हाईकोर्ट

संपत्ति के संवैधानिक अधिकार को राज्य के एमिनेंट डोमेन के संदर्भ में समझा जाना चाहिए: कलकत्ता हाईकोर्ट
'संपत्ति' के संवैधानिक अधिकार को राज्य के 'एमिनेंट डोमेन' के संदर्भ में समझा जाना चाहिए: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि व्यापक सार्वजनिक हित के लिए राज्य की ओर से प्रयुक्त राइट ऑफ एमिनेंट डोमेन संविधान के अनुच्छेद 300 ए के तहत निजी भूमि स्वामियों को प्राप्‍त संपत्ति के संवैधानिक अधिकार पर प्रभावी होगा। उल्लेखनीय है कि Right Of Eminent Domain के तहत सरकार को सार्वजनिक हित के लिए उच‌ित मुआवजा देकर निजी संपत्तियों को अधिग्रहित करने का अधिकार है। कोर्ट के समक्ष मौजूद मामल में जस्टिस अनिरुद्ध रॉय ने मेट्रो रेलवे निर्माण के लिए याचिकाकर्ता के परिसर को अधिग्रहित करने की अनुमति देते हुए कहा,...

राजस्थान हाईकोर्ट ने लगभग 7 वर्ष की देरी से दम्पति को इंटरकास्ट विवाह सहायता योजना के लिए आवेदन में गलतियां ठीक करने की अनुमति दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने लगभग 7 वर्ष की देरी से दम्पति को इंटरकास्ट विवाह सहायता योजना के लिए आवेदन में गलतियां ठीक करने की अनुमति दी

राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने एक इंटरकास्ट विवाहित दम्पति को राहत प्रदान की, जिसका डॉ. सविता बेन अंबेडकर इंटरकास्ट विवाह सहायता योजना के तहत दावा एक महीने की अवधि के भीतर आवेदन में गलतियों ठीक न करने के कारण खारिज कर दिया गया था।यह योजना राजस्थान सरकार द्वारा हिंदू और अनुसूचित जाति के लड़के-लड़कियों के बीच विवाह को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई। योजना के अनुसार 35 वर्ष की आयु तक के ऐसे इंटरकास्ट दम्पति 5 लाख रुपये पाने के हकदार थे। आधी राशि विवाह के रजिस्ट्रेशन के एक...

राजस्थान हाईकोर्ट ने बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अपनी बहू को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग करने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज की, 50 हजार का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अपनी बहू को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग करने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज की, 50 हजार का जुर्माना लगाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ससुर पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, क्योंकि उसने अपनी बहू के खिलाफ लंबित FIR के आधार पर उसे पटवारी के पद से हटाने की मांग करते हुए निराधार रिट याचिका दायर की, जिसमें उसने अपने बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने फैसला सुनाया कि कानून की यह स्थापित स्थिति है कि व्यक्तिगत रंजिश और अप्रत्यक्ष विचारों को निपटाने के लिए कानून की प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ता द्वारा ऐसा कृत्य कानून की प्रक्रिया का...

मुस्लिम कानून | अदालत का यह दायित्व कि आपसी सहमति और समझौते की स्वैच्छिकता का पता लगाने के बाद मुबारत द्वारा तलाक का समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मुस्लिम कानून | अदालत का यह दायित्व कि आपसी सहमति और समझौते की स्वैच्छिकता का पता लगाने के बाद मुबारत द्वारा तलाक का समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मुस्लिम जोड़े को तलाक का आदेश दिया, जिन्होंने मुबारत के माध्यम से आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन किया था। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने केरल हाईकोर्ट के असबी के.एन. बनाम हाशिम एम.यू. के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जहां मुबारत की पारस्परिक प्रकृति की प्रामाणिकता सत्यापित हो गई है, वहां न्यायालयों को आगे जांच नहीं करनी चाहिए और केवल तलाक को मंजूरी देनी चाहिए।कोर्ट ने कहा, “जब पक्षकार मुबारत के माध्यम से अपने तलाक की औपचारिक...

बिना मेडिकल एक्सपर्ट की राय के चोट की प्रकृति के बारे में सामान्य गवाह की मौखिक गवाही हत्या से मौत साबित करने के लिए अपर्याप्त: पटना हाईकोर्ट
बिना मेडिकल एक्सपर्ट की राय के चोट की प्रकृति के बारे में सामान्य गवाह की मौखिक गवाही हत्या से मौत साबित करने के लिए अपर्याप्त: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोप में तीन महिलाओं को बरी करने का फैसला बरकरार रखा, जबकि फैसला सुनाया कि मृतक को लगी चोट की प्रकृति के बारे में सामान्य गवाहों की मौखिक गवाही (मेडिकल एक्सपर्ट की पुष्टि के बिना) हत्या से मौत साबित करने के लिए अपर्याप्त है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने कहा,"कथित हमले के कारण हत्या से मौत साबित करने के लिए सामान्य गवाहों के मौखिक साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। केवल मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट गवाह ही चोट की प्रकृति और मृतक की मौत ऐसी...

बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में वृद्धि गंभीर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका शुरू की, केंद्र/राज्य से POCSO Act के क्रियान्वयन पर सवाल पूछे
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में वृद्धि गंभीर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका शुरू की, केंद्र/राज्य से POCSO Act के क्रियान्वयन पर सवाल पूछे

राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में पर्याप्त वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की जबलपुर पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से यह जानने के लिए स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका शुरू की कि POCSO Act के क्रियान्वयन पर क्या कदम उठाए गए।चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने राज्य में POCSO Act के तहत स्थापित विभिन्न विशेष न्यायालयों में लंबित बड़ी संख्या में मुकदमों और हाईकोर्ट की तीनों पीठों में कुल 14531 आपराधिक अपीलों पर अपनी चिंता व्यक्त...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिफिन बॉक्स में मांसाहारी भोजन लाने के आरोप में प्राइवेट स्कूल से निकाले गए 7 वर्षीय लड़के की मदद की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिफिन बॉक्स में मांसाहारी भोजन लाने के आरोप में प्राइवेट स्कूल से निकाले गए 7 वर्षीय लड़के की मदद की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में प्राइवेट स्कूल से निकाले गए 7 वर्षीय मुस्लिम लड़के की मदद की क्योंकि उसने कथित तौर पर अपने टिफिन बॉक्स में मांसाहारी भोजन लाया था।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने अमरोहा के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि तीनों बच्चों (लड़के और उसके भाई-बहन) को 2 सप्ताह के भीतर किसी अन्य CBSE -संबद्ध स्कूल में दाखिला दिलाया जाए और हलफनामा दाखिल किया जाए। ऐसा न करने पर DM को अगली सुनवाई (6 जनवरी) को उपस्थित...

पंजाब में NHAI की राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए
पंजाब में NHAI की 'राष्ट्रीय महत्व' की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य के अधिकारी भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा नहीं दे रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पुलिस सहायता भी उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं।याचिका में कहा गया कि राज्य के अधिकारियों की ओर से अपने कर्तव्यों का पालन न करने के कारण NHAI राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में असमर्थ है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा,“NHAI राज्य में पायलट परियोजनाओं के निर्माण में लगा हुआ है।...

वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध उन सत्तावादी सरकारों की प्रथाओं को वैध बना सकते हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व नहीं देतीं: X ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध उन सत्तावादी सरकारों की प्रथाओं को वैध बना सकते हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व नहीं देतीं: 'X' ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया

X कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाने के आदेश खतरनाक मिसाल स्थापित करते हैं, जो सत्तावादी सरकारों की प्रथाओं को वैध बना सकते हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुँच के अधिकारों को पूरी तरह महत्व नहीं देतीं।सोशल मीडिया इकाई ने कहा है कि यदि विभिन्न देशों की अदालतें अपने स्थानीय कानूनों के आधार पर वैश्विक अवरोधन आदेश जारी कर सकती हैं तो इसका परिणाम ऐसी स्थिति में होगा कि सबसे अधिक प्रतिबंधात्मक कानूनों वाला देश यह तय करेगा कि...

कथित घटना से इनकार करने वाले गवाहों के बयान के आधार पर बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO केस रद्द नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कथित घटना से इनकार करने वाले गवाहों के बयान के आधार पर बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO केस रद्द नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रथम दृष्टया अपना मत व्यक्त किया कि धारा 161 (IO के समक्ष) के तहत दर्ज गवाहों के बयानों के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ दर्ज POCSO केस रद्द करना संभव नहीं है, जिन्होंने कथित घटना के बारे में पीड़िता के विपरीत राय दी।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,"धारा 161 और धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयानों के आधार पर कार्यवाही रद्द करने का मेरा प्रथम दृष्टया मत है। मुझे एक भी ऐसा निर्णय दिखाइए, जिसमें धारा 161 और धारा 164 के तहत दिए गए बयानों पर भरोसा...

वन विभाग के पास DPTA के तहत अनुपालन के लिए SOP होने तक पेड़ों की छंटाई नहीं की जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट
वन विभाग के पास DPTA के तहत अनुपालन के लिए SOP होने तक पेड़ों की छंटाई नहीं की जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी उप वन संरक्षकों (DCF) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जब तक वन एवं वन्यजीव विभाग के पास यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश या एसओपी नहीं हो जाते कि पेड़ों की छंटाई दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जाए और उसकी निगरानी की जाए, तब तक पेड़ों की छंटाई नहीं की जाएगी।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि यदि छंटाई की जानी है तो वन विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इसकी निगरानी के लिए एक योग्य और जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद हो।अदालत अवमानना ​​याचिका पर विचार कर रही...

क्या वादी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अपना मामला स्वयं प्रस्तुत करने का अप्रतिबंधित अधिकार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
क्या वादी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अपना मामला स्वयं प्रस्तुत करने का अप्रतिबंधित अधिकार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का कोई अप्रतिबंधित अधिकार नहीं है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,“किसी वादी को न्यायालय/प्राधिकरण आदि के समक्ष स्वयं उपस्थित होने का कोई अधिकार या अप्रतिबंधित अधिकार नहीं है। ऐसे वादी को स्वयं उपस्थित होने की अनुमति देना या न देना न्यायालय/प्राधिकरण आदि के विवेक पर निर्भर करता है।"न्यायालय ने एडवोकेट एक्ट 1961 की धारा 32 का उल्लेख किया, जो किसी पक्षकार को स्वयं उपस्थित होने का अधिकार देता है और व्याख्या की कि...

दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के गैर-सरकारी सदस्यों के पदों को भरने के लिए शीघ्र कदम उठाएं: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश
दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के गैर-सरकारी सदस्यों के पदों को भरने के लिए शीघ्र कदम उठाएं: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के गैर-सरकारी सदस्यों के पदों को भरने के लिए शीघ्र कदम उठाए।एक्टिंग चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि प्राधिकरण जब भी गठित होगा मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 73 और 74 के अनुसार जिला मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्डों के गठन के लिए शीघ्र कदम उठाएगा।अदालत ने कहा कि हम आगे निर्देश देते हैं कि दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और समीक्षा बोर्डों के गठन की...

कमलेश तिवारी हत्याकांड |  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2019 से जेल में बंद कथित साजिशकर्ता को जमानत दी
कमलेश तिवारी हत्याकांड | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2019 से जेल में बंद कथित साजिशकर्ता को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अक्टूबर 2019 से जेल में बंद व्यक्ति को जमानत दी, जिसने कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर 2019 में हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रची थी।आरोपी पठान राशिद अहमद को जमानत देते हुए जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने कहा कि उसका इस मामले के अलावा कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसने हमेशा जांच में सहयोग किया और मुकदमे की कार्यवाही में शामिल होने का वचन दिया। अदालत ने यह भी कहा कि उसके गवाहों को प्रभावित करने सबूतों से छेड़छाड़ करने...

कर्मचारी आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है, भले ही अस्पताल किसी भी योजना के तहत सूचीबद्ध न हो, दिल्ली हाईकोर्ट
'कर्मचारी आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है, भले ही अस्पताल किसी भी योजना के तहत सूचीबद्ध न हो', दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा करने का अधिकार है, भले ही वह अस्पताल सीजीएचएस के अंतर्गत सूचीबद्ध न हो, यदि उसे आपातकालीन स्थिति में ऐसे अस्पताल में भर्ती कराया गया हो। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह गंभीर रूप से घायल थी और योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों से संपर्क नहीं कर सकती थी। न्यायालय ने माना कि मौजूदा मामले में जिस मुद्दे पर निर्णय लेने की आवश्यकता थी, वह यह था कि...

सुरक्षित साइबरस्पेस बनाने में सरकारों और सोशल मीडिया मध्यस्थों के सहयोग के लिए सहयोग पोर्टल विकसित किया गया: गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
सुरक्षित साइबरस्पेस बनाने में सरकारों और सोशल मीडिया मध्यस्थों के सहयोग के लिए 'सहयोग' पोर्टल विकसित किया गया: गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया है कि उसने "सहयोग" नामक एक पोर्टल विकसित किया है, जहां केंद्र सरकार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की अधिकृत एजेंसियां और साथ ही सोशल मीडिया मध्यस्थ एक सुरक्षित साइबरस्पेस बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। गृह मंत्रालय द्वारा दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि पोर्टल के पहले चरण में, गैरकानूनी सामग्री को हटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है और दूसरे चरण में वैध डेटा अनुरोध और अन्य समान प्रस्तुतियां शामिल करने के लिए पोर्टल की...

S.187 BNSS | 10 वर्ष तक के कारावास के दंडनीय अपराधों के लिए पुलिस हिरासत पहले चालीस दिनों के भीतर होनी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
S.187 BNSS | 10 वर्ष तक के कारावास के दंडनीय अपराधों के लिए पुलिस हिरासत पहले चालीस दिनों के भीतर होनी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187 के अनुसार, दस वर्ष तक के कारावास के दंडनीय अपराधों के मामलों में 15 दिन की पुलिस हिरासत पहले चालीस दिनों के भीतर मांगी जानी चाहिए।इसने स्पष्ट किया कि धारा 187 BNSS में प्रयुक्त शब्दावली "दस वर्ष या उससे अधिक" के लिए दंडनीय अपराध है, यह स्पष्ट करते हुए कि 10 वर्ष या उससे अधिक का अर्थ होगा कि दण्ड की सीमा 10 वर्ष है, न कि 10 वर्ष तक की सजा। न्यायालय ने कहा कि यदि दण्ड की अवधि 1-10 वर्ष के बीच है तो धारा 187(3) BNSS के...

मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 (1) (2) के तहत देरी की माफी की याचिका का निर्धारण करते समय दिनों की संख्या से अधिक कारणों की पर्याप्तता पर विचार किया जाता है: दिल्ली हाईकोर्ट
मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 (1) (2) के तहत देरी की माफी की याचिका का निर्धारण करते समय दिनों की संख्या से अधिक कारणों की पर्याप्तता पर विचार किया जाता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस सौरभ बनर्जी की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता वर्तमान अपील दायर करने में हुई देरी के लिए कोई भी व्यावहारिक कारण प्रदर्शित करने में विफल रहा। इसके अलावा, ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी जो अपीलकर्ता को निर्धारित वैधानिक अवधि के दौरान वर्तमान अपील दायर करने से रोकती थी। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल विलंब के दिनों की संख्या नहीं है, जो विलंब के लिए क्षमा मांगने वाले आवेदन पर विचार करने के लिए सामग्री होगी, बल्कि यह विलंब के कारणों की...

PMLA Case| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के करीबी व्यक्ति के नाम पर लोगों को ठगने के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार
PMLA Case| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के करीबी व्यक्ति के नाम पर लोगों को ठगने के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मंत्रियों के साथ छेड़छाड़ की गई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर दिखाकर लोगों को ठगने के आरोप में धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपी मोहम्मद काशिफ को जमानत देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि भारी मात्रा में धन और अन्य संबंधित दस्तावेज और लेख कथित रूप से बरामद होने से उनके कारनामों की पुष्टि होती है और पीएमएलए, 2002 की धारा 45 की दोहरी शर्तों को दूर करने के लिए कुछ...