हाईकोर्ट

पीड़िता के डर का फायदा आरोपी को मिल सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की FIR रद्द करने से किया इनकार
पीड़िता के डर का फायदा आरोपी को मिल सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की FIR रद्द करने से किया इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने दो FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया- एक फरवरी 2024 में दर्ज और दूसरी मार्च 2024 में - शादी के झूठे वादे के तहत दो महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई।अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में आरोपी द्वारा स्थिति का फायदा उठाने या यौन उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर महिलाओं में पैदा होने वाले डर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दोनों FIR में सामान्य अपराध आईपीसी की धारा 376 (2) (n) (एक ही महिला पर बार-बार बलात्कार करना) था, और...

ऋणी अदालत में डिक्री राशि जमा करता है तो डिक्री धारक को डिक्री के बाद ब्याज का अधिकार
ऋणी अदालत में डिक्री राशि जमा करता है तो डिक्री धारक को डिक्री के बाद ब्याज का अधिकार

क्या डिक्री धारक को डिक्री के बाद ब्याज का अधिकार है जब ऋणी न्यायालय में पूरी डिक्री राशि जमा करता है, और यदि डिक्री धारक को इसे वापस लेने की अनुमति नहीं है तो ऐसी जमा राशि का क्या प्रभाव होगा? अक्सर यह देखा जाता है कि धन डिक्री में ऋणी निष्पादन न्यायालय या अपीलीय न्यायालय के समक्ष उस पर स्थगन प्राप्त करने के लिए डिक्री/अवार्ड राशि न्यायालय में जमा करता है। ऐसी जमा राशि स्वैच्छिक हो सकती है या अपील स्वीकार करने और/या डिक्री/अवार्ड पर स्थगन की शर्त पर न्यायालय के आदेश के तहत हो सकती है।धन...

भारत में दिव्यांगता, मेंटल हेल्थ और जेंडर आइडेंटिटी कानून: परिवर्तन का एक दशक
भारत में दिव्यांगता, मेंटल हेल्थ और जेंडर आइडेंटिटी कानून: परिवर्तन का एक दशक

पिछले दशक में, भारत ने दिव्यांगता अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य और लिंग पहचान से संबंधित अपने कानूनी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। यह बदलाव सामाजिक दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है - जो समावेश, सम्मान और स्वायत्तता की ओर बढ़ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के पुराने प्रावधानों से लेकर अधिक प्रगतिशील मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 तक और कल्याण-आधारित दिव्यांगता कानूनों से दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत अधिकार-आधारित ढांचे तक, भारतीय कानून ने हाशिए...

सेलेबी ने अडानी के अहमदाबाद एयरपोर्ट को उसकी सेवाएं बदलने पर अंतिम फैसला लेने से रोकने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया
सेलेबी ने अडानी के अहमदाबाद एयरपोर्ट को उसकी सेवाएं बदलने पर अंतिम फैसला लेने से रोकने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया

गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (5 जून) को सेलेबी ग्राउंड हैंडलिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया, जिसमें वाणिज्यिक न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अदानी समूह द्वारा संचालित अहमदाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं के लिए समझौते को समाप्त करने पर उसकी अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया गया था। जस्टिस देवन एम देसाई की अवकाश पीठ ने मामले की कुछ देर तक सुनवाई करने के बाद अपने आदेश में कहा, "प्रतिवादी को 10 जून तक जवाब देने के लिए नोटिस जारी...

आपत्तिजनक वीडियो मामले में लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को मिली अंतरिम जमानत
आपत्तिजनक वीडियो मामले में लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को मिली अंतरिम जमानत

कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार (6 जून) को लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम राहत देते हुए अंतरिम जमानत दी।पनोली को आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें मुसलमानों को लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में कथित रूप से आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने पनोली को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकते हैं।शर्मिष्ठा पनोली लॉ स्टूडेंट हैं। उन...

सरकार द्वारा बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहने पर दिव्यांग कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
सरकार द्वारा बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहने पर दिव्यांग कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के अनुसार यह सरकार का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि सार्वजनिक स्थान दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ हों और ऐसा करने में किसी भी तरह की विफलता दिव्यांग सरकारी कर्मचारी के लिए हानिकारक नहीं होनी चाहिए।जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने टी. राजीव द्वारा दायर मामले में यह टिप्पणी की, जो पोलियो के बाद अवशिष्ट पक्षाघात के कारण 60% लोकोमोटर दिव्यांगता से पीड़ित हैं।वे मोटर वाहन विभाग में सीनियर ग्रेड...

बिना आरोप पत्र के पासपोर्ट जब्त करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, केवल FIR दर्ज करना लंबित कार्यवाही नहीं: J&K हाईकोर्ट
बिना आरोप पत्र के पासपोर्ट जब्त करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, केवल FIR दर्ज करना 'लंबित कार्यवाही' नहीं: J&K हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने संवैधानिक अधिकारों की पवित्रता की पुष्टि करते हुए, फैसला सुनाया कि केवल आपराधिक मामला दर्ज करना पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3) के खंड (ई) के तहत निर्धारित कार्यवाही नहीं है।जस्टिस सिंधु शर्मा ने कहा कि आपराधिक न्यायालय के समक्ष कार्यवाही को लंबित मानने के लिए, केवल एफआईआर नहीं बल्कि आरोप पत्र दायर किया जाना चाहिए।ये टिप्पणियां सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सज्जाद अहमद खान द्वारा दायर एक रिट याचिका में आईं, जिसमें विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निरोधक (सीबीआई...

Child Custody | माता-पिता द्वारा नाबालिग को जबरन नए स्थान पर ले जाना, उन्हें संरक्षकता प्रदान करने के लिए सामान्य निवासी नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
Child Custody | माता-पिता द्वारा नाबालिग को जबरन नए स्थान पर ले जाना, उन्हें संरक्षकता प्रदान करने के लिए 'सामान्य निवासी' नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जब किसी नाबालिग बच्चे को उसके माता या पिता में से कोई एक जबरन शिफ्ट करता है, जबकि वे उस बच्‍चे की कस्टडी के लिए एक दूसरे से संघर्षरत हैं, तो ऐसी शिफ्टिंग ऐसे अभिभावक को संरक्षकता प्रदान करने के लिए क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र प्रदान नहीं करेगा। संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम (Guardians & Wards Act) की धारा 9 में निर्धारित किया गया है कि जिस स्थान पर नाबालिग 'सामान्य रूप से रहता है', वहां अधिकार क्षेत्र रखने वाले जिला न्यायालय को नाबालिग की संरक्षकता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ की मस्‍जिद के पास जबरन हनुमान चालीसा पढ़ने के आरोपी दो युवकों का जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ की मस्‍जिद के पास जबरन 'हनुमान चालीसा' पढ़ने के आरोपी दो युवकों का जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के एक नेता सहित दो लोगों को जमानत दे दी, जिन्हें इस साल मार्च में यूपी के मेरठ में एक मस्जिद के पास जबरन 'हनुमान चालीसा' पढ़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। जस्टिस राजबीर सिंह की पीठ ने सचिन सिरोही और संजय समरवाल को जमानत दे दी, जिन पर मेरठ पुलिस ने धारा 191(2) [दंगा], 196 [विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करना], 197 [राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे] बीएनएस के...

पूर्व सैनिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णयों का अनुपालन नहीं कर रहा केंद्र, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने की आलोचना
पूर्व सैनिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णयों का अनुपालन नहीं कर रहा केंद्र, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने की आलोचना

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भूतपूर्व सैनिकों के अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैये के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। न्यायालय ने कहा कि सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अनुपालन न करने के कारण सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) पर मुकदमेबाजी का बोझ बढ़ रहा है।ज‌स्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस एचएस ग्रेवाल ने कहा, "हम प्रतिदिन भूतपूर्व सैनिकों को अपने अधिकारों के लिए एएफटी के पास जाते हुए देख रहे हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णयों द्वारा पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं। सुप्रीम...

केरल हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर माता-पिता को पिता या माता के बजाय माता-पिता के रूप में दर्शाने की अनुमति दी
केरल हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर माता-पिता को पिता या माता के बजाय 'माता-पिता' के रूप में दर्शाने की अनुमति दी

केरल हाईकोर्ट ने देश के पहले ट्रांसजेंडर माता-पिता जाहद और जिया द्वारा अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में पिता और माता से माता-पिता के रूप में उनका विवरण बदलने के लिए दायर याचिका को अनुमति देते हुए कहा कि कानून को समाज में होने वाले परिवर्तनों के साथ विकसित होना चाहिए।कोर्ट ने कहा,“कानून स्थिर नहीं रह सकता है, लेकिन इसे समाज में होने वाले परिवर्तनों और समाज के सदस्यों की जीवन शैली के अनुसार विकसित होना चाहिए।”जाहद नामक ट्रांसमैन ने बच्चे को जन्म दिया था। जन्म प्रमाण पत्र में पिता का नाम जिया...

लगभग 2 साल बीत गए, एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने NDPS आरोपी को जमानत दी, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया
लगभग 2 साल बीत गए, एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने NDPS आरोपी को जमानत दी, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 जून) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत एक आरोपी को जमानत दी। निर्णय में मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने में अनुचित देरी का हवाला दिया गया।जस्टिस राकेश कैंथला की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता एक साल और नौ महीने से हिरासत में है। यह भी देखा गया कि इस अवधि के दौरान अभियोजन पक्ष एक भी गवाह की जांच करने में विफल रहा। इस प्रकार, अदालत ने इस तरह की देरी को याचिकाकर्ता के त्वरित सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना।अदालत ने कहा,"याचिकाकर्ता...

गुजरात हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी के आरोपी को व्यापार के अवसर तलाशने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी
गुजरात हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी के आरोपी को 'व्यापार के अवसर तलाशने' के लिए विदेश जाने की अनुमति दी

गुजरात हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी आईटी फर्म साई इंफोसिस्टम (इंडिया) लिमिटेड के निदेशक सुनील कक्कड़ को भारत में बैक-एंड आईटी सपोर्ट और एंटरप्राइजेज रिसोर्स प्लानिंग सॉफ्टवेयर आवश्यकताओं को आउटसोर्स करने के लिए कंपनियों के साथ व्यापार के अवसर तलाशने के लिए यूएई जाने की अनुमति दी।कक्कड़ को कथित तौर पर 2014 में लाइबेरिया में गिरफ्तार किया गया और उन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है, जिसकी जांच CBI कर रही है। इसी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में 20 वर्ष बाद आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए किया बरी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में 20 वर्ष बाद आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के मामले में विसंगतियां पाए जाने पर बलात्कार के मामले में 20 वर्ष बाद दो व्यक्तियों को दोषसिद्धि के बाद संदेह का लाभ देते हुए बरी किया।जस्टिस कीर्ति सिंह ने कहा,"यह सामान्य कानून है कि अभियोजन पक्ष के मामले को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। उसे अपने मामले को उचित संदेह की छाया से परे साबित करना चाहिए। ऊपर उल्लिखित भौतिक विरोधाभासों को देखते हुए अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी दलदल पर टिकी हुई है, क्योंकि अभियोजन पक्ष अपने मामले को उचित संदेह की छाया से परे...

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही समलैंगिक विवाह को वैध न बनाया हो, लेकिन ऐसे जोड़े परिवार बना सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही समलैंगिक विवाह को वैध न बनाया हो, लेकिन ऐसे जोड़े परिवार बना सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'परिवार' की अवधारणा को व्यापक रूप से समझना होगा और विवाह परिवार शुरू करने का एकमात्र तरीका नहीं है।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने कहा कि भले ही सुप्रियो @ सुप्रिया चक्रवर्ती बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने समलैंगिक विवाह को वैध न बनाया हो, लेकिन ऐसे जोड़े परिवार बना सकते हैं।कोर्ट ने कहा,'परिवार' शब्द को व्यापक अर्थ में समझना होगा। सुप्रियो @ सुप्रिया चक्रवर्ती बनाम भारत संघ (2023 आईएनएससी 920) ने भले ही समलैंगिक...

P&H हाईकोर्ट ने कथित चिकित्सा पर्यटन धोखाधड़ी मामले में जांच CBI को ट्रांसफर करने से इनकार किया
P&H हाईकोर्ट ने कथित चिकित्सा पर्यटन धोखाधड़ी मामले में जांच CBI को ट्रांसफर करने से इनकार किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मेडिकल टूरिज्म धोखाधड़ी मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने से इनकार कर दिया है। आरोपों के अनुसार, केन्या निवासी को याचिकाकर्ता और उसके दंत चिकित्सक पति ने धोखा दिया, जिन्होंने उसे मेडिकल टूरिज्म पैकेज की पेशकश की थी। आरोप लगाया गया कि महिला का उचित उपचार नहीं किया गया और उसे काफी वित्तीय नुकसान हुआ।जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा, "इस असाधारण शक्ति का प्रयोग संयम से, सावधानी से और असाधारण परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, जहां जांच में विश्वसनीयता...

राजस्थान हाईकोर्ट ने जूनियर प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए शिल्प प्रशिक्षक प्रमाण पत्र रखने की अनिवार्यता को बरकरार रखा
राजस्थान हाईकोर्ट ने जूनियर प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए 'शिल्प प्रशिक्षक प्रमाण पत्र' रखने की अनिवार्यता को बरकरार रखा

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान तकनीकी प्रशिक्षण अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें जूनियर प्रशिक्षकों के पद के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय शिल्प प्रशिक्षक प्रमाण पत्र (एनसीआईसी)/शिल्प प्रशिक्षक प्रशिक्षण योजना (सीआईटीएस) प्रमाण पत्र रखने को अनिवार्य बनाया गया था। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि नियमों में संशोधन के लिए राज्य द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, एनसीआईसी/सीआईटीएस प्रमाण पत्र रखने की...

2004 हरियाणा सिविल सेवा घोटाला: कथित रूप से दागी उम्मीदवार की नियुक्ति के लिए याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विभाजित फैसला सुनाया
2004 हरियाणा सिविल सेवा घोटाला: कथित रूप से दागी उम्मीदवार की नियुक्ति के लिए याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विभाजित फैसला सुनाया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 2004 की हरियाणा सिविल सेवा भर्ती में कथित दागी उम्मीदवार की नियुक्ति पर विभाजित फैसला सुनाया। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अंतर-न्यायालय अपील को स्वीकार कर लिया और उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश दिया, जबकि जस्टिस मीनाक्षी आई मेहता ने याचिका खारिज कर दी। तथ्यलेटर पेटेंट अपील सुरेन्द्र लाठर ने दायर की थी, जो हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 2004 की हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) में चयनित हुए थे। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों और सर्वोच्च...

पर्सनल लोन या EMI स्वैच्छिक वित्तीय दायित्व, पत्नी के भरण-पोषण के लिए पति के दायित्व को प्रभावित नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
पर्सनल लोन या EMI स्वैच्छिक वित्तीय दायित्व, पत्नी के भरण-पोषण के लिए पति के दायित्व को प्रभावित नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पर्सनल लोन या EMI स्वैच्छिक दायित्व हैं, जो कमाने वाले पति या पत्नी के दूसरे पति या बच्चे के भरण-पोषण के दायित्व को प्रभावित नहीं कर सकते।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेणु भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि मकान का किराया, बिजली शुल्क, पर्सनल लोन का पुनर्भुगतान, जीवन बीमा के लिए प्रीमियम या स्वैच्छिक उधार के लिए EMI जैसी कटौती भरण-पोषण के उद्देश्य से वैध कटौती के रूप में योग्य नहीं हैं।न्यायालय ने कहा,"ये कमाने वाले पति या पत्नी द्वारा लिए गए स्वैच्छिक वित्तीय दायित्व माने जाते...