चा (भ्रूण) एक जीवित बच्चे के समान माना जाएगा और ऐसे भ्रूण की आकस्मिक मृत्यु के लिए रेलवे अलग से मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होगा, जो माँ की मृत्यु के लिए दिए गए मुआवजे से पृथक होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने लखनऊ स्थित रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए भ्रूण की मृत्यु के लिए दावेदार को अतिरिक्त ₹8,00,000/- का मुआवजा प्रदान किया।यह उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यूनल...
हाईकोर्ट ने 'मोहम्मद' दीपक के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार, सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से भी रोका
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 'मोहम्मद' दीपक कुमार और अन्य लोगों को 26 जनवरी की कोटद्वार घटना और उससे जुड़े मामलों के बारे में सोशल मीडिया पर कोई भी बयान देने या वीडियो पोस्ट करने से रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से मामले की चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।बता दें, 26 जनवरी को दीपक का बजरंग दल के सदस्यों से आमना-सामना हुआ था। आरोप है कि ये सदस्य एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान के नाम में 'बाबा' शब्द का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जता रहे थे। इस घटना का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हो गया था।इस घटना के...
धारा 41A CrPC के नोटिस का पालन होने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं: पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आरोपी को अग्रिम जमानत—मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित धांधली मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की है। आरोपी पर अभ्यर्थियों और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेटर) व्यक्तियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाकर अवैध चयन में सहायता करने का आरोप था।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि धारा 41A CrPC (अब BNSS की धारा 35(3)) के तहत जारी नोटिस का पालन करने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है, तो उसे गिरफ्तार करना...
















![[POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट [POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/11/14/500x300_630971-pocso.jpg)


