हाईकोर्ट
नर्सिंग होम में अग्नि सुरक्षा मानदंडों के कार्यान्वयन के लिए याचिका पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें: दिल्ली सरकार से हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम द्वारा लागू किए जा सकने वाले अग्नि सुरक्षा और स्प्रिंकलर पर बुनियादी मानदंडों को तैयार करने के लिए चार सप्ताह के भीतर एक प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को युगांश मित्तल द्वारा दायर जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में मानने और कानून के अनुसार तर्कसंगत आदेश के माध्यम से उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।पीठ में शामिल जस्टिस...
खुद का खर्च उठाने में सक्षम पति को पत्नी का खर्च बी उठाना चाहिए; नौकरी/व्यवसाय न होना कोई बहाना नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर पति स्वस्थ है, सक्षम है और खुद का खर्च उठाने की स्थिति में है तो उसे अपनी पत्नी का खर्च उठाना कानूनी तौर पर ज़रूरी है।जस्टिस मालसारी नंदी की पीठ ने कहा कि पति का यह तर्क कि उसके पास पैसे नहीं हैं, क्योंकि उसके पास कोई उपयुक्त नौकरी या व्यवसाय नहीं है, बेबुनियाद बहाना है, जो कानून में स्वीकार्य नहीं है।हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियां व्यक्ति की पुनर्विचार याचिका के जवाब में कीं, जिसमें फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ़ उसे अपनी पत्नी (प्रतिवादी नंबर 2) को 15...
पीड़िता के करीबी रिश्तेदार द्वारा किसी निर्दोष को फंसाने की संभावना नहीं, उन्हें केवल 'इच्छुक गवाह' बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक करीबी रिश्तेदार वास्तविक अपराधी को छिपाने और किसी निर्दोष व्यक्ति पर अपराध थोपने के बजाय घटना की वास्तविक कहानी पेश करने की अधिक संभावना रखता है। जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की एकल पीठ यह समझा रही थी कि करीबी रिश्तेदारों की गवाही को 'हितधारक गवाहों' के रूप में वर्गीकृत करके स्वतः ही अनदेखा क्यों नहीं किया जाना चाहिए।इंदौर में बैठी पीठ ने कहा, "...वस्तुतः, कई आपराधिक मामलों में, यह अक्सर देखा जाता है कि अपराध पीड़ित के करीबी रिश्तेदारों द्वारा देखा जाता...
यूपी लघु खनिज अधिनियम | आशय पत्र रद्द होने के बाद जमा राशि जब्त करने की अनुमति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
उत्तर प्रदेश लघु खनिज (रियायत) अधिनियम की जांच करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एक बार खनन पट्टे के लिए आशय पत्र जारी कर दिया गया है और सिक्योरिटी जमा कर दिया गया है, तो संबंधित प्राधिकारी के पास आशय पत्र को रद्द करने पर पट्टेदार द्वारा की गई ऐसी जमा राशि को जब्त करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने कहा, "प्रस्तुत किए गए प्रस्तुतीकरणों पर विचार करने और उत्तर प्रदेश लघु खनिज (रियायत) नियम, 2017 और 2019 की सावधानीपूर्वक जांच करने पर, हम जब्ती...
धारा 11 हिंदू विवाह अधिनियम | पति के माता-पिता उसकी मृत्यु के बाद विवाह को अमान्य घोषित करने की कार्यवाही का विरोध कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 11 के तहत (विवाह को शून्य घोषित करने) के लिए दायर किए गए पति की मृत्यु के बाद, उसके माता-पिता को आदेश 22 नियम 3 सीपीसी के तहत कार्यवाही को आगे बढ़ाने का अधिकार है क्योंकि ऐसे वैवाहिक विवादों में उत्तराधिकार के प्रश्न शामिल होते हैं। परिवार न्यायालय के आदेश के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने कहा,“कानूनी प्रतिनिधि जो “दोनों पक्षों में से कोई नहीं है” और...
कानूनी ज्ञान की कमी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले सरकारी अधिकारियों के लिए कोई बचाव नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निजी भूमि के अतिक्रमण की निंदा की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कानूनी ज्ञान की कमी का हवाला देकर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने वाले सरकारी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने निजी भूमि का सरकारी सड़क के रूप में उपयोग बंद करने के न्यायालय के पूर्व निर्देश का उल्लंघन करने पर लोक निर्माण विभाग, रीवा संभाग के अधिशासी अभियंता पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया है।न्यायालय ने इस बात पर भी अविश्वास व्यक्त किया कि अधिशासी अभियंता ने महाधिवक्ता कार्यालय की बात पर भी ध्यान नहीं दिया, जबकि...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित अवैध किडनी प्रत्यारोपण रैकेट के संबंध में दो डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित फोर्टिस अस्पताल के दो डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया है। ये डॉक्टर मानव अंग (किडनी) के कथित अवैध प्रत्यारोपण के संबंध में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय रैकेट के संबंध में आरोपी हैं। जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि उनके खिलाफ कोई सबूत है।पीठ ने कहा, "जांच रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता नंबर एक आकाश, प्रशांत यादव और गोपाल नामक दलालों के साथ टेलीफोन पर संपर्क में पाया गया है, साथ ही गिरिराज शर्मा के साथ उसके बैंक खाते से...
मोरनी हिल्स में जंगल की आग | पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार से आग पर काबू पाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज हरियाणा सरकार से पंचकूला के मोरनी हिल्स में सक्रिय जंगल की आग की स्थिति और इसे नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी मांगी है। जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन की अवकाश पीठ ने हरियाणा सरकार, पर्यावरण विभाग के सचिव, उपायुक्त, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और प्रभागीय वन अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए राज्य से "वर्तमान में सक्रिय आग और आग को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में लिखित जवाब" दाखिल करने को कहा...
राजकोट गेमिंग जोन आग | पुलिस कमिश्नर ने गुजरात हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत टीआरपी गेमिंग जोन को दी गई अनुमति के बारे में बताया
राजकोट के पुलिस आयुक्त आईपीएस ब्रजेशकुमार झा ने टीआरपी गेमिंग जोन को दी गई अनुमतियों के बारे में स्पष्टीकरण देने के निर्देश के बाद गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दायर किया है। हाईकोर्ट ने इस बात का विवरण मांगा है कि क्या ये अनुमतियां गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 33(w) के प्रावधानों के तहत प्राप्त की गई थीं। 28 मई, 2024 को पदभार ग्रहण करने वाले झा ने अपने हलफनामे में कहा कि उन्होंने 25 मई और 27 मई, 2024 के केस रिकॉर्ड और आदेशों की समीक्षा की।अपने हलफनामे में उन्होंने कहा, "मैं...
S.13 Hindu Marriage Act | क्रूरता का पता लगने के बाद परित्याग के सबूत की परवाह किए बिना तलाक दिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एक बार फैमिली कोर्ट द्वारा क्रूरता के बारे में पता लगने के बाद पक्षकारों के बीच विवाह को भंग कर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने माना कि केवल इसलिए कि परित्याग साबित नहीं हुआ है, विवाह को बहाल नहीं किया जा सकता।न्यायालय ने माना कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 13(1) में दिए गए तलाक के आधार परस्पर अनन्य हैं। यदि इनमें से कोई भी आधार बनता है तो तलाक दिया जाना चाहिए। इसने माना कि प्रत्येक आधार के बाद 'या' शब्द का उपयोग उन्हें विभाजक बनाता है।हिंदू विवाह...
कार्यालय के लिए अस्थायी आवास के लिए AAP की याचिका पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में स्थायी कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटित होने तक अस्थायी आवास के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रतिनिधित्व पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय ले।AAP को 15 जून तक राउज एवेन्यू में अपना वर्तमान पार्टी कार्यालय खाली करना है।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि AAP को दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मार्ग पर स्थित अपने किसी मंत्री के घर को अपना अस्थायी कार्यालय बनाने का कोई अधिकार नहीं है।हालांकि, न्यायालय ने कहा कि AAP...
पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों को पुलिस थानों में तब तक खुले आसमान के नीचे नहीं रखा जाना चाहिए, जब तक कि जांच के लिए ऐसा करना आवश्यक न हो: झारखंड हाइकोर्ट
झारखंड हाइकोर्ट ने दोहराया है कि पुलिस मामलों के संबंध में जब्त किए गए वाहनों को पुलिस थानों में तब तक खुले आसमान के नीचे नहीं रखा जाना चाहिए, जब तक कि जांच के लिए उनकी उपस्थिति आवश्यक न हो।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने मामले की सुनावई करते हुए जब्त मोटरसाइकिल से संबंधित याचिका संबोधित करते हुए इस सिद्धांत पर जोर दिया।जस्टिस चौधरी ने कहा,"बार में प्रस्तुत किए गए तर्कों को सुनने और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्रियों को देखने के बाद यहां यह उल्लेख करना उचित है कि यह कानून का एक स्थापित सिद्धांत है कि पुलिस...
राज्य को चयन प्रक्रिया पूरी करते समय प्रतीक्षा सूची तैयार करने से परहेज करने का अधिकार: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने माना कि चयन प्रक्रिया में प्रतीक्षा सूची तैयार करना राज्य का पूर्ण विवेकाधिकार है और न्यायालय इसे तैयार करने के लिए नहीं कह सकता।जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा,"न्यायालय प्रतीक्षा सूची तैयार करने के लिए नहीं कह सकता। प्रतीक्षा सूची के अभाव में न्यायालय राज्य को किसी चयनित उम्मीदवार के शामिल न होने की स्थिति में रिक्तियों को भरने के लिए नहीं कह सकता। यह कानून का स्थापित प्रस्ताव है कि चयन प्रक्रिया की शर्तों और नियमों को निर्दिष्ट करना नियोक्ता का पूर्ण विवेकाधिकार है।...
जिस मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर इकबालिया बयान को रिकॉर्ड किया, उसके द्वारा हस्ताक्षरित न किए गए इकबालिया बयान को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत सत्य नहीं माना जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
कोहिमा स्थित गुवाहाटी हाइकोर्ट ने हाल ही में बलात्कार और हत्या का मामला इस आधार पर खारिज कर दिया कि निचली अदालत ने केवल हस्ताक्षरित और अप्रमाणित इकबालिया बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस बुदी हबंग की खंडपीठ ने कहा,"जिस दस्तावेज पर मजिस्ट्रेट ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं या उसे साबित नहीं किया है जिसे कथित इकबालिया बयान दर्ज करने वाला माना जाता है। उसे सीआरपीसी की धारा 164 के प्रावधानों के तहत आरोपी का सच्चा इकबालिया बयान नहीं माना...
गुजरात हाईकोर्ट ने BCI की मंजूरी के बिना 8 लॉ कॉलेज में एडमिशन पर रोक लगाई
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य के आठ लॉ कॉलेज में एलएलबी कोर्ट के लिए एडमिशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिन्हें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (CBI) से मंजूरी नहीं मिली है। न्यायालय ने CBI को इन कॉलेज का निरीक्षण करने का निर्देश दिया, जो मंजूरी देने के लिए एक शर्त है।जस्टिस विमल के. व्यास ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा,"नियम 2008 के प्रावधानों पर विचार करते हुए तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम बोनी एफओआई लॉ कॉलेज एवं अन्य [एस.एल.पी. (सी.) संख्या 22337/2008 से उत्पन्न सिविल अपील संख्या 969/2023] के मामले में...
'नियम राजनीतिक एजेंडे पर आधारित नहीं हो सकते': सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए अतिरिक्त अंकों के लिए हरियाणा सरकार के सामाजिक-आर्थिक मानदंड पर हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा 2022 में ग्रुप सी और ग्रुप डी पदों की भर्ती के लिए पेश किए गए नियम खारिज कर दी, जिसमें राज्य के मूल निवासी को सामाजिक-आर्थिक मानदंड के तहत अतिरिक्त पांच प्रतिशत अंक प्रदान किए जाने का प्रावधान था, यह देखते हुए कि नियम वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तैयार किए जाने चाहिए और "राजनीतिक एजेंडे पर आधारित नहीं हो सकते।जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा,"जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया, राज्य के लिखित प्रस्तुतीकरण से हमें पता चलता है कि...
[Rajasthan Municipalities Act, 2009] अधिनियम के तहत उपाय का लाभ उठाए बिना सीधे सिविल कोर्ट जाने पर कोई रोक नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट में जस्टिस बीरेंद्र कुमार की पीठ ने एक ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। उक्त याचिका में ट्रायल कोर्ट ने सीपीसी के आदेश VII नियम 11 के तहत शिकायत खारिज करने से इनकार किया था।यह याचिका राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 के तहत वैकल्पिक उपाय के अस्तित्व के आधार पर दायर की गई थी लेकिन न्यायालय ने यह देखते हुए मामले का फैसला किया कि अधिनियम के तहत सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर कोई विशेष रोक नहीं है।तथ्यात्मक पृष्ठभूमिइस मामले में याचिकाकर्ता और नगर...
यह गलत धारणा है कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता न होने पर अग्रिम जमानत दी जा सकती है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि यह आम गलत धारणा है कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता न होने पर अग्रिम जमानत दी जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि अग्रिम जमानत आवेदन पर निर्णय लेते समय हिरासत में पूछताछ केवल एक कारक है।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि न्यायालय को अग्रिम जमानत आवेदनों पर विचार करते समय यह विचार करना होगा कि क्या अभियुक्त के विरुद्ध प्रथम दृष्टया मामला बनता है, अपराध की प्रकृति और दंड की गंभीरता क्या है।कोर्ट ने कहा,“इसके अलावा, यह मानते हुए भी कि ऐसा मामला है, जिसमें अभियुक्त से हिरासत में...
अपील के 30 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्यवाही में देरी का हवाला देते हुए अपहरण मामले में सजा घटाकर 5 दिन की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 1992 के अपहरण मामले में दोषी की अपील पर निर्णय लेने में 30 साल की देरी का हवाला देते हुए सजा कम की।जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता-दोषी ने "लंबे समय तक चले मुकदमे के कारण मानसिक पीड़ा और आघात झेला है।" इस प्रकार 2 साल के कठोर कारावास की सजा को घटाकर पहले से ही भुगती गई अवधि, यानी 5 दिन कर दिया।अपीलकर्ता के खिलाफ 1992 में नाबालिग लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट के संबंध में आईपीसी की धारा 363 और 366-ए के तहत अपराध के लिए मामला दर्ज किया गया। अपीलकर्ता को दोषी...
प्रयागराज के वकील 58% कार्य दिवसों तक हड़ताल पर रहे: हाईकोर्ट ने जिला बार एसोसिएशन को 'अवमानना' पर कारण बताओ नोटिस जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय बार एसोसिएशन, प्रयागराज के अध्यक्ष और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि 1 जुलाई 2023 से 30 अप्रैल 2024 के बीच 127 दिनों तक जिला न्यायालय प्रयागराज की कार्यवाही में "बाधा" डालने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अधिवक्ता संघ से "उत्तर प्रदेश के जिला न्यायालयों...

















![[Rajasthan Municipalities Act, 2009] अधिनियम के तहत उपाय का लाभ उठाए बिना सीधे सिविल कोर्ट जाने पर कोई रोक नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट [Rajasthan Municipalities Act, 2009] अधिनियम के तहत उपाय का लाभ उठाए बिना सीधे सिविल कोर्ट जाने पर कोई रोक नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2024/06/05/500x300_543246-533108-rajasthan-high-court-jaipur-bench-1.jpg)


