संपादकीय

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बावजूद क्यों नहीं रुक रही हैं बोरवेल दुर्घटनाएं, शीर्ष अदालत ने दिए थे ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बावजूद क्यों नहीं रुक रही हैं बोरवेल दुर्घटनाएं, शीर्ष अदालत ने दिए थे ये निर्देश

बोरवेल दुर्घटना के कारण तमिलनाडु में दो वर्षीय सुजीत विल्सन की दुखद मौत एक आंख खोलने वाली घटना होनी चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाएं अभी भी जारी हैं, जबकि बोरवेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ साल पहले व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा स्वत संज्ञान लिए गए एक मामले में बोरवेल में गिरने और ट्यूबवेल में गिरने के कारण छोटे बच्चों के साथ होने वाली घातक दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर फिर से विचार किया गया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस...

क्या मृतक के शरीर में जहर नहीं मिलने पर भी उसे दोषी करार दिया जा सकता है? ऐसे केस की कुछ खास बातें
क्या मृतक के शरीर में जहर नहीं मिलने पर भी उसे दोषी करार दिया जा सकता है? ऐसे केस की कुछ खास बातें

मनु सेबेस्टियनइस आलेख में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि जहर देकर मार देने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कैसे दोषी ठहराया जा सकता है। क्या किसी व्यक्ति को जहर देकर मारने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है जबकि यह पता नहीं है कि जहर कैसे दिया गया? केरल पुलिस के इस आरोप के बाद कि उत्तरी केरल के कूदाथायी गांव की जॉली जोसफ नामक एक महिला ने अपने ही परिवार के छः लोगों की 17 साल की अवधि के दौरान जहर देकर हत्या कर दी, कानूनी क्षेत्र में...

NDPS एक्ट के तहत आरोपी को दोषी करार देने के लिए सिर्फ जांच अधिकारी के सबूतों पर विश्वास करना सही नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किया अभियुक्तों को बरी
NDPS एक्ट के तहत आरोपी को दोषी करार देने के लिए सिर्फ जांच अधिकारी के सबूतों पर विश्वास करना सही नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किया अभियुक्तों को बरी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत पारित दोषसिद्धि के एक आदेश को पलटते हुए कहा कि स्वतंत्र गवाहों द्वारा कोई पुष्टि नहीं होने के बाद, केवल जांच अधिकारियों के साक्ष्य पर भरोसा करते हुए, जिनके बयान विरोधाभासी थे, आरोपी को दोषी ठहराना अनुचित है। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल ने कहा, "उपरोक्त सबूतों की एक मिनट की जांच पर, यह स्पष्ट है कि मामला केवल जांच अधिकारी दीपेश सैनी (PW11) और अन्य...

अगर पक्षकारों में समझौता हो गया है तो 498A के तहत आपराधिक शिकायत जारी नहीं रह सकती, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अगर पक्षकारों में समझौता हो गया है तो 498A के तहत आपराधिक शिकायत जारी नहीं रह सकती, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 498A और दहेज निषेध अधिनियम के तहत की गई आपराधिक शिकायत के बाद यदि पक्षकारों ने इस मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है तो उपरोक्त शिकायत के तहत कार्रवाई जारी नहीं रह सकती। न्यायमूर्ति ए.एम.कांविलकर और दिनेश माहेश्वरी की पीठ द्वारा पारित आदेश में पाया गया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था के बावजूद कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौते हो गया है, दोनों के बीच होने वाली कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह माना गया था कि उच्च...

धारा 498ए का झूठा मामला :  कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला,  पत्नी करे पूर्व पति को 25,000 रुपये का भुगतान, केस भी खारिज
धारा 498ए का झूठा मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला, पत्नी करे पूर्व पति को 25,000 रुपये का भुगतान, केस भी खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला को निर्देश दिया है कि वह अपने पूर्व पति को 25,000 रुपये बतौर हर्जाने के तौर पर दे, क्योंकि महिला ने उसे प्रताड़ित करने के लिए आईपीसी की धारा 498ए के तहत आपराधिक केस दर्ज करवाकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। इसी के साथ कोर्ट ने आपराधिक केस को भी खत्म कर दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज करते हुए कहा, '' यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए पूर्व पति को...

सुप्र‌ीम कोर्ट ने दोहराया, रेवेन्यू रिकॉर्ड में हुईं एंट्रीज़ से नहीं तय होता संप‌‌‌त्त‌ि का स्वामित्व
सुप्र‌ीम कोर्ट ने दोहराया, रेवेन्यू रिकॉर्ड में हुईं एंट्रीज़ से नहीं तय होता संप‌‌‌त्त‌ि का स्वामित्व

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश फिर दोहराया है कि राजस्व अभिलेखों यानी रेवेन्यू रिकॉर्ड में की गई एंट्रीज से संपत्त‌ि का स्वामित्व तय नहीं होता। शीर्ष अदालत ने कहा, ऐसी प्र‌व‌िष्टि‌यों से स्वामित्व का संभावित मूल्य भी तय नहीं होता। जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने प्रह्लाद प्रधान बनाम सोनू कुम्हार के मामले में स्पष्ट किया कि ऐसी प्रविष्‍टियां केवल उस व्यक्ति को, जिसके नाम पर म्युटेशन रिकॉर्ड है, मुकदमें में शामिल जमीन का राजस्व अदा करने के लिए अधिकृत करती हैं। प्रह्लाद...

फोन कॉल टेप करने की अनुमति केवल सार्वजनिक सुरक्षा के हित में दी जा सकती है, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
फोन कॉल टेप करने की अनुमति केवल सार्वजनिक सुरक्षा के हित में दी जा सकती है, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को मुंबई के एक 54 वर्षीय व्यवसायी को राहत दे दी है और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पारित तीन अलग-अलग आदेशों को रद्द कर दिया है। इन आदेशों के तहत मंत्रालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को रिश्वतखोरी के एक मामले में याचिकाकर्ता व्यवसायी के फोन कॉल को टेप करने की अनुमति दे दी थी। रिश्वतखोरी के इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक का एक अधिकारी भी शामिल था। न्यायमूर्ति रंजीत मोर और न्यायमूर्ति एन.जे जमादार की दो सदस्यीय पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश दिया है...

(बलात्कार) सिर्फ पुलिस को सीआरपीसी की धारा 154/161 के तहत दिए गए बयानों के आधार पर नहीं हो सकती सजा, पढ़िए  सुप्रीम कोर्ट   का फैसला
(बलात्कार) सिर्फ पुलिस को सीआरपीसी की धारा 154/161 के तहत दिए गए बयानों के आधार पर नहीं हो सकती सजा, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के एक आरोपी को बरी करते हुए कहा है कि एक अभियुक्त की सजा पूरी तरह से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 या 154 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किए गए गवाहों के बयान पर आधारित नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने बलात्कार के मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया, जिसे पंद्रह साल पहले वर्ष 2004 में इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। यह था मामला नारा पेद्दि राजू बनाम ए.पी राज्य मामले में, लड़की ने खुद प्राथमिकी दर्ज...

पति ने भरण पोषण के भुगतान से बचने के लिए फर्ज़ी दस्तावेज़ किए पेश, अदालत ने अंतरिम भरण पोषण की राशि दो गुना करने के आदेश दिए
पति ने भरण पोषण के भुगतान से बचने के लिए फर्ज़ी दस्तावेज़ किए पेश, अदालत ने अंतरिम भरण पोषण की राशि दो गुना करने के आदेश दिए

निचली अदालत में लंबित घरेलू हिंसा के मामले में पति की झूठी गवाही और किराए का फर्जी करारनामा पेश करने पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को दी जानेवाली अंतरिम मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया, जिसका भुगतान पति को करना है। अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि इस मामले की सुनवाई सीआरपीसी की धारा 340 के तहत होनी चाहिए। पति की दलील याचिकाकर्ता पति अभिषेक दुबे ने निचली अदालत और अपीली अदालत के आदेश में संशोधन के लिए हाइकोर्ट में अपील की थी। इन अदालतों ने अभिषेक को निर्देश दिया था कि वह...

पीड़िता पर चोट के निशान न होना सेक्स के लिए सहमति का संकेत, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप के मामले में बरी करने के फैसले को कायम रखा
पीड़िता पर चोट के निशान न होना सेक्स के लिए सहमति का संकेत, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप के मामले में बरी करने के फैसले को कायम रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि पीड़िता या शिकायतकर्ता पर चोट की अनुपस्थिति से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह संभोग करने के लिए एक सहमत थी। इसी के साथ हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में बरी किए जाने फैसले के खिलाफ अपील को नामंज़ूर कर दिया। मेडिकल एक्सपर्ट ने कहा कि पीड़िता के साथ हाल ही में संभोग की संभावना थी ... परंतु चिकित्सक को पीड़िता के शरीर पर कोई चोट नहीं मिली, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह संभोग के लिए एक सहमत पक्षकार थी। शिकायतकर्ता की गवाही की पुष्टि के लिए कोई सबूत...

रुपए वसूलने के लिए सिर्फ एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत करना आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट
रुपए वसूलने के लिए सिर्फ एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत करना आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रुपए वापस लेने के लिए सिर्फ मामला दायर करना और एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत करना आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात के आपराधिक मामले को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वर्तमान मामले में हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के एक केस में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई को मुख्यतः इस आधार पर खारिज कर दिया था कि पक्षों के बीच जो करार हुआ था उसको देखते हुए इस करार का नवीनीकरण हुआ था। आरोपी की याचिका को स्वीकार करने का एक और कारण यह था कि शिकायतकर्ता ने 9 करोड़ रुपये की अग्रिम...

चेक बाउंस के मामलों को छह महीने के भीतर निपटाएं,  उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिया निचली अदालत को निर्देश
चेक बाउंस के मामलों को छह महीने के भीतर निपटाएं, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिया निचली अदालत को निर्देश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामलों को तेजी से निपटाने के महत्व को मजबूत करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया है कि वह छह महीने के भीतर चेक बाउंस के मामले की कार्यवाही का निपटारा करे। इस मामले में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि ''एशियन गैलेक्सी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम वी.सिद्धिविनायक इलेक्ट्रिक ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड व अन्य'' के मामले में लंबित कार्यवाही को निपटाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। यह मामला वर्ष 2017 में परक्राम्य लिखत अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) 1881...

कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह, देखिए खास फैसलों के साथ वीकली राउंड अप
कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह, देखिए खास फैसलों के साथ वीकली राउंड अप

अक्टूबर माह के तीसरे सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण फैसले हुए। आइए डालते हैं सुप्रीम कोर्ट के पिछ्ले सप्ताह के कुछ खास फैसलों पर एक नज़र। किसी के नाम पावर ऑफ अटार्नी करने से वह संपत्ति का स्वामी नहीं बन सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जीपीए बिक्री और एसए/जीपीए/वसीयत ट्रांसफ़र क़ानूनी रूप से वैध नहीं है और इससे स्वामित्व का हस्तांतरण नहीं होता और न ही यह अचल संपत्ति के हस्तांतरण का वैध तरीक़ा है। यह मामला एक अधिसूचित ज़मीन का एसए/जीपीए/वसीयत...

ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के बिना अपील का निपटारा नहीं किया जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के बिना अपील का निपटारा नहीं किया जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड को देखे बिना एक आपराधिक अपील का निपटारा किया था। न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ अपील पर विचार किया, जिसमें हाईकोर्ट ने मुकदमे के ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के बिना आईपीसी 498 ए और आईपीसी 304 के तहत एक व्यक्ति पर लगाए गए मुकदमे में दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट का...

किसी की सज़ा का सिर्फ़ निलंबन या उसे ज़मानत देने का मतलब यह नहीं कि उसकी सज़ा माफ़ हो गई है,  पढ़िए दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
किसी की सज़ा का सिर्फ़ निलंबन या उसे ज़मानत देने का मतलब यह नहीं कि उसकी सज़ा माफ़ हो गई है, पढ़िए दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर कहा है कि किसी की सज़ा को अपील पर सुनवाई तक निलंबित करने का मतलब यह नहीं है कि उसको मिली सज़ा अब जारी नहीं रहेगी। न्यायमूर्ति रेखा पाटिल ने कहा कि आपराधिक मामलों के लिए अदालती कार्रवाई झेल रहे किसी अपराधी को ज़मानत मिल जाती है या उसकी अपील पर सुनवाई होने तक उसकी सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी सज़ा ख़त्म हो गई। वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता को आईपीसी के धारा 363, 366, 368 और 376 के तहत सज़ा दी गई पर उसकी अपील पर अपीलीय अदालत ने उसकी सज़ा को...

यदि पीड़िता द्वारा दिए गए साक्ष्य अदालत के विश्वास को बढ़ाते हैं तो मेडिकल साक्ष्य के बिना भी रेप के आरोपी को दोषी करार दिया जा सकता है : कर्नाटक हाईकोर्ट
यदि पीड़िता द्वारा दिए गए साक्ष्य अदालत के विश्वास को बढ़ाते हैं तो मेडिकल साक्ष्य के बिना भी रेप के आरोपी को दोषी करार दिया जा सकता है : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को बरी किए जाने के एक आदेश को रद्द करते हुए एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में एक 47 वर्षीय व्यक्ति को दोषी ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा, ''पीड़िता का साक्ष्य अदालत के इस विश्वास को प्रेरित करता है कि आरोपी ने उसका यौन शोषण किया था और मेडिकल साक्ष्य की अनुपस्थिति में भी यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पीड़िता का यौन उत्पीड़न हुआ था।'' न्यायमूर्ति रवि मलीमथ और न्यायमूर्ति एच.पी. संदेश की पीठ ने आरोपी एस.राजू को निर्देश दिया है कि वह...