हाईकोर्ट
नियोक्ता को दोषपूर्ण घरेलू जांच के बाद भी साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT) के निर्णय के विरुद्ध श्रमिक संघ द्वारा दायर याचिका खारिज की। यह निर्णय बर्खास्त कर्मचारी के पक्ष में पारित किया गया। उसे अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण बर्खास्त किया गया और CGIT ने उसकी बर्खास्तगी बरकरार रखी। न्यायालय ने माना कि नियोक्ता अपना मामला बनाने के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है, भले ही मूल घरेलू जांच को अमान्य घोषित कर दिया गया हो। इसने स्पष्ट किया कि श्रम न्यायालय को...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सीएम चंद्रबाबू नायडू पर अपमानजनक पोस्ट करने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने संगठित अपराध करने और मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी, जिसके बारे में दावा किया गया था कि इससे राजनीतिक अशांति और संभावित हिंसा हुई थी।जस्टिस हरिनाथ एन ने अपने आदेश में मोहम्मद इलियास मोहम्मद बिलाल कपाड़िया बनाम गुजरात राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि संबंधित राज्य कानून के तहत संगठित अपराध को लागू...
J&K COBA 1988| किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय कारण बताओ नोटिस में निर्दिष्ट आधारों को पार नहीं कर सकते अधिकारी: हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कानून के बुनियादी सिद्धांत की पुष्टि करते हुए कहा है कि व्यक्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को कारण बताओ नोटिस में निर्दिष्ट आधारों का सख्ती से पालन करना चाहिए, जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अधिकारी नोटिस की सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर सकते क्योंकि इस तरह के उल्लंघन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करते हैं और बाद की कार्रवाइयों को कानूनी रूप से अस्थिर बना देते हैं।"जिन आधारों पर व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी है,...
समझौते में विशिष्ट बहिष्करण खंड विवाद को गैर-मनमाना बनाता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने माना है कि जब समझौते में एक विशिष्ट बहिष्करण खंड है, तो मामले को मध्यस्थता के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए।पूरा मामला: आवेदक ने मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत यह आवेदन दायर किया, जिसमें मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग की गई। वर्तमान आवेदन कस्टम मिलिंग नीति, 2018 में निहित मध्यस्थता खंड के आधार पर दायर किया गया था। समझौते में एक खंड है जो यह निर्धारित करता है कि आवेदक द्वारा धोखाधड़ी, चोरी या दुवनियोजन से जुड़े मामले मध्यस्थता योग्य नहीं...
AIIMS जोधपुर ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में 16 साल की देरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई, 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की इच्छा जताई
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने AIIMS जोधपुर में ट्रॉमा सेंटर सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में लगातार हो रही देरी के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई और 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के लिए कार्रवाई शुरू करने की इच्छा जताई।हालांकि कोर्ट ने न्याय के हित में राज्य सरकार को मामले में हलफनामा दाखिल करने का एक आखिरी मौका दिया।AIIMS जोधपुर में बुनियादी ढांचे से संबंधित मुद्दों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस...
अतुल सुभाष आत्महत्या | आरोपी पत्नी ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया
34 वर्षीय बेंगलुरु के तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सुभाष की पत्नी ने अपने तीन परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।सुभाष जिन्होंने कथित तौर पर वैवाहिक मामलों को दायर करके अपनी पत्नी द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने के कारण आत्महत्या कर ली थी, ने अपने पीछे न्याय मिलना चाहिए की तख्ती और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है।उन्होंने 81 मिनट का वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी...
हिरासत के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए, जब तक कि हाईकोर्ट द्वारा चुनौती न दी जाए या संशोधित न किया जाए: झारखंड हाईकोर्ट ने मां को बेटे को पिता को सौंपने का निर्देश दिया
इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि हिरासत के आदेश का सम्मान किया जाना चाहिए, जब तक कि हाईकोर्ट द्वारा चुनौती न दी जाए या संशोधित न किया जाए, झारखंड हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़के की हिरासत उसके पिता को देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है, जो यह सुझाव दे कि नाबालिग का कल्याण पिता के हाथों में किसी भी तरह से खतरे में था।न्यायालय ने मां से बातचीत की जिसने अदालत को बताया कि उसने फैमिली कोर्ट के 2022 के आदेश को चुनौती नहीं दी है।इसी के मद्देनजर...
मौजूदा नामांकन के मामले में डेथ-कम-रिटायमेंट लाभों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मृतक सरकारी कर्मचारी के डेथ-कम-रिटायमेंट लाभों के लिए आवेदन करते समय आवेदक के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करना आवश्यक नहीं है यदि उनके नाम पर कोई नामांकन मौजूद है।जस्टिस जे.जे. मुनीर ने कहा,“एक बार जब मृतक द्वारा अपने सेवा रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति, जो उसकी पत्नी है के पक्ष में नामांकन किया जाता है तो प्रतिवादियों या किसी भी नियोक्ता के लिए सेवा रिकॉर्ड में नामांकित व्यक्ति के पक्ष में रिटायरमेंट के बाद के लाभों का भुगतान रोकने का कोई कारण नहीं है। यह दूसरे...
कॉलेज की संबद्धता के लिए याचिका दायर करने का स्टूडेंट्स के पास कोई अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेज के मान्यता न मांगने पर आश्चर्य व्यक्त किया
कॉलेज की मान्यता प्रदान करने के संबंध में याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि स्टूडेंट्स के पास कॉलेज की संबद्धता मांगने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि कॉलेज मान्यता मांगने के लिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित क्यों नहीं हुआ।सुनवाई की अंतिम तिथि यानी 13 नवंबर को प्रतिवादी संख्या 1 (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) और प्रतिवादी संख्या 2 (म.प्र. राज्य बार काउंसिल) के वकीलों ने अंतिम रियायत के रूप में...
झारखंड हाईकोर्ट ने मोतियाबिंद, सुगर और हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित बुजुर्ग कैदियों के लिए अनिवार्य मासिक मेडिकल कैंप लगाने का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) को निर्देश दिया कि वह जेलों में आयोजित मासिक विधिक शिविरों के साथ-साथ मोतियाबिंद सुगर और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित कैदियों, विशेष रूप से बुजुर्ग कैदियों के लिए मेडिकल कैंप आयोजित करे।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और नवनीत कुमार की खंडपीठ ने निर्देश दिया,“इस न्यायालय ने उपरोक्त आदेश पारित करने के बाद यह भी विचार किया कि इस तरह के मुद्दे पर विचार किया गया कि विचाराधीन कैदियों या न्यायिक हिरासत में बंद कैदियों की,...
रोजगार विवाद में उद्योग का दर्जा स्थापित करने का बोझ याचिकाकर्ता पर: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस गिरीश कथपालिया की एकल पीठ ने लेबर कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें एक कर्मचारी के बहाली के दावों को खारिज कर दिया गया।कोर्ट ने माना कि कर्मचारी यह साबित करने में विफल रहा कि होलिस्टिक चाइल्ड डेवलपमेंट इंडिया (HCDI) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत एक उद्योग के रूप में योग्य है। न्यायालय को ऐसा कोई सबूत भी नहीं मिला, जिससे पक्षों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित हो।इसने नोट किया कि याचिकाकर्ता को केवल सफाई कार्यों के लिए एक आकस्मिक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'सील' परिसर में शराब की दुकान चलाने की अनुमति देकर आदेशों का उल्लंघन करने के लिए तहसीलदार को अवमानना नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को सुनवाई के दौरान एक तहसीलदार को अवमानना नोटिस जारी किया, क्योंकि उसने जानबूझकर न्यायालय के पिछले आदेश की अवहेलना की और एक शराब की दुकान को ऐसे परिसर में संचालित करने की अनुमति दी, जिसे सील करके खाली किया जाना था।न्यायालय ने तहसीलदार से स्पष्टीकरण दाखिल करने को कहा कि उसने शराब की दुकान को खोलने की अनुमति क्यों दी, लेकिन मौखिक रूप से कहा कि यह एक उचित मामला प्रतीत होता है, जिसमें अधिकारी के खिलाफ न केवल विभागीय बल्कि सतर्कता जांच की भी आवश्यकता है।...
[MV Act] गुवाहाटी हाईकोर्ट ने MACT का आदेश खारिज किया, जिसमें धारा 166(3) के तहत प्रतिबंधित होने के दावे को खारिज कर दिया गया था, कहा- दुर्घटना धारा डाले जाने से पहले हुई थी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण कामरूप द्वारा पारित आदेश खारिज कर दिया, जिसके तहत उसने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (जैसा कि 2019 में संशोधित किया गया) की धारा 166(3) के तहत सीमा द्वारा प्रतिबंधित होने के लिए दुर्घटना के छह महीने बाद दायर दावा याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि अधिनियम की धारा 166 में संशोधन जिसमें उप-धारा (3) को शामिल करना शामिल है, 1 अप्रैल, 2022 से ही प्रभावी होना था।जस्टिस बुदी हाबुंग की एकल जज पीठ ने कहा,“उपर्युक्त मामलों में स्थापित कानूनी...
मध्यस्थता कार्यवाही में न्यायालय द्वारा पारित आदेश में गलती को CPC की धारा 152, 153 के तहत ठीक किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस चंद्र धारी सिंह की दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने माना कि मध्यस्थता कार्यवाही में न्यायालय द्वारा पारित आदेश में किसी भी त्रुटि को सीपीसी की धारा 152 और 153 के तहत ठीक किया जा सकता है, बशर्ते कि दूसरे पक्ष को कोई नुकसान न हो।पूरा मामलाआवेदक ने मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रतिवादी के साथ विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग करते हुए आवेदन दायर किया। विवाद की शुरुआत 20 अक्टूबर, 2016 को किए गए एक कार्य आदेश से हुई, जिसके तहत प्रतिवादी प्रदान की गई सेवाओं के लिए देय राशि का...
एक्टर अल्लू अर्जुन को भगदड़ मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते की अंतरिम जमानत दी
तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता अल्लू अर्जुन को चार सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दे दी, जिन्होंने पिछले हफ्ते हैदराबाद में एक सिनेमा हॉल के बाहर हुई भगदड़ के सिलसिले में प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी।करीब दो घंटे तक दलीलें सुनने के बाद जस्टिस जुव्वादी श्रीदेवी ने आदेश लिखवाते हुए कहा, 'मैं अर्नब गोस्वामी मामले के बाद सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने को इच्छुक हूं। गिरफ्तारी के बाद से जेल अधीक्षक को बांड दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान, पीठ ने मौखिक रूप से अंतरिम जमानत देने के लिए अपना...
जब मृत सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करता है, तो बाद में केवल पारिवारिक पेंशन मिलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत सरकारी कर्मचारी की पहली पत्नी द्वारा पारिवारिक पेंशन के लिए याचिका को इस आधार पर स्वीकार कर लिया है कि उनके बीच कोई वैध तलाक नहीं हुआ क्योंकि "सामाजिक तलाक" हमारी कानूनी प्रणाली द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं था। इस आलोक में, चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार दूसरी पत्नी के साथ विवाह वैध नहीं था, इसलिए उसे पारिवारिक पेंशन की हकदार होने के लिए मृत कर्मचारी की "विधवा" के रूप में नहीं देखा जा सकता था।"इस प्रकार, पहली शादी के विघटन के बिना किसी की दूसरी शादी को वैध...
दिल्ली हाईकोर्ट ने लाल किले पर दावा करने वाली महिला की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुल्ताना बेगम की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने लाल किले पर कब्जे की मांग की थी और दावा किया था कि वह खुद को अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर द्वितीय के प्रपौत्र की विधवा बताती है।कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने महिला द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया , जिसमें दिसंबर 2021 के सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। खंडपीठ ने कहा कि अपील ढाई साल से अधिक की देरी के बाद दायर की गई थी, जिसे...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में दिलजीत के कंसर्ट की अनुमति दी, 75 डेसिबल ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ को चंडीगढ़ में 14 दिसम् बर को कंसर्ट आयोजित करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि कार्यक्रम को ध्वनि सीमा का पालन करना चाहिए और 75 डेसिबल के अधिकतम ध्वनि स्तर के साथ परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना चाहिए अन्यथा आयोजकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती हैखंडपीठ ने कहा, ''कार्यक्रम के आयोजन के लिए सार्वजनिक स्थल की सीमा पर अधिकतम 75 डेसिबल ध्वनि के संबंध में वायु गुणवत्ता मानक के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित...
मद्रास हाईकोर्ट ने FERA केस में शशिकला के खिलाफ सुनवाई तेज की
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की करीबी सहयोगी शशिकला द्वारा दायर तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत, आर्थिक अपराध-1 द्वारा एगमोर में रखे गए कुछ सवालों को चुनौती दी गई थी।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एम जोतिरमन की खंडपीठ ने अदालत को निर्देश दिया कि यदि ऐसा होता है तो वह मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाए और पक्षों से मुकदमे में सहयोग करने और मुकदमे में देरी के लिए तुच्छ याचिकाएं दायर करने से परहेज करने को...
पति और ससुराल वालों को पत्नी ने गलत तरीके से फंसाया, दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद के मद्देनजर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार, दहेज के मामले में दर्ज FIR खारिज की
एक पति और उसके परिजनों के खिलाफ बलात्कार और दहेज के मामले में दर्ज FIR खारिज करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों को गलत तरीके से फंसाया गया। साथ ही कहा कि पत्नी के कहने पर प्राथमिकी दर्ज कराना बदला लेने की कोशिश' प्रतीत होता है।अदालत ने यह टिप्पणी इस बात पर गौर करने के बाद की कि याचिकाकर्ता पति द्वारा शिकायतकर्ता पत्नी और अन्य व्यक्ति के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग करते हुए एक लंबित दीवानी मुकदमा दायर किया गया। इस प्रकार, न्यायालय ने कहा...













![[MV Act] गुवाहाटी हाईकोर्ट ने MACT का आदेश खारिज किया, जिसमें धारा 166(3) के तहत प्रतिबंधित होने के दावे को खारिज कर दिया गया था, कहा- दुर्घटना धारा डाले जाने से पहले हुई थी [MV Act] गुवाहाटी हाईकोर्ट ने MACT का आदेश खारिज किया, जिसमें धारा 166(3) के तहत प्रतिबंधित होने के दावे को खारिज कर दिया गया था, कहा- दुर्घटना धारा डाले जाने से पहले हुई थी](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2024/09/21/500x300_562051-750x450401609-gauhati-high-court.jpg)






