संपादकीय
पटाखा प्रतिबंध का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई आज दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ पश्चिम बंगाल राज्य में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ पटाखा निर्माताओं द्वारा दायर याचिका पर आज सुनवाई करेगी।जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय की खंडपीठ ने आगामी उत्सवों के दौरान पूरे पश्चिम बंगाल राज्य में हरित पटाखों सहित सभी प्रकार के पटाखों के उपयोग और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया...
अनुसूचित जनजातियों की सूची: जानिए कौन सी जातियों को अनुसूचित जनजातियों का दर्जा प्राप्त है
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के अंतर्गत सभी महत्वपूर्ण धाराओं पर आलेख प्रस्तुत किए गए हैं। यह अधिनियम अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण प्रदान करता है तथा उन पर होने वाले अत्याचारों को रोकने का लक्ष्य निर्धारित करता है। यह एक निवारण विधि है।इससे ठीक पूर्व के आलेख में अनुसूचित जातियों के संबंध में उल्लेख किया गया था। इस आलेख के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है तथा उनसे संबंधित सूची प्रस्तुत की जा रही है। यह सूची भी...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 91/92 : जब पक्ष लिखित रूप में अपना समझौता करते हैं, तो यह निश्चित रूप से इरादों का पूर्ण और अंतिम विवरण माना जाता है - सुप्रीम कोर्ट
"यह माना गया है कि जब पार्टियां सोच समझकर अपने समझौते को लिखित रूप में रखती हैं, तो यह निश्चित रूप से माना जाता है तो उनका इरादा लिखित बयान को एक पूर्ण और अंतिम बयान बनाना है, ताकि उसे भविष्य के विवाद, अविश्वास और विश्वासघाती स्मृति की पहुंच" से परे रखा जा सके।"न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई की बेंच ने पार्टनरशिप डीड की अवधि की वैधता से जुड़े एक मामले से निपटने के दौरान उपरोक्त टिप्पणियां कीं। न्यायमूर्ति बी.आर.गवई द्वारा 'वी अनंत राजू और अन्य बनाम...
जमानत देने के लिए अपराध की गंभीरता प्रासंगिक विचार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके द्वारा उसने गांव के सरपंच की हत्या के एक आरोपी को यह देखते हुए जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपराध की गंभीरता के प्रासंगिक विचारों पर विचार नहीं किया था और आरोपी की विशिष्ट भूमिका बताई गई थी।7 नवंबर 2021 को या उससे पहले आरोपी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हुए, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने स्पष्ट किया है कि उसके फैसले में की गई टिप्पणियां केवल जमानत...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (25 अक्टूबर, 2021 से 29 अक्टूबर, 2021) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं, सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप।पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों को जारी किए निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में निर्देश जारी किया।पीठ एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें मान्यता प्राप्त...
कर्मचारी द्वारा जन्मतिथि में बदलाव का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी द्वारा जन्मतिथि में बदलाव के लिए आवेदन केवल प्रासंगिक प्रावधानों/विनियमों के अनुसार ही हो सकता है। कोर्ट ने दोहराया कि जन्मतिथि में बदलाव का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता।जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की बेंच वर्तमान मामले (कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड वीटीपी नटराज और अन्य) में कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड ("निगम") द्वारा दायर एक अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के निगम को दिए गए उस निर्देश...
अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त वन अधिकार के बारे में जानिए
अनुसूचित जनजातियों को जंगलों का जागीरदार कहा गया है। यह जातियां प्राचीन समय से वनों में निवास कर रही है और वनों को संरक्षित करने में इन जातियों का बहुत बड़ा योगदान है। यह जातियां वनों में रहकर अपना जीवन व्यतीत करती हैं और वनों से ही अपनी जीविका का पार्जन करती है। राज्य पर यह कर्तव्य था कि वह इन जातियों के अधिकारों को सुरक्षित तथा इनके वन अधिकारों को स्पष्ट कर दें।इन जातियों को वनों के उपभोग का अधिकार प्राप्त है। एक प्रकार से वनों की मालिक राज्य है परंतु उनके उपभोग का अधिकार अनुसूचित जनजातियों को...
जमानत के बाद रिहाई में देरी: सभी न्यायालयों में "FASTER" (इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का तेज और सुरक्षित ट्रांसमिशन) की आवश्यकता
"सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के इस युग में हम अभी भी आदेशों को संप्रेषित करने के लिए आसमान की ओर कबूतरों को देख रहे हैं।" चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना ने एक मामले में जेल से कैदियों की रिहाई में हुई देरी पर यह टिप्पणी की थी। मामले में जेल अधिकारियों की जिद थी कि उन्हें जमानत के आदेश की भौतिक प्रतियां दी जाए। ये जिद कैदियों की रिहाई में देरी का कारण बनी।आगरा से 13 कैदियों की रिहाई में देरी के बारे में एक अखबार में छपी रिपोर्ट पर सीजेआई ने मामले को स्वतः संज्ञान लेने और जमानत आदेशों के...
अनुसूचित जातियों की सूची: जानिए कौन सी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के अंतर्गत सभी महत्वपूर्ण धाराओं पर आलेख प्रस्तुत किए गए हैं। यह अधिनियम अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण प्रदान करता है तथा उन पर होने वाले अत्याचारों को रोकने का लक्ष्य निर्धारित करता है। यह एक निवारण विधि है।प्रश्न यह है कि किन जातियों को अनुसूचित जातियों का दर्जा प्राप्त है एवं किन जातियों को अनुसूचित जनजातियों का दर्जा प्राप्त है।अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति दो प्रकार की जातियां है।इस आलेख के अंतर्गत...
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 15ए के तहत पीड़ित को आरोपी के खिलाफ अदालती कार्यवाही को नोटिस अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 15ए के तहत पीड़ित या आश्रित को अदालत की कार्यवाही का नोटिस जारी करना अनिवार्य है।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न की पीठ ने कहा कि इस आवश्यकता के अनुसार, पीड़ित या उनके आश्रित को एक उचित और समय पर नोटिस जारी किया जाना चाहिए।धारा 15ए(3) के तहत, पीड़ित या उसके आश्रित को जमानत याचिका सहित किसी भी अदालती कार्यवाही के उचित, सटीक और समय पर नोटिस का अधिकार होगा और विशेष लोक अभियोजक या राज्य सरकार पीड़ित को इस...
सुरक्षा के रूप में जारी किए गए चेक के अनादर पर भी एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध आकर्षित हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के रूप में जारी किए गए चेक के अनादर पर भी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध को आकर्षित हो सकता है।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि ऐसा सख्त नियम नहीं हो सकता है कि सुरक्षा के तौर पर जारी किए गए चेक को अदाकर्ता कभी पेश नहीं कर सकता।अदालत ने कहा कि इस तरह का विवाद केवल उस स्थिति में उत्पन्न होगा जहां ऋण वसूली योग्य नहीं हो पाया है और जमानत के रूप में जारी किया गया चेक राशि की वसूली के लिए प्रस्तुत करने के लिए...
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय और अन्य दो खिलाफ रेप केस में जांच पर रोक लगाने से इनकार किया, गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय, आरएसएस सदस्य जिस्नू बसु और प्रदीप जोशी के खिलाफ रेप के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को गुण-दोष के आधार पर अभियुक्त व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर आगे विचार करने की अनुमति दी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने आगे आदेश दिया कि हाईकोर्ट द्वारा पहले दी गई गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई की अगली तारीख यानी 16 नवंबर तक जारी रखी...
कर्नाटक में प्रवेश के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट की शर्त 'व्यापक जनहित' में : सुप्रीम कोर्ट ने केरल विधायक की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल विधासभा सदस्य (एमएलए) एकेएम अशरफ की ओर से दायर एक विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, कर्नाटक सरकार ने केरल के नागरिकों को कर्नाटक में प्रवेश के लिए नेगेटिव आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य कर दिया था, जिसे अशरफ ने केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके बाद अशरफ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि व्यापक जनहित को देखते...
'कोवैक्सिन पर डब्ल्यूएचओ के फैसले की प्रतीक्षा करें': सुप्रीम कोर्ट ने पुन: टीकाकरण के विकल्प की मांग वाली याचिका स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका को दीवाली की छुट्टी के बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया है। याचिका में कोवैक्सिन को डब्ल्यूएचओ की मंजूरी नहीं मिलने के मद्देनजर, जिन लोगों को कोवैक्सिन लग चुका है, उन्हें कोविशील्ड का फिर से टीका लगाए जाने की मांग की गई है।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा,"यह बताया गया है कि भारत बायोटेक (कोवैक्सिन के संबंध में) ने डब्ल्यूएचओ को स्पष्टीकरण के लिए नई प्रस्तुति की है। निर्णय आने की उम्मीद है। हम आपकी तरह ही अखबार पढ़ रहे हैं। आइए दिवाली के बाद तक थोड़ा इंतजार करें। ...
ऐतिहासिक मामलों पर गौतम भाटिया की लेक्चर सीरीज: पश्चिम बंगाल राज्य बनाम भारत संघ
लाइव लॉ भारतीय सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक मामलों पर गौतम भाटिया की लेक्चर सीरीज प्रस्तुत कर रहा है। इस सीरीज के दौरान गौतम भाटिया पश्चिम बंगाल रा्य बनाम भारत संघ मामले पर लेक्चर देंगे।मामला:- पश्चिम बंगाल राज्य बनाम भारत संघ [AIR 1963 SC 241]आयोजन का विवरण इस प्रकार है:-दिनांक: 30 अक्टूबर 2021 (शनिवार)समय: शाम 6:30 बजे सेलाइव देखें:यूट्यूब लिंक: https://www.youtube.com/watch?v=EbHiZR-udB4&feature=youtu.beफेसबुक लिंक: https://www.facebook.com/livelawindia/इंस्टाग्राम लिंक:...
एफसीआरए प्रावधान सामान्य प्रतिबंध लगाते हैं, अनुपातहीन और कठोर हैं : सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विदेशी योगदान विनियमन (संशोधन) अधिनियम 2020 और गृह मंत्रालय की 18 मई, 2021 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की, जिसमें अधिनियम के विशिष्ट प्रावधानों के अनुपालन की तारीख बढ़ाई गई थी।न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और भारत संघ की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन की दलीलें सुनीं।शुरुआत में, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल...
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC ST Act) भाग :10 इस अधिनियम में उल्लेखित किए गए अपराधों के संबंध में अग्रिम जमानत के प्रावधान लागू नहीं होना (धारा-18)
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989) के अंतर्गत धारा 18 अत्यंत महत्वपूर्ण धारा है जो इस अधिनियम के अंतर्गत घोषित किए गए अपराध के संबंध में आरोपी बनाए गए व्यक्तियों अभियुक्त को अग्रिम जमानत न दिए जाने संबंधित है। अर्थात इस कानून के अंतर्गत अभियुक्तों को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिल सकता। इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 18 पर चर्चा की जा रही है।अग्रिम जमानत लागू नहीं होना:-दंड प्रक्रिया...
पटाखों पर नियंत्रण किसी विशेष त्योहार या समुदाय के खिलाफ नहीं : सुप्रीम कोर्ट
निर्माताओं द्वारा आतिशबाजी में खतरनाक और सुरक्षा सीमा से परे कुछ रसायनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि यह किसी विशेष त्योहार या समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह दूसरों को इन शक्तियों की आड़ में नागरिकों के जीने के अधिकार के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दे सकता।अपने पिछले आदेशों के कार्यान्वयन पर जोर देते हुए जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने टिप्पणी की, "हम किसी विशेष त्योहार या...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्रूज शिप ड्रग मामले में आर्यन खान और दो अन्य को जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित क्रूज शिप ड्रग मामले में आर्यन खान को जमानत दे दी।जस्टिस एनडब्ल्यू साम्ब्रे ने अर्यान के साथ मामले के सह-आरोपी अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी जमानत दे दी।जमानत रे विस्तृत आदेश के कल यानी शुक्रवार को जारी होने की संभावना है।आर्यन खान के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के एएसजी अनिल सिंह को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत देने का फैसला किया।बेंच ने अरबाज मर्चेंट के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई और मुनमुन धमेचा के लिए वकील काशिफ अली...
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC ST Act) भाग :8 अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायालय क्या है (धारा-14)
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989) के अंतर्गत अधिनियम से संबंधित अपराध धारा 3 में उल्लेखित किए गए हैं उनके विचारण के लिए विशेष न्यायालय की व्यवस्था इस अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत दी गई है। इस आलेख के अंतर्गत विशेष न्यायालय पर न्याय निर्णय सहित टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।विशेष न्यायालय:-जैसा कि इस अधिनियम को अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति पर होने वाले अत्याचारों के निवारण के उद्देश्य...

















