दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेनिंग के दौरान सिविल सेवा परीक्षा में बैठने पर IFS प्रोबेशनर्स पर रोक बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेनिंग के दौरान सिविल सेवा परीक्षा में बैठने पर IFS प्रोबेशनर्स पर रोक बरकरार रखी

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के प्रोबेशनर्स को उनकी ट्रेनिंग के दौरान सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में बैठने से रोकने वाला नियम बरकरार रखा।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने अलग-अलग IFS प्रोबेशनर्स द्वारा दायर याचिकाओं का बैच खारिज कर दिया, जिसमें 2023 के एक संशोधन को चुनौती दी गई, जो उन्हें उनकी प्रोबेशनरी ट्रेनिंग के दौरान CSE या किसी अन्य ओपन कॉम्पिटिटिव परीक्षा में बैठने से रोकता है।कोर्ट ने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (प्रोबेशन) संशोधन नियम, 2023...

पीएम केयर्स फंड कानूनी संस्था, लेकिन RTI Act के तहत उसे प्राइवेसी का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
पीएम केयर्स फंड कानूनी संस्था, लेकिन RTI Act के तहत उसे प्राइवेसी का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पीएम केयर्स फंड, एक कानूनी या सरकारी संस्था होने के बावजूद, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत प्राइवेसी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही यह फंड एक राज्य हो, लेकिन सिर्फ इसलिए कि यह एक पब्लिक अथॉरिटी है। कुछ सार्वजनिक काम करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने प्राइवेसी के अधिकार को खो देता है।कोर्ट एक गिरीश मित्तल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा...

रजिस्टर्ड दस्तावेज़ से प्राप्त संपत्ति का स्वामित्व मौखिक पारिवारिक समझौते के दावों पर प्रभावी रहेगा: दिल्ली हाइकोर्ट
रजिस्टर्ड दस्तावेज़ से प्राप्त संपत्ति का स्वामित्व मौखिक पारिवारिक समझौते के दावों पर प्रभावी रहेगा: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति के संबंध में यदि स्वामित्व रिजस्टर्ड विक्रय/हस्तांतरण डीड के आधार पर स्थापित है तो उसे केवल अस्पष्ट या अप्रमाणित मौखिक पारिवारिक समझौते के दावों के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसे मौखिक दावे जब तक ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से समर्थित न हों रजिस्टर्ड टाइटल को परास्त नहीं कर सकते।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने व्यक्ति द्वारा दायर अपीलों को खारिज किया, जिसमें उसने आवासीय संपत्ति पर संयुक्त...

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर भुवन बाम की अनधिकृत तस्वीरें हटाने का आदेश दिया, प्रारंभिक स्तर पर पर्सनैलिटी राइट्स पर टिप्पणी से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर भुवन बाम की अनधिकृत तस्वीरें हटाने का आदेश दिया, प्रारंभिक स्तर पर 'पर्सनैलिटी राइट्स' पर टिप्पणी से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक जॉन डो आदेश पारित करते हुए यूट्यूबर और एक्टर भुवन बाम की उन तस्वीरों को हटाने या उनका प्रसारण बंद करने का निर्देश दिया, जिनका विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा उनकी अनुमति के बिना उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, अदालत ने मामले की पहली ही सुनवाई में भुवन बाम के 'पर्सनैलिटी राइट्स' को लेकर कोई प्रारंभिक निष्कर्ष देने से इनकार किया।जस्टिस ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक स्तर पर पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर निष्कर्ष देना कठिन है। अदालत ने कहा कि वह अनधिकृत...

सरकारी और पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए EWS इनकम लिमिट बढ़ाकर ₹5 लाख की गई: सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
सरकारी और पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए EWS इनकम लिमिट बढ़ाकर ₹5 लाख की गई: सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार का फैसला रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें सरकारी अस्पतालों और रियायती ज़मीन पर बने प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) की इनकम लिमिट को 2.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये सालाना कर दिया गया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने निर्देश दिया कि इस फैसले का व्यापक प्रचार किया जाए ताकि योग्य लोग इसका फायदा उठा सकें।कोर्ट 2017 में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं के बाद शुरू की गई एक स्वतः...

वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार | कोर्ट वकीलों को क्लाइंट के निर्देश पर फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार | कोर्ट वकीलों को क्लाइंट के निर्देश पर फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को क्लाइंट द्वारा दिए गए डॉक्यूमेंट का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह विशेषाधिकार प्राप्त बातचीत के दायरे में आता है, जब तक कि धोखाधड़ी का कोई प्रथम दृष्टया न्यायिक निष्कर्ष न हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि जब कोई क्लाइंट कानूनी बचाव के लिए अपने वकील को कोई डॉक्यूमेंट देता है तो डॉक्यूमेंट के ओरिजिन से जुड़ा ऐसा काम प्रोफेशनल गोपनीयता का हिस्सा होता है।कोर्ट ने कहा,"कोर्ट में फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स की मुख्य जिम्मेदारी पार्टी...

उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार, इसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार, इसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है जिसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा,"उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार, भले ही भारत के संविधान के भाग III में मौलिक अधिकार के रूप में साफ तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन यह राज्य की एक सकारात्मक जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार को सुनिश्चित करे और इसे हल्के में कम करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।"कोर्ट ने उम्मीदवार हर्षित अग्रवाल द्वारा दायर याचिका मंज़ूरी की, जिसने...

मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का सर्वश्रेष्ठ निर्णायक जरूर है, लेकिन किरायेदार को बेदखल करने के लिए वास्तविक आवश्यकता का सबूत देना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट
मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का 'सर्वश्रेष्ठ निर्णायक' जरूर है, लेकिन किरायेदार को बेदखल करने के लिए वास्तविक आवश्यकता का सबूत देना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि भले ही आम तौर पर मकान मालिक को अपनी आवश्यकता का “सर्वश्रेष्ठ निर्णायक” माना जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह बिना ठोस सबूत के किरायेदार को बेदखल कर सकता है। किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 के तहत बेदखली मांगते समय मकान मालिक को अपनी वास्तविक और ईमानदार आवश्यकता (बोना फाइड नीड) को प्रमाणित करना आवश्यक होता है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी उस पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें मकान मालिक ने धारा 14(1)(e) के तहत दायर अपनी बेदखली याचिका खारिज किए...

बच्चे की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता सर्वोपरि, विवादित आरोप तय किए बिना भी माता-पिता की मुलाकात सीमित की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
बच्चे की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता सर्वोपरि, विवादित आरोप तय किए बिना भी माता-पिता की मुलाकात सीमित की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि हालांकि किसी माता-पिता को अपने बच्चे से नियमित और सार्थक मिलने-जुलने का अधिकार होता है, लेकिन अंतरिम (अस्थायी) चरण में यदि परिस्थितियाँ यह संकेत दें कि इससे बच्चे की सुरक्षा की भावना, भावनात्मक भलाई या मानसिक स्थिरता पर खतरा हो सकता है, तो ऐसे अधिकारों को नियंत्रित या सीमित किया जा सकता है, भले ही माता-पिता के बीच लगे आरोपों पर अंतिम निर्णय न हुआ हो।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा:“अंतरिम मुलाकात तय करते समय अदालत को विवादित...

लंबे समय से लंबित मामला मूल मुद्दों पर फैसला न होने की कमी पूरी नहीं कर सकता: दिल्ली हाइकोर्ट
लंबे समय से लंबित मामला मूल मुद्दों पर फैसला न होने की कमी पूरी नहीं कर सकता: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि किसी दीवानी मुकदमे का लंबे समय से लंबित होना इस आधार पर मामले को पुनः निचली अदालत को भेजने से बचने का कारण नहीं बन सकता, यदि ट्रायल कोर्ट ने मूल और निर्णायक मुद्दों पर गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला ही नहीं किया हो।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने एक संपत्ति विवाद से जुड़े दो नियमित द्वितीय अपीलों को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। यह विवाद एक निजी पक्ष और दिल्ली विकास प्राधिकरण के बीच था, जो तीन दशकों से अधिक समय से लंबित था। अपीलें प्रथम अपीलीय अदालत द्वारा पारित उस आदेश को...

CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट
CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन वाद में एक बार जब मजिस्ट्रेट संज्ञान ले लेता है और आरोपी को समन जारी कर देता है तो उसके बाद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 251 के चरण पर आरोपी को कार्यवाही से मुक्त करने अथवा बरी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि CrPC की धारा 251 का उद्देश्य केवल इतना है कि आरोपी को उस अपराध का विवरण बताया जाए, जिसका उस पर आरोप है। उससे यह पूछा जाए कि वह दोष स्वीकार करता है या अपना बचाव प्रस्तुत करना चाहता है। यह प्रावधान मजिस्ट्रेट को न...

लगातार जेल में रहने के दौरान दर्ज दोषसिद्धि कैदी को आदतन अपराधी नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
लगातार जेल में रहने के दौरान दर्ज दोषसिद्धि कैदी को 'आदतन अपराधी' नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई कैदी लगातार जेल में हो तो उस दौरान दर्ज दोषसिद्धि दिल्ली जेल नियम, 2018 के तहत फरलो देने से इनकार करने के मकसद से कैदी को "आदतन अपराधी" नहीं बना सकती।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी एक उम्रकैद की सज़ा पाए कैदी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में दिल्ली जेल नियमों के नियम 1223(ii) के तहत आदतन अपराधी होने के आधार पर उसकी फरलो याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता अक्टूबर, 2007 से लगातार न्यायिक हिरासत में है। उसने...

जिस जज ने फैसला सुरक्षित रखा, उसे ट्रांसफर के बावजूद फैसला सुनाना होगा, उत्तराधिकारी जज दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
जिस जज ने फैसला सुरक्षित रखा, उसे ट्रांसफर के बावजूद फैसला सुनाना होगा, उत्तराधिकारी जज दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी क्रिमिनल ट्रायल में फाइनल बहस पूरी हो जाती है और मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है तो जिस जज ने केस सुना है, उसे फैसला सुनाना ही होगा, भले ही बाद में उसका ट्रांसफर हो जाए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी 18.11.2025 और 26.11.2025 के आदेशों पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया कि सभी ट्रांसफर किए गए ज्यूडिशियल अधिकारियों को उन मामलों के बारे में सूचित करना होगा, जिनमें चार्ज छोड़ने से पहले फैसले या आदेश सुरक्षित रखे गए और उन्हें...

धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की
धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की

दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 409 आईपीसी (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दोषसिद्ध कंपनी निदेशक की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि जब निदेशक को धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी (धाराएं 468 व 471 आईपीसी) के आरोपों से बरी कर दिया गया है, तो धारा 409 के तहत दोषसिद्धि का मूल आधार (substratum) कमजोर हो जाता है।जस्टिस विकास महाजन ने यह आदेश उस अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें संयुक्त उद्यम कंपनी से लगभग ₹3 करोड़ की धनराशि के गबन का आरोप था। अदालत ने कहा कि धारा 409 का आरोप जालसाजी और धोखाधड़ी के...

एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा
एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) का विरोध किया, जिसमें एयर प्यूरीफायर को "मेडिकल डिवाइस" घोषित करने और उन पर 18% GST हटाने की मांग की गई।अपने हलफनामे में सरकार ने कहा कि GST काउंसिल ही एकमात्र संवैधानिक रूप से नामित संस्था है, जो GST से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करती है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर देगा।हलफनामे में कहा गया कि ऐसा हस्तक्षेप भारत के संविधान के अनुच्छेद 279A द्वारा संरक्षित संघीय संतुलन को भी...

दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत पुनरीक्षण अधिकार सीमित, तथ्यात्मक निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: हाइकोर्ट
दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत पुनरीक्षण अधिकार सीमित, तथ्यात्मक निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 25बी की उपधारा (8) के तहत उसका पुनरीक्षण अधिकार केवल पर्यवेक्षणात्मक प्रकृति का है। इसके अंतर्गत न तो साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है और न ही किराया नियंत्रक द्वारा दर्ज किए गए तथ्यात्मक निष्कर्षों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने यह टिप्पणी एक किरायेदार द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर पारित बेदखली आदेश को...

Civil Service Rules | आरोपी की गैरमौजूदगी में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले की जांच करना, ICC रिपोर्ट के बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई को अमान्य करता है: दिल्ली हाईकोर्ट
Civil Service Rules | आरोपी की गैरमौजूदगी में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले की जांच करना, ICC रिपोर्ट के बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई को अमान्य करता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स 1965 के नियम 14(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही, जो इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) की जांच पर आधारित है, तब अमान्य हो जाती है जब शिकायतकर्ताओं की जांच दोषी कर्मचारी की गैरमौजूदगी में की जाती है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने इस तरह केंद्र की अपील खारिज की और CAT के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें IIHT गुवाहाटी में एक प्रोबेशनर की बर्खास्तगी रद्द कर दी गई, जिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप...

आम बिजनेस में पेमेंट का डायरेक्टर का आश्वासन अपने आप धोखाधड़ी का आरोप नहीं बन सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
आम बिजनेस में पेमेंट का डायरेक्टर का आश्वासन अपने आप धोखाधड़ी का आरोप नहीं बन सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कमर्शियल लेनदेन के सामान्य कोर्स में डायरेक्टर द्वारा दिया गया पेमेंट का आश्वासन अपने आप में धोखाधड़ी वाला लालच नहीं माना जा सकता, जिससे IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध लगे।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए की, जिस पर धोखाधड़ी का आरोप था। आरोप था कि उनकी कंपनी को पेमेंट के आश्वासन पर माल सप्लाई किया गया, जिसे बाद में पूरा नहीं किया गया।बेंच ने कहा,“आरोपों में बताए गए पेमेंट का “आश्वासन” बिजनेस...

पुलिस-रिपोर्ट वाले मामलों में सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही जल्द सुनवाई के लिए निर्देश मांग सकते हैं, पीड़ित नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
पुलिस-रिपोर्ट वाले मामलों में सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही जल्द सुनवाई के लिए निर्देश मांग सकते हैं, पीड़ित नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट से जुड़े मामलों में, सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही ट्रायल को जल्दी निपटाने के लिए निर्देश मांग सकते हैं।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने साफ़ किया कि असल शिकायतकर्ता या पीड़ित ऐसी याचिका दायर नहीं कर सकता।बेंच ने कहा,“क्योंकि यह मामला राज्य का है, इसलिए असल शिकायतकर्ता की भूमिका सिर्फ़ गवाह तक सीमित है। इसलिए सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही ऐसी याचिका दायर कर सकते हैं।”इस तरह कोर्ट ने शिकायतकर्ता द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें ट्रायल कोर्ट से IPC की धारा 420 के तहत दर्ज...

पुलिस रिपोर्ट से दर्ज मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राज्य को, तीसरे पक्ष को नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
पुलिस रिपोर्ट से दर्ज मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राज्य को, तीसरे पक्ष को नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन आपराधिक मामलों की शुरुआत पुलिस रिपोर्ट के आधार पर होती है, उनमें अभियुक्त के बरी होने के खिलाफ अपील दायर करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को प्राप्त है। ऐसे मामलों में कोई तीसरा पक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 के प्रावधान का सहारा लेकर अपील नहीं कर सकता, जब तक वह विधि में परिभाषित “पीड़ित” की श्रेणी में न आता हो।जस्टिस अमित महाजन ने यह निर्णय एक महिला द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए दिया।याचिका में महिला ने एक संपत्ति से जुड़े...