गुजरात हाईकोर्ट

पासपोर्ट अपडेट: तलाकशुदा मां को मिली बड़ी राहत, पिता की NOC के बिना बच्चों का पासपोर्ट नवीनीकरण होगा: गुजरात हाईकोर्ट
पासपोर्ट अपडेट: तलाकशुदा मां को मिली बड़ी राहत, पिता की NOC के बिना बच्चों का पासपोर्ट नवीनीकरण होगा: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने तलाकशुदा महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए उसे बड़ी राहत दी। कोर्ट ने पिता का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न होने के कारण पासपोर्ट प्राधिकरण द्वारा नाबालिग बच्चों के पासपोर्ट नवीनीकरण के इनकार को खारिज कर दिया।जस्टिस एलएस पीरजादा ने अपने फैसले में यह महत्वपूर्ण तथ्य नोट किया कि माता-पिता के बीच पहले ही तलाक की डिक्री प्राप्त हो चुकी है और एक समझौता ज्ञापन (MoU) निष्पादित हुआ है, जिसके तहत बच्चों की कस्टडी मां के पास है।कोर्ट ने पासपोर्ट नियम 1980 के प्रावधानों का हवाला देते हुए...

संजीव भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पति के पालनपुर जेल से स्थानांतरण के खिलाफ पत्नी की याचिका खारिज की
संजीव भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पति के पालनपुर जेल से स्थानांतरण के खिलाफ पत्नी की याचिका खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने मांग की कि उनके पति को पालनपुर जेल से किसी अन्य जेल में ट्रांसफर या बेदखल न किया जाए। न्यायालय ने कहा कि भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई पूर्ण अधिकार नहीं है।भट्ट को जामनगर सेशन जज ने 20.06.2019 को एक कथित हिरासत में मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और वह जामनगर जेल में बंद हैं। इसी दौरान NDPS मुकदमे में बनासकांठा सेशन कोर्ट ने 27.03.2024 को पूर्व आईपीएस अधिकारी को संबंधित...

परिवार के मुखियाओं द्वारा निष्पादित सहमति निर्णय से गैर-हस्ताक्षरकर्ता परिवार के सदस्य भी बाध्य: गुजरात हाईकोर्ट
परिवार के मुखियाओं द्वारा निष्पादित सहमति निर्णय से गैर-हस्ताक्षरकर्ता परिवार के सदस्य भी बाध्य: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब दो परिवारों के मुखिया संयुक्त पारिवारिक व्यवस्था और सहमति मध्यस्थता निर्णय के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से विवादों का समाधान कर लेते हैं तो परिवार के व्यक्तिगत सदस्य बाद में निर्णय की हस्ताक्षरित प्रति न मिलने या व्यक्तिगत सहमति के अभाव के आधार पर निर्णय को चुनौती नहीं दे सकते, भले ही वे हस्ताक्षरकर्ता न हों।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. रे की खंडपीठ ने कहा कि यदि पारिवारिक व्यवस्थाएं सद्भावपूर्वक और स्वेच्छा से निष्पादित की जाती हैं तो वे...

सेशन कोर्ट केवल पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए अभियुक्त की सज़ा निलंबित नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट
सेशन कोर्ट केवल पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए अभियुक्त की सज़ा निलंबित नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC/BNSS में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो प्रथम अपीलीय कोर्ट को किसी अभियुक्त की सज़ा निलंबित करने या उसे केवल इस आधार पर रिहा करने का अधिकार देता हो कि वह हाईकोर्ट में दोषसिद्धि को चुनौती देने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर कर सके।अदालत ने कहा कि विधायिका का इरादा अपीलीय कोर्ट को सज़ा स्थगित करने या निलंबित करने या अभियुक्त को आत्मसमर्पण करने के लिए दी गई समय सीमा बढ़ाने का अधिकार देने का नहीं है ताकि वह पुनरीक्षण याचिका दायर कर सके।हाईकोर्ट इस बात पर विचार कर रहा था...

रेप केस में सजा काट रहे आसाराम बापू की जमानत याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट ने मांगा राज्य से जवाब
रेप केस में सजा काट रहे आसाराम बापू की जमानत याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट ने मांगा राज्य से जवाब

गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को आसाराम बापू की मेडिकल स्थिति पर जवाब देने का निर्देश दिया। आसाराम को 2013 के रेप मामले में गांधीनगर के सेशन कोर्ट ने दोषी ठहराया था और वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस पी.एम. रावल की खंडपीठ आसाराम बापू की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मामले को अगले महीने सूचीबद्ध किया, क्योंकि उसे बताया गया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने आवेदक की जमानत याचिका को 29 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया, जिस दिन आदेश पारित होने की...

गुजरात हाईकोर्ट ने अदालत में मामले की पेंडेंसी के बावजूद दुकान ध्वस्त करने पर नगर पालिका को फटकारा
गुजरात हाईकोर्ट ने अदालत में मामले की पेंडेंसी के बावजूद दुकान ध्वस्त करने पर नगर पालिका को फटकारा

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को आनंद जिले की खंबट नगर पालिका द्वारा जारी एक नोटिस की कार्रवाई पर स्थगन (स्टे) दे दिया। इस नोटिस में एक व्यक्ति को उसकी दुकान खाली करने के लिए कहा गया था, जिसे उसने नीलामी जीतने के बाद 9 साल के पट्टे पर लिया था। नोटिस में कहा गया था कि यदि व्यक्ति दुकान खाली नहीं करता है तो कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।कोर्ट ने स्थगन दिया क्योंकि जानकारी मिली कि आज सुबह दुकान का एक हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया, जबकि नगर पालिका को ज्ञात था कि याचिकाकर्ता ने जबरन...

धार्मिक परिवर्तन के कथित पीड़ित भी दूसरों को धर्म बदलने पर प्रेरित करें तो होंगे अपराधी: गुजरात हाईकोर्ट
धार्मिक परिवर्तन के कथित पीड़ित भी दूसरों को धर्म बदलने पर प्रेरित करें तो होंगे अपराधी: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि जो लोग धार्मिक परिवर्तन (religious conversion) के "पीड़ित" होने का दावा करते हैं, उन्हें भी उस अपराध के लिए आरोपित किया जा सकता है यदि वे बाद में अन्य लोगों को धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित करते हैं।कोर्ट ने उन कई पुरुषों की दलील खारिज कर दी, जिन्हें धार्मिक परिवर्तन के आरोप में नामजद किया गया था, कि वे स्वयं धर्म परिवर्तन के पीड़ित हैं और उनके खिलाफ FIR गलत है। कोर्ट ने कहा कि यदि ये लोग धर्म परिवर्तन करने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित...

S.148 NI Act | अपीलीय कोर्ट को न्यूनतम 20% मुआवज़ा राशि जमा करने का निर्देश देने का एकमात्र विवेकाधिकार: गुजरात हाईकोर्ट
S.148 NI Act | अपीलीय कोर्ट को न्यूनतम 20% मुआवज़ा राशि जमा करने का निर्देश देने का 'एकमात्र विवेकाधिकार': गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 148 के अंतर्गत अपीलीय कोर्ट को चेक अनादर के लिए दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले व्यक्ति को परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुआवज़े की राशि का 20% जमा करने का निर्देश देने का पूर्ण विवेकाधिकार है।NI Act की धारा 148 दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील लंबित रहने तक भुगतान का आदेश देने की अपीलीय कोर्ट की शक्ति से संबंधित है। इस प्रावधान में कहा गया कि NI Act की धारा 138 के अंतर्गत चेक अनादर के लिए दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले चेक जारीकर्ता...

सार्वजनिक हित में दी गई अनिवार्य रिटायरमेंट दंड नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी की समयपूर्व रिटायरमेंट को सही ठहराया
सार्वजनिक हित में दी गई अनिवार्य रिटायरमेंट दंड नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी की समयपूर्व रिटायरमेंट को सही ठहराया

गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में न्यायिक अधिकारी को दी गई समयपूर्व रिटायरमेंट को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित या प्रशासनिक हित में दी गई अनिवार्य अथवा समयपूर्व रिटायरमेंट को दंड नहीं माना जा सकता।यह आदेश जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस एल.एस. पिरजादा की खंडपीठ ने पारित किया। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व न्यायिक अधिकारी ने 2016 की अधिसूचना को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें 53 वर्ष की आयु में सार्वजनिक हित में सेवा से समयपूर्व रिटायरमेंट किया गया।खंडपीठ ने अपने...

गुजरात हाईकोर्ट ने 400 साल पुरानी मस्जिद के आंशिक विध्वंस पर रोक से किया इनकार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना को दी हरी झंडी
गुजरात हाईकोर्ट ने 400 साल पुरानी मस्जिद के आंशिक विध्वंस पर रोक से किया इनकार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना को दी हरी झंडी

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) की उस योजना पर रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें सरसपुर स्थित लगभग 400 साल पुरानी मंचा मस्जिद के एक हिस्से को तोड़कर सड़क चौड़ीकरण किया जाना है।चीफ जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस एल.एस. पीरजादा की खंडपीठ ने मुतवल्ली की अपील खारिज करते हुए कहा कि मस्जिद की मुख्य संरचना को तोड़ा नहीं जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर, मकान और व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल की गई हैं।मामलामुतवल्ली ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि मस्जिद...

शर्मनाक: झूठी अफवाह फैलाकर आधी रात अपील दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को फटकारा, 1 लाख का जुर्माना लगाया
शर्मनाक: झूठी अफवाह फैलाकर आधी रात अपील दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को फटकारा, 1 लाख का जुर्माना लगाया

गुजरात हाईकोर्ट ने एक सीनियर वकील के आचरण की कड़ी निंदा की, जिन्होंने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा रोक आदेश न दिए जाने के कारण अधिकारी रातों-रात उनके मुवक्किलों के फ्लैट ध्वस्त कर देंगे। कोर्ट ने कहा कि वकील ने सही तथ्यों की पुष्टि किए बिना आधी रात को अपील दायर करके कोर्ट की मशीनरी का दुरुपयोग किया।जस्टिस मौलिक जे. शेलाट की पीठ ने वकील के आचरण को निंदनीय और शर्मनाक बताते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि एक सीनियर वकील...

वयस्क महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ शेल्टर होम में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: गुजरात हाईकोर्ट
वयस्क महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ शेल्टर होम में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मजिस्ट्रेट को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शेल्टर होम भेजने का अधिकार तो है लेकिन वयस्क महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध अनिश्चितकाल तक वहीं रखना असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि जब महिला स्वयं रिहाई की मांग करती है तो मजिस्ट्रेट को उसे तत्काल मुक्त करना अनिवार्य है।मामले में शिकायतकर्ता ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। महिला ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि उसके पास परिवार नहीं है और वह माता-पिता के घर नहीं जाना चाहती। इसी आधार पर 30...

गुजरात हाईकोर्ट का Jolly LLB 3 के टीज़र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से सवाल, पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पढ़ें
गुजरात हाईकोर्ट का Jolly LLB 3 के टीज़र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से सवाल, पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पढ़ें

गुजरात हाईकोर्ट ने आगामी फिल्म Jolly LLB 3 के टीज़र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से गुरुवार (11 सितंबर) को कहा कि वह पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को पढ़ें, जिसमें इसी तरह की याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही अपनी याचिका के संबंध में कोई निर्णय लें।फिल्म में अक्षय कुमार और अरशद वारसी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 19 सितंबर को रिलीज़ होने वाली है।याचिकाकर्ता स्वयं उपस्थित हुए थे। उन्होंने जस्टिस निराल आर...

यूसुफ पठान ने बिना किसी आदेश के सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण किया, इसलिए उन्हें भूखंड छोड़ना होगा: गुजरात हाईकोर्ट
यूसुफ पठान ने बिना किसी आदेश के सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण किया, इसलिए उन्हें भूखंड छोड़ना होगा: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाीकोर्ट ने हाल ही में वडोदरा नगर निगम को पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान द्वारा एक भूखंड पर अतिक्रमण हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने वाला आदेश बरकरार रखा।ऐसा करते हुए अदालत ने कहा कि पठान द्वारा बिना किसी प्रतिफल के भूखंड पर "लंबे समय तक कब्ज़ा" रखने से उन्हें ज़मीन पर कोई अधिकार नहीं मिलता। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की अवैधता को जारी नहीं रखा जा सकता। पठान को अतिक्रमणकारी पाते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें भूखंड आवंटित करने का कोई आदेश पारित नहीं...

सूरत बलात्कार मामला: बीमार मां से मिलने के लिए नारायण साईं की अस्थायी ज़मानत याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य से जवाब मांगा
सूरत बलात्कार मामला: बीमार मां से मिलने के लिए नारायण साईं की अस्थायी ज़मानत याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य से जवाब मांगा

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (12 सितंबर) को राज्य सरकार से नारायण साईं द्वारा दायर उस याचिका पर निर्देश प्राप्त करने को कहा, जिसमें उन्होंने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अस्थायी ज़मानत की मांग की। नारायण साईं को 2019 में बलात्कार के मामले में सेशन कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।नारायण साईं की ओर से पेश हुए वकील ने जस्टिस इलेश जे वोरा और जस्टिस पीएम रावल की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि हाल ही में आवेदक की माँ को अस्पताल में भर्ती कराया गया।वकील ने कहा, "माँ...

विदेशी कानून हिंदू विवाह अधिनियम के तहत संपन्न हिंदू विवाह को भंग नहीं कर सकता, भले ही दंपत्ति विदेश में निवास करते हों या विदेशी नागरिकता प्राप्त कर ली हो: गुजरात हाईकोर्ट
विदेशी कानून हिंदू विवाह अधिनियम के तहत संपन्न हिंदू विवाह को भंग नहीं कर सकता, भले ही दंपत्ति विदेश में निवास करते हों या विदेशी नागरिकता प्राप्त कर ली हो: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि भारत में विवाह करने वाले दो हिंदुओं के बीच वैवाहिक विवाद केवल हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ही माना जा सकता है और विदेशी पारिवारिक कानून उस पर लागू नहीं होगा, भले ही दंपत्ति किसी विदेशी देश के निवासी हों या उनकी नागरिकता हो। इस प्रकार, न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत संपन्न विवाह को भंग करने के लिए किसी विदेशी कानून की प्रयोज्यता "अनुचित" है।हाईकोर्ट ने यह आदेश सिडनी स्थित ऑस्ट्रेलिया के फेडरल सर्किट कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को...

आसाराम बापू की अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई टली, अब 22 सितंबर को होगी सुनवाई
आसाराम बापू की अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई टली, अब 22 सितंबर को होगी सुनवाई

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (3 सितंबर) को बलात्कार मामले में दोषी आसाराम बापू की अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई टाल दी। अदालत ने याचिका को 22 सितंबर को नियमित ज़मानत पर होने वाली सुनवाई के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।जस्टिस इलेशकुमार वोरा और जस्टिस पी.एम. रावल की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही आसाराम की अंतरिम ज़मानत याचिका खारिज कर चुका है। उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। ऐसे में अस्थायी ज़मानत पर ज़ोर देने से नियमित ज़मानत पर असर पड़ेगा।अदालत ने टिप्पणी...

सरकार की चुप्पी बहुत कुछ कहती है: गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी की अवैध माफी वापस न लेने पर राज्य सरकार की आलोचना की
'सरकार की चुप्पी बहुत कुछ कहती है': गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी की 'अवैध' माफी वापस न लेने पर राज्य सरकार की आलोचना की

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 अगस्त) को एक हत्या के दोषी की समय से पहले, "अवैध" रिहाई को रद्द कर दिया। यह रिहाई तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जेल द्वारा 2018 में दी गई "क्षमा" के बाद की गई थी। न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए कि यह बिना किसी अधिकार और उचित प्रक्रिया का पालन किए दी गई थी, उसे रद्द कर दिया। बृहदारण्यकोपनिषद का हवाला देते हुए, हाईकोर्ट ने शुरू में कहा, "कानून राजाओं का राजा है, उनसे कहीं अधिक शक्तिशाली और न्यायसंगत; कानून से अधिक शक्तिशाली कुछ भी नहीं हो सकता, जिसकी सहायता...