कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश
Amir Ahmad
5 Feb 2026 4:26 PM IST

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट, इंदौर ने कथित जबरन धर्मांतरण के मामले में आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत दी। अनवर कादरी अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। उन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत अपराध दर्ज हैं।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ सीमित सामग्री ही सामने आती है, जबकि सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
आवेदक की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में अनवर कादरी का नाम नहीं लिया है और कथित अपराध से उन्हें जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है।
यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से सह-आरोपी साहिल के बयान पर आधारित हैं। साथ ही यह तर्क रखा गया कि मुकदमे की सुनवाई लंबी चलने की संभावना है और ऐसे में निरंतर हिरासत न्यायोचित नहीं है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी के आपराधिक पूर्ववृत्त हैं। उसके खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि उस समय प्रकरण की केस डायरी उपलब्ध नहीं हो सकी।
हाइकोर्ट ने यह तथ्य महत्वपूर्ण माना कि सह-आरोपी साहिल को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अनवर कादरी के खिलाफ प्रथम दृष्टया ठोस साक्ष्य सीमित हैं। हिरासत की अवधि और आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत देने को उचित माना।
हाइकोर्ट ने अनवर कादरी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक सक्षम जमानती पर रिहा करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437(3) के तहत निर्धारित शर्तों का पालन करने का आदेश दिया गया।
आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए अदालत ने अतिरिक्त शर्त लगाते हुए कहा कि वह मुकदमे के निपटारे तक प्रत्येक रविवार दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच संबंधित पुलिस थाने में उपस्थित होकर अपनी हाजिरी देगा।
हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत की किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में ट्रायल कोर्ट जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगा।

