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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अमजद ए सईद को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अमजद ए सईद को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अमजद ए सईद के नाम की सिफारिश की है। वर्तमान में जस्टिस अमजद ए. सैयद बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। 21 जनवरी, 1961 को जन्मे जस्टिस सैयद ने वर्ष 1984 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह केंद्र सरकार, बॉम्बे हाईकोर्ट (Senior Counsel Group-I) के पैनल में थे। वह बॉम्बे हाईकोर्ट में सहायक सरकारी वकील भी रहे।वह भारत सरकार/राज्य सरकार की ओर से मैंग्रोव, कचरा...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'कस्टडी में रहते हुए कई बीमारियों से पीड़ित हो गया': कलकत्ता हाईकोर्ट ने बोलने और सुनने में पूरी तरह असमर्थ एनडीपीएस आरोपी को जमानत दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में सीआरपीसी की धारा 439 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया और एक आरोपी को जमानत दी। कोर्ट ने ध्यान दिया गया कि आरोपी बोलने और सुनने में पूरी तरह असमर्थ है और हिरासत में रहते हुए कई शारीरिक बीमारियों से पीड़ित हो चुका है।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस केसांग डोमा भूटिया की एक पीठ याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर फैसला सुना रही थी। उस पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत अपराध का आरोप था।अदालत ने कहा कि...

माता मृकुला देवी मंदिर का जीर्णोद्धार | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एएसआई को मंदिर इंस्पेक्शन पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया
माता मृकुला देवी मंदिर का जीर्णोद्धार | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एएसआई को मंदिर इंस्पेक्शन पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 11 वीं शताब्दी में निर्मित मंदिर माता मृकुला देवी में इंस्पेक्शन कार्य पूरा करने का आदेश दिया है, जो राज्य के लाहौल जिले में स्थित है।गौरतलब है कि कोर्ट ने वर्ष 2020 में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए माता मृकुला देवी मंदिर की बिगड़ती स्थिति का विवरण प्रस्तुत करने के बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए मुकदमा शुरू किया था।चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस संदीप शर्मा की पीठ ने 21 अप्रैल को...

कलकत्ता हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 313- 'आरोपी को उसके खिलाफ सबूतों में आने वाली किसी भी परिस्थिति को व्यक्तिगत रूप से स्पष्ट करने का अवसर दिया जाना चाहिए': कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने शुक्रवार को कहा कि सीआरपीसी की धारा 313 के तहत एक आरोपी की जांच करते समय, अभियोजन पक्ष का यह अनिवार्य दायित्व है कि वह आरोपी को उसके खिलाफ सबूतों में आने वाली किसी भी परिस्थिति को व्यक्तिगत रूप से समझाने का अवसर दे।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य ने महेश्वर तिग्गा बनाम झारखंड राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी भरोसा किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सीआरपीसी की धारा 313 के तहत किसी आरोपी के लिए परिस्थितियों का इस्तेमाल उसके खिलाफ नहीं किया जा सकता है...

दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई के पूर्व प्रमुख एम नागेश्वर राव का ट्विटर वैरिफिकेशन टैग हटाने के खिलाफ दायर याचिका जुर्माने के साथ खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के वैरिफिकेशन टैग (नाम के साथ ब्ल्यू टिक) हटाने के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व प्रमुख और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव द्वारा दायर याचिका 10,000 रुपए के जुर्माने के साथ खारिज कर दी। जस्टिस यशवंत वर्मा का विचार था कि राव को वैरिफिकेशन के लिए फिर से आवेदन करने की स्वतंत्रता देकर, 7 अप्रैल, 2022 के आदेश के द्वारा समान प्रार्थनाओं वाली याचिका का निपटारा किया जा चुका है।नतीजतन राव ने उक्त आदेश के अनुपालन में...

आईपीसी/आरपीसी अपराधों के संबंध में बैंक अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए किसी पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
आईपीसी/आरपीसी अपराधों के संबंध में बैंक अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए किसी पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि आईपीसी/आरपीसी के तहत अपराधों के संबंध में बैंक अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए पूर्व मंजूरी लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता बैंक के अधिकारियों की नियुक्ति और हटाने का अधिकार सरकार का नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्टेट बैंक का सक्षम प्राधिकारी है जिसे ऐसा करने का अधिकार है। इसलिए, सीआरपीसी की धारा 197 बैंक अधिकारियों के मामले में लागू नहीं होती है।संक्षेप में मामलाप्रतिवादी-शिकायतकर्ता द्वारा मुख्य न्यायिक...

रिटायरमेंट के बाद गोद लिए गए बच्चे को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
रिटायरमेंट के बाद गोद लिए गए बच्चे को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की दत्तक बेटी की याचिका पर विचार करते हुए ने कहा कि दत्तक पोस्ट-रिटायरमेंट दत्तक को पारिवारिक पेंशन के लाभ से वंचित करने का आधार नहीं होगी। उक्त लड़की का परिवार पेंशन के लाभ के लिए आवेदन को उसके पिता की सेवानिवृत्ति की तारीख के बाद गोद लिए जाने के एकमात्र आधार पर खारिज कर दिया गया था।कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि पोस्ट-रिटायरमेंट के बाद बच्चा गोद लिया गया है, जो मुख्य रूप से निर्भरता के लिए और युगल के बुढ़ापा के सहारा के लिए है। यह उक्त बच्चे को...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
सीपीसी का आदेश XVA | अदालत के निर्देश पर किराए के भुगतान में महज चूक करना ही दोषी किरायेदार के बचाव को निरस्त करने को सही नहीं ठहराता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश XVA(1) के तहत कोर्ट द्वारा निर्देशित किराये के भुगतान में महज चूक, वास्तव में, डिफ़ॉल्ट किरायेदार के बचाव को दरकिनार करने वाला आदेश पारित करने को सही नहीं ठहरा सकती है।न्यायमूर्ति सी हरि शंकर, ट्रायल कोर्ट द्वारा दीवानी वाद में पारित 07 दिसंबर, 2019 के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता प्रतिवादी था और प्रतिवादी वादी था।आक्षेपित आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी)...

सेवानिवृत्ति के बाद गोद लिए गए बच्चे को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सेवानिवृत्ति के बाद गोद लिए गए बच्चे को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने एक सरकारी कर्मचारी की दत्तक बेटी की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद गोद लिए बच्चे को पारिवारिक पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। दत्तक बेटी के परिवारिक पेंशन के लाभ के लिए किए गए आवेदन को उसके पिता की सेवानिवृत्ति की तारीख के बाद गोद लिए जाने के एकमात्र आधार पर खारिज कर दिया गया था।पीठ ने कहा कि केवल इसलिए कि सेवानिवृत्ति के बाद गोद लिया है जो मुख्य रूप से निर्भरता प्रदान करने के उद्देश्य से है और कपल...

कलकत्ता हाईकोर्ट
36 साल के बाद आरोपियों को दोषी ठहराने से सुविधा का संतुलन बिगड़ेगा और अधिक अन्याय होगा: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने आईपीसी की धारा 147/380/427 (दंगा करने की सजा, आवास में चोरी, नुकसान पहुंचाने वाली शरारत) के तहत एक आपराधिक मामले के संबंध में बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य का विचार था कि आरोप तय होने के 36 साल के अंतराल के बाद दोषसिद्धि का आदेश पारित करने से सुविधा का संतुलन बिगड़ जाएगा और अन्याय होगा, खासकर तब जब आरोपी ने अपील में प्रतिनिधित्व भी नहीं किया हो।तदनुसार, इसने मामले को पुन: विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया।पीठ मई 1980 में...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को 'दहेज कैलकुलेटर' वेबसाइट के मालिक को ब्लॉकिंग ऑर्डर और फैसले के बाद सुनवाई की कॉपी देने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह वेबसाइट 'दहेज कैलकुलेटर' के मालिक और निर्माता तनुल ठाकुर को ओरिजनल ब्लॉकिंग ऑर्डर के साथ-साथ निर्णय के बाद सुनवाई की कॉपी दे, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सितंबर 2018 में ब्लॉक कर दिया गया था।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा की खंडपीठ ने ब्लॉकिंग नियम, 2009 के तहत एमईआईटीवाई द्वारा गठित समिति को 23 मई, 2022 को दोपहर 3 बजे ठाकुर के वकील को निर्णय के बाद सुनवाई करने का निर्देश...

मजिस्ट्रेट द्वारा सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस जांच करने से इनकार नहीं कर सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट द्वारा सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस जांच करने से इनकार नहीं कर सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब अदालत आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 200 के तहत दायर शिकायत को स्वीकार कर लेती है और विशेष पुलिस को जांच का निर्देश देती है तो पुलिस जांच से इनकार नहीं कर सकती है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने अश्विनी द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए पुलिस द्वारा जारी दिनांक 26.08.2021 के समर्थन के आदेश को खारिज कर दिया। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले की जांच और अंतिम रिपोर्ट दर्ज करें जैसा कि IX अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, बेंगलुरु,...

दिल्ली हाईकोर्ट
आरोपी के खिलाफ उद्घोषणा/अटैचमेंट प्रक्रिया की शुरुआत उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करने से नहीं रोकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उद्घोषणा या कुर्की की कार्यवाही शुरू की है, हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत आवेदन के लंबित होने के बावजूद सीआरपीसी की धारा 82/83 ऐसे आवेदन पर विचार करने पर कोई रोक नहीं लगाती।सीआरपीसी की धारा 82 फरार व्यक्ति के विरुद्ध उद्घोषणा जारी करने की प्रक्रिया पर विचार करती है। वहीं धारा 83 फरार व्यक्ति की संपत्ति कुर्क करने की बात करती है।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 467, धारा 120बी सपठित आईटी...

डीआरआई ने एससीएन बिना किसी कानूनी अधिकार के जारी किया : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई
डीआरआई ने एससीएन बिना किसी कानूनी अधिकार के जारी किया : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज पार्थ प्रतिम साहू की खंडपीठ ने डीआरआई द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया और कार्यवाही पर रोक लगा दी।याचिकाकर्ता/निर्धारिती (Assessee) ने प्रस्तुत किया कि रेलवे स्टेशन-रायपुर में दो व्यक्तियों की डीआरआई द्वारा की गई गिरफ्तारी के अनुसार, डीआरआई ने उसी तारीख को याचिकाकर्ता के घर की तलाशी ली और सोने की छड़ें, चांदी की सिल्लियां, चांदी और 32 लाख रुपये की नकद राशि भी बरामद की।याचिकाकर्ता ने जब्ती की कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने जांच के लिए समय...

यदि अदालत प्रथम दृष्टया मानती है कि आरोपी ने क्रूरता से काम किया है तो उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
यदि अदालत प्रथम दृष्टया मानती है कि आरोपी ने क्रूरता से काम किया है तो उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि जमानत पर फैसला करने में क्रूरता एक कारक है, हाल ही में कहा कि आमतौर पर एक बार जब अदालतें प्रथम दृष्टया राय बनाती हैं कि आरोपी ने क्रूरता के साथ कृत्य किया है, तो ऐसे आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।यह रेखांकित करते हुए कि एक क्रूर व्यक्ति किसी भी समाज में असुरक्षा पैदा कर सकता है, जस्टिस अनूप चितकारा की खंडपीठ ने कहा-एक बार जब अदालतें प्रथम दृष्टया यह राय बना लेती हैं कि आरोपी ने क्रूरता के साथ काम किया है तो ऐसे आरोपी को आमतौर पर...

डीआरटी, सरफेसी या अन्य फोरम पर कार्यवाही का लंबित होना- सीआईआरपी शुरू करने के लिए कोई रोक नहीं: एनसीएलएटी चेन्नई
डीआरटी, सरफेसी या अन्य फोरम पर कार्यवाही का लंबित होना- सीआईआरपी शुरू करने के लिए कोई रोक नहीं: एनसीएलएटी चेन्नई

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की चेन्नई बेंच ने अमर वोरा बनाम सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड मामले में एक अपील पर फैसला सुनाया है। बेंच ने माना है कि इनसॉल्वेंसी एंड बैकरप्सी कोड, 2016 (आईबीसी) की धारा 7, 9, या 10 के तहत एक याचिका दायर की जा सकती है, भले ही उसी ऋण के संबंध में कार्यवाही ऋण वसूली न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित हो; या सरफेसी एक्ट 2002; या बेनामी संपत्ति लेनदेन एक्ट, 1988 या किसी अन्य फोरम पर लंब‌ित हो। आईबीसी का अन्य कानूनों पर ओवरराइडिंग प्रभाव पड़ता है। यह आदेश 11.05.2022...

केरल हाईकोर्ट
विशेष अदायगी के लिए डिक्री मौखिक समझौते के आधार पर तब तक नहीं दी जा सकती जब तक कि यह ठोस साक्ष्य के जरिए साबित न हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्थापित किया कि विशेष अदायगी के लिए एक डिक्री मौखिक समझौते के आधार पर नहीं दी जा सकती है जब तक कि इस तरह के समझौते को साबित करने के लिए ठोस सबूत न हों।जस्टिस के बाबू ने कहा कि पुनर्हस्तांतरण के लिए मौखिक अनुबंध की याचिका को तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब इसे स्थापित करने के लिए ठोस सबूत हों। उन्होंने कहा, "प्रथम अपीलीय न्यायालय ने स्थापित सिद्धांत की दृष्टि खो दी कि विशिष्ट प्रदर्शन के लिए एक मौखिक समझौते के आधार पर एक डिक्री नहीं दी जा सकती जब तक कि इसे साबित करने...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'युवा व्यक्ति अपराध के समय बमुश्किल 18 साल का था': कलकत्ता हाईकोर्ट ने सात साल की बच्ची से बलात्कार के दोषी को आजीवन कारावास की सजा की कमी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी व्यक्ति को दी गई आजीवन कारावास की सजा को इस बात को ध्यान में रखते हुए बदल दिया कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह पहले से ही लगभग 18 साल कैद का सामना कर चुका है।जस्टिस बिवास पटनायक और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हालांकि वर्तमान मामले में नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार किया गया था, आरोपी भी एक युवा व्यक्ति था जिसकी उम्र घटना के समय बमुश्किल 18 वर्ष से अधिक थी।उम्रकैद की सजा को कम करते हुए बेंच ने...