अगर आरोपी का वकील नहीं है तो अदालत को या तो एमिकस नियुक्त करना होगा या लीगल कानूनी सेवा समिति को वकील नियुक्त करने के लिए आग्रह करना होगा : SC

अगर आरोपी का वकील नहीं है तो अदालत को या तो एमिकस नियुक्त करना होगा या  लीगल कानूनी सेवा समिति को वकील नियुक्त करने के लिए आग्रह करना होगा : SC

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जब किसी अभियुक्त का न्यायालय में कोई वकील पैरवी करने के लिए नहीं होता तो उसके लिए या तो एमिकस क्यूरी नियुक्त करना होगा या लीगल कानूनी सेवा समिति को इस मामले को संदर्भित करना होगा ताकि वो कोई वकील नियुक्त कर सके।

इस मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने की पुष्टि की थी, बावजूद इसके कि अपील की सुनवाई के दौरान वो अदालत के सामने वकील प्रस्तुत नहीं कर पाए थे।

इस दृष्टिकोण को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनगौदर और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने इस प्रकार कहा :

राकेश और अन्य बनाम मध्य प्रदेश, 20111 (12) SCC 512 में इस न्यायालय के निर्णय समेत कई फैसलों में अच्छी तरह से निपटाया गया है कि यह न्यायिक के हित में है कि उस अदालत की सहायता के लिए अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे जहां उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

अदालत इस मामले को कानूनी सेवा समिति को भी संदर्भित कर सकती है, जो अभियुक्त का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक वकील नियुक्त कर सकती है। उच्च न्यायालय ने दुर्भाग्यवश, एमिकस क्यूरी को नियुक्त करने के लिए या कानूनी सेवा समिति को वकील नियुक्त करने का अनुरोध करने के लिए मामले को संदर्भित करने के लिए नहीं चुना।

हालांकि यह देखा गया कि यह मामला उच्च न्यायालय में भेजे जाने लायक है, लेकिन पीठ ने इस मामले के तथ्य पर ध्यान दिया कि यह घटना वर्ष 2011 में घटी थी और आरोपी करीब 8 महीने तक हिरासत में रहे थे। रिकॉर्ड पर सबूतों का हवाला देते हुए पीठ ने दोषी ठहराए जाने की पुष्टि तो की लेकिन कारावास की काटी सजा के तौर पर ही सजा का समय तय कर दिया।