हाईकोर्ट

पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की सरकारी नौकरी से जुड़ी जानकारी RTI के तहत मांगने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस material नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जानकारी के खुलासे में सार्वजनिक हित इतना महत्वपूर्ण है कि वह पत्नी के निजता के अधिकार पर भारी पड़े।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी की सरकारी नियुक्ति में कथित हेरफेर के आरोप को प्रथम दृष्टया साबित...

एक वकील और परिवार को अलग-अलग मामलों में 23 लाख से ज्यादा की सहायता, SC/ST Act के लाभों के दुरुपयोग की यूपी में जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 (SC/ST Act ) और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत मिलने वाली राहत और आर्थिक सहायता के दावों तथा वितरण की व्यापक जांच के निर्देश दिए। अदालत ने खास तौर पर एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा बार-बार राहत का दावा किए जाने वाले मामलों की जांच और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने यह निर्देश उस समय दिया जब अदालत के सामने राज्य सरकार ने बताया कि पेशे से वकील संतोष कुमार दोहरे और...

मुआवजा याचिका पूरी सुनवाई के बाद सिर्फ क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पूरी सुनवाई कराने के बाद केवल क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न होने के आधार पर मुआवजा याचिका खारिज नहीं कर सकता, खासकर तब जब किसी भी प्रतिवादी ने यह साबित न किया हो कि मामले की सुनवाई उस स्थान पर होने से उसे कोई नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ।जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166(2) दुर्घटना पीड़ित को दावा दायर करने के लिए मंच चुनने का अधिकार देती है। याचिका उस क्षेत्र के अधिकरण में दायर की जा सकती है जहां दुर्घटना हुई,...

दो साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या में मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची से गंभीर यौन हमला और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने उसे कम से कम 25 वर्ष की वास्तविक उम्रकैद की सजा दी है, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है और किसी व्यक्ति का जीवन आसानी से नहीं छीना जाना चाहिए। अदालत ने आरोपी की उम्र, उसका कोई...

जाति साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज न होने भर से SC-ST को संवैधानिक लाभ से वंचित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) का सदस्य अपनी जातीय पहचान साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाया केवल इस आधार पर उसे संविधान के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके लिए राज्य को उसके दावे के विपरीत ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य पेश करना होगा।डॉ. जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की डिवीजन बेंच ने कहा कि केरल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सामुदायिक प्रमाणपत्र जारी करने के विनियमन अधिनियम 1996 के तहत जाति दावों की जांच...

बस बहुत हो गया: हाईकोर्ट ने दी अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, आगे FIR के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी करने पर होगा विचार

तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही आपराधिक शिकायतों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने सोमवार को कहा कि अब बहुत हो गया और संकेत दिया कि यदि उनके खिलाफ इसी तरह शिकायतें और FIR दर्ज होती रहीं तो भविष्य में नई FIR दर्ज करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है।जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह 4 मई से इस मामले को सुन रहे हैं और अब सुबेंदु अधिकारी के मामले में समकक्ष पीठ द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर आदेश पारित...

UGC इक्विटी नियमों के खिलाफ 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति पर दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल में अधिसूचित उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियमों के खिलाफ 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले नए आवेदन पर फैसला किया जाए।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को संशोधित तारीख के साथ दिल्ली पुलिस के समक्ष नया आवेदन दाखिल करने को कहा। उनके वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन अब 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम...

बिल्डिंग मैप मंजूरी में अथॉरिटी निजी जमीन के मालिकाना हक पर फैसला नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिल्डिंग मैप की मंजूरी देने वाली अथॉरिटी निजी भूमि के मालिकाना हक के विवाद का फैसला नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में अथॉरिटी को केवल यह देखना है कि संबंधित जमीन पर कोई प्रभावी इंजंक्शन ऑर्डर लागू है या नहीं।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि अथॉरिटी के पास जमीन के मालिकाना हक को विवादित घोषित करने का अधिकार नहीं है, सिवाय उन मामलों के जहां जमीन सरकार या ग्राम सभा की हो अथवा किसी न्यायिक कार्यवाही का विषय हो।क्या था मामला?याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन पर निर्माण के लिए...

Satya Niketan PG Collapse : दिल्ली हाईकोर्ट में स्वतंत्र जांच तथा मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई। याचिका में हादसे की सटीक वजह पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक या तकनीकी समिति गठित करने की भी मांग की गई। मामले का सोमवार को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया।लॉ स्टूडेंट अनिकेत कुमार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में हादसे से प्रभावित छात्रों को तत्काल मेडिकल सुविधा और पुनर्वास उपलब्ध कराने,...

पत्नी की सरपंची के बकाये के लिए पति जिम्मेदार नहीं, संलिप्तता साबित हुए बिना वसूली नहीं हो सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी अलग-अलग कानूनी इकाइयां हैं और किसी सार्वजनिक पद पर रहते हुए एक के कथित कदाचार या गलत कार्य के लिए दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वह भी उस कृत्य में शामिल था।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल से जुड़े बकाये की वसूली उसके पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य से केवल इस आधार पर नहीं की जा सकती कि वह उसका पति है। सार्वजनिक प्रतिनिधि द्वारा किए गए कदाचार या गलत कार्य की जिम्मेदारी उसी की होती है और...

CJP प्रदर्शनकारी पर हमले का मामला: स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आज सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट जुलाई में जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान किशोर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कार्यकर्ता के पिता से संबंधित कथित हमले के मामले में उनकी गिरफ्तारी के संबंध में स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आज सुनवाई करेगा।इस मामले का उल्लेख आज भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष किया।शर्मा ने कहा कि भारद्वाज तीन दिन से हिरासत में हैं। कोर्ट ने आज (सोमवार) के लिए तत्काल लिस्टिंग की अनुमति दी।भारद्वाज को रविवार को...

जयपुर में गिरफ़्तारी या फ़िरोज़ाबाद में? UP Police पर फ़र्ज़ी एनकाउंटर का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADGP और CP से मांगी रिपोर्ट

पुलिस अधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। यह मामला जयपुर (राजस्थान) से चोरी के आरोपी की गिरफ़्तारी और उसके बाद फ़िरोज़ाबाद (UP) में कथित पुलिस एनकाउंटर में उसके घायल होने से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के सामने आने के बाद उठा है।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने आरोपी की पत्नी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।कोर्ट ने आगरा ज़ोन...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरार आरोपी की 1982 की हत्या की कोशिश की अपील गैर-मौजूदगी में मेरिट के आधार पर खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या की कोशिश के मामले में 42 साल पुरानी अपील को मेरिट के आधार पर खारिज किया, जबकि आरोपी-अपीलकर्ता फरार थी। कोर्ट ने कहा कि वह तब तक हमेशा इंतज़ार करने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि उसे ढूंढकर कोर्ट के सामने पेश न किया जाए।जस्टिस वाणी रंजन अग्रवाल की बेंच फरार आरोपी फूलमती द्वारा 1982 में दायर क्रिमिनल अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील ट्रायल कोर्ट के उसी साल के फैसले के खिलाफ थी, जिसमें उसे IPC की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया गया और चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई।11...

किसी और के नाम से ईमेल ID बनाना पहली नज़र में IT Act की धारा 66-C के तहत आइडेंटिटी थेफ्ट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुरुआती तौर पर माना कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से सिर्फ़ ईमेल ID बनाना, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2008 (IT Act) की धारा 66-C के तहत अपराध नहीं है। बता दें, उक्त धारा 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (पहचान की चोरी) की सज़ा से संबंधित है।IT Act की धारा 66-C में तब सज़ा का प्रावधान है, जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या बेईमानी से किसी दूसरे व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर, पासवर्ड या किसी अन्य यूनिक आइडेंटिफिकेशन फ़ीचर (विशिष्ट पहचान विशेषता) का इस्तेमाल करता है।जस्टिस अब्दुल मोइन...