संपादकीय
माता-पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर शादी करने वाले जोड़े को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, लड़की के पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की कार्यवाही पर लगाई रोक
माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह करने वाले एक जोड़े को अंतरिम राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में पत्नी के पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मूल रूप से राजस्थान से संबंध रखने वाला यह जोड़ा शादी के बाद मुंबई में रहने लग गया है। लड़की के पिता ने राजस्थान हाईकोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी बेटी का उस व्यक्ति ने अपहरण कर लिया है और वह उसके अवैध कब्जे में...
मजिस्ट्रेट के दंड देने की शक्तियां एवं पद- भाग 2
इसके पूर्व के आलेख में दंड न्यायालय की दंड देने की शक्तियां में सत्र न्यायाधीश, उच्च न्यायालय की शक्तियों को समझा गया था। इस लेख के माध्यम से मजिस्ट्रेट द्वारा दंड दिए जाने की शक्ति को समझने का प्रयास किया जा रहा है। दंड प्रक्रिया संहिता धारा 29 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट को दंड देने की शक्तियां दी गई है तथा या उल्लेख किया गया है कि मजिस्ट्रेट कितना दंड दे सकेंगे। न्याय तंत्र की समस्त पदावली को दो भागों में बांटा गया है। पहला न्यायाधीश, दूसरा मजिस्ट्रेट। मजिस्ट्रेट न्यायपालिका की अहम कड़ी है...
आयकर रिटर्न तलब करना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं, ये सरकारी दस्तावेज हैं : तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अदालत में आयकर रिटर्न पेश करने का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करेगा, क्योंकि ये दूसरों के लिए सुलभ सरकारी दस्तावेज हैं।न्यायालय ने उस दीवानी पुनरीक्षण याचिका का फैसला करते हुए यह व्यवस्था दी, जिसमें एक ट्रायल कोर्ट द्वारा सिविल सूट में प्रतिवादी का आयकर रिटर्न तलब करने संबंधी अर्जी ठुकराये जाने को चुनौती दी गयी थी।यह मुकदमा एक कंपनी द्वारा दायर किया गया था, जिसमें बचाव पक्ष के नाम से खरीदी गयी सम्पत्ति को...
क्या नाराजी याचिका को परिवाद (Complaint) मानना मजिस्ट्रेट के लिए अनिवार्य है?
हम अक्सर देखते हैं कि जब कोई अपराध घटित होता है तो कोई व्यक्ति (कभी मामले का पीड़ित या उसके सम्बन्धी या अन्यथा कोई व्यक्ति) जाकर पुलिस के समक्ष उस अपराध के सम्बन्ध में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराता है। पुलिस उस मामले में अन्वेषण करती है और इसके पश्च्यात वो किसी निष्कर्ष पर पहुँचती है। पुलिस द्वारा उस निष्कर्ष को एक रिपोर्ट के जरिये सम्बंधित मजिस्ट्रेट तक पहुँचाया जाता है। इस रिपोर्ट में पुलिस FIR में नामजद व्यक्ति/व्यक्तियों के विरुद्ध या तो मामला बनाती है या नहीं बनाती है और मामला बंद...
दूसरी अपील में तथ्यों के निष्कर्ष में कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता जब तक कि तथ्य के निष्कर्ष विकृत न हों : सुप्रीम कोर्ट
किसी तथ्य के निष्कर्ष में दूसरी अपील के दौरान तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक कि उन निष्कर्षों को विकृत न किया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। इस मामले में वादी ने दावा किया कि अपने पिता की मृत्यु के समय वह नाबालिग था और उसके भाइयों ने उससे कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करा लिए और उसे नहीं पता था कि उन दस्तावेज़ों में क्या है और न ही उसने कोई दस्तावेज़ी क़रार किया है और न ही उसे यह समझ है कि उन दस्तावेज़ों में क्या है। अपने नाबालिग़ होने के समर्थन...
जानिए कब पुलिस रिपोर्ट पर विचार करते हुए मजिस्ट्रेट के लिए अपराध की सूचना देने वाले (Informant) को सुनना होता है अनिवार्य
पिछले लेख में हमने जाना कि नाराजी याचिका (Protest Petition) क्या होती है और कौन कर सकता है इसे दाखिल। हम ने यह समझा कि "प्रोटेस्ट पिटीशन" (नाराजी याचिका) के सम्बन्ध में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973, भारतीय दंड संहिता, 1860 या भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 या किसी अन्य अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं दिया गया है। हालाँकि, नाराजी याचिका की अवधारणा पीड़ित पक्ष या मामले की पुलिस को इत्तिला देने वाले पक्ष के लिए एक अहम् अधिकार के रूप में साबित हुई है। हम यह कह सकते हैं कि जब पुलिस किसी आपराधिक मामले...
जानिए दंड न्यायालय के दंड देने की शक्तियां और पद
किसी समय राजा ही विधि का निर्माण करता था तथा राजा ही व्यक्तियों को अभियोजित करता था। राजा ही न्यायाधीश का काम करता था। लोकतांत्रिक व्यवस्था के आने के बाद न्याय के कार्य न्यायपालिका को प्राप्त हो गए तथा राज्य ने विधि के माध्यम से न्यायपालिका को दोषियों को दंड देने हेतु सशक्त किया। न्यायपालिका के भीतर अलग अलग दंड न्यायालय होते हैं तथा इन दंड न्यायालयों को शक्तियां दी गई हैं। यह लोगों के अपराध में विचारण कर सकते हैं तथा इन व्यक्तियों को उस विचारण के परिणामस्वरूप दंड भी दे सकते हैं। दंड...
सीपीसी : जानिए एकपक्षीय डिक्री और उसे अपास्त किए जाने के आधार
सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अंतर्गत जब पक्षकारों को समन किया जाता है तो आदेश 9 के अंतर्गत पक्षकारों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के परिणाम दिए गए है। इन परिणामों में से एक परिणाम एकपक्षीय आदेश (Ex Parte) या डिक्री होता है। एकपक्षीय आज्ञप्ति का अर्थ बुलाए गए पक्षकारों द्वारा अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण किसी एक पक्षकार को सुना जाना तथा जो पक्षकार अदालत में उपस्थित न होकर अपने लिखित अभिकथन नहीं करता है उस पक्षकार को वाद से एकपक्षीय कर दिया जाता है। जो पक्षकार न्यायालय में वाद लेकर आता है...
निचली अदालत के फ़ैसले की पुष्टि करते हुए प्रथम अपीलीय अदालत को सीपीसी के आदेश XLI नियम 31 की शर्तों का पालन करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रथम अपीलीय अदालत को अपने निर्णय के बारे में अपने कारण बताने होंगे। जब प्रथम अपीलीय अदालत निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराती है, तो उसे उम्मीद की जाती है कि वह सीपीसी के आदेश XLI नियम 31 की शर्तों का पालन करेगी और अगर इसका पालन नहीं किया जाता है तो इससे प्रथम अपीलीय अदालत के फ़ैसले में अस्थिरता आएगी। यह बात न्यायमूर्ति एए नज़ीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की बेंच ने कही। पीठ ने हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया जिसने प्रथम...
अज़ान के लिए लाउड स्पीकर बैन करने पर याचिका : दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को एक अवमानना याचिका पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह निर्देश उसके पहले के आदेश के अनुपालन के संबंध में है, जिसमें अदालत ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउड स्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। वर्तमान अवमानना याचिका संजीव कुमार ने लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि अदालत के उक्त आदेश के बाद भी दिल्ली में लगभग सभी मस्जिदें लाउड स्पीकर का उपयोग कर रही हैं, जो 2005 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा और 2019...
बॉम्बे हाईकोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस धर्माधिकारी ने इस्तीफा दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्यरंजन धर्माधिकारी ने अपना इस्तीफा दे दिया है। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने शुक्रवार को अपने कोर्ट में एक वकील से कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण नहीं बताया। उन्होंने अपने इस्तीफी की बात वकील से उस समय की जब वकील मैथ्यू नेदुम्परा ने एक याचिका का उल्लेख किया जिसमें अदालत से अगले सप्ताह इस पर सुनवाई करने की मांग की। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने अदालत में कहा, "मैंने इस्तीफा दे दिया है। आज...
जानिए नाराजी याचिका (Protest Petition) क्या होती है और कौन कर सकता है इसे दाखिल?
हम अक्सर ही ऐसे मामले देखते हैं जहां एक व्यक्ति (victim/informant) एक मामले को लेकर एक FIR दर्ज करता है, पुलिस उस मामले में अन्वेषण करती है और उसके पश्च्यात पुलिस द्वारा मामले में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी जाती है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट तब दाखिल की जाती है जब पुलिस को अपने अन्वेषण में FIR में अभियुक्त के तौर पर नामजद व्यक्ति/व्यक्तियों के खिलाफ कोई मामला बनता नहीं दिखता है। इसके परिणामस्वरूप कई बार मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसे व्यक्ति/व्यक्तियों को डिस्चार्ज कर दिया जाता है (हालाँकि,...
अगर आरोपी का वकील नहीं है तो अदालत को या तो एमिकस नियुक्त करना होगा या लीगल कानूनी सेवा समिति को वकील नियुक्त करने के लिए आग्रह करना होगा : SC
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जब किसी अभियुक्त का न्यायालय में कोई वकील पैरवी करने के लिए नहीं होता तो उसके लिए या तो एमिकस क्यूरी नियुक्त करना होगा या लीगल कानूनी सेवा समिति को इस मामले को संदर्भित करना होगा ताकि वो कोई वकील नियुक्त कर सके। इस मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने की पुष्टि की थी, बावजूद इसके कि अपील की सुनवाई के दौरान वो अदालत के सामने वकील प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। इस दृष्टिकोण को खारिज करते...
भारत में पहली बार कोर्ट रूम से लाइव स्ट्रीमिंग, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दी अनुमति
भारत के इतिहास में पहली बार कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को पारसी महिलाओं और गैर-पारसी पुरुषों से पैदा हुए बच्चों को अग्नि मंदिर में पूजा स्थल में प्रवेश करने की अनुमति देने के एक मामले की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मंज़ूरी दी। कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति लेने के लिए कलकत्ता के पारसी जोरास्ट्रियन एसोसिएशन (PZAC) के वकील फिरोज एडुल्जी ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि इस मामले की सुनवाई देश के सभी पारसियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और वे इसके परिणाम से लाभान्वित होंगे। ...
कानून के विद्यार्थियों को जस्टिस जोसेफ की सलाहः वकालत के पेशे को हल्के में ना लें
एनयूएएलएस, कोच्चि के 13 वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ ने युवाओं के साथ कानून के अपने अनुभव साझा किया। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि कानूनी पेशा रोजगार नहीं है, कानूनी पेशेवर के लिए 'सीखने का जुनून' बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, "वकालत के पेशे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। आप किसी सर्जन से कम नहीं है, जिसकी कुशलता, परिश्रम और समर्पण पर किसी मरीज़ की ज़िदगी का दारोमदार होता है।" "एक वकील को चिंतनशील होना चाहिए। कल्पना और अंतर्ज्ञान की शक्ति...
CrPC की धारा 482: हाईकोर्ट 161 CrPC के तहत बयानों के मूल्यांकन के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह फैसला दिया है कि CrPC की धारा 161 के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष दर्ज बयानों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता है।न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ द्वारा दिए गए निर्णय में यह निर्धारित किया गया है कि केवल अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने और न्याय की सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय द्वारा CrPC की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप किया जा सकता है।केस के तथ्य :अपीलकर्ता ने मध्य प्रदेश के जिला नरसिंहपुर के थाना करेली में...
कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका, 'एंटी-सीएए प्ले' पर नाबालिग छात्रों से पूछताछ करने के मामले में पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग
कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर नागरिकता संशोधन अधिनियम से संबंधित एक नाटक के संबंध में शाहीन एजुकेशन सोसायटी, बीदर के नाबालिग छात्रों से अवैध रूप से पूछताछ करने के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका वकील नयना ज्योति झावर और दक्षिण इंडिया सेल फॉर ह्यूमन राइट्स एजुकेशन एंड मॉनिटरिंग ने दायर की है और कहा है कि लगभग 85 बच्चे, जिनमें से कुछ 9 वर्ष से कम उम्र के हैं, उनसे पुलिस ने पूछताछ की थी। इससे बच्चों के लिए माहौल बहुत प्रतिकूल हो गया है और बच्चों...
क्या हम अपने मूल अधिकारों का परित्याग कर सकते हैं, जानिए सुप्रीम कोर्ट का मत
भारत का संविधान अपने नागरिकों को (कुछ मामलों में गैर-नागरिकों को भी) कुछ मौलिक अधिकारों को लागू करने की गारंटी देता है। संविधान के अंतर्गत मौजूद मौलिक अधिकार, वैदिक काल से इस देश के लोगों द्वारा पोषित मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये अधिकार, मानवाधिकारों की बुनियादी संरचना के मद्देनजर कुछ मूलभूत गारंटियों का पैटर्न बुनते हैं।इसके अलावा यह अधिकार, राज्य पर सम्बंधित नकारात्मक दायित्वों को लागू करते हैं, ताकि इसके विभिन्न आयामों में व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अतिक्रमण न किया जा सके।...

















