संपादकीय

हाईकोर्ट से संपर्क करें, सुप्रीम कोर्ट ने मप्र लव जिहाद कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
"हाईकोर्ट से संपर्क करें", सुप्रीम कोर्ट ने मप्र लव जिहाद कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें धार्मिक रूपांतरण और अंतर-धार्मिक विवाह से संबंधित मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिट याचिका पर कहा,"मप्र हाईकोर्ट से संपर्क करें। हम हाईकोर्ट के विचार देखना चाहेंगे। हमने इसी तरह के मामलों को हाईकोर्ट को वापस भेजा है।"पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से याचिका वापस लेने को कहा और उच्च न्यायालय में याचिका स्थानांतरित करने...

[दिशा रवि टूल किट केस] मीडिया सनसनीखेज तरीके से सूचना का प्रसार नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने चैनल के संपादकों को निर्देश दिया, दिशा को भी पुलिस को बदनाम करने से रोका
[दिशा रवि टूल किट केस] मीडिया सनसनीखेज तरीके से सूचना का प्रसार नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने चैनल के संपादकों को निर्देश दिया, दिशा को भी पुलिस को बदनाम करने से रोका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना है कि टूलकिट मामले का हालिया कवरेज निश्चित रूप से दिखाता है कि मीडिया द्वारा सनसनीखेज रिपोर्टिंग की गई है।न्यायमूर्ति प्रथिबा सिंह की खंडपीठ ने टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे और न्यूज 18 चैनल के संपादकों को निर्देश दिया कि सूचनाओं का प्रसार करते समय उचित संपादकीय नियंत्रण का उपयोग सुनिश्चित करें ताकि जांच प्रभावित न हो।कोर्ट ने उक्त टिप्पण‌ियां एक्टिविस्ट दिश रवि की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें इंडिया टुडे, टाइम्स नाउ और न्यूज 18 के खिलाफ टूलकिट मामले में हिंसक...

NHAI बनाम प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन : सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस ( सेवानिवृत ) जीएस सिंघवी को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया
NHAI बनाम प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन : सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस ( सेवानिवृत ) जीएस सिंघवी को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा दायर एक अपील की अनुमति देते हुए, पक्षों को मध्यस्थ कार्यवाही के लिए आईसीए घरेलू वाणिज्यिक मध्यस्थता और सुलह, 2016 के नियमों के अनुसार विवादों के निपटारे के लिए 2 सप्ताह के भीतर भारतीय मध्यस्थता परिषद के समक्ष जाने का निर्देश दिया।यह आदेश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ से आया है, जिसने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 04.12.2019 को रद्द किया है। 10.04.2019 के उच्च न्यायालय के आदेश में एकल पीठ...

जो पक्षकार सीपीसी 89 के तहत अदालती हस्तक्षेप के बिना विवाद को निपटाने में सहमत हुए, वो कोर्ट फीस वापस लेने के हकदार : सुप्रीम कोर्ट
जो पक्षकार सीपीसी 89 के तहत अदालती हस्तक्षेप के बिना विवाद को निपटाने में सहमत हुए, वो कोर्ट फीस वापस लेने के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि जो पक्ष निजी तौर पर सिविल विवाद प्रक्रिया की धारा 89 के तहत विचार किए गए माध्यम के बाहर अपने विवाद को निपटाने के लिए सहमत होते हैं, वो भी कोर्ट फीस वापस लेने के हकदार हैं।निजी समझौतों में भाग लेने वाले समान लाभ के हकदार होंगे, जिन्हें धारा 89 सीपीसी के तहत वैकल्पिक विवाद निपटान विधियों का पता लगाने के लिए संदर्भित किया गया है, पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति विनीत सरन शामिल हैं, ने कहा।इस मामले में, मद्रास उच्च न्यायालय (प्रशासनिक पक्ष) ने...

हम किसी को शारीरिक रूप से सुनवाई के लिए सहमति देने के लिए कैसे बाध्य कर सकते हैं  : सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के परिपत्र के खिलाफ याचिका पर कहा
"हम किसी को शारीरिक रूप से सुनवाई के लिए सहमति देने के लिए कैसे बाध्य कर सकते हैं " : सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के परिपत्र के खिलाफ याचिका पर कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए दी जिसमें COVID-19 महामारी के परिणामस्वरूप अदालत के प्रतिबंधित कामकाज के दौरान किसी मामले की अंतिम सुनवाई से पहले दोनों पक्षों की सहमति के उच्च न्यायालय के परिपत्र को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।अब्दुल्ला 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट में उनके द्वारा दायर की गई वैवाहिक अपील की अंतिम सुनवाई की मांग कर रहे हैं, जिसमें...

जब कोई पुरुष एक ऐसी महिला से शादी करता है जिसके बारे में जानता है कि उसका पहले पति से कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है, तो 125 की कार्यवाही में शादी के अवैध होने की दलील नहीं दे सकताः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
जब कोई पुरुष एक ऐसी महिला से शादी करता है जिसके बारे में जानता है कि उसका पहले पति से कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है, तो 125 की कार्यवाही में शादी के अवैध होने की दलील नहीं दे सकताः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना है कि एक पुरुष, जो एक महिला से बारे में पूरी तरह से जानता था कि उसकी पूर्व की शादी वैध तलाक के जरिए समाप्त नहीं हुई है, उसे सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण पोषण की कार्यवाही में विवाह के अवैध होने की दलील देने से रोक दिया जाता है। न्यायमूर्ति राजेंद्र चंद्र सिंह सामंत की एकल पीठ ने एक फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ दायर एक रिविजन पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। फैमिली कोर्ट ने आवेदक-पत्नी को इस आधार पर भरण पोषण भत्ता देने से इनकार कर दिया था कि उसने पहले...

सुप्रीम कोर्ट ने NRI के लिए डाक मतपत्र सुविधा की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने NRI के लिए डाक मतपत्र सुविधा की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस रिट याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें चुनाव के समय अपने मतदान क्षेत्र के बाहर रहने वाले अनिवासी भारतीयों और अन्य लोगों के लिए डाक मतपत्र जैसे तरीकों के जरिए मतदान के अधिकार की मांग की गई है।कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।केरल के एक राजनीतिक एक्टिविस्ट के सत्यन द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि इन दिनों, बहुसंख्यक आबादी अपने निर्वाचन क्षेत्र से अस्थायी रूप से दूर रहती है, जिनमें पेशा, व्यवसाय, व्यापार, शिक्षा, विवाह आदि...

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के पीछे बड़ी साजिश की जांच पर शुरू स्वतः संज्ञान कार्यवाही बंद की
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के पीछे "बड़ी साजिश" की जांच पर शुरू स्वतः संज्ञान कार्यवाही बंद की

भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के पीछे "बड़ी साजिश" होने की जांच करने के लिए शुरू की गई स्वतः संज्ञान कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बंद कर दिया।"इन रि : मैटर ऑफ ग्रेट पब्लिक इंपोर्टेंस टचिंग अपॉन द इंडिपेंडेंस ऑफ ज्यूडिशियरी" शीर्षक वाले इस मामले पर 1 साल 9 महीने की अवधि के बाद जस्टिस संजय किशन कौल,जस्टिस, एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने विचार किया।आज न्यायमूर्ति कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ...

जहां धोखाधड़ी, गलतबयानी या गलती से समझौता नष्ट हो गया है वहां सहमति देने वाली डिक्री प्रतिबंध के रूप में काम नहीं करेगी : सुप्रीम कोर्ट
जहां धोखाधड़ी, गलतबयानी या गलती से समझौता नष्ट हो गया है वहां सहमति देने वाली डिक्री प्रतिबंध के रूप में काम नहीं करेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि जहां धोखाधड़ी, गलतबयानी, या गलती से समझौता नष्ट हो गया है वहां सहमति देने वाली डिक्री एक प्रतिबंध के रूप में काम नहीं करेगी।यह मामला बेअंत सिंह द्वारा पूर्व में स्वामित्व वाली संपत्ति के भूतल के संबंध में कम्पैक एंटरप्राइजेज पर दायर कब्जे और मध्यवर्ती मुनाफे के लिए दाखिल सूट से निकला था।उच्च न्यायालय ने एक सहमति डिक्री पारित की, जिसमें निर्देश दिया गया कि 'याचिकाकर्ता (कम्पैक) उत्तरदाता (सिंह) को मध्यवर्ती मुनाफे के माध्यम से, हर 12 महीने बाद 10% की वृद्धि के साथ...

RTI : सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस अरुण मिश्रा के सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी आवास में रहने पर कारण देने से इनकार किया
RTI : सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस अरुण मिश्रा के सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी आवास में रहने पर कारण देने से इनकार किया

सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई अधिनियम) के तहत दायर एक आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा के अपने आधिकारिक बंगले में समय से अधिक रहने के बारे में विवरण मांगने पर, सुप्रीम कोर्ट ने खुलासा किया है कि इस संबंध में जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती है क्योंकि इसे आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) और धारा 11 (1) के तहत छूट प्राप्त है।यह जवाब शेरिल डिसूजा द्वारा दायर एक आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त रजिस्ट्रार और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी अजय अग्रवाल ने दिया...

महिला को उत्पीड़न के खिलाफ अवाज उठाने के लिए दंडित नहीं किया जा सकताः प्र‌िया रमानी का बरी किया जाना मी टू आंदोलन की जीत
महिला को उत्पीड़न के खिलाफ अवाज उठाने के लिए दंडित नहीं किया जा सकताः प्र‌िया रमानी का बरी किया जाना 'मी टू' आंदोलन की जीत

पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ मानहानि के मुकदमे में पत्रकार प्रिया रमानी का बरी किया जाना देश में यौन उत्पीड़न के मामले में दिया गया महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के एसीएमएम रवींद्र पांडे ने बुधवार को यह फैसला दिया था।यौन उत्पीड़न के मामले में रमानी का बोलना, पेशकश के बावजूद 'समझौते' से इनकार करना और उनका बचाव - इन सभी बातों ने उस मुद्दे में काफी मदद की, जिसके लिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई थी, यानी-सार्वजनिक कल्याण और सार्वजनिक हित। आज भी,...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 12: संघ की कार्यपालिका और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 12: संघ की कार्यपालिका और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया

पिछले आलेख में भारत के संविधान के अंतर्गत राज्य की नीति के निदेशक तत्व के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान के भाग 5 संघ की कार्यपालिका जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का उल्लेख सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पर चर्चा की जा रही है।संघ की कार्यपालिकाजैसा कि पूर्व के आलेख में यह उल्लेख किया गया है भारत के संविधान के अंतर्गत संघ का अर्थ केंद्र है और राज्य का अर्थ प्रांत है। भारत राज्यों का एक संघ है। राज्यों के पास अपनी पृथक शक्तियां हैं और संघ के पास अपनी पृथक शक्तियां हैं परंतु फिर...

महिलाओं को दशकों बाद भी अपनी शिकायत सामने रखने का अधिकार: दिल्ली कोर्ट ने एमजे अकबर आपराधिक मानहानि केस में प्रिया रमानी को बरी किया
'महिलाओं को दशकों बाद भी अपनी शिकायत सामने रखने का अधिकार': दिल्ली कोर्ट ने एमजे अकबर आपराधिक मानहानि केस में प्रिया रमानी को बरी किया

दिल्ली की अदालत ने बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को बरी कर दिया है। प्रिया द्वारा लगाए गए ''मीटू'' यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद यह अवमानना का केस दायर किया गया था। अदालत ने कहा कि,''महिलाओं को दशकों के बाद भी अपनी शिकायत सामने रखने का अधिकार है।'' यह भी कहा कि सोशल स्टे्टस वाला व्यक्ति भी यौन उत्पीड़न करने वाला हो सकता है। कोर्ट ने माना कि,''यौन शोषण गरिमा और आत्मविश्वास को खत्म कर देता है। प्रतिष्ठा का अधिकार गरिमा के...

वसीयत के तहत निष्पादक या वसीयत दार के रूप में अधिकार स्थापित करने के लिए प्रोबेट यानी प्रमाणित इच्छा पत्र या प्रशासन के पत्र लेने की अनिवार्यता आवश्यक ? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया
वसीयत के तहत निष्पादक या वसीयत दार के रूप में अधिकार स्थापित करने के लिए प्रोबेट यानी प्रमाणित इच्छा पत्र या प्रशासन के पत्र लेने की अनिवार्यता आवश्यक ? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी वसीयत के तहत निष्पादक या वसीयतदार के रूप में अधिकार स्थापित करने के लिए प्रोबेट यानी प्रमाणित इच्छा पत्र या प्रशासन के पत्र लेने की अनिवार्य आवश्यकता, केवल हिंदू, बौद्ध, सिख या जैन द्वारा बनाई गई वसीयत पर लागू होती है, जो उच्च न्यायालयों के सिविल अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर होती है और उन क्षेत्रों के बाहर बनाई गई वसीयत की सीमा, जिसमें वे उन क्षेत्रों के भीतर अचल संपत्ति को सम्मिलित किया गया है, को कवर करती है।न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन ने कहा,ऐसे...

समुदाय की जरूरतों और हितों को देखना होगा: सुप्रीम कोर्ट ने चांदनी चौक के दशकों पुराने हनुमान मंदिर को हटाने के खिलाफ याचिका को खारिज किया, वैकल्पिक स्थल के अनुदान के लिए प्रतिनिधित्व देने को कहा
"समुदाय की जरूरतों और हितों को देखना होगा": सुप्रीम कोर्ट ने चांदनी चौक के दशकों पुराने हनुमान मंदिर को हटाने के खिलाफ याचिका को खारिज किया, वैकल्पिक स्थल के अनुदान के लिए प्रतिनिधित्व देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के चांदनी चौक में 3 जनवरी को दशकों पुराने हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ के खिलाफ याचिका को एक वैकल्पिक स्थल के अनुदान के लिए प्रतिनिधित्व देने की स्वतंत्रता के साथ खारिज कर दिया। इस घटना ने राष्ट्रीय राजधानी में हंगामा मचा दिया था।इस तोड़फोड़ ने, जो कि दिल्ली सरकार की चांदनी चौक पुनर्विकास योजना का हिस्सा थी, ने आम आदमी पार्टी (आप) जो सरकार का नेतृत्व करती है, और भाजपा, जो उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को नियंत्रित करती है, के बीच तनातनी भी पैदाकर दी थी,जिस...

सुप्रीम कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों की निर्मम हत्या के दोषी को प्राकृतिक जीवन की अंतिम सांस तक के लिए उम्रकैद की पुष्टि की
सुप्रीम कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों की निर्मम हत्या के दोषी को प्राकृतिक जीवन की अंतिम सांस तक के लिए उम्रकैद की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने सल्फास खिलाकर दो बच्चों की हत्या के दोषी व्यक्ति को शेष प्राकृतिक जीवन की अंतिम सांस तक के लिए उम्रकैद की सजा की पुष्टि की है।गौरी शंकर को चार वर्ष और दो वर्ष की उम्र के दो नाबालिग बच्चों को सल्फास खिलाकर निर्मम हत्या करने का दोषी पाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया था और 01 जुलाई 2013 को एक आदेश जारी करते हुए उसे प्राकृतिक जीवन की अंतिम सांस तक के लिए उम्रकैद की सजा सुनायी थी और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।...

सुप्रीम कोर्ट कोविड वैक्सीन प्राथमिकता सूची में न्यायधीशों, वकीलों, अदालत के कर्मचारियों को शामिल करने की मांग पीआईएल पर विचार करने के लिए कहा
सुप्रीम कोर्ट कोविड वैक्सीन प्राथमिकता सूची में न्यायधीशों, वकीलों, अदालत के कर्मचारियों को शामिल करने की मांग पीआईएल पर विचार करने के लिए कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह वकीलों, न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को COVID-19 वैक्सीन के लिए प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करेगा।भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो सप्ताह बाद अरविंद सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि न्यायपालिका और वकीलों को भी डॉक्टरों, पुलिस आदि के बराबर अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता माना जाना चाहिए और वैक्सीन के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए ।याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए एडवोकेट अमिक खेमका ने पेश किया कि...

National Uniform Public Holiday Policy
'जूनियर अधिकारी के साथ फ्लर्ट करना किसी न्यायाधीश के लिए स्वीकार्य आचरण नहीं ' : सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के लिए विभागीय कार्यवाही झेल रहे मध्य प्रदेश के जज को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के एक पूर्व जिला जज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने पर अनिच्छा व्यक्त की जिन्होंने एक जूनियर न्यायिक अधिकारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर मप्र उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को चुनौती दी है।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से अपील करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता महिला अधिकारी को याचिकाकर्ता द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप संदेशों को पढ़ा। ...

सीपीसी आदेश 20 में निर्धारित निर्णय की घोषणा के लिए टाइम लाइन हाईकोर्ट के लिए लागू नहीं होती : सुप्रीम कोर्ट
सीपीसी आदेश 20 में निर्धारित निर्णय की घोषणा के लिए टाइम लाइन हाईकोर्ट के लिए लागू नहीं होती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 20 में निर्धारित निर्णय की घोषणा के लिए टाइम लाइन (समयरेखा) उच्च न्यायालय के लिए लागू नहीं होती है।इस मामले में, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निर्णय देने में देरी के आधार पर एकल न्यायाधीश के निर्णय को रद्द कर दिया था। डिवीजन बेंच ने कहा कि इस मामले में बहस 24.12.2019 को समाप्त हो गई और उसके बाद 30.09.2020 को नौ महीने से अधिक समय के बाद निर्णय सुनाया गया। इस प्रकार ये तय करने के लिए, डिविजन बेंच ने सिविल प्रक्रिया संहिता के...

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को अडानी ग्रुप को लीज पर देने के खिलाफ केरल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 16 मार्च को सुनवाई करेगा
तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को अडानी ग्रुप को लीज पर देने के खिलाफ केरल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 16 मार्च को सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल सरकार के अडानी एंटरप्राइजेज को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को लीज पर देने के एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच को सुनवाई को 16 मार्च के लिए पोस्ट किया।केरल सरकार और कुछ अन्य व्यक्तियों ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की हैं।केरल हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2020 में अडानी एंटरप्राइजेज को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को लीज पर देने के एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के फैसले को...