हाईकोर्ट

आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाना स्वीकार्य नहीं, यह मानवाधिकारों का उल्लंघन: कलकत्ता हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाना स्वीकार्य नहीं, यह मानवाधिकारों का उल्लंघन: कलकत्ता हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि किसी आरोपी को पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से घुमाना "स्वीकार्य नहीं है" और यह "मानवाधिकारों का उल्लंघन" है।अदालत यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस नेता सौकत मोल्ला की याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें उन्होंने जांच के दौरान कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने को चुनौती दी। सुनवाई के दौरान सौकत मोल्ला की ओर से सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने की एक चिंताजनक परंपरा...

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने X की कार्यशैली पर जताई सख्त नाराज़गी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने X की कार्यशैली पर जताई सख्त नाराज़गी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून का दायरा इतना व्यापक है कि वह किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकता है और दोषियों को न्याय के कटघरे में ला सकता है।यह टिप्पणी जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की खंडपीठ ने एक साइबर अपराध मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,"सोशल मीडिया मंच...

अभिषेक शर्मा ने पर्सनैलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
अभिषेक शर्मा ने पर्सनैलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष हुई।सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वह एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें।इस हलफनामे में उन आपत्तिजनक सामग्रियों के स्क्रीनशॉट रिकॉर्ड पर लाए जाएं, जो वादपत्र में दी गई तालिकाओं से मेल अकाउंट हों। सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष आठ इंटरनेट कड़ियों का उल्लेख किया। इनसे संबंधित...

कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा: दुष्यंत दवे; सिब्बल को सेकंड जजेज़ केस में पेश होने का अफ़सोस
कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा: दुष्यंत दवे; सिब्बल को 'सेकंड जजेज़ केस' में पेश होने का अफ़सोस

'दिल से विद कपिल सिब्बल' शो के एक इंटरव्यू में वकालत छोड़ देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने हाल ही में कहा कि जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा है।दवे का मानना ​​है कि पिछले कुछ सालों में जज "नागरिक-विरोधी" हो गए हैं और संविधान के मूल स्वरूप से उनका संपर्क टूट गया। उनके अनुसार, हाल के जजों ने अपने फैसलों में संविधान सभा की बहसों की सही समझ नहीं दिखाई और इसका एक कारण नियुक्ति की प्रक्रिया है।दवे ने कहा,"इसमें कोई शक नहीं कि इसका संबंध जजों की...

शादी के बहाने रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी: राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी म्यांमार के नागरिकों की ज़मानत याचिका खारिज की
शादी के बहाने रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी: राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी 'म्यांमार के नागरिकों' की ज़मानत याचिका खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने म्यांमार के रहने वाले और शादी का झांसा देकर रोहिंग्या मूल की लड़कियों को गैर-कानूनी तरीके से भारत लाने और फिर उन्हें बेच देने के आरोपी तीन लोगों की ज़मानत याचिका खारिज की।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की डिवीज़न बेंच ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों, सुरक्षित गवाहों के बयानों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ज़मानत याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।कोर्ट स्पेशल जज (NIA मामले) के उस आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रहा था,...

क्या फ़रार आरोपी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट न दाखिल होने पर डिफ़ॉल्ट ज़मानत का दावा कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जवाब
क्या फ़रार आरोपी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट न दाखिल होने पर डिफ़ॉल्ट ज़मानत का दावा कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी के फ़रार रहने के दौरान उसके ख़िलाफ़ चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है तो उसकी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने की कोई ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 252]जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा,"सिर्फ़ इसलिए कि जांच एजेंसी ने आगे की जांच के लिए समय मांगा या याचिकाकर्ता की गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल नहीं की, यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि जांच अधूरी रह गई और...

अगर शिकायतकर्ता की उम्र साबित नहीं होती है तो सिर्फ़ POCSO के तहत सज़ा के लिए पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अगर शिकायतकर्ता की उम्र साबित नहीं होती है तो सिर्फ़ POCSO के तहत सज़ा के लिए पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट के आधार पर POCSO Act के तहत सज़ा का आदेश सही नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब शिकायतकर्ता/पीड़िता की उम्र साबित न हुई हो। [2026 LiveLaw (MP) 251]जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र सिंह की डिवीज़न बेंच ने देखा कि पीड़िता के पिता ने कहा था कि उनकी शादी घटना की तारीख से उन्नीस साल पहले हुई और शादी के एक साल बाद उनकी पहली संतान, यानी पीड़िता का जन्म हुआ। हालांकि, माँ ने कहा कि उनकी शादी घटना की तारीख से बीस साल पहले हुई थी और उसके दो साल...

सज़ा के 25 साल बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार के दोषी को माना नाबालिग, सज़ा में बदलाव किया
सज़ा के 25 साल बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार के दोषी को माना 'नाबालिग', सज़ा में बदलाव किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि 2001 में अपहरण और रेप के लिए दोषी ठहराया गया एक व्यक्ति, 1999 में अपराध के समय नाबालिग था। कोर्ट ने उसकी सज़ा को बदलकर उतनी ही कर दिया जितनी सज़ा वह पहले ही जेल में काट चुका था। [2026 LiveLaw (PH) 220]जस्टिस सुभाष मेहला ने कहा कि उन्हें "यमुना नगर के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं दिखता। यह रिपोर्ट उस समय के स्कूल रिकॉर्ड पर आधारित है और इसे गलत साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत पेश नहीं किया गया।...

पंचायत सचिव को तुम-ताम या मेरे-तेरे कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने BDO के खिलाफ FIR रद्द की
पंचायत सचिव को 'तुम-ताम' या 'मेरे-तेरे' कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने BDO के खिलाफ FIR रद्द की

झारखंड हाईकोर्ट ने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उन पर एक पंचायत सचिव को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि मृतक को सिर्फ़ "तुम-ताम" या "मेरे-तेरे" कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं है। कोर्ट ने माना कि अगर FIR में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए तो भी वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच उस याचिका पर सुनवाई...

1977 में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे लेखपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 49 साल बाद भी रखी सज़ा बरकरार
1977 में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे लेखपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 49 साल बाद भी रखी सज़ा बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 41 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज की और कंसोलिडेशन लेखपाल की 1985 की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें लगभग आधी सदी पहले ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने उन्हें सुनाई गई 1 साल की कठोर कारावास की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें अपनी बाकी सज़ा काटने के लिए 4 हफ़्तों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।इस मामले में कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर ट्रैप की कार्रवाई की पुष्टि विजिलेंस अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों द्वारा...

राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या की जांच में पुलिस की जानबूझकर की गई चूक की ओर इशारा किया, नाबालिग आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या की जांच में पुलिस की 'जानबूझकर' की गई चूक की ओर इशारा किया, नाबालिग आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज की

पुलिस की जांच में 'जानबूझकर' चूक की आशंका जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के मामले में 13 साल के आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज करने का फैसला बरकरार रखा। [2026 LiveLaw (Raj) 268]जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा उस समय पोस्टमार्टम न कराने के लिखित इनकार के बावजूद, परिवार को शव सौंपते समय पंचनामा करना पुलिस का कर्तव्य था।कोर्ट ने कहा,"...हालांकि शिकायतकर्ता ने उस समय हाथ से लिखा पत्र देकर पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया, लेकिन अस्पताल में मौजूद पुलिस अधिकारी...

व्यभिचार अब अपराध नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंध के आरोप में कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी रद्द की
व्यभिचार अब अपराध नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंध के आरोप में कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी रद्द की

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड आर्म्ड पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी रद्द की। यह बर्खास्तगी विवाहेतर संबंध (Adultery) के आरोप में की गई। कोर्ट ने कहा कि 'जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद व्यभिचार अब कोई आपराधिक अपराध नहीं रह गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुशासनात्मक अधिकारी ने कॉन्स्टेबल को ऐसे आधार पर बर्खास्त किया था जो कभी चार्ज-शीट का हिस्सा ही नहीं था, जिससे यह आदेश गैर-कानूनी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला हो गया।जस्टिस दीपक रोशन की...

ट्रायल कोर्ट पति की आय साबित करने का पूरा बोझ पत्नी पर नहीं डाल सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुजारा-भत्ता मंज़ूर किया
ट्रायल कोर्ट पति की आय साबित करने का पूरा बोझ पत्नी पर नहीं डाल सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुजारा-भत्ता मंज़ूर किया

पत्नी को गुजारा-भत्ता देने और नाबालिग बच्चे के गुजारा-भत्ते की रकम बढ़ाने के साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पति की आय साबित करने का पूरा बोझ गलत तरीके से पत्नी पर डाल दिया था। [2026 LiveLaw (MP) 250]इस बात पर ज़ोर देते हुए कि CrPC की धारा 125 एक सामाजिक कल्याण की कार्यवाही है, जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने कहा कि पति से उसकी आय से जुड़ी सभी ज़रूरी बातें बताने के लिए कहा जाना चाहिए था।बेंच ने कहा:"ट्रायल कोर्ट के आदेश से पता चलता है कि पति की आय का स्रोत साबित करने का पूरा...

पति के दबाव में पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगना भी दहेज की मांग हो सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
पति के दबाव में पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगना भी दहेज की मांग हो सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी महिला को अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगने का कानूनी अधिकार है, लेकिन यदि वह मांग पति के लगातार दबाव, उत्पीड़न या मजबूरी में की गई हो, तो उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304बी के तहत दहेज की मांग माना जा सकता है।जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्व सिन्हा रे की खंडपीठ ने दहेज मृत्यु के मामले में पति की दोषसिद्धि बरकरार रखी, जबकि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में उसके माता-पिता को बरी कर दिया।अदालत ने पति की सजा को आजीवन कारावास से...

RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश
RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत दूसरी अपीलों का निस्तारण 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि RTI Act, 2005 में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई वैधानिक समयसीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए अदालत ऐसी समयसीमा तय नहीं कर सकती। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपीलों को वर्षों तक लंबित नहीं रख सकता। उसे लंबित मामलों का बोझ कम करने और नए मामलों के शीघ्र निस्तारण के...

लापरवाही और खामियों से भरी जांच का उदाहरण: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को बरी किया, जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश
लापरवाही और खामियों से भरी जांच का उदाहरण: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को बरी किया, जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश

पटना हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए पुलिस जांच पर कड़ी टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि यह मामला अनुचित, लापरवाहीपूर्ण और उदासीन जांच का एक क्लासिक उदाहरण है। साथ ही जांच में गंभीर चूक पाए जाने पर संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कराने का भी निर्देश दिया। जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ एडिशनल सेशन जज, मधेपुरा के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/34 तथा...

दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने या गलत जगह लग जाने से फैसला समीक्षा योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने या गलत जगह लग जाने से फैसला समीक्षा योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने, गलत स्थान पर लग जाने या अभिलेख के साथ संलग्न नहीं होने मात्र से अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि समीक्षा तभी संभव है, जब ऐसी चूक से रिकॉर्ड पर स्पष्ट दिखाई देने वाली कानूनी त्रुटि उत्पन्न हुई हो या उससे न्याय का गंभीर हनन हुआ हो। जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,"किसी दस्तावेज के संकलन में किसी पृष्ठ का छूट जाना, गलत स्थान पर लग जाना या संलग्न नहीं होना...

राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार
राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चंदा विवाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि इसी तरह की मांग वाली एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वकील मोहित अशोक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद, सोना और चांदी के चढ़ावे के कथित गबन की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध...

अज्ञात आय के स्रोत से मिली संपत्ति को स्वतः अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत
अज्ञात आय के स्रोत से मिली संपत्ति को स्वतः अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति की संपत्ति का स्रोत अज्ञात होने भर से यह नहीं माना जा सकता कि वह किसी अनुसूचित अपराध से अर्जित 'अपराध की आय' है।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट रूप से स्थापित करना होगा कि संबंधित संपत्ति किसी अनुसूचित अपराध से प्राप्त हुई।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने यह टिप्पणी यमुना बेसिन में अवैध खनन से जुड़े धन शोधन मामले में एक आरोपी को जमानत देते हुए की।अदालत ने कहा,"किसी व्यक्ति...