संपादकीय
क्या एक नाबालिग संविदा करने में सक्षम है ? जानिए क्या कहता है कानून
स्पर्श उपाध्यायआज के दौर में अवयस्क/नाबालिग सार्वजनिक जीवन में पहले से भी अधिक सक्रिय दिखते हैं। नाबालिग, सिनेमा हॉल में जाते हैं, टिकट पर यात्रा करते हैं, साइकिल स्टैंड का इस्तेमाल करते हैं, अपने कपड़े सिलवाने या साफ करने के लिए सेवाओं का उपयोग करते हैं, शिक्षा संस्थानों में स्वयं फीस भरते हैं और जीवन और शिक्षा से जुड़ी बहुत सारी अन्य चीज़ों का दैनिक लेनदेन करते हैं। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अवयस्कों/नाबालिगों द्वारा किये जाने वाले करार या संविदा (Agreement) की वैधता को समझें। जैसा कि...
कर्नाटक : अयोग्य विधायकों को राहत, उपचुनाव लड़ सकेंगे, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राजनीतिक नैतिकता को संवैधानिक नैतिकता से बदला नहीं जा सकता
कर्नाटक में अयोग्य करार दिए गए 17 बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पीकर के अयोग्य ठहराने के फैसले को बरकरार रखा लेकिन विधानसभा कार्यकाल यानी 2023 तक अयोग्य ठहराने के फैसले को रद्द कर दिया। इसके साथ ही अब ये अयोग्य विधायक पांच दिसंबर को होने वाले उपचुनाव में हिस्सा ले सकते हैं। जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अयोग्यता उस तारीख से संबंधित है जब इस तरह के दलबदल की...
प्रथम दृष्टया पुख्ता सबूत को लेकर आश्वस्त होने पर ही अदालत आरोपी को अदालत में पेशी के लिए बुलाए : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक ताज़ा फैसले में इस बात को दोहराया कि किसी आरोपी को अदालत में बुलाने को लेकर मजिस्ट्रेट के लिए यह जरूरी है कि वह इसके बारे में अपने आश्वस्त होने का उल्लेख करे। अदालत ने यह फैसला आवेदनकर्ता की इस दलील पर दिया कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता और उसके गवाहों के बयानों के आधार पर सिर्फ एक निष्कर्ष रिकॉर्ड किया था कि प्रथम दृष्टया ऐसा करने का आधार है, लेकिन अदालत का यह निष्कर्ष सीआरपीसी की धारा 200 और 202 के तहत शिकायतकर्ता और उसके गवाहों के रिकॉर्ड बयानों पर हुई बहस के बाद...
आखिर क्या है अयोध्या अधिनियम, जिसके तहत केंद्र मंदिर निर्माण के लिए बनाएगा ट्रस्ट
अयोध्या में विवादित भूमि हिंदू देवता राम लला की है, ये फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो क्षेत्र में निहित हित को देखते हुए एक ट्रस्ट की स्थापना के लिए एक योजना तैयार करे ताकि आंतरिक और बाहरी अहातों के कब्जे को हस्तांतरित किया जाए। यह दिशा-निर्देश अयोध्या अधिनियम 1993 में निश्चित क्षेत्र के अधिग्रहण के खंड 6 और 7 के तहत केंद्र सरकार में निहित शक्तियों को देखते हुए आया है। न्यायालय ने निर्देश दिया: "केंद्र सरकार इस फैसले की तारीख से...
मुविक्कल का बचाव करने पर वकील को मिल रही थी धमकियां, दिल्ली हाईकोर्ट दी पुलिस सुरक्षा
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस वकील की पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने की मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसे सिर्फ इसलिए धमकाया गया और उस पर हमला किया गया था, क्योंकि वह अदालत में एक केस में अपने मुविक्कल का बचाव कर रहा था। चूंकि इस मामले में ''बार की स्वतंत्रता''का बड़ा मुद्दा था और बार के एक युवा सदस्य के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस की निष्क्रियता को भी उजागर किया गया था, इसलिए 24 अक्टूबर को इस मामले को तुरंत मुख्य न्यायाधीश डी.एन पटेल के संज्ञान में लाया गया, जिसके बाद इस मामले को मुख्य...
अयोध्या मामले में 1045 पन्नों का फैसला किसने लिखा?
अयोध्या-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का 1045 पन्नों के फैसले में उस लेखक के नाम का खुलासा नहीं करता है, जिसने इसे लिखा। यह असामान्य है बात है कि कोर्ट के आदेश पर इसके लेखक का नाम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में स्थापित प्रथा के अनुसार एक बेंच द्वारा दिए गए निर्णय को लिखने वाले न्यायाधीश का नाम इसमें दिया जाता है। लेकिन अयोध्या फैसले को किसने लिखा है, इसका उल्लेख नहीं किया गया है। मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों की पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस...
लोक अदालत के अवार्ड के तहत जारी चेक बाउंस होने पर NI एक्ट की धारा 138 की शिकायत सुनवाई योग्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोक अदालत द्वारा दिए गए अवार्ड तहत जारी किए गए चेक के बाउंस होने पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट ( NI एक्ट) की धारा 138 के तहत कोई शिकायत सुनवाई योग्य होगी। इस मामले में [अरुण कुमार बनाम अनीता मिश्रा] आरोपी द्वारा जारी किए गए पहले चेक पर NI एक्ट की धारा 138 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। इसके परिणामस्वरूप सजा और जुर्माना किया गया। लंबित मुकदमे को वापस लेने के लिए सजा के फैसले और दोनों पक्षों के खिलाफ अपील को लोक अदालत में प्राथमिकता दी गई थी।इसी के चलते...
सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को नहीं समझ सका कहा, ऐसा आदेश दें, जिसे हम समझ सकें
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से 'अनुरोध' करते हुए कहा कि ऐसा आदेश पारित करें, जिसे हम समझ सकें। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश लागू करने वाली विशेष अवकाश याचिका का निपटान किया। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अस्पष्ट है। हाईकोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। पीठ ने आदेश को रद्द कर दिया और मामले को हाईकोर्ट वापस भेज दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के द्वारा एक आपराधिक रिट याचिका में पारित एक आदेश के...
ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं, केरल हाईकोर्ट का फैसला
केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह आगे की जांच करने के लिए अदालत से कोई अनुमति ले। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशराडी ने यह भी देखा कि मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद आगे की जांच करने के लिए जांच अधिकारी की शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) और राम चौधरी बनाम राज्य AIR 2009 SC 2308 के फैसले का हवाला देते हुए कहा। "अदालत से किसी भी अनुमति के बिना भी, जांच अधिकारी के पास आगे की जांच करने की...
जब खनिज और खनन अधनियम के तहत अपराध को माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत अभियोजन नहीं टिकेगा : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर खनिज और खान (विकास और विनियमन) (एमएमआरडी) अधिनियम के तहत अगर अपराध को जुर्माना वसूलकर माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत उसका अभियोजन अदालत में नहीं टिकेगा। न्यायमूर्ति पीबी बजंथ्री ने सुरेश के और फ्रंसिक @मंजुनाथ जोसफ के खिलाफ कदाबा पुलिस थाने में खनिज और खान (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 4(1) और 21(A) और कर्नाटक गौण खनिज छूट नियम के नियम 31(R), 42 और आईपीसी की धारा 379 के तहत दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। क्या है मामला याचिकाकर्ता के...
राजीव गांधी हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने MDMA से जांच की नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी साजिश की जांच कर रही मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी ( MDMA) से नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने कहा है कि एजेंसी चार हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। पीठ ने ये आदेश दोषी एजी पेरारीवलन की आजीवन कारावास की सजा के निलंबन की याचिका पर दिया है। पेरारीवलन ने दायर की थी याचिका दरअसल पेरारीवलन ने अपनी याचिका में कहा है कि जब तक मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी ( MDMA) की जांच पूरी नहीं होती उनकी सजा निलंबित की...
पुलिस मुठभेड़ की जांच के लिए क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
हाल ही में केरल के अट्टाप्पडी जंगल में चार माओवादियों को मार गिराये जाने की घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि ऐसे आरोप लगाये जा रहे हैं कि पुलिस ने इन माओवादियों को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया है। कथित मुठभेड़ में मारे गये दो व्यक्तियों के परिजनों ने त्रिशुर की सत्र अदालत में याचिका दायर करके कहा है कि पुलिस ने मुठभेड़ में हुई मौत की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुसरण नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने 2014 में 'पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र सरकार' के मामले में पुलिस...
क्या हैं महिलाओं के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर? कैसे कर रहे हैं काम
- पलक जावा एक महिला द्वारा किसी भी तरह की हिंसा झेलने पर उसे तुरंत कई तरह की सहायता की जरूरत पड़ सकती है, जैसे मेडिकल सपोर्ट, कानूनी सहायता, कई बार अस्थायी रूप से रहने के लिए स्थान, मानसिक और भावनात्मक सहयोग आदि। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि एक महिला को ये सभी सहयोग एक स्थान पर मिल जाएं और उसे अलग-अलग संस्थाओ के पास भटकना न पड़े। यही परिकल्पना है वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर की, जो महिला को वे सभी सहयोग और मदद देते हैं, जो मुश्किल पलों में उसे चाहिए होते हमहिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की वन...
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, NRC भविष्य के लिए एक आधारभूत दस्तावेज़, अवैध प्रवासियों की संख्या का पता लगाना तत्काल आवश्यक था
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने रविवार को कहा कि असम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि भविष्य के दावों को निर्धारित करने के लिए यह एक तरह का संदर्भ दस्तावेज है। उन्होंने कहा,"1985 के असम समझौते और इसके सहवर्ती विशेषताओं - नागरिकता अधिनियम में धारा 6A की शुरुआत और नागरिकों के एक राष्ट्रीय रजिस्टर का वादा कानूनी ढांचे के माध्यम से एक समाधान विकसित करने का प्रयास था। परिणाम क्या हैं? धारा 6 ए को सुप्रीम कोर्ट की सहमति का इंतज़ार है...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों का मानवीय जीवन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जेल ठीक से काम करें और राज्य के जेल में कैदियों को मानवीय जीवन प्रदान किया जाए। अंतरिम आदेश डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह ने केंद्रीय जेल, लुधियाना की अपनी यात्रा के दौरान जेलों के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की थी। सिंह ने पंजाब राज्य में जेलों के कामकाज की स्वतंत्र जांच करने और जेल के कैदियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए...
क्या 'नाजायज़' बच्चा पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट के सामने फिर आया सवाल
क्या एक 'नाजायज' बच्चे को पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बनने का अधिकार है? जितेंद्र कुमार बनाम जसबीर सिंह के मामले में विशेष अवकाश याचिका में यह मुद्दा फिर से सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। इस मामले में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दूसरी अपील को खारिज करते हुए, भरत मठ और एक अन्य बनाम आर विजया रेंगनाथन और अन्य, एआईआर 2010 एससी 2685 और जिनिया केओटिन बनाम कुमार सीताराम (2003) 1 एससीसी 730 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर भरोसा किया था और यह माना कि शून्य विवाह से पैदा...
उत्तरदाता को याचिका की प्रति दे दी गई है तो उसके अधिवक्ता फिर से वह प्रति प्राप्त करने के हकदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कहा
उत्तरदाताओं का यह कर्तव्य है कि वे अपने वकील को याचिका की प्रति उपलब्ध करवाएं। ऐसे उत्तरदाता अपने वकील को देने के लिए याचिका की अतिरिक्त प्रति प्राप्त करने के लिए आग्रह नहीं कर सकते।
भावी मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा, कॉलेजियम प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता, सरकार न्यायिक नियुक्तियों में देरी नहीं करती
एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में देश के भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा है कि कॉलेजियम प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता है। जस्टिस बोबडे ने कॉलेजियम के निर्णयों में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि, "मुझे लगता है कि पर्याप्त पारदर्शिता है। अधिकांश समय जब कुछ लोग अधिक पारदर्शिता की मांग करते हैं तो वे इसका कारण जानना चाहते हैं कि किसी का चयन क्यों नहीं किया गया। वे इतने इच्छुक नहीं हैं कि किसी को क्यों चुना गया। वे रुचि रखते हैं कि किसी को...




















