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सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप पर एक नज़र

Sharafat Khan
10 Feb 2020 8:46 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप पर एक नज़र
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Supreme Court Weekly Round-Up

सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह। देखिए वीकली राउंड अप के तहत सुप्रीम कोर्ट के खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

(निश्चित अदायगी) वादी को यह साबित करना होगा कि उसके पास बकाया भुगतान के लिए संसाधन उपलब्ध है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की निश्चित अदायगी से संबंधित मुकदमे में वादी को यह साबित करना अनिवार्य है कि उसके पास बकाये भुगतान के लिए संसाधन उपलब्ध है।

न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ निश्चित अदायगी संबंधी मुकदमे से उत्पन्न एक अपील पर विचार कर रही थी।

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सेना में महिलाओं को कमांड नियुक्ति ना देने पर उनका गौरव और साहस प्रभावित होंगे : सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें

केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सेना में महिलाओं को कमांड नियुक्ति नहीं देने के कारणों पर महिला अधिकारियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर लिखित दलीलों में 'अत्यधिक प्रतिगामी' के रूप में आलोचना की गई है।

यह प्रस्तुत किया गया है कि महिला अधिकारी कमांड नियुक्ति से इनकार करने के संबंध में भारत संघ की ओर से सौंपे गए नोट में दिए गए औचित्य / कारण न केवल अत्यधिक प्रतिगामी हैं बल्कि पूरी तरह से प्रदर्शित रिकॉर्ड और आंकड़ों के विपरीत हैं," मामले में वरिष्ठ वकील ऐश्वर्या भट द्वारा प्रस्तुत लिखित प्रस्तुतियों में कहा गया है।

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किसी व्यक्ति को गोद लिए जाने से पहले जन्मे उसके बच्चों को दत्तक परिवार से मिली संपत्ति में अधिकार मिलेगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गोद लिए गए किसी व्यक्ति के ऐसे बच्चे जो उसके गोद लेने से पहले जन्मे हैं, उन्हें गोद लेने वाले परिवार से अपने पिता को मिली संपत्ति में अधिकार मिलेगा।

मामले के तथ्य दिलचस्प हैं। लक्ष्मण और उनकी पत्नी पद्मावती के पहले से ही तीन बेटे थे, जब उन्हें वर्ष 1935 में एक सरस्वती नामक महिला को गोद दिया गया था। गोद लिए जाने के बाद लक्ष्मण और पद्मावती के घर एक बेटी का जन्म हुआ। लक्ष्मण की मृत्यु के बाद विभाजन का एक मुकदमा उनके तीन बेटों में से एक बेटे ने दायर किया था।

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कठुआ रेप और हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चल रही कार्रवाई पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप की के बाद हत्या के मामले में नाबालिग आरोपी के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने शुक्रवार को ये रोक जम्मू-कश्मीर प्रशासन की उस याचिका पर लगाई जिसमें कहा गया था कि 2018 में अपराध के वक्त आरोपी बालिग था और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश की पुष्टि कर गलती की है। मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को सूचीबद्ध की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से पंजाब DGP की नियुक्ति रद्द करने के CAT के फैसले पर सुनवाई में तेजी लाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से कहा कि वो पंजाब सरकार की केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (चंडीगढ़ बेंच) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को तेज करे जिसमें दिनकर गुप्ता की राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि वो उच्च न्यायालय से मामले की सुनवाई में तेज़ी लाने का अनुरोध करते हैं क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा दी गई" लंबी तारीख "पर सवाल उठाया गया है।

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राज्य सेवाओं में पदोन्नति में SC/ST आरक्षण ना देने के निर्णय को सही ठहराने के लिए मात्रात्मक डेटा देना आवश्यक नही : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार को पदोन्नति में आरक्षण ना देने के अपने निर्णय को सही ठहराने के लिए मात्रात्मक डेटा के आधार पर ये दर्शाने की आवश्यकता नहीं है कि राज्य सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने माना कि सार्वजनिक सेवाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व की पर्याप्तता से संबंधित मात्रात्मक डेटा एकत्र करने के लिए न्यायालय द्वारा राज्य को कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता है।

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शाहीन बाग में बच्चे की मौत : सुप्रीम कोर्ट ने धरने में बच्चों की भागीदारी पर संज्ञान लिया

सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन में 30 जनवरी को एक शिशु की मौत के मद्देनजर प्रदर्शन और आंदोलन में बच्चों और शिशुओं को शामिल करने के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान ले लिया है। यह संज्ञान एक छात्रा द्वारा देश के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र पर लिया गया है जिसमें इस मुद्दे पर अदालत के हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है। यह मामला 10 फरवरी को CJI एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

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विवादित सम्पत्ति को छोड़कर कंप्रोमाइज डिक्री को पंजीकृत कराने की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस सम्पत्ति पर कोई विवाद नहीं है उसके लिए समझौता हुक्मनामे (कंप्रोमाइज डिक्री) के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने गैर-पंजीकृत कंप्रोमाइज डिक्री की स्वीकार्यता पर वादी द्वारा उठायी गयी आपत्तियों को सही ठहराया था। वादी ने बचाव पक्ष द्वारा कंप्रोमाइज डिक्री को साक्ष्य के तौर पर शामिल करने की मांग पर यह कहते हुए सवाल खड़े किये थे कि यह कंप्रोमाइज डिक्री पंजीकृत नहीं थी।

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पुनर्विचार याचिका में पारित किसी आदेश की समीक्षा नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट

पुनर्विचार याचिका में पारित किसी आदेश की समीक्षा नहीं हो सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ लोक प्रहरी द्वारा पुनर्विचार याचिका में पारित आदेश को वापस लेने के लिए दायर एक आवेदन को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में एनजीओ लोक प्रहरी द्वारा एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें मांग की गई थी कि चूंकि कानून दोषसिद्धि पर रोक प्रदान नहीं करता है, यहां तक ​​कि इस मामले में अपीलीय अदालत द्वारा एक अपराध के लिए इस पर रोक लगाई गई हो तो भी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 के तहत अयोग्यता पर ऐसे किसी भी स्थगन आदेश का प्रभाव नहीं होता है।

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बीमा पॉलिसी के लाभार्थी भी 'उपभोक्ता', भले ही वो पार्टी न होंः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बीमाधारक द्वारा ली गई बीमा पॉलिसी के लाभार्थी भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत 'उपभोक्ता' हैं, भले ही वे बीमा अनुबंध के पक्षकार न हों। इस मामले में, किसानों ने श्रीदेवी कोल्ड स्टोरेज नामक एक साझेदारी फर्म के तहत संचालित कोल्ड स्टोर में अपनी उपज का भंडारण किया था। कोल्ड स्टोरेज फर्म का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ किया गया था। राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी द्वारा कोल्ड स्टोर के दावे को निरस्त करने के खिलाफ किसानों द्वारा दायर शिकायतों के मामले में राहत दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया, मोटर दुर्घटना के मामलों में कैसे तय करें मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने एक दुर्घटना में 100 फीसदी विकलांग हो गई एक लड़की के मुआवजे को बढ़ाते हुए मोटर एक्सिडेंट क्‍लेम के मामलों में मुआवजे के अनुदान के कुछ सिद्धांतों को पर जोर दिया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत उचित मुआवजे के भुगतान की आवश्यकता है और अदालत का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पीड़‌ित को उचित मुआवजा दिया जाए।

पीठ ने विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहाः "मानवीय पीड़ा और निजी क्षति को धन में बराबर रखना असंभव है। हालांकि यह वही है जिसे करने का आदेश कानून, अदालतों को देता है। अदालत को मुआवजा दिलाने के लिए विवेकपूर्ण प्रयास करना पड़ता है, ताकि पीड़‌ित के नुकसान की की भरपाई हो सके। एक ओर जहां, मुआवजे का आकलन बहुत रूढ़िवादी ढंग से नहीं किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर, मुआवजे का आकलन बहुत उदार होकर भी नहीं किया जाना चाहिए कि वह दावेदार के लिए पुरस्कार बन जाए।

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एनआई एक्ट की धारा 138 : चेक बाउंस के मामलों में बही-खाता पेश करना प्रासंगिक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज आपराधिक मामले में बही-खाता/ नकदी बही प्रस्तुत करना प्रांसगिक नहीं हो सकता है। इस मामले में, प्रथम अपीलीय अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराये जाने संबंधी ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता ने नकदी बही और खाते को प्रस्तुत नहीं किया था, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी के यहां कोई बकाया था, जिसका भुगतान आरोपी द्वारा किया जाना था।

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सुप्रीम कोर्ट ने MP के श्रम कानूनों के तहत अपराधों पर आपराधिक अदालतों में मुकदमा चलाने के संशोधन को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश श्रम कानून (संशोधन) और विविध प्रावधान अधिनियम, 2002 को बरकरार रखा है जिसमें श्रम कानूनों के तहत अपराधों पर नियमित आपराधिक न्यायालयों में मुकदमा चलाने की शक्ति को बहाल किया गया है।

दरअसल 1981 में अधिनियम में संशोधन किया गया था और श्रम कानूनों के तहत अपराधों पर मुकदमा चलाने की शक्ति श्रम न्यायालयों की बजाए नियमित आपराधिक न्यायालयों को दी गई थी। बाद में 2002 में, एक और संशोधन द्वारा, इस प्रक्रिया को उलटा करने की मांग की गई थी। द लेबर बार एसोसिएशन, सतना और MP ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन की याचिका को अनुमति देते हुए हाईकोर्ट ने इस संशोधन को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि अनुच्छेद 21 ने त्वरित न्याय का अधिकार दिया और एक तरह से संशोधन ने त्वरित न्याय का यह अधिकार छीन लिया।

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पीड़ित/ शिकायतकर्ता को विरोध याचिका दाखिल करने का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले की पुष्टि की है जिसमें यह कहा गया था कि कोई याचिकाकर्ता, पीड़ित होने के नाते, पुलिस की अंतिम रिपोर्ट की स्वीकृति से पहले नोटिस के लिए अनिवार्य रूप से हकदार है और यदि ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया गया है तो विरोध याचिका दायर करना उसका अधिकार है। दरअसल मद्रास हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति एडी जगदीश चंदीरा की पीठ ने पिछले साल संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया था कि शिकायतकर्ता (उत्तरदाता) के उच्च मूल्य वाली भूमि के संबंध में किए गए घोटाले से संबंधित मामले को फिर से उठाएं और दो महीने की अवधि के भीतर योग्यता पर आदेश पारित करें

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ब्लड बैंक और संशोधित एनबीटीसी दिशानिर्देशों के विनियमन की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट की खंडपीठ ने देश में ब्लड बैंकों और रक्त भंडारण इकाइयों को मज़बूत बनाने और इनको विनियमित करने से संबंधित जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया है। यह याचिका एसोसिएशन ऑफ रुरल सर्जन्स ऑफ़ इंडिया, जन स्वास्थ्य सहयोग शहीद हॉस्पिटल ने दायर किया है। याचिका में श्रेणी A, B और C के तहत वरीयता वाले जिलों में ब्लड बैंकों के विनियमन का आदेश देने की मांग की गई है। श्रेणियों का यह वर्गीकरण नेशनल एड्ज़ कंट्रोल प्रोग्राम- III ने नेशनल एड्ज़ कंट्रोल ऑर्गनायज़ेशन के तहत किया है।

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