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दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, यूएपीए मामले में कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट की न्यायिक रिमांड बढ़ाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती
कश्मीर स्थित 24 वर्षीय स्वतंत्र फोटोग्राफर मोहम्मद मनन डार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत दर्ज एक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।अधिवक्ता तारा नरूला, तमन्ना पंकज और प्रिया वत्स के माध्यम से दायर याचिका में सीआरपीसी की धारा 167(1) के तहत, जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कारण डिफॉल्ट बेल की मांग की गई है।पिछले साल अक्टूबर में यूएपीए की धारा 18, 18ए,...
बलात्कार महिला के पवित्र शरीर और समाज की आत्मा के खिलाफ सबसे बर्बर अपराधों में से एकः दिल्ली हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में 6 में से 3 आरोपियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार के मामले में तीन आरोपियों की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि बलात्कार एक महिला के पवित्र शरीर और समाज की आत्मा के खिलाफ किए गए सबसे बर्बर अपराधों में से एक है।अदालत ने हालांकि इस मामले में तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। जस्टिस चंद्रधारी सिंह की पीठ ने कहा कि, ''बलात्कार सबसे बर्बर और जघन्य अपराधों में से एक है जो न केवल बलात्कार-पीड़िता की गरिमा के खिलाफ बल्कि बड़े पैमाने पर समाज के खिलाफ भी किया जाता है। प्रत्येक नागरिक की गरिमा संविधान के...
डीएसपी रैंक की महिला अधिकारी द्वारा गायघाट शेल्टर होम मामले की जांच की जाएगी: राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट को सूचित किया
बिहार सरकार (Bihar) ने पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) को सूचित किया कि गायघाट शेल्टर होम मामले की जांच एक महिला अधिकारी द्वारा की जाएगी, जो डीएसपी रैंक से नीचे नहीं होगी।यह भी प्रस्तुत किया गया कि जांच अभी जारी है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस महीने की शुरुआत में, पटना उच्च न्यायालय ने गायघाट शेल्टर होम मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें जिसमें शेल्टर होम के एक कैदी ने आरोप लगाया कि महिलाओं को बेहोश करके अनैतिक कृत्यों के लिए खुद को प्रस्तुत करने के लिए मजबूर किया गया था।3 फरवरी को,...
केवल यह तथ्य कि एफआईआर प्रतिवाद के रूप में दर्ज की गई, धारा 482 सीआरपीसी के तहत रद्द करने का आधार नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि केवल यह तथ्य कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर प्रतिवाद (counterblast) के रूप में दर्ज की गई थी, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। जांच के बाद ही यह पता किया जा सकता है।जस्टिस चीकाती मानवेंद्रनाथ राय ने कहा, "आरोप झूठे हैं या नहीं और रिपोर्ट वास्तविक शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट के प्रतिवाद के रूप में दर्ज की गई है या नहीं, यह जांच के दरमियान जांच अधिकारी द्वारा पता लगाए जाने का विषय है। इसलिए, इस स्तर पर...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस नोटरी को समन भेजा, जो 3-4 क्लर्कों के साथ काम कर रहा था; सभी खुद को नोटरी की तरह पेश करते हैं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक नोटरी को समन भेजा है। उस पर आरोप है कि वह हाईकोर्ट की इमारत के बाहर से 3-4 क्लर्कों के साथ काम कर रहा है और वे क्लर्क खुद को नोटरी के रूप में पेश कर रहे हैं।नोटरी एक ऐसी सेवा है, जिसका उपयोग दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है। नोटरी जब दस्तावेज की नकल को मूल के साथ प्रमाणित कर देता है, उसके बाद उसे नोटरीकृत करना होता है। अदालत के समक्ष किसी व्यक्ति द्वारा किसी दस्तावेज को दाखिल करने के मामले में, नोटरी को उस व्यक्ति के पहचान दस्तावेज की जांच करनी चाहिए।पिछले...
'आरोपी को झुकाने के लिए मामला दायर': दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठे यौन उत्पीड़न के मामलों में खतरनाक वृद्धि पर जताई चिंता
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में झूठे यौन उत्पीड़न मामले में खतरनाक वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इसे केवल अभियुक्तों को दबाव में लाने और शिकायतकर्ता की मांगों के आगे घुटने टेकने को मजबूर करने के लिए दायर किया जाता है।न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "यह कोर्ट इस बात से दुखी है कि धारा 354, 354ए, 354बी, 354सी और 354डी के तहत मामलों में खतरनाक वृद्धि हो रही है, ताकि आरोपी को केवल शिकायतकर्ता की मांगों के आगे झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।"कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा ऐसे झूठे...
हिजाब की अनुमति देना एक नेशनल प्रैक्टिस, केन्द्रीय विद्यालय भी अनुमति देते हैं, राज्य नहीं कह सकता कि यह आवश्यक नहीं : कामत ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता, एक मुस्लिम छात्रा की ओर से व्यापक दलीलें सुनीं, जिसने हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर उसे कॉलेज में प्रवेश करने से इनकार करने की एक सरकारी कॉलेज की कार्रवाई को चुनौती दी थी।पीठ ने पिछले शुक्रवार को छात्रों को कक्षाओं में किसी भी प्रकार के धार्मिक कपड़े पहनने से रोका था , जबकि मामले की सुनवाई लंबित है। अंतरिम आदेश केवल उन संस्थानों पर लागू किया गया जिन्होंने कॉमन ड्रेस कोड निर्धारित किया है।मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को सुनवाई की शुरुआत में सभी...
यदि पति के किसी अन्य स्त्री को अपने साथ रखने के आधार पर पत्नी ने वैवाहिक घर छोड़ा है तो यह परित्याग नहींः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि यदि पत्नी इस तथ्य के कारण अपना वैवाहिक घर छोड़ देती है कि उसके पति ने दूसरी महिला (उपपत्नी) को अपने साथ रख लिया है और उसे (पत्नी) शारीरिक और मानसिक यातना देता है तो इसे पत्नी की ओर से परित्याग के रूप में नहीं माना जा सकता है।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस रजनी दुबे की खंडपीठ ने इस अवलोकन के साथ फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पति/अपीलकर्ता की तरफ से दायर अपील खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट ने पति की तरफ से दायर उस वाद को खारिज कर दिया था,जिसमें...
देवी सरस्वती के बारे में आपत्तिजनक एफबी पोस्ट: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पोस्ट हटाने के लिए फेसबुक इंडिया के साथ यूआरएल शेयर करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को याचिकाकर्ता को आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने के लिए देवी सरस्वती के बारे में एक कथित आपत्तिजनक पोस्ट का यूआरएल (URL) विवरण तुरंत फेसबुक इंडिया के अधिकारियों के साथ साझा करने का निर्देश दिया, जिससे फेसबुक उक्त आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंंत हटा सके। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस वर्तमान कार्यवाही में कथित आरोपी को पार्टी बनाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजराशी भारद्वाज की पीठ एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। इस...
मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने पर एडवोकेट जनरल का इस्तीफा देना जरूरी नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी राज्य के एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे पर मंत्री परिषद के साथ या विधान सभा के कार्यकाल/विघटन की समाप्ति पर अपना इस्तीफा प्रस्तुत करने का कोई दायित्व नहीं है।चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 165 (3) का उल्लंघन करते हुए बिहार के एजी ललित किशोर को हटाने की मांग वाली एक रिट याचिका को खारिज करते हुए कहा।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता दिनेश ने एक जनहित याचिका दायर कर कहा कि जुलाई 2017 में किशोर को एक नए...
'हमारा विचार है कि इस तरह की याचिका सुनवाई योग्य नहीं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्यपाल जगदीप धनकड़ को हटाने की मांग वाली पीआईएल पर फैसला सुरक्षित रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इस याचिका में केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में जगदीप धनखड़ को हटाने का निर्देश देने की प्रार्थना की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि वह 'भारतीय जनता पार्टी के एजेंट' के रूप में काम कर रहे हैं।चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजराशी भारद्वाज की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,"हम विचार करेंगे और एक आदेश पारित करेंगे। जाहिर तौर पर हमारा विचार है कि इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं की जा...
बिहार में न्यायिक अवसंरचना विकास: पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट मांगी
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने बिहार राज्य के भीतर विभिन्न अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं प्रदान करने में राज्य की ओर से उदासीनता को उजागर करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक अवसंरचना विकास पर राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह याचिका केवल राज्य में अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए ढांचागत जरूरतों तक ही सीमित है।कोर्ट की टिप्पणियां कोर्ट ने शुरू में...
विभागीय जांच के बिना, एफआईआर को संदर्भित कर दिया गया बर्खास्तगी आदेश दोषपूर्णः गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्ण विभागीय जांच किए बिना कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर और मामला दर्ज करने का संदर्भ देकर दिए गए बर्खास्तगी के आदेश का दोषपूर्ण होना तय है। जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने अनुच्छेद 226 के तहत एक याचिका पर यह टिप्पणी की, जिसमें याचिकाकर्ता की सेवाओं को समाप्त करने के लिए किए गए संचार को चुनौती दी गई थी। बेंच ने संचार को रद्द कर दिया।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता को गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड में तालुका प्रबंधक के रूप में अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। 2018 में कुछ...
पूर्ण विभागीय जांच के बिना कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने याचिकाकर्ता की सेवाओं को समाप्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की अनुमति देते हुए कहा कि नियोक्ता को काम पर रखने और नौकरी से निकालने की अनुमति नहीं है।कोर्ट ने आगे कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार नियमित जांच किए बिना कर्मचारी को कदाचार के आधार पर एक झटके में नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। पूरा मामलायाचिकाकर्ता, एक जूनियर क्लर्क (प्रशासन), पांच साल के अनुबंध के आधार पर तालुका पंचायत में सेवाओं में लगा हुआ था। याचिकाकर्ता की...
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 36 ए (4) के तहत आरोपी की 180 दिन से आगे हिरासत को उचित ठहराने के लिए लोक अभियोजक को स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत आरोपी को 180 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी नहीं होने के बहाने डिफॉल्ट जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता है, जब तक कि लोक अभियोजक, स्वतंत्र रूप से अपना विवेक लगाने के बाद, जांच एजेंसी को जांच पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए आरोपी को और हिरासत में रखने के औचित्य का खुलासा करते हुए एक रिपोर्ट दाखिल नहीं करता है।जस्टिस संत प्रकाश ने कहा कि कोई लोक अभियोजक केवल एक पोष्ट ऑफिस या फारवर्डिंग एजेंसी नहीं है। "समय के विस्तार की...
[41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 1980 के एक मामले में हत्या के दोषी की उम्रकैद की सजा को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह की गवाही विश्वसनीय नहीं है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने मामले में जोड़े गए तथ्यों, परिस्थितियों और सबूतों के विश्लेषण में पाया कि घटना के एकमात्र चश्मदीद पीडब्ल्यू-1 की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं था, जिन्होंने घटना से ठीक पहले मृतक के साथ थे।तथ्यमामले में एफआईआर नबी बख्श (पीडब्ल्यू-1) ने दर्ज कराई थी, जिन्होंने आरोप...
"न्यायपालिका, न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को हटा दिया गया है": ट्विटर ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट को सूचित किया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) द्वारा 31 जनवरी, 2022 को पारित आदेश के अनुपालन में एक हलफनामा दायर करते हुए ट्विटर (Twitter) ने कोर्ट को सूचित किया है कि उसने न्यायपालिका, हाईकोर्ट के जज के खिलाफ पोस्ट की गई कई 'अपमानजनक' टिप्पणियों को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार न्यायपालिका और कुछ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ पोस्ट की गई कई 'अपमानजनक' टिप्पणियों को हटाने में विफल रहने के लिए ट्विटर से स्पष्टीकरण...
गुजरात हाईकोर्ट ने शादी करने के इच्छुक युवा जोड़े को सुरक्षा प्रदान की
गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ ने एक दूसरे से शादी करने के इच्छुक एक युवा जोड़े को सुरक्षा प्रदान करते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, बनासकांठा की देखरेख से जयबेन श्रीमाली की रिहाई की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका स्वीकार कर ली।अदालत ने पहले एक अवसर पर याचिकाकर्ता हितेशकुमार प्रजापति से शादी करने में रुचि रखने वाले कॉर्पस को सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन यह कहने के लिए दबाव डाला गया कि वह 21 वर्ष से कम आयु का था। याचिकाकर्ता के 07.02.2022 को 21 वर्ष...
बच्चों का गवाह के रूप में परीक्षण नहीं करना अभियोजन के मामले के लिए घातक नहीं है, जबकि वयस्क गवाह उपलब्ध हैं: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला में कहा कि बच्चों को अदालत में नहीं बुलाया जा सकता है और जब तक बहुत जरूरी नहीं है और मामले को साबित करने के लिए अन्य गवाह नहीं है, तब तक उन्हें गवाह के रूप में उद्धृत नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा, कि जब वयस्क गवाह उपलब्ध हों तो बच्चों का परीक्षण नहीं करना अभियोजन के मामले के लिए घातक नहीं है।जस्टिस जी राधा रानी ने यह टिप्पणी निचली अदालत के आदेश के खिलाफ राज्य द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दरमियान की, जिसमें आईपीसी की धारा 448 (घर में घुसना), 354...
'पति बेरोजगारी की दलील देकर अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता': दिल्ली कोर्ट ने भरण-पोषण के अंतरिम आदेश को बरकरार रखा
दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने एक मामले में पति द्वारा पत्नी को 5,133 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण की मामूली राशि देने के आदेश को बरकरार रखा है।कोर्ट ने कहा कि केवल इस तथ्य को देखते हुए कि पति बेरोजगार है, वह अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने कहा कि पति बेरोजगारी की दलील देकर पत्नी के प्रति अंतरिम भरण पोषण के संबंध में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।कोर्ट ने कहा, "केवल इस तथ्य को देखते हुए कि पति बेरोजगार है,...















![[41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की [41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/10/21/500x300_402691-allahabadhc.jpg)


