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सुप्र‌ीम कोर्ट ने दोहराया, रेवेन्यू रिकॉर्ड में हुईं एंट्रीज़ से नहीं तय होता संप‌‌‌त्त‌ि का स्वामित्व

LiveLaw News Network
25 Oct 2019 6:09 AM GMT
सुप्र‌ीम कोर्ट ने दोहराया, रेवेन्यू रिकॉर्ड में हुईं एंट्रीज़ से नहीं तय होता संप‌‌‌त्त‌ि का स्वामित्व
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश फिर दोहराया है कि राजस्व अभिलेखों यानी रेवेन्यू रिकॉर्ड में की गई एंट्रीज से संपत्त‌ि का स्वामित्व तय नहीं होता। शीर्ष अदालत ने कहा, ऐसी प्र‌व‌िष्टि‌यों से स्वामित्व का संभावित मूल्य भी तय नहीं होता।

जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने प्रह्लाद प्रधान बनाम सोनू कुम्हार के मामले में स्पष्ट किया कि ऐसी प्रविष्‍टियां केवल उस व्यक्ति को, जिसके नाम पर म्युटेशन रिकॉर्ड है, मुकदमें में शामिल जमीन का राजस्व अदा करने के लिए अधिकृत करती हैं।

प्रह्लाद प्रधान बनाम सोनू कुम्हार के मामले में एक पक्ष ने आपत्त‌ि दर्ज कराते हुए कहा था कि चूंकि 1964 के सर्वे सेटलमेंट के मुताबिक विवादित जमीन पर उनके पुरखे मंगल कुम्हार का नाम जोतदार के रूप में दर्ज है, इसलिए जमीन उनकी खुद की अर्जित की हुई संपत्त‌ि है।

बेंच ने आपत्त‌ि को खारिज करते हुए कहा कि आप‌त्त‌ि कानूनी रूप से उचित नहीं है। राजस्व अभिलेखों में की गई प्रविष्टियों से किसी संप‌त्त‌ि का स्वामित्व तय नहीं होता और ऐसी प्रविष्टियों से स्वामित्व का संभावित मूल्य भी तय नहीं होता। ऐसी प्रविष्ट‌ियों से केवल उस व्यक्ति को, जिसके नाम पर म्युटेशन रिकॉर्ड है, उस मुकदमें में शामिल जमीन का राजस्व अदा करने का अधिकार प्राप्त होता है, नतीजतन, केवल सर्वे सेटलमेंट 1964 में जोतदार के रूप में दर्ज होने कारण भर से मंगल कुम्हार विवादित संपत्त‌ि के अकेले और एक मात्र मालिक नहीं बन जाते।

बेंच ने दरअसल अपने फैसले में सवर्णी (Smt.)बनाम इंदर कौर (1996) 6 SCC 223 के फैसले को रेफर किया है। बेंच ने मामले में की गई अपील खारिज़ करते हुए कहा है कि अपीलकर्ता संपत्ति को मंगल कुम्हार द्वारा अर्जित संपत्त‌ि सबित करने के लिए सर्वे सेटलमेंट 1964 के अलावा कोई भी सबूत नहीं पेश कर पाए हैं, इसलिए उनकी अपील खारिज की जाती है।

फैसले की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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