POCSO मामलों में गवाहों पर दबाव रोकने के लिए रोज़ाना गवाही दर्ज हो: दिल्ली हाइकोर्ट का ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश
Amir Ahmad
7 Feb 2026 1:26 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी ट्रायल अदालतों को निर्देश दिया कि POCSO मामलों में जिन गवाहों की गवाही शुरू हो चुकी है उनकी गवाही बिना अंतराल के रोज़ाना दर्ज की जाए ताकि गवाहों पर दबाव डालने की संभावना को रोका जा सके।
जस्टिस गिरीश काथपालिया ने कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल यथासंभव दिन-प्रतिदिन चलाया जाना चाहिए विशेष रूप से तब, जब गवाह बयान दे रहा हो।
हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
“निर्देश दिया जाता है कि इस निर्णय की प्रति दिल्ली के सभी प्रिंसिपल जिला एंड सेशन जजों को भेजी जाए ताकि इसे सत्र मामलों की सुनवाई करने वाली सभी अदालतों, विशेषकर POCSO Act के मामलों से निपटने वाली अदालतों में प्रसारित किया जा सके।”
यह आदेश हाइकोर्ट ने ऐसे आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए पारित किया, जिस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 और 376 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज था।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। हालांकि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाइकोर्ट ने पाया कि मुख्य परीक्षण के दौरान पीड़िता ने अभियोजन की कहानी का पूरा समर्थन किया। पीड़िता ने जबरन अपहरण, सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने की धमकी और अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर बार-बार यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में गवाही दर्ज किए जाने के तरीके पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि गवाही दर्ज करने में लंबे अंतराल गवाहों पर दबाव डालने के अवसर पैदा करते हैं।
जस्टिस काथपालिया ने टिप्पणी की,
“कई न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया कि सेशन कोर्ट्स में ट्रायल, कम से कम गवाह के बयान के दौरान, दिन-प्रतिदिन चलाया जाना चाहिए। गवाही के बीच लंबे अंतराल से आंशिक रूप से जांचे गए अभियोजन गवाहों पर दबाव डालने की गुंजाइश बन जाती है।”
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि यह मामला जमानत देने योग्य नहीं है और आरोपी की याचिका खारिज की।
यह आदेश POCSO मामलों में पीड़ित और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है जिससे निष्पक्ष और प्रभावी सुनवाई को मजबूती मिलेगी।

