हाईकोर्ट
तलाक लेने का अधिकार व्यक्ति का निजी अधिकार, बेटे की मौत के बाद परिवार कार्यवाही नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक लेने का अधिकार किसी व्यक्ति का निजी अधिकार है। इसे किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके परिवार के सदस्यों तक नहीं बढ़ाया जा सकता।जस्टिस मंगेश पाटिल और जस्टिस शैलेश ब्रह्मे की खंडपीठ ने पुणे के व्यक्ति की मां और भाइयों द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया, जिन्होंने COVID-19 प्रकोप के दौरान उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी के खिलाफ आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही जारी रखने की मांग की थी।जजों ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी(2) के तहत तलाक...
पाकिस्तान या किसी खाड़ी देश में चले जाओ, भारत के उदार रवैये का अनुचित लाभ मत उठाओ: बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्धारित समय से अधिक वक्त रुकने वाले शरणार्थी से कहा
भारत में निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने वाले शरणार्थी पर कड़ी फटकार लगाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को यमन के नागरिक से कहा कि वह यहां निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने के बजाय पाकिस्तान या किसी अन्य खाड़ी देश में चला जाए।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने कहा कि शरणार्थी भारत के उदार रवैये का अनुचित लाभ नहीं उठा सकता।जजों ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा,"आप पाकिस्तान जा सकते हैं, जो पड़ोस में है। या आप किसी भी खाड़ी देश में जा सकते हैं। भारत के उदार...
कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स ऑफ इंडिया ने किसानों के विरोध के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट से जनहित याचिका वापस ली
कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपनी जनहित याचिका वापस ले ली, जिसमें न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को अपने कार्यालयों में आम जनता के सुरक्षित प्रवेश और निकास के लिए निर्देश देने और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों के लिए एक स्थान निर्धारित करने की मांग की गई थी।जनहित याचिका में कहा गया कि किसान अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान, नौकरी में आरक्षण और अधिकारियों द्वारा...
लोकसभा चुनाव में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की जीत को हाईकोर्ट में चुनौती
लोकसभा चुनाव 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की जीत को चुनौती देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। चरणजीत 17वीं लोकसभा में जालंधर से सांसद चुने गए हैं।जालंधर के एक मतदाता द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि चन्नी ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपने द्वारा किए गए खर्च के बारे में जानकारी छिपाई।याचिका में कहा गया,"हालांकि चुनाव आयोग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण प्रतिवादी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रतिवादी के दुर्भावनापूर्ण इरादे साफ झलकते हैं।"आरोप है कि...
Maratha Reservation | समुदाय असाधारण रूप से पिछड़ा है, कई लोग अंधविश्वास होने के कारण बेटियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर देते हैं: MSCBC ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया
मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करने की अपनी सिफारिश को उचित ठहराते हुए महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (MSCBC) ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि समुदाय को मुख्यधारा के समाज के 'अंधकारमय छोर' पर धकेल दिया गया और मराठा अपनी बेटियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही कर देते हैं और अंधविश्वास का भी पालन करते हैं।पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस (रिटायरमेंट) सुनील शुक्रे की अध्यक्षता वाले MSCBC को आयोग की रिपोर्ट में छेद करने वाली विभिन्न याचिकाओं का जवाब देते हुए हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया,...
Krishna Janmabhumi Case | मुकदमे में इसका 'धार्मिक चरित्र' निर्धारित किया जाएगा; सरकार की 1920 की अधिसूचना औरंगजेब से पहले के मंदिर के अस्तित्व का संकेत देती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित शाही ईदगाह (मस्जिद) समिति द्वारा दायर आदेश 7 नियम 11 सीपीसी याचिका खारिज कर दी, जिसमें मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में हिंदू उपासकों और देवता श्री कृष्ण विराजमान द्वारा दायर 18 मुकदमों की स्वीकार्यता को चुनौती दी गई।जस्टिस मयंक कुमार जैन की पीठ ने 18 मुकदमों को, जिनमें मुख्य रूप से 13.37 एकड़ के विवादित परिसर से मस्जिद को हटाने की मांग की गई, स्वीकार्य पाया, जिससे उनकी योग्यता के आधार पर उनकी सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।अपने 155...
HMA के तहत वयस्क बच्चे को आर्थिक रूप से स्वतंत्र न होने तक भरण-पोषण का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act (MHA)) की धारा 26 के तहत बच्चा तब तक भरण-पोषण का हकदार है, जब तक वह अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहा है और आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो जाता।जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस अमित बंसल की खंडपीठ ने कहा,"हमारे विचार से बच्चा, जो अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहा है, वह वयस्क होने के बाद भी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 के तहत भरण-पोषण का हकदार होगा, जब तक वह अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहा है और आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो...
Nursing Officers Recruitment: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व में नियुक्त सीनियर अधिकारियों को नई भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से रोका
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मेडिकल स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में पहले से कार्यरत उम्मीदवारों पर मेडिकल शिक्षा विभाग में नए अधिसूचित नर्सिंग ऑफिसर पदों पर आवेदन करने पर अंतरिम रोक लगा दी।चीफ जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने अपीलकर्ता नवल किशोर और अनीता भंडारी द्वारा दायर अंतरिम आवेदन स्वीकार कर लिया, जो नर्सिंग ऑफिसर पद के इच्छुक हैं। न्यायालय ने मामले में नोटिस जारी किए और उत्तराखंड मेडिकल सेवा चयन बोर्ड सहित प्रतिवादी राज्य अधिकारियों को 27.11.2024 के भीतर जवाब...
मूल्यांकन आदेश में प्रत्येक प्रश्न पर संतुष्टि प्रकट करने वाला संदर्भ शामिल होना आवश्यक नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि मूल्यांकन आदेशों में प्रत्येक प्रश्न के संबंध में संतुष्टि प्रकट करने के लिए संदर्भ और/या चर्चा शामिल होना अनिवार्य नहीं है।जस्टिस के.आर. श्रीराम और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि आदेश में खतरनाक अपशिष्ट के मुद्दे पर कोई चर्चा या निष्कर्ष नहीं है। इसलिए प्रतिवादी विभाग को याचिकाकर्ता के स्पष्टीकरण को स्वीकार करने के रूप में माना जाना चाहिए।याचिकाकर्ता/करदाता मेडिकल उपकरणों के आयात निर्माण और आपूर्ति में लगा हुआ है। व्यवसाय के दौरान याचिकाकर्ता 2008 से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को अश्लील मैसेज भेजने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ़ दर्ज FIR खारिज़ की, तीन महीने सामुदायिक सेवा करने को कहा
महिला के साथ समझौता करने के बाद, उसे अश्लील संदेश मैसेज के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ़ दर्ज 2014 का मामला खारिज़ करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में उस व्यक्ति को अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए तीन महीने तक सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने व्यक्ति को 9 सितंबर से 30 नवंबर तक वृद्धाश्रम, LNJP अस्पताल और अनाथालय में एक-एक महीने तक सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।अदालत ने आरोपी को अपने इलाके में अपने खर्च पर 50 पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का भी निर्देश...
Indian Succession Act- ज़मानत केवल प्रशासन के पत्र जारी करने के लिए आवश्यक, वसीयत की प्रोबेट जारी करने के लिए नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वसीयत के निष्पादकों को प्रोबेट जारी करने के लिए ज़मानत और बांड प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है। यह आवश्यकता केवल प्रशासन के पत्र जारी करने के लिए आवश्यक है।जस्टिस बीरेन वैष्णव और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने कहा,"भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों को देखते हुए ज़मानत प्रस्तुत करने का प्रावधान केवल प्रशासन के पत्र जारी करने के मामले में प्रदान किया गया, न कि वसीयत की प्रोबेट जारी करने के लिए।"उपर्युक्त निर्णय भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 299...
पूर्वव्यापी नियमितीकरण के बाद, कर्मचारी पूर्वव्यापी प्रभाव से वेतन बकाया के अलावा अन्य लाभ पाने का हकदार होगा, जब तक कि विशेष रूप से रोक न लगाई गई हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्वव्यापी नियमितीकरण के मामलों में कर्मचारी को समयमान वेतनमान, चयन वेतन, एसीपी लाभ आदि जैसे लाभों का पूर्वव्यापी प्रभाव से अधिकार होगा, जब तक कि उसे नियमित करने वाले आदेश में निर्दिष्ट समय अवधि को गिनने से विशेष रूप से प्रतिबंधित न किया गया हो। इसके अलावा यह भी माना गया कि अन्यथा भी, यदि पूर्वव्यापी नियमितीकरण वरिष्ठता को बहाल करता है, तो याचिकाकर्ता को उसके कनिष्ठ की तुलना में कम वेतनमान पर निर्धारित किया जाता है, तो यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली Congress नेता की याचिका पर नोटिस जारी किया
2024 के लोकसभा चुनाव में खंडवा से उम्मीदवार और कांग्रेस (Congress) नेता नरेंद्र पटेल ने उक्त सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार ज्ञानेश्वर पाटिल की जीत को चुनौती दी। चुनाव याचिका में कहा गया कि विजयी उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने सांसद के साथ-साथ अन्य उम्मीदवारों को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता का आरोप है कि पाटिल ने जानबूझकर अपने नामांकन पत्र जमा करते समय नागरिक सहकारी बैंक, बुरहानपुर से लिए...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, निर्णय-देनदार कंपनी के खिलाफ धन संबंधी डिक्री लागू करने के लिए कंपनी के निदेशक/कर्मचारी के खिलाफ दीवानी कारावास का आदेश नहीं दिया जा सकता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि निर्णय-ऋणी कंपनी के खिलाफ धन डिक्री को लागू करने के लिए किसी कंपनी अधिकारी के सिविल कारावास की मांग नहीं की जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि आदेश 21 नियम 50 भागीदारों की परिसंपत्तियों से धन डिक्री के निष्पादन की अनुमति देता है, लेकिन किसी कर्मचारी/प्रतिनिधि/निदेशक से नहीं।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा, "आदेश 21 नियम 50 नियम में उल्लिखित उक्त फर्म के भागीदारों की परिसंपत्तियों से किसी फर्म के खिलाफ धन डिक्री के निष्पादन का प्रावधान करता है, लेकिन कंपनी के...
आपराधिक मामले में पति की कथित संलिप्तता ओसीआई पंजीकरण के लिए पत्नी को सुरक्षा अनुमति से इनकार का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि किसी आरोपी के साथ केवल पारिवारिक संबंध, कथित अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता के साक्ष्य के बिना, किसी पति/पत्नी को ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) पंजीकरण के लिए सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार करने का कोई आधार नहीं है। जस्टिस संजीव नरूला ने कहा, "किसी आरोपी के साथ केवल जुड़ाव या पारिवारिक संबंध, कथित अपराधों में प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत के ठोस साक्ष्य के बिना, नागरिकता अधिनियम की धारा 7ए(1)(डी) के तहत सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार करने का आधार नहीं बनता...
"विवाहित पुरुष के साथ सहमति से संबंध, महिला पर्याप्त वयस्क थी": बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला से 31 साल तक बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को 73 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के मामले को खारिज कर दिया, जिसने कथित तौर पर पीड़िता के साथ 31 साल तक बलात्कार किया था। जस्टिस अजय गडकरी और डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने एफआईआर का अध्ययन करने के बाद माना कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे।उन्होंने कहा, "एफआईआर की सामग्री स्पष्ट रूप से सहमति से संबंध का संकेत देती है। दोनों पक्ष 31 साल से यौन संबंध बना रहे थे। शिकायतकर्ता ने कभी भी संबंध पर अपनी कथित आपत्ति के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। एफआईआर की सामग्री में...
BREAKING | कृष्ण जन्मभूमि विवाद: हिंदू उपासकों और देवता के मुकदमे सुनवाई योग्य- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष लंबित मुकदमों के लिए संभावित निहितार्थों वाले महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने आज शाही ईदगाह मस्जिद की याचिका को आदेश 7 नियम 11 CPC के तहत खारिज कर दिया। इस याचिका में देवता और हिंदू उपासकों द्वारा दायर 18 मुकदमों की विचारणीयता को चुनौती दी गई।इस निर्णय के साथ जस्टिस मयंक कुमार जैन की पीठ ने सभी 18 मुकदमों को सुनवाई योग्य पाया, जिससे उनकी योग्यता के आधार पर उनकी सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।गौरतलब है कि एकल...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एचडी रेवन्ना की जमानत रद्द करने की मांग करने वाली SIT की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें महिला के अपहरण के आरोपी जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी रेवन्ना को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा। रेवन्ना को 13 मई को विशेष अदालत ने जमानत दी थी।प्रज्वल रेवन्ना की महिला के साथ कथित तौर पर अश्लील वीडियो सामने आने के बाद उसके बेटे ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि शिकायत दर्ज होने से पहले ही महिला का अपहरण कर...
कृष्ण जन्मभूमि विवाद: 18 याचिकाओं के खिलाफ दायर मस्जिद समिति की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट कल फैसला सुनाएगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में देवता और हिंदू पक्षों द्वारा दायर 18 मुकदमों की स्वीकार्यता को चुनौती देने वाली शाही ईदगाह मस्जिद (आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत) द्वारा दायर एक आवेदन पर कल अपना फैसला सुनाएगा। जस्टिस मयंक कुमार जैन की पीठ विवाद में शामिल सभी पक्षों की व्यापक सुनवाई के बाद लगभग दो महीने पहले अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद कल अपना फैसला सुनाएगी। गौरतलब है कि एकल न्यायाधीश ने इस साल फरवरी में मस्जिद समिति की आपत्तियों पर सुनवाई...
आरोपी जांच के तरीके या एजेंसी के चयन को तय नहीं कर सकता, जांच पर अदालत की निगरानी सीमित: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित पीठ ने एक मामले में फैसला सुनाया है कि अभियुक्त को किसी विशेष तरीके की जांच या विशिष्ट जांच एजेंसी की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है और जांच की अदालती निगरानी इसकी उचित प्रगति सुनिश्चित करने और जनता का विश्वास बनाए रखने तक सीमित है। पीठ की अध्यक्षता जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की, आरोप लगाया कि एफआईआर फर्जी दस्तावेजों पर आधारित है और तर्क दिया कि विसंगतियों को इंगित करने के बावजूद...




















