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महिला ने फर्ज़ी दस्तावेज़ के आधार पर देह व्यापार में उतारने के इरादे से मांगी किशोरी की कस्टडी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 3 लाख का जुर्माना

LiveLaw News Network
16 Oct 2019 10:36 AM GMT
महिला ने फर्ज़ी दस्तावेज़ के आधार पर देह व्यापार में उतारने के इरादे से मांगी किशोरी की कस्टडी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 3 लाख का जुर्माना
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महिला पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, इस महिला ने एक लड़की (वेश्यालय से बचाई गई पीड़िता) की कस्टडी लेने के लिए अदालत में पूरी तरह से झूठी याचिका दायर की थी। इस महिला ने लड़की की जैविक मां होने का दावा किया था और वह लड़की को देह व्यापार के लिए मजबूर करने का इरादा रखती थी। लड़की की कस्टडी के लिए अपने दावे को साबित करने के लिए महिला ने आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवाए थे।

न्यायमूर्ति जेड ए हक और न्यायमूर्ति पुष्पा वी गणेदीवाला ने राजुबाई शंभु चतुव्रत को उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया। 15 अक्टूबर को 1.90 लाख रुपये की राशि जमा की गई।

यह थी याचिका

महिला ने हेबियस कॉर्पस की एक रिट दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि राज्य को नज़रबंद (कु "एक्स") की कस्टडी उसे सौंपने के लिए निर्देशित किया जाए। लड़की की उम्र लगभग 20 वर्ष की है, जिसे बाल कल्याण समिति द्वारा अपनी निगरानी में रखा गया है। यह भी प्रार्थना की गई कि लड़की को रिहा कर दिया जाए और उसे याचिकाकर्ता को सौंप दी जाए। इसके अलावा, याचिकाकर्ता को रु 5,00,000 के मुआवजे का भुगतान करने के लिए भी प्रार्थना की गई।

अदालत में हुआ सच का सामना

अदालत के निर्देश पर, पीड़िता को अदालत में पेश किया गया, जिसने बयान दिया कि याचिकाकर्ता उसकी जैविक मां नहीं है। अदालत द्वारा फरवरी में ही एक जांच का आदेश दिया गया था। विवाद की प्रकृति को देखते हुए, जांच एजेंसी ने डीएनए परीक्षण करने का विकल्प चुना, रिपोर्ट से पता चला कि याचिकाकर्ता कु "X" की जैविक मां नहीं है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक ने 17 सितंबर को अदालत को यह भी बताया कि याचिकाकर्ता कु "X" की जैविक मां होने के अपने दावे की पुष्टि के लिए जो आधार कार्ड और पैन कार्ड पेश किए हैं, वे दस्तावेज़ भी फर्ज़ी तौर पर गढ़े गए हैं। अदालत ने इस तरह याचिकाकर्ता को नोटिस दिया और उसे एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। 30 सितंबर को, याचिकाकर्ता ने अदालत में जवाब दाखिल किया और कानून के अनुसार उचित कार्यवाही दायर करने के लिए याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी।

पीठ ने कहा

"हमें पता चला है कि याचिकाकर्ता ने एक किशोर लड़की को देह व्यापार में धकेलने के इरादे से उसकी कस्टडी लेने के लिए पूरी तरह से झूठा मामला बनाकर इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने इस अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का प्रयास किया है। याचिकाकर्ता ने झूठे दस्तावेज़ के आधार पर 5 लाख रुपये के मुआवजे का दावा करने का दुस्साहस किया है। "

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पुलिस स्टेशन अधिकारी, वानी, जिला यवतमाल इस याचिका के रिकॉर्ड पर याचिकाकर्ता द्वारा पेश गढ़े गए आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने के लिए मामले की जांच करें।

अदालत का फैसला डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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