दिल्ली हाईकोर्ट

ECI गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के अंदरूनी विवादों पर फैसला नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
ECI गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के अंदरूनी विवादों पर फैसला नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) किसी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के अंदरूनी विवादों पर फैसला नहीं कर सकता। ऐसे विवादों को सिविल मुकदमे में ही सुलझाना होगा।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा,"ECI किसी रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी के अंदरूनी विवादों के मामले में किसी भी विरोधी गुट को मान्यता नहीं देगा, क्योंकि इन विवादों को सुलझाना ECI का काम नहीं है। एक रजिस्टर्ड और गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी में ऐसे आपसी विवादों को सिविल मुकदमे में ही सुलझाना होगा।"कोर्ट...

जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री के मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: सोशल मीडिया अपलोडरों को पक्षकार बनाया जाए
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री के मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: सोशल मीडिया अपलोडरों को पक्षकार बनाया जाए

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को निर्देश दिया कि वह अपनी मानहानि याचिका में उन व्यक्तियों को भी पक्षकार बनाएं, जिन्होंने उनके विरुद्ध कथित आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर अपलोड की।जस्टिस अमित बंसल ने चौधरी द्वारा दायर उस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसके माध्यम से मामले की सुनवाई की तारीख आगे किए जाने की मांग की गई थी। यह प्रकरण पहले 13 जनवरी 2026 को सूचीबद्ध था, जिसे अब 16 दिसंबर को सुनवाई के लिए तय किया गया।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी अपलोडरों को...

अजमेर शरीफ़ दरगाह पर कार्रवाई से पहले सुनवाई अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट
अजमेर शरीफ़ दरगाह पर कार्रवाई से पहले सुनवाई अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि अजमेर स्थित ख्वाजा साहब दरगाह परिसर के भीतर और उससे जुड़े क्षेत्रों में किसी भी ढांचे को हटाने या ध्वस्त करने से पहले प्रभावित पक्षों को अनिवार्य रूप से सुनवाई का अवसर दिया जाए।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना प्रक्रिया का पालन किए सीधे कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि 22 नवंबर को जारी हटाने के नोटिस के आधार पर कोई भी त्वरित या एकतरफा कदम उठाने से पहले संबंधित प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग कारण...

महिला का साझा घर का अधिकार ससुराल वालों के घर में हमेशा के लिए रहने का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
महिला का साझा घर का अधिकार ससुराल वालों के घर में हमेशा के लिए रहने का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा एक्ट की धारा 17 के तहत महिला का साझा घर का अधिकार सुरक्षा का अधिकार है, न कि मालिकाना हक का अधिकार या ससुराल वालों की जगह पर हमेशा के लिए रहने का लाइसेंस, खासकर तब जब ऐसे कब्जे से सीनियर सिटिजन को साफ नुकसान होता हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा माना कि ऐसे अधिकार को सीनियर सिटिजन माता-पिता के अपनी प्रॉपर्टी पर शांति से कब्जे और उसके इस्तेमाल के अधिकारों के साथ बैलेंस किया जाना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने BCD चुनावों में जिला कोर्ट में मतदान केंद्र स्थापित करने की मांग पर BCI समिति को विचार करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने BCD चुनावों में जिला कोर्ट में मतदान केंद्र स्थापित करने की मांग पर BCI समिति को विचार करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा गठित स्पेशल कमेटी को निर्देश दिया है कि वह अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार द्वारा दायर याचिका को प्रतिनिधित्व (representation) के रूप में स्वीकार कर उस पर निर्णय ले। यह याचिका आगामी बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनावों में मतदान की बेहतर व्यवस्था करने से संबंधित थी।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कहा कि स्पेशल कमेटी इस प्रतिनिधित्व पर विचार कर तीन सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करे।BCD चुनाव 13-14 फरवरी, 2026 को होने वाले हैं, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट और...

दिव्यांग आश्रित की देखभाल करने वाले को ट्रांसफर में छूट का हक, दिव्यांगों के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिव्यांग आश्रित की देखभाल करने वाले को ट्रांसफर में छूट का हक, दिव्यांगों के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने माना कि दिव्यांग आश्रित के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी हैं। साथ ही दिव्यांग लोगों की देखभाल करने वाले रेगुलर ट्रांसफर से छूट के हकदार हैं। उनके लिए सही सुविधा ज़रूरी है।मामले की पृष्ठभूमि के तथ्ययाचिकाकर्ता बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की 171वीं बटालियन में पोस्टेड असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर/जनरल ड्यूटी है। उसका बेटा दिल्ली में रहता है। उसे अपने निचले अंगों में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है, जो 50%...

तीस हजारी मेट्रो परियोजना विवाद: हाईकोर्ट ने DMRC के पक्ष में 70 लाख रुपये का मध्यस्थता अवॉर्ड बरकरार रखा
तीस हजारी मेट्रो परियोजना विवाद: हाईकोर्ट ने DMRC के पक्ष में 70 लाख रुपये का मध्यस्थता अवॉर्ड बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के पक्ष में पारित उस मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा, जिसमें पारसवनाथ डेवलपर्स लिमिटेड (PDL) पर लगभग 70 लाख रुपये से अधिक की देनदारी तय की गई थी।जस्टिस जस्मीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि कंसेशन एग्रीमेंट के तहत A की ओर से किसी तरह का उल्लंघन नहीं किया गया और परियोजना के पूरा न हो पाने का कारण पारसवनाथ और उसके सब-लाइसेंसी की लापरवाही थी, जिन्होंने आवश्यक स्थानीय निकाय की मंजूरी के लिए उचित आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया।यह विवाद तिस हजारी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फील्ड टेस्ट के दौरान ड्रग की पहचान में अंतर होने पर NDPS आरोपी को ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने फील्ड टेस्ट के दौरान ड्रग की पहचान में अंतर होने पर NDPS आरोपी को ज़मानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत पकड़े गए एक आदमी को ज़मानत दी, क्योंकि ज़ब्त की गई ड्रग की फील्ड टेस्टिंग और फोरेंसिक टेस्टिंग में पहचान में अंतर था।जस्टिस अमित महाजन ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता दो साल से ज़्यादा समय से जेल में था, लेकिन ट्रायल शुरू नहीं हुआ और सिर्फ़ आरोप तय किए गए।प्रॉसिक्यूशन ने आवेदक की जेब से मिली एक पॉलीथीन से 67g MDMA मिलने का आरोप लगाया। बाद में FSL में ड्रग को मेथामफेटामाइन बताया गया।प्रॉसिक्यूशन...

सिर्फ़ जालसाज़ी के दावे विवादित कंपनी रिकॉर्ड की जांच करने के NCLT के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट
सिर्फ़ जालसाज़ी के दावे विवादित कंपनी रिकॉर्ड की जांच करने के NCLT के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सिर्फ़ धोखाधड़ी या जालसाज़ी के आरोपों का इस्तेमाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के अधिकार क्षेत्र को खत्म करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिविल कोर्ट एक जैसे मुकदमों पर सुनवाई नहीं कर सकते, जब वही मुद्दे पहले से ही किसी ज़ुल्म और मिसमैनेजमेंट के मामले में NCLT के सामने हों।इसके बाद जस्टिस अमित महाजन की सिंगल बेंच ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक डिफेंस-टेक स्टार्टअप के फाउंडर्स द्वारा दायर सिविल केस खारिज करने से...

दिल्ली सरकार को MCD की फाइनेंशियल हालत देखने की ज़रूरत है: हाईकोर्ट ने MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच मीटिंग का निर्देश दिया
दिल्ली सरकार को MCD की फाइनेंशियल हालत देखने की ज़रूरत है: हाईकोर्ट ने MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच मीटिंग का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को दिल्ली सरकार से कहा कि वह दिल्ली नगर निगम (MCD) की फाइनेंशियल तंगी को देखे और निर्देश दिया कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच एक मीटिंग की जाए।कोर्ट महारानी बाग इलाके में ड्रेनेज और बाढ़ की समस्याओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।कुछ देर मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने अपने ऑर्डर में कहा:"जहां तक ​​नाले के तीसरे चैंबर को ढकने और नाले की बैरिकेडिंग की...

सीधा कैरेक्टर पर हमला: तेजिंदर बग्गा ने हाईकोर्ट में मानहानि केस में सुब्रमण्यम स्वामी के समन को चुनौती देने का विरोध किया
'सीधा कैरेक्टर पर हमला': तेजिंदर बग्गा ने हाईकोर्ट में मानहानि केस में सुब्रमण्यम स्वामी के समन को चुनौती देने का विरोध किया

BJP नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि सुब्रमण्यम स्वामी के उनके खिलाफ किए गए ट्वीट, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह कई बार जेल जा चुके हैं, उन्होंने सीधे तौर पर उनके कैरेक्टर और ईमानदारी पर हमला किया। साथ ही समाज में उनकी इज़्ज़त भी गिराई।ऐसा इसलिए है, क्योंकि क्रिमिनल बैकग्राउंड का आरोप किसी पॉलिटिकल पार्टी में पद पर बैठे व्यक्ति के लिए नुकसानदायक होता है, बग्गा ने स्वामी की उस याचिका के जवाब में कहा, जिसमें बग्गा द्वारा स्वामी के खिलाफ दायर मानहानि केस में ट्रायल कोर्ट...

UAE में हिरासत में लिए गए एक्ट्रेस सेलिना जेटली के भाई, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से संपर्क कराने में मदद करने को कहा
UAE में हिरासत में लिए गए एक्ट्रेस सेलिना जेटली के भाई, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से संपर्क कराने में मदद करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर) को विदेश मंत्रालय से एक्ट्रेस सेलिना जेटली और उनके भाई के बीच कॉन्टैक्ट कराने में मदद करने को कहा, जिन्हें UAE में गिरफ्तार करके हिरासत में लिया गया था। बता दें, एक्ट्रेस सेलिना जेटली के भाई रिटायर्ड इंडियन आर्मी ऑफिसर हैं।कोर्ट जेटली की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने भाई के लिए असरदार कानूनी मदद मांगी है।कुछ देर मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस सचिन दत्ता ने मुंह से कहा:"मैंने ये दो निर्देश जारी किए हैं। नंबर 1, कॉन्सुलेट ऑफिसर हिरासत में...

कोर्ट में चुप करा दिए जाने का दावा कर लाल टेप लगाकर पेश हुए वकील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, बताया- अशोभनीय आचरण
कोर्ट में चुप करा दिए जाने का दावा कर लाल टेप लगाकर पेश हुए वकील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, बताया- अशोभनीय आचरण

दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वकील के आचरण पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की। वकील अपने होंठों पर लाल रंग का चिपकने वाला टेप लगाकर कोर्ट में पेश हुए थे, जिसका दावा उन्होंने यह कहकर किया कि यह प्रतीक है कि उन्हें पिछली सुनवाई में जिरह के दौरान "चुप करा दिया गया।यह घटना 1 दिसंबर को हुई थी, जब दिल्ली सरकार के सीनियर वकील ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार याचिकाकर्ता को दिए गए प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर रही है और एक नया लिखित प्रस्ताव पेश किया गया। यह तब हुआ जब...

ट्रायल जज को डराने की कोशिश पर दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार; कहा— “जज, जज होता है, चाहे कहीं भी बैठा हो”
ट्रायल जज को डराने की कोशिश पर दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार; कहा— “जज, जज होता है, चाहे कहीं भी बैठा हो”

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अधिवक्ता को फटकार लगाई, जिस पर आरोप था कि उसने ट्रायल कोर्ट के जज को डराने-धमकाने की कोशिश की। अदालत ने वकील को याद दिलाया कि “जज, जज होता है—चाहे वह न्यायिक पदानुक्रम में कहीं भी क्यों न बैठा हो।”जस्टिस गिरीश कथपालिया ने टिप्पणी की:“हाल के दिनों में देखा जा रहा है कि जब किसी मामले में मेरिट नहीं होता या संबंधित जज लंबी सुनवाई की अनुमति नहीं देता और कार्यवाही खींचने नहीं देता, तो कुछ (सौभाग्य से सभी नहीं) वकील जज को प्रभावित या दबाव में लाने का प्रयास करते हैं,...

एयर क्वालिटी के उपायों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएं, हमारे पास पहले से ही बहुत-से पेंडिंग मामले: दिल्ली हाईकोर्ट
एयर क्वालिटी के उपायों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएं, हमारे पास पहले से ही बहुत-से पेंडिंग मामले: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह राष्ट्रीय राजधानी में एयर पॉल्यूशन लेवल और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को कंट्रोल करने और कम करने के लिए तुरंत उपाय करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाए।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में एयर क्वालिटी से जुड़े मुद्दे पर नज़र रख रहा है और कई आदेश भी दिए हैं।कोर्ट ग्रेटर कैलाश-II वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से अपने जनरल सेक्रेटरी संजय राणा और एडवोकेट उदियन शर्मा के...

लोक सेवक को सुने बिना भ्रष्टाचार पर प्रथम दृष्टया राय नहीं बना सकता लोकपाल: दिल्ली हाईकोर्ट
लोक सेवक को सुने बिना भ्रष्टाचार पर प्रथम दृष्टया राय नहीं बना सकता लोकपाल: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद में भर्ती और पदोन्नति से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच का आदेश रद्द करते हुए कहा कि लोकपाल किसी भी लोक सेवक को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिए बिना भ्रष्टाचार को लेकर प्रथम दृष्टया राय नहीं बना सकता। अदालत ने माना कि लोकपाल ने इस प्रकरण में पहले ही मामले पर पूर्वाग्रहपूर्ण निष्कर्ष निकाल लिया, जो कानून के विपरीत है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 की धारा 20(3) का हवाला देते हुए कहा कि...

“दुर्भावना रखने वाले व्यंग्य की आड़ में नहीं छिप सकते” : Ba**ds of Bollywood के खिलाफ मानहानि मुकदमे में समीयर वानखेड़े ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा
“दुर्भावना रखने वाले व्यंग्य की आड़ में नहीं छिप सकते” : 'Ba**ds of Bollywood' के खिलाफ मानहानि मुकदमे में समीयर वानखेड़े ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (2 दिसंबर) को IRS अधिकारी समीयर वानखेड़े द्वारा नेटफ्लिक्स की सीरीज़ “Ba*ds of Bollywood” (निर्देशक आर्यन ख़ान) में उनकी कथित मानहानिकारक प्रस्तुति के खिलाफ दायर इंटरिम इंजंक्शन याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौड़ा ने वानखेड़े, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट और नेटफ्लिक्स की विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित किया।अदालत ने इंटरिम इंजंक्शन पर दो मुख्य प्रश्न निर्धारित किए– क्या यह वाद दिल्ली में सुनवाई योग्य (Maintainable) है? क्या संपूर्ण रूप से...

आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की मांग करने वाले पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संपर्क करें: दिल्ली हाईकोर्ट
आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की मांग करने वाले पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संपर्क करें: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट को तुरंत हटाने की मांग करने वाले लोगों को सीधे ज्यूडिशियल रोक लगाने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संपर्क करना होगा।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि कोर्ट की कार्यवाही में पेश होने वाले सोशल मीडिया इंटरमीडियरी खराब और गलत कंटेंट हटाने के लिए ऐसी शिकायतों पर कोई आपत्ति नहीं करते हैं।कोर्ट ने कहा,"इसलिए यह साफ किया जाता है कि अगर अब से कोई शिकायतकर्ता/वादी IT इंटरमीडियरी रूल्स के तहत दिए गए कानूनी तरीके का इस्तेमाल किए बिना कोर्ट...