हाईकोर्ट

तृतीय श्रेणी पद पर कार्यरत कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों से अतिरिक्त भुगतान के आधार पर कोई वसूली नहीं की जा सकती: मणिपुर हाइकोर्ट
तृतीय श्रेणी पद पर कार्यरत कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों से अतिरिक्त भुगतान के आधार पर कोई वसूली नहीं की जा सकती: मणिपुर हाइकोर्ट

मणिपुर हाइकोर्ट की जस्टिस अहंथम बिमोल सिंह की सिंगल जज बेंच ने डब्ल्यू मनीलीमा देवी बनाम मणिपुर राज्य एवं अन्य के मामले में रिट याचिका पर निर्णय लेते हुए माना कि तृतीय श्रेणी पद पर कार्यरत कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों से अतिरिक्त भुगतान के आधार पर कोई वसूली नहीं की जा सकती।मामले की पृष्ठभूमिडब्ल्यू. मनीलीमा देवी (याचिकाकर्ता) को 1986 में शिक्षा निदेशक, मणिपुर (DEM) द्वारा 6 महीने की अवधि के लिए स्थानापन्न सहायक स्नातक शिक्षक नियुक्त किया गया और समय-समय पर उनकी सेवाओं को बढ़ाया गया। DEM द्वारा...

कर्मचारी को उसकी पिछली सेवाओं के आधार पर पेंशन लाभ मिलना संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संवैधानिक अधिकार: झारखंड हाइकोर्ट
कर्मचारी को उसकी पिछली सेवाओं के आधार पर पेंशन लाभ मिलना संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संवैधानिक अधिकार: झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट की जस्टिस चंद्रशेखर ए.सी.जे. और जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ ने बिरसा कृषि यूनिवर्सिटी बनाम झारखंड राज्य के मामले में लेटर्स पेटेंट अपील पर निर्णय देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को पेंशन लाभ देने से मना करना संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत उसके संवैधानिक अधिकार को छीनना है, क्योंकि कर्मचारी को पेंशन उसकी पिछली सेवाओं के आधार पर मिलती है।मामले की पृष्ठभूमिमहमूद आलम, मोहम्मद अब्बास अली, देव नारायण साव और शेख केतबुल हुसैन (प्रतिवादी) बिरसा कृषि वयूनिवर्सिटी (अपीलकर्ता) के अधीन दैनिक...

लखनऊ वालों की मुश्किल पर ध्यान दें, उनके लिए स्वच्छ पीने का पानी मुहैया करायें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने LMC को निर्देश दिया
लखनऊ वालों की मुश्किल पर ध्यान दें, उनके लिए स्वच्छ पीने का पानी मुहैया करायें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने LMC को निर्देश दिया

लखनऊ के कुछ क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की लंबे समय से चली आ रही समस्या को नोटिस करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम (LMC) को लखनऊ की आबादी की "दुर्दशा के प्रति जागने" और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश 2016 में उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान द्वारा अपने अध्यक्ष (अरुणा सिंह) के माध्यम से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में पारित किया, जिसमें निवासियों द्वारा उनके घरों में आपूर्ति किए जाने वाले...

लगातार 70 तारीखों तक ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं किया गया कैदी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत दी
लगातार 70 तारीखों तक ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं किया गया कैदी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के नोटिस के बावजूद उसे 70 मौकों पर ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं किए गए हत्या के आरोपी को जमानत दे दी।जस्टिस एसजी महरे ने कहा कि हालांकि आरोप गंभीर हैं, लेकिन ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोपी को पेश नहीं किया जाना उसे जमानत का हकदार बनाता है।कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा,“यद्यपि अभियोजन पक्ष इस आधार पर आवेदन का विरोध कर रहा है कि अपराध गंभीर है, लेकिन 70 तारीखों तक अदालत के समक्ष आरोपी को पेश न करने के लिए उसके पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है। आरोप तय करने और...

फर्लो परोपकारी प्रावधान, अगर इसे जेल नियमों की यांत्रिक व्याख्याओं से बांध दिया गया तो इसका उद्देश्य खो जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट
फर्लो परोपकारी प्रावधान, अगर इसे जेल नियमों की यांत्रिक व्याख्याओं से बांध दिया गया तो इसका उद्देश्य खो जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यदि फर्लो का प्रावधान जेल नियमों की कठोर और यांत्रिक व्याख्याओं से बंधा हुआ है तो यह अपना वास्तविक उद्देश्य खो देगा।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कैदियों के कल्याण के लिए बनाया गया "परोपकारी प्रावधान" सक्षम अधिकारियों द्वारा कठोर व्याख्याओं की छाया में कम हो जाएगा।अदालत ने कहा,"अदालतों को यह सुनिश्चित करने के लिए दयालु होना चाहिए कि जेल की कोठरियों का एकांत किसी कैदी के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले और उनके सुधार के बहाने उनके पुनर्वास का मार्ग...

बलात्कार पीड़िता को उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करना, जिसने उस पर हमला किया, अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का उल्लंघन: केरल हाईकोर्ट
बलात्कार पीड़िता को उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करना, जिसने उस पर हमला किया, अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का उल्लंघन: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता को उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जिसने उसका यौन उत्पीड़न किया। इस प्रकार न्यायालय ने 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली सोलह वर्षीय बलात्कार पीड़िता को 28 सप्ताह के प्रेग्नेंसी को मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति दी।जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि अवांछित प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट करने की अनुमति देने से इनकार करना जबरन मातृत्व थोपने और गरिमा के साथ जीवन के अधिकार से वंचित करने के बराबर होगा, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन...

डिपार्टमेंटल ट्रांसफर के बाद पुन: सौंपे गए विभाग में काम करने से कर्मचारी का स्वैच्छिक इनकार सेवा समाप्ति के समान नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
डिपार्टमेंटल ट्रांसफर के बाद पुन: सौंपे गए विभाग में काम करने से कर्मचारी का स्वैच्छिक इनकार सेवा समाप्ति के समान नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट की जज जस्टिस मौना एम. भट्ट की एकल पीठ ने माना कि डिपार्टमेंटल ट्रांसफर (Departmental Transfer) के बाद किसी कर्मचारी द्वारा पुन: सौंपे गए विभाग में काम करने से इनकार करना प्रबंधन द्वारा 'समाप्ति' नहीं माना जाएगा, यदि ऐसे तबादलों के प्रावधान कर्मचारी के नियुक्ति पत्र में शामिल है।संक्षिप्त तथ्य:याचिकाकर्ता (कर्मचारी) 15 अक्टूबर, 1986 से मेसर्स मीट चेतन्स प्राइवेट लिमिटेड (प्रबंधन) के उत्पादन विभाग में मशीन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। हालांकि, प्रबंधन के मालिक ने 8 अप्रैल, 2011 को...

ID Act जब गंभीर प्रकृति के आरोप साबित नहीं होते और सजा अनुपातहीन है तो श्रम न्यायालय को धारा 11ए लागू करने का अधिकार: गुजरात हाईकोर्ट
ID Act जब गंभीर प्रकृति के आरोप साबित नहीं होते और सजा अनुपातहीन है तो श्रम न्यायालय को धारा 11ए लागू करने का अधिकार: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट की जज जस्टिस मौना एम. भट्ट की एकल पीठ ने कहा कि जब गंभीर प्रकृति के आरोप साबित नहीं होते और प्रबंधन द्वारा दी गई सजा को अनुपातहीन माना जाता है तो श्रम न्यायालय को सजा में हस्तक्षेप करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 11ए लागू करने का अधिकार है।औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 11ए कुछ मामलों में नियोक्ता द्वारा किसी कर्मचारी पर लगाई गई सजा को संशोधित करने के लिए श्रम न्यायालय, न्यायाधिकरण या राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के अधिकार से संबंधित है। यह धारा निर्णय लेने वाली...

निजी कंपनियों के खिलाफ रिट सुनवाई योग्य नहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को उचित मंच पर मामले को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया
निजी कंपनियों के खिलाफ रिट सुनवाई योग्य नहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को उचित मंच पर मामले को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट के जस्टिस आदित्य कुमार महापात्र की सिंगल जज बेंच ने निजी कंपनियों के खिलाफ एक रिट याचिका को इस कारण से खारिज कर दिया कि निजी कंपनियां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत परिभाषित राज्य के रूप में वर्गीकृत नहीं करती हैं। कर्मचारियों को एक उचित मंच पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र किया गया।पूरा मामला: ऑल ओडिशा भारती इंफ्राटेल कॉन्ट्रैक्ट टेक्नीशियन यूनियन ने कर्मचारियों के एक समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए उड़ीसा हाईकोर्ट के समक्ष एक रिट याचिका दायर की। एक निजी कंपनी द्वारा...

स्थायित्व प्राप्त करने पर दिहाड़ी मजदूरों के साथ नियमित रूप से नियुक्त श्रमिकों के साथ समान स्तर पर व्यवहार किया जाना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
स्थायित्व प्राप्त करने पर दिहाड़ी मजदूरों के साथ नियमित रूप से नियुक्त श्रमिकों के साथ समान स्तर पर व्यवहार किया जाना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस निखिल एस. करियल की सिंगल जज बेंच ने कहा कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 बी के अनुसार, दैनिक वेतन भोगी कामगार जिन्होंने एक विशिष्ट कार्यकाल पूरा कर लिया है, वे स्थायित्व के हकदार हैं।पीठ ने आगे कहा कि एक बार स्थायी होने के बाद, ये कामगार पेंशन और उच्च वेतनमान जैसे अतिरिक्त लाभों के भी हकदार हैं जो नियमित रूप से नियुक्त श्रमिकों के लिए उपलब्ध हैं। इस प्रकार, पीठ ने वन विभाग को पीड़ित श्रमिकों की सेवाओं का आकलन करने और व्यक्तिगत आवेदन प्राप्त करने पर उन्हें स्थायी...

अस्थायी योजना में शामिल होने पर कोर्ट दिहाड़ी मजदूर को फिर से काम पर रखने का आदेश नहीं दे सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट
अस्थायी योजना में शामिल होने पर कोर्ट दिहाड़ी मजदूर को फिर से काम पर रखने का आदेश नहीं दे सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस एमएस रमन की खंडपीठ ने कहा कि एक अस्थायी योजना की समाप्ति पर, एक आकस्मिक मजदूर की पुनर्नियुक्ति का आदेश कोर्ट द्वारा नहीं दिया जा सकता है।पूरा मामला: याचिकाकर्ता, एक कामगार, ने एक मौखिक समझौते के तहत 01.07.1984 से 28.02.1990 तक नाममात्र मस्टर रोल (NMR) आधार पर बागवानी विशेषज्ञ, भुवनेश्वर के प्रबंधन के तहत काम किया। अपनी सेवा की अवैध समाप्ति का दावा करते हुए, उन्होंने 1993 में एक औद्योगिक विवाद शुरू किया। राज्य सरकार ने इस मामले को...

कर्मचारी द्वारा गलत बयानी के बिना गलत तरीके से वेतन तय किए जाने पर कोई वसूली नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट
कर्मचारी द्वारा गलत बयानी के बिना गलत तरीके से वेतन तय किए जाने पर कोई वसूली नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच के जस्टिस राजेश कुमार वर्मा ने बिक्रम सिंह और अन्य बनाम बिहार राज्य और अन्य के मामले में एक रिट याचिका का फैसला करते हुए कहा है कि जब कोई गलत बयानी या धोखाधड़ी नहीं होती है जिसके कारण गलत वेतन निर्धारण या वेतन होता है, तो कर्मचारियों से कोई वसूली नहीं की जा सकती है।मामले की पृष्ठभूमि: बिक्रम सिंह (याचिकाकर्ता नंबर 1) और राजेंद्र प्रसाद सिंह (याचिकाकर्ता नंबर 2) (सामूहिक रूप से 'याचिकाकर्ता') को क्रमशः 1978 और 1972 में पत्राचार क्लर्क के पद पर नियुक्त किया गया था।...

केरल मोटर वाहन अधिनियम की धारा 6 के तहत रिफंड का प्रावधान केवल तभी लागू होता है जब अग्रिम में कर का भुगतान किया जाता है, वाहन का उपयोग नहीं किया जाता है: केरल हाईकोर्ट
केरल मोटर वाहन अधिनियम की धारा 6 के तहत रिफंड का प्रावधान केवल तभी लागू होता है जब अग्रिम में कर का भुगतान किया जाता है, वाहन का उपयोग नहीं किया जाता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केरल मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1976 की धारा 6 के तहत धनवापसी का प्रावधान केवल तभी लागू होगा जब मोटर वाहन कर का भुगतान किसी वाहन के लिए अग्रिम रूप से किया गया हो।जस्टिस गोपीनाथ पी की सिंगल जज बेंच ने कहा, "1976 अधिनियम की धारा 6 को पढ़ने से संदेह से परे संकेत मिलता है कि रिफंड का प्रावधान केवल तभी लागू होगा जब मोटर वाहन कर का भुगतान निर्दिष्ट अवधि के लिए अग्रिम रूप से किया गया हो और वाहन का उपयोग उस अवधि के दौरान करने का इरादा नहीं है या उसका निरंतर हिस्सा एक...

शिक्षण संस्थानों में गेस्ट फैकल्टी को अनुबंध के आधार पर रखा जाता है, सेवा के नियमितीकरण को निहित अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
शिक्षण संस्थानों में गेस्ट फैकल्टी को अनुबंध के आधार पर रखा जाता है, सेवा के नियमितीकरण को निहित अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

चीफ़ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि जबकि गेस्ट फैकल्टी अपनी सेवाएं जारी रख सकते हैं, वे अपने रोजगार की संविदात्मक प्रकृति और उनके नियमितीकरण को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट नियमों या विनियमों की अनुपस्थिति पर जोर देते हुए एक अंतर्निहित अधिकार के रूप में नियमितीकरण की मांग नहीं कर सकते हैं।पूरा मामला: याचिकाकर्ता गेस्ट फैकल्टी के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने ग्रेड I, ग्रेड II और ग्रेड III में गेस्ट फैकल्टी के रूप में...

फाइनल सेलेक्शन लिस्ट में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का अविभाज्य अधिकार नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट ने दोहराया
फाइनल सेलेक्शन लिस्ट में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का अविभाज्य अधिकार नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट ने दोहराया

दिल्ली हाइकोर्ट के जज जस्टिस तुषार राव गेडेला की सिंगल बेंच ने डॉ. शशि भूषण बनाम दिल्ली यूनिवर्सिटी के मामले में रिट याचिका पर निर्णय लेते हुए माना कि फाइनल सेलेक्शन लिस्ट में शामिल उम्मीदवार को भी नियुक्ति का अविभाज्य अधिकार नहीं है।मामले की पृष्ठभूमिडॉ. शशि भूषण (याचिकाकर्ता) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (प्रतिवादी) के कालिंदी कॉलेज के भूगोल विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। याचिकाकर्ता प्रतीक्षा सूची में पहले उम्मीदवार थे। उषा रानी चयनित उम्मीदवारों की सूची में...

ID ACT| ब्याज का दावा करने का अधिकार केवल तभी पहले से मौजूद अधिकार है, जब रोजगार अनुबंध या सेवा शर्तों में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया हो: कर्नाटक हाइकोर्ट
ID ACT| ब्याज का दावा करने का अधिकार केवल तभी पहले से मौजूद अधिकार है, जब रोजगार अनुबंध या सेवा शर्तों में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया हो: कर्नाटक हाइकोर्ट

कर्नाटक हाइकोर्ट के जज जस्टिस शिवशंकर अमरन्नावर की सिंगल बेंच ने कहा कि ब्याज का दावा करने के अधिकार को पहले से मौजूद अधिकार या लाभ तभी माना जा सकता है, जब इसे रोजगार कॉन्ट्रेक्ट या सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले प्रस्तावों में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया हो। हालांकि इसने माना कि न तो रोजगार अनुबंध और न ही कर्मचारी की सेवा शर्तों में विलंबित सेवा लाभों पर ब्याज के भुगतान की रूपरेखा दी गई।इसके अलावा बेंच ने माना कि लेबर कोर्ट में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 (Industrial Disputes Act,...

दिल्ली हाइकोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दोषी ठहराए गए आतंकवादी फिरोज अहमद भट्ट को पैरोल देने से इनकार किया
दिल्ली हाइकोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दोषी ठहराए गए आतंकवादी फिरोज अहमद भट्ट को पैरोल देने से इनकार किया

दिल्ली हाइकोर्ट ने दो दशक से अधिक समय से जेल में बंद आतंकवादी फिरोज अहमद भट्ट को पैरोल देने से मना किया, जिसने जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने के लिए अस्थायी रिहाई के लिए आवेदन किया।अदालत ने इस बात की चिंता जताई कि क्षेत्र में उसकी मौजूदगी व्यापक सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। अपने माता-पिता से मिलने और शादी करने के लिए दोषी द्वारा पैरोल मांगे जाने के बावजूद अदालत ने इसके खिलाफ फैसला सुनाया।इसके बजाय अदालत ने जेल अधीक्षक को भट्ट और उसके माता-पिता के बीच एक बार वीडियो कॉल की सुविधा प्रदान...

दिल्ली हाइकोर्ट ने टेस्ला के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में टेस्ला पावर इंडिया के खिलाफ़ समन जारी किया
दिल्ली हाइकोर्ट ने टेस्ला के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में टेस्ला पावर इंडिया के खिलाफ़ समन जारी किया

दिल्ली हाइकोर्ट ने एलन मस्क के स्वामित्व वाली टेस्ला इंक द्वारा गुरुग्राम स्थित कंपनी टेस्ला पावर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके अमेरिकी समकक्ष के खिलाफ़ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में समन जारी किया।जस्टिस अनीश दयाल ने भारतीय कंपनी और टेस्ला पावर यूएसए एलएलसी को समन जारी किया और उनके लिखित बयान मांगे।अदालत ने मुकदमे में अंतरिम राहत की मांग करने वाली टेस्ला की याचिका पर भी नोटिस जारी किया और इसे 22 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।टेस्ला ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दायर करते हुए आरोप...

कोयला घोटाला: दिल्ली हाइकोर्ट ने पूर्व सांसद विजय दर्दा के पासपोर्ट को रिन्यू करने का आदेश दिया
कोयला घोटाला: दिल्ली हाइकोर्ट ने पूर्व सांसद विजय दर्दा के पासपोर्ट को रिन्यू करने का आदेश दिया

दिल्ली हाइकोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्दा के पासपोर्ट को तीन साल की अवधि के लिए रिन्यू करने का आदेश दिया।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा कि दर्दा को पहले भी कई मौकों पर विदेश यात्रा करने की अनुमति दी गई और उन्होंने दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया।अदालत ने कहा कि पिछले साल सितंबर में दर्दा की चार साल की सजा निलंबित करते हुए यह शर्त लगाई गई थी कि वह संबंधित अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।अदालत ने कहा,"मामले के समग्र तथ्यों और...