हाईकोर्ट
रिपोर्टिंग करें, तड़का न लगाएं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी को दी नसीहत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़े मामलों की कवरेज को लेकर रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्टिंग करते समय अनावश्यक सजावट (एम्बेलिशमेंट) से बचें।जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने साफ किया कि कोर्ट किसी तरह का प्रतिबंध (गैग ऑर्डर) लगाने के पक्ष में नहीं है लेकिन रिपोर्टिंग का लहजा संयमित होना चाहिए।सुनवाई के दौरान अंबानी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि चैनल पर प्रसारित कार्यक्रमों में फ्रॉडस्टर और स्टुपिड जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा...
फर्जी दूतावास चलाने के आरोपी को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने और खुद को 'रॉयल एडवाइजर' (शाही सलाहकार) बताते हुए 'कॉन्सुलर' कार्यालय संचालित करने के आरोपी 49 वर्षीय व्यक्ति को जमानत दी।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने आरोपी हर्षवर्धन जैन को यह राहत प्रदान की। जैन को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार किया था।अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को वेस्ट आर्कटिका नामक गैर-मौजूद देश का राजनयिक बताकर कथित कांसुलेट संचालित किया और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से...
आय छिपाकर कमाई कम बताने से नहीं बचेगा पति: दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा गुजारा भत्ता
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई पति अपनी वास्तविक आय छिपाकर खुद को कम कमाने वाला बताकर गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने पत्नी और दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में दिए गए 13,000 रुपये प्रतिमाह के अंतरिम गुजारा भत्ते को बरकरार रखते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि यदि पति अपनी आय और वित्तीय स्थिति से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपाता है तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगा सकती है और उसकी न्यूनतम आय का आकलन स्वयं कर सकती है।मामले में...
दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: दुष्कर्म और POCSO मामलों में आरोपी को 'घोषित अपराधी' नहीं कहा जा सकता
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म (रेप) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आरोपित व्यक्ति को धारा 82 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत “घोषित अपराधी” (Proclaimed Offender) नहीं घोषित किया जा सकता।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी करते हुए एक सत्र अदालत के आदेश में संशोधन किया, जिसमें याचिकाकर्ता को IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत मामले में “घोषित अपराधी” घोषित किया गया था।कोर्ट की अहम टिप्पणीअदालत ने कहा कि धारा 82(1) CrPC के तहत फरार आरोपी के खिलाफ उद्घोषणा...
BJP नेताओ पर NaMo App के जरिए फंड जुटाने में धोखाधड़ी का आरोप, मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर
मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके नेताओं पर NaMo ऐप के माध्यम से कथित रूप से धोखाधड़ी कर धन जुटाने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।याचिका चेन्नई निवासी बीआर अरविंदाक्षन ने दायर की, जिसमें कहा गया कि NaMo ऐप और वेबसाइट के जरिए जनता से चंदा लिया गया लेकिन इसे सरकारी योजनाओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता में यह धन राजनीतिक दल के लिए एकत्र किया गया।याचिका में BJP के पूर्व...
चुनाव के दौरान मतदाता से कथित दुर्व्यवहार मामला: हाईकोर्ट ने BJP नेता माधवी लता को दी अंतरिम राहत
तेलंगाना हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता माधवी लता के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई। बता दें, यह मामला 2024 के हैदराबाद लोकसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने और एक महिला मतदाता का नकाब जबरन हटाने के आरोप से जुड़ा है।जस्टिस जे. श्रीनिवास राव की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि फिलहाल FIR में आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी। अदालत ने यह भी नोट किया कि धारा 155(2) के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।यह मामला मलाकपेट...
दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक राज्य में मिलने वाला आरक्षण लाभ दूसरे राज्य में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने यह टिप्पणी NEE-PG सीट आवंटन में आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,“अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। यह मान लेना कि सभी राज्यों के...
लिव-इन संबंध का सहारा लेकर झूठे शादी के वादे से नहीं बच सकता आरोपी: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत
दिल्ली हाइकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई आरोपी यह कहकर खुद को बचा नहीं सकता कि वह पहले से किसी महिला के साथ केवल लिव-इन संबंध में था इसलिए उस पर झूठे शादी के वादे का आरोप लागू नहीं होता।जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।मामला उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने विवाह का झूठा वादा कर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से ही एक अन्य महिला के साथ रह रहा था और उसके दो...
गौरव भाटिया के मानहानि मामले में हाईकोर्ट की सख्त, 'X यूजर को जारी किया नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने BJP नेता और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया मंच X के एक यूजर को नोटिस जारी किया। आरोप है कि उक्त यूजर ने अदालत के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए आपत्तिजनक सामग्री शेयर की।जस्टिस मीनि पुष्करणा की अदालत ने मामले में यूजर रैन्टिंग गोला और एक्स से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया कि सितंबर में पारित अंतरिम आदेश के बावजूद संबंधित यूजर लगातार वीडियो और पोस्ट डाल रही है।दरअसल, गौरव भाटिया ने पिछले वर्ष एक टीवी बहस के दौरान दिए गए बयान के बाद सोशल...
'Molitics' के फेसबुक पेज ब्लॉक करने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और मेटा से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म मोलिटिक्स (Molitics) के फेसबुक पेज को ब्लॉक किए जाने के मामले में केंद्र सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और मेटा को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर किस प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई।मामला 29 मार्च को मोलिटिक्स के फेसबुक पेज को भारत में ब्लॉक किए जाने से जुड़ा है। कंपनी ने याचिका दाखिल...
NDPS मामलों में बरामदगी व गिरफ्तारी मेमो की सच्चाई ट्रायल में ही तय होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS मामलों में बरामदगी और गिरफ्तारी मेमो की सत्यता, विश्वसनीयता और प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है, न कि रिट याचिका में।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे उसके घर से उठाया गया और बाद में उस स्थान पर ले जाकर फंसाया गया, जहां से कथित तौर पर मादक पदार्थ बरामद दिखाया गया। उसने पूरे मामले को झूठा और मनगढ़ंत...
वकील अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने के लिए PIL याचिकाकर्ता नहीं बन सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी वकील, जिसके पास उसके क्लाइंट्स अपनी शिकायतों के निवारण के लिए आते हैं, उसे खुद याचिकाकर्ता बनकर अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने वाली जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर की गई PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की। इस याचिका में वकील ने प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की...
एड-हॉक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता: 28 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को पक्का करने पर विचार करे सरकार- राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को राहत दी, जिसने 28 साल से ज़्यादा समय तक सेवा देने के बावजूद, सरकार द्वारा उसे पक्का करने पर विचार न किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि उसकी शुरुआती नियुक्ति किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि एड-हॉक (अस्थायी) आधार पर की गई।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने पाया कि राज्य सरकार का यह तर्क कि याचिकाकर्ता को किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि केवल काम के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए रखा गया था, लेबर कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका था। लेबर कोर्ट ने...
बिजली तक पहुंच अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन चाहने वाली बहू की मदद की
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली कनेक्शन पाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वैवाहिक विवाद के बीच एक नई घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए एक बहू द्वारा दायर आवेदन पर कार्रवाई करें।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रीति शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शर्मा) प्रतिवादी नंबर 7 की...
FIR की निष्पक्ष रिपोर्टिंग 'मीडिया ट्रायल' नहीं: सिक्किम हाईकोर्ट
सिक्किम हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि FIR दर्ज होने की निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग को बिना किसी सनसनीखेजपन या पहले से कोई राय बनाए, "मीडिया ट्रायल" नहीं कहा जा सकता।कोर्ट ने टिप्पणी की कि आपराधिक मामलों की रिपोर्टिंग करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के तौर पर प्रेस की भूमिका है। यह एक सार्वजनिक प्रहरी के तौर पर मीडिया के कर्तव्य का हिस्सा है।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि इस तरह की रिपोर्टिंग, खासकर तब जब इसमें पीड़ितों की पहचान उजागर न की गई हो तो उस पर किसी तरह की न्यायिक रोक या प्रतिबंध लगाने की...
पत्नी द्वारा 'छोड़ देने' के आधार पर तलाक़ मिलने से पति CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि पति के पक्ष में तलाक़ का फ़ैसला इस आधार पर दिया गया कि पत्नी ने उसे छोड़ दिया था, यह अपने आप में तलाक़ के बाद पत्नी को भरण-पोषण देने में कोई रुकावट नहीं डालता।कानून की स्थिति को स्पष्ट करते हुए जस्टिस डॉ. संजीव कुमार पाणिग्राही की पीठ ने यह राय व्यक्त की–“BNSS के तहत भरण-पोषण का प्रावधान अब धारा 144 के रूप में पुन: क्रमांकित किया गया। इसकी व्याख्या में 'पत्नी' शब्द के अंतर्गत एक ऐसी तलाक़शुदा महिला को भी शामिल किया गया, जिसने अभी तक पुनर्विवाह...
परेशान करने वाला चलन, जांच अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं: हाईकोर्ट ने 'यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण कानून' के तहत 'झूठी' FIRs की कड़ी आलोचना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य में 'उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021' के तहत झूठी FIRs दर्ज किए जाने के "परेशान करने वाले चलन" की कड़ी निंदा की।यह देखते हुए कि 2021 के कानून के तहत FIRs "धड़ाधड़" दर्ज की जा रही हैं, जो बाद में झूठी साबित होती हैं, कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वह एक व्यक्तिगत हलफनामा दायर कर बताएं कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां...
ट्रायल कोर्ट ज़मानत देने की शर्त के तौर पर पासपोर्ट ज़ब्त करने का आदेश नहीं दे सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास ज़मानत देने की शर्त के तौर पर पासपोर्ट ज़ब्त करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।जस्टिस पी. धनबाल ने फ़ैसला दिया कि BNSS की धारा 109 (CrPC की धारा 104) के तहत कोर्ट के पास किसी भी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने का अधिकार है, लेकिन पासपोर्ट को नहीं। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट ज़ब्त करने का अधिकार सिर्फ़ पासपोर्ट अधिकारियों के पास है, जो पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3) के तहत दिया गया।कोर्ट ने आगे कहा कि पासपोर्ट ज़ब्त करने का अधिकार पासपोर्ट एक्ट की...
ट्रांसजेंडर कानून संशोधन पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Act, 2026 को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संशोधित कानून 'स्व-पहचान' (self-identification) के आधार पर अपनी लैंगिक पहचान तय करने वाले व्यक्तियों को 'ट्रांसजेंडर' की कानूनी परिभाषा से बाहर कर देता है।मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं में दो ट्रांसवुमन शामिल हैं, जो लंबे समय से हार्मोन थेरेपी ले रही हैं और आधिकारिक...
'भरोसे लायक दस्तावेज़ दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन': पटना हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर लगी 2 साल की रोक हटाई
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ठेकेदार को उन दस्तावेज़ों को दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना, जो आरोपों का आधार हैं, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों द्वारा लगाई गई दो साल की रोक हटाई।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा 10.12.2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत, याचिकाकर्ता को बिहार ठेकेदार पंजीकरण नियम, 2007 के नियम 11 के...



















