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हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
01 2021 से 05 मार्च 2021 तक हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़रपत्नी की चुप्पी को यह नहीं माना जा सकता कि उसने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 7 के तहत गोद लेने को सहमति दे दी है: इलाहाबाद उच्च न्यायालयइलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि पति द्वारा गोद लेने के समय पत्नी की चुप्पी या विरोध का अभाव, हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 7 के तहत इस तरह के गोद लेने पर सहमति नहीं मानी जा सकती है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने फैसला में कहा,...
सूरत की अदालत ने सिमी के सदस्य होने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार 122 लोगों को बरी किया
सूरत की एक अदालत ने दिसंबर 2001 में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्यों के रूप में यहां आयोजित एक बैठक में भाग लेने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किए गए 122 लोगों को शनिवार को बरी कर दिया।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए एन दवे की अदालत ने 122 लोगों को प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य होने के आरोप से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मुकदमे के लंबित रहने के दौरान पांच अन्य आरोपियों की मौत हो गई थी।अपने आदेश में अदालत ने कहा...
'यह सबसे हैरानी की बात है कि देश में आज भी बच्चों को शारीरिक दंड दिया जाता है, जो अमानवीय है': मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (गुरुवार) ने कहा कि शारीरिक दंड (Corporal Punishment) को खत्म करने के लिए विधायी ढांचे के बावजूद भी देश भर के स्कूलों और संस्थानों में बच्चों को शारीरिक दंड दिया रहा है।कोर्ट ने एक स्कूली बच्चे की मौत के मामले में अवलोकन किया, जिसमें एक बच्चे को स्कूल में देरी से आने पर शारीरिक दंड दिया गया था, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में पाया गया कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है।न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने कहा कि किसी बच्चे को शारीरिक दंड देना, दु:खद और अमानवीय प्रकृति है।शुरुआत में न्यायाधीश...
बिना सोचे-समझे इरादे से धार्मिक भावना आहत करने के लिए लापरवाही से किया गया धर्म का अपमान, धारा 295 ए के तहत अपराध नहींः त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने माना है कि धर्म का बिना इरादे के किया गया अपमान या बिना जाने-बूझे और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध नहीं है।चीफ जस्टिस अकील कुरैशी की सिंगल बेंच ने कहा, "धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है, यह केवल अपमान या अपमान की कोशिश के के उन कृत्यों को दंडित करता है, जिन्हें विशेष वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 3499 अंडर ट्रायल कैदियों को अंतरिम ज़मानत अवधि समाप्त होने से पहले जेल में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को COVID-19 के मद्देनजर अंतरिम जमानत पर छूटे सभी 3499 अंडरट्रायल कैदियों को जमानत अवधि समाप्त होने से पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इन कैदियों को कोरोना माहमारी के दौरान उच्चाधिकार समिति की सिफारिशों पर अंतरिम जमानत दी गई थी।अब इन्हें अंतरिम जमानत अवधि समाप्त होने से पहले या 7 मार्च से पहले जेल अधीक्षकों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने जेल के महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का भी...
मीडिया के हाथ लगने से लीक करने के आरोप खुद ही स्थापित हो जाते हैंः दिल्ली हाईकोर्ट ने आसिफ इकबाल तन्हा की याचिका पर दिल्ली पुलिस से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार आसिफ इकबाल तन्हा द्वारा मीडिया को उनके कथित इकबालिया बयान के लीक होने के संबंध में की गई शिकायत के जवाब में दिल्ली पुलिस के अड़ियल रुख से कड़ी नाराजगी जताई।दिल्ली पुलिस के लिए सरकारी वकील अमित महाजन ने इस दावे का खंडन किया कि सबूत पुलिस द्वारा लीक किए गए थे।उन्होंने कहा कि उन पर आरोपों की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।अदालत ने इस पर कहा कि मामला पहले से ही आरोपों साबित होने से परे है, क्योंकि पुलिस की रिपोर्ट पहले ही लीक...
'हमे आधुनिक होना चाहिए': कर्नाटक हाईकोर्ट ने फास्टैग लागू करने पर रोक लगाने से इनकार किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करने के लिए जारी की गई अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके द्वारा सभी वाहनों के लिए फास्टैग का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए एक नया थर्ड पार्टी बीमा प्राप्त करते समय एक वैधानिक फास्टैग अनिवार्य है। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने कहा कि हमें आधुनिक होना चाहिए।वर्तमान COVID-19 स्थिति का उल्लेख करते हुए खंडपीठ ने कहा,"वर्तमान परिस्थितियों में इसका स्वागत नहीं किया...
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस काउंसिल के हिंदुस्तान टाइम्स न्यूज पेपर में विज्ञापन पर रोक के आदेश पर स्टे लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (02 मार्च) को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा सरकारी विभागों को दिए गए संचार पर रोक लगाई, जिसमें सभी सरकारी एजेंसियों को हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड के स्वामित्व वाले समाचार पत्रों में विज्ञापन देने से रोका गया था।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की खंडपीठ पीसीआई के आदेश को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता (हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता को "सेंसर" किया गया।यह आदेश कथित रूप से इसलिए जारी किया गया क्योंकि ...
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाईकोर्ट में पांच अधिवक्ताओं की जज के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा और जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रूप में पांच अधिवक्ताओं की नियुक्ति की सिफारिश की है। कॉलेजियम ने इन नामों का प्रस्ताव दिया हैडॉ. विवेक शरण, निधि पाटनकर और प्रणय वर्मा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश।अधिवक्ता विकास बहल को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश। अधिवक्ता राहुल भारती को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की...
पत्नी की चुप्पी को यह नहीं माना जा सकता कि उसने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 7 के तहत गोद लेने को सहमति दे दी है: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि पति द्वारा गोद लेने के समय पत्नी की चुप्पी या विरोध का अभाव, हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 7 के तहत इस तरह के गोद लेने पर सहमति नहीं मानी जा सकती है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने फैसला में कहा, "अदालत पत्नी की सहमति सिर्फ इसलिए नहीं मान सकती क्योंकि वह गोद लेने के समय मौजूद थी।"यह माना गया कि अधिनियम की धारा 7 के प्रावधान को संतुष्ट करने के लिए, एक हिंदू पुरुष, जिसकी जीवित पत्नी है, द्वारा गोद का प्रस्ताव देने...
जेल में 20 साल बिताने के बाद बलात्कार के केस में बरी होने का मामलाः एनएचआरसी ने यूपी सरकार से आरोपी के पुनर्वास व दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बीस साल जेल में बिताने के बाद बलात्कार के केस में एक व्यक्ति को बरी किए जाने के मामले पर स्वत संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने पाया कि यह सीआरपीसी की धारा 433 के गैर-अनुप्रयोग का मामला है। गौरतलब है कि यह मामला एक 23 वर्षीय व्यक्ति (अब 43) का है, जिसे बलात्कार के एक मामले में ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और जिसे अब बीस साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्दोष घोषित किया है। महत्वपूर्ण है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट जनवरी 2021 में उस व्यक्ति के बचाव...
यूपी बार काउंसिल बनाम बीसीआईः एडवोकेट एक्ट के तहत बीसीआई को राज्य बार काउंसिल को निर्देश देने का अधिकार - बीसीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि 19 जनवरी, 2021 और 2 फरवरी, 2021 को यूपी बार काउंसिल की गतिविधियों की निगरानी करने के लिए जारी सर्कुलर के लिए उसने अधिवक्ता अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया गया है। अपने इस अधिकार का प्रयोग करते हुए बीसीआई ने यूपी बार काउंसिल की गतिविधियों की निगरानी के लिए समितियों का गठन किया था।बीसीआई अध्यक्ष मिश्रा ने न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की एकल पीठ को बताया कि बीसीआई के पास अधिवक्ता अधिनियम,...
एक बार जब अन्वेषण पूरा हो जाता है तो पुलिस को कार्रवाई के बारे में अपराध की प्रथम इत्तिला देने वाले को सूचित करना अनिवार्य है: त्रिपुरा उच्च न्यायालय
त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने सोमवार (01 फरवरी) को राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि Cr.P.C की धारा 173 (2) (ii) की आवश्यकता का सभी मामलों में 'कड़ाई से पालन' किया जाए। मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति एस.जी. चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने विशेष रूप से राज्य सरकार के गृह विभाग को निर्देश दिया कि वह सभी पुलिस स्टेशनों को एक उचित परिपत्र जारी करे, जिसमें पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी और जांच अधिकारी को सभी मामलों में धारा 173 (2) (ii) Cr.PC की आवश्यकता का पालन करने के...
'एक बार जब याचिका में गलती का मुद्दा उठाया जाता है, तो उसको साबित करने का जिम्मा भी पक्षकार का होता है': मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा कि एक व्यक्ति, जो न्यायालय के समक्ष पेश किसी भी सबूत को हटाने के लिए एक बार जब याचिका में गलती का मुद्दा उठाया जाता है, तो उसको साबित करने का जिम्मा भी पक्षकार का होता है।न्यायमूर्ति आर सुब्रमण्यन की एकल पीठ ने एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मांग का दावा किया गया था कि वह एक हिंदू महिला है और गलती से उसे स्कूल प्रमाणपत्र में ईसाई के रूप में दिखाया गया है।बेंच ने महिला के पति द्वारा की गई प्रार्थना को भी अनुमति दी, जिसमें महिला के पति ने उनकी शादी...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए सॉफ्टवेयर ऐप लॉन्च किया
उत्तराखंड राज्य के न्यायिक अधिकारियों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (जिला न्यायालय प्रदर्शन निगरानी उपकरण-डीसीपीएमटी) का उद्घाटन 03 मार्च, 2021 को उच्च न्यायालय, नैनीताल में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रघुवेंद्र सिंह चौहान ने किया ।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रघुवेंद्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन व निर्देशों के तहत उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम ने डीसीपीएमटी बनाया है। इन-हाउस सॉफ्टवेयर का उद्देश्य उत्तराखंड उच्च न्यायालय के माननीय...
सरोगेट महिला भी मातृत्व अवकाश का लाभ पाने की हकदार, सरोगेट मां और प्राकृतिक मां के बीच अंतर करना महिला होने का अपमान: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि एक सरोगेट मां भी सीसीएस (लीव) रूल्स, 1972 के नियम 43 (1) के तहत मातृत्व अवकाश का लाभ पाने की हकदार है। यह भी कहा गया है कि यह "महिला होने का अपमान" होगा, यदि एक सरोगेट मां और प्राकृतिक मां के बीच अंतर किया जाता है।जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस संदीप शर्मा की पीठ ने एक सरोगेट मां की याचिका पर सुनवाई में उक्त टिप्पणियां की हैं। याचिका में सरोगेट मां के लिए भी मातृत्व अवकाश का लाभ पाने की मांग की गई थी।पीठ ने कहा, "मातृत्व बच्चे के जन्म के साथ...
"इसकी अनुमति कैसे मिली", गुजरात हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट पर हैरानी जताई कि 5000 से अधिक स्कूल फायर सेफ्टी एनओसी के बिना चल रहे हैं
गुजरात हाईकोर्ट ने फायर प्रिवेंशन एंड प्रोटेक्शन सिस्टम के संबंध में बिना वैध और निर्विवाद प्रमाण पत्र के राज्य के 5,000 से अधिक स्कूलों के संचालन पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा की एक खंडपीठ ने रिपोर्ट पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,"इसकी अनुमति कैसे दी गई? ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के मासूम जीवन के साथ कोई कैसे खेल सकता है? यदि इस दिशा में जल्द से जल्द कोई कदम नहीं उठाया जाता है, तो यह अदालत राज्य सरकार से ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने के...
कानूनी बिरादरी को वैक्सीनेशन : दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत बायोटेक, एसआईआई से हलफनामा मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रेखा पल्ली की खंडपीठ ने शुक्रवार को कानून बिरादरी को COVID-19 वैक्सीनेशन से संबंधित एक मामले में अदालत द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों को संबोधित करते हुए भारत सरकार, दिल्ली राज्य सरकार और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक के लिए वकीलों के प्रस्तुतिकरण को ध्यान में रखते हुए कि उनके पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, अदालत ने संगठनों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया कि...
अगले आदेश तक आवासीय भवनों पर टावर लगाने की अनुमति न दें, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया
'आवासीय भवन पर टावर लगाने' के 'महत्वपूर्ण सवाल' पर विचार-विमर्श करते हुए, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार (03 मार्च) को पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक आवासीय भवनों पर टावरों को लगाने की अनुमति न दें।(अंतरिम उपाय)जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस करमजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश इस तथ्य के मद्देनजर पारित किया है कि बेतरतीब ढंग से टावरों लगाने से लोगों के जीवन और संपत्ति को खतरा हो सकता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा।इसके अलावा, खंडपीठ ने...
मध्यस्थता विवादों से जुड़े वाणिज्यिक मामलों को जिला जज या अतिरिक्त जिला जज के स्तर के वाणिज्यिक न्यायालय द्वारा ही सुना जा सकता हैः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता विवादों से जुड़े वाणिज्यिक मामलों को केवल जिला जज या अतिरिक्त जिला जज के स्तर के वाणिज्यिक न्यायालय द्वारा ही सुना जा सकता है। यह माना गया है कि एक सिविल जज आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 9,14, 34 और 36 के तहत मामलों की सुनवाई करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं होगा।चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने 26 फरवरी के अपने आदेश में कहा कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 2 (1) (सी) में "न्यायालय" के परिभाषा खंड में...



















