मुख्य सुर्खियां
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल से अधिक समय से सेशन कोर्ट में मामला सौंपने में विफलता को स्पष्ट करने के लिए एसीजेएम को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर चार, हरदोई को सेशन कोर्ट में दो साल से अधिक समय तक आपराधिक मामला में विफलता को स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ सूरज पाल/अभियुक्त द्वारा पेश की गई जमानत याचिका पर विचार कर रही थी। उक्त अभियुक्त के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 के तहत आरोप पत्र दायर किया है। इस पर तीन जनवरी, 2020 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरदोई द्वारा लिया गया था। जांच अभी...
दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में फिर हुई फायरिंग, दो घायल
दिल्ली की रोहिणी अदालत में एक बार फिर फायरिंग हुई है। हालांकि घटना के बारे में पुलिस का अभी तक कोई बयान नहीं आया है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोली रोहिणी अदालत में प्रवेश करने के स्थान पर चेकिंग के दौरान चली है।घटना में एक वकील और एक मुव्वकिल घायल हुआ है। दोनों के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।इससे पहले पिछले साल 24, सिंतबर को रोहिणी कोर्ट में गोलीबारी की एक घटना हुई थी। इसमें घटना में एक गैंगस्टर और दो अपराधी मारे गए थे। इस गोलीबारी में जितेंद्र मान गोगी गैंगस्टर मारा गया था।गोगी पर गोली...
'पुलिस एडवोकेट और क्लाइंट्स के बीच की प्रिविलेज कम्युनिकेशन लीक कर रही है' : वकील ने बार काउंसिल में शिकायत की
अभिनेता दिलीप से जुड़े मामलों में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच विशेषाधिकार प्राप्त संचार को कथित रूप से लीक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए वकील ने बार काउंसिल ऑफ केरल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।यह उन रिपोर्टों में कहा गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता बी. रमन पिल्लई जो ज्यादातर मामलों में अभिनेता का प्रतिनिधित्व करते हैं और दिलीप के भाई अनूप के बीच कॉल मीडिया में लीक हो गए हैं।अपनी शिकायत में अधिवक्ता वी. सेतुनाथ ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को...
बलात्कार पीड़िता को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से मांगा जवाब
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के समक्ष सीआरपीसी की की धारा 482 के तहत याचिका दायर कर बलात्कार पीड़िता और उसके दोस्त को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दर्ज मामले के संबंध में संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग की है।इस मामले में एक महिला और उसके दोस्त ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर खुद को आग लगा ली थी और झुलने के कारण बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया।24 वर्षीय महिला, जिसके साथ 2019 में बहुजन समाज पार्टी के सांसद अतुल राय द्वारा कथित रूप से बलात्कार...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य पर बिना वैध स्वीकृति के अभियुक्तों/संदिग्धों के घरों को "ध्वस्त" करने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य में पुलिस द्वारा कथित तौर पर कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों के घरों और अन्य पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने पर अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस रवि मलीमथ और जस्टिस पी.के. कौरव ने कहा कि पेशे से वकील याचिकाकर्ता और उक्त कार्यवाही से पीड़ितों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि वे लोग न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, जो सीधे तौर पर विध्वंस से पीड़ित...
'इस मामले की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी': बिहार सरकार ने शेल्टर होम मामले में पटना हाईकोर्ट को बताया
बिहार सरकार (Bihar Government) ने गायघाट शेल्टर होम मामले में पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) को बताया कि इस मामले की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने चीफ जस्टिस संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और जस्टिस एस कुमार (Justice S Kumar) की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया,"इस मामले की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी और पटना के एसपी द्वारा हलफनामे के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।"पिछली सुनवाई में...
[भरण-पोषण भत्ता का भुगतान न होना] मजिस्ट्रेट सीआरपीसी धारा 421 के तहत जुर्माना लगाए बिना गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि भरण-पोषण भत्ता देने के न्यायालय के आदेश का पालन करने में किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी भी विफलता की स्थिति में अदालतों के लिए सही/उपयुक्त तरीका पहले राशि की वसूली के उद्देश्य से सीआरपीसी की धारा 421 के तहत प्रदान किया गया जुर्माना लगाने के लिए वारंट जारी करना है।इसके साथ ही जस्टिस अजीत सिंह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण भत्ते का भुगतान न करने के ऐसे मामलों में दंडाधिकारी के पास सीआरपीसी की धारा 421 के तहत पहले से देय राशि को जुर्माने के रूप में लगाए बिना,...
[एससी/एसटी एक्ट] जब अपराध कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है, तो कोर्ट को अग्रिम जमानत देने का अधिकार है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने हाल ही में टिप्पणी की कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का अपराध कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है, तो कोर्ट के पास अग्रिम जमानत देने की शक्ति है।इसके साथ ही न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी ने अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत एक आरोपी को अग्रिम जमानत दी।आरोपी-अपीलकर्ता ने अग्रिम जमानत के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 की धारा 14 (ए) (2) के तहत अपील दायर की...
नाना-नानी के साथ रहने वाली बेटी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से पिता बच नहीं सकता : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक पिता अपनी पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने की अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता, भले ही उसे अपने माता-पिता की देखभाल करनी पड़ रही हो। इस प्रकार हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है,जिसमें उसे पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि बेटी अपने नाना-नानी के साथ रह रही है, यह नहीं कहा जा सकता है कि पिता अपने बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुक्त है। कोर्ट...
मृतक सरकारी कर्मचारी का विवाहित भाई 'आश्रित' नहीं होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति का हकदार नहीं है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने पाया कि याचिकाकर्ता मृतक सरकारी कर्मचारी का विवाहित भाई है, और इसलिए याचिकाकर्ता को आश्रित नहीं माना जा सकता है और राजस्थान मृतक सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996 के संदर्भ में अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का हकदार नहीं है।जस्टिस रेखा बोराना ने रिट याचिका खारिज करते हुए कहा,"जाहिर है, याचिकाकर्ता विवाहित है और इसलिए, 1996 के नियमों के अनुसार, याचिकाकर्ता को आश्रित नहीं माना जा सकता है और अनुकंपा नियुक्ति का...
"वह भयावह परिस्थितियों की व्याख्या करने में विफल रहा": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी, 3 बच्चे को जलाकर हत्या करने के मामले में दोषी-व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक व्यक्ति को अपनी ही पत्नी और 3 बच्चों को जिंदा जलाकर मारने के लिए दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।अदालत ने कहा कि दोषी अपने अपराध की ओर इशारा करते हुए आपत्तिजनक परिस्थितियों की व्याख्या करने में विफल रहा है।न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि दोषी को उन परिस्थितियों के संबंध में धारा 313 सीआरपीसी के तहत उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए बाध्य किया गया था जिसके तहत मृतक की घर के अंदर...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मूवी थियेटर में "टॉय गन" ले जाने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 290 (सार्वजनिक उपद्रव), 506 (आपराधिक धमकी) सहपठित धारा 34 (आपराधिक कृत्य के लिए एक समान आशय) और आर्म एक्ट की धारा 25 के तहत गिरफ्तार एक व्यक्ति को जमानत दी। जस्टिस चीकाती मानवेंद्रनाथ रॉय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 290 और 506 के तहत किए गए अपराध जमानती अपराध हैं। इसके साथ ही आर्म एक्ट की धारा 25 के तहत प्रथम दृष्टया आरोप नहीं बनते हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई बंदूक एक "टॉय गन" थी।कोर्ट...
गुजरात हाईकोर्ट ने जस्टिस सोनिया गोकानी के खिलाफ 'अपमानजनक' भाषा का इस्तेमाल करने वाले 64 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए
गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में जस्टिस सोनिया गोकानी के खिलाफ 'अपमानजनक भाषा' का उपयोग करने के लिए 64 वर्षीय व्यक्ति (आनंद एच गोस्वामी) के खिलाफ अवमानना का आरोप तय किए।कोर्ट ने पाया कि आपराधिक विविध के संदर्भ में 2012 की आवेदन नंबर 12353, गोस्वामी/प्रतिवादी ने फरवरी 2013 में जस्टिस गोकानी के चरित्र और क्षमता पर अनुचित मानहानिकारक दावा किया था।उल्लेखनीय है कि आनंद एच. गोस्वामी/प्रतिवादी के खिलाफ अवमानना मामला नवंबर 2013 में शुरू किया गया था, जब एचसी ने प्रथम दृष्टया राय दी थी कि गोस्वामी...
"यह अवैध हिरासत है": दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद कैदी को समय से पहले रिहा नहीं करने के लिए गृह मंत्रालय की खिंचाई की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक कैदी को समय से पहले रिहाई देने के लिए जनवरी, 2021 में पारित एक आदेश का पालन नहीं करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की खिंचाई की।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो एमएचए सचिव को व्यक्तिगत रूप से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही पूछा जाएगा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों न बनाया जाए।अपहरण के एक मामले में 2015 में 14 साल की सजा पूरी करने वाले एक दोषी की समय से पहले रिहाई के लिए...
मर्डर ट्रायल| जहां ओकुलर गवाही विश्वास दिलाती है, वहां अभियोजन के मकसद और वसूली के रूप में पुष्टि करने की कोई आवश्यकता नहीं है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्त्र का एक अच्छी तरह से स्थापित सिद्धांत है कि हत्या के मामले में, जहां ओकुलर गवाही विश्वास दिलाती है, वहां अभियोजन पक्ष के लिए मकसद और वसूली के रूप में पुष्टि करने की कोई आवश्यकता नहीं है।वर्तमान मामले में, निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को निलंबित करने की मांग करते हुए सीआऱपीसी की धारा 389 के तहत एक आवेदन दायर किया गया था, जिसके तहत अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया है और आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 323 (स्वेच्छा से चोट...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गर्भवती पत्नी की देखभाल करने के लिए हत्या के आरोपी को अस्थायी जमानत दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को 90 दिनों के लिए अस्थायी जमानत दी ताकि वह अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल कर सके। आरोपी की पत्नी की डिलीवरी एक सप्ताह में होने वाली है।जस्टिस संजय द्विवेदी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 307, 294, 506, 147, 148, 149, 323, 324 और 34 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आवेदक आरोपी द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे।आवेदक इस आधार पर अस्थायी जमानत की मांग कर रहा था कि उसकी पत्नी गर्भवती है और उसकी डिलीवरी की...
लॉ फर्म में लॉ इंटर्न से कथित तौर पर मारपीट: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने हाल ही में एक वकील के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को लॉ इंटर्न द्वारा दायर एक शिकायत पर रद्द करने से इनकार कर दिया।जस्टिस वी. श्रीशानंद की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"आक्रामक पक्ष कौन है, वास्तव में जो हुआ वह सभी जांच का विषय है और पूरी जांच के बाद पुलिस सीआरपीसी की धारा 173 के तहत उचित रिपोर्ट दर्ज कर सकती है। तब तक, यह न्यायालय इस स्तर पर रिकॉर्ड सामग्री पर विचार करके कोई...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उच्च अध्ययन के लिए अस्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता के चाचा के जाति प्रमाण पत्र को अंतिम रूप से अस्वीकार करने तक वह उक्त प्रमाण पत्र पर भरोसा करके मांगे गए लाभों की हकदार है।जस्टिस सुनील बी शुक्रे और जस्टिस जी.ए. सनप ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता के चाचा के जाति प्रमाण पत्र की वैधता के बारे में वास्तविक चिंताएं हैं और उस पर पुनर्विचार किया जा रहा है, फिर भी जब तक इसे पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया जाता, तब तक याचिकाकर्ता इससे होने वाले लाभों का हकदार है।याचिकाकर्ता ने अनुसूचित...
क्या आर्य समाज मैरिज ब्यूरो किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में आर्य समाज ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होकर संहिताबद्ध / प्रथागत कानून के बारे में यह स्पष्ट करने को कहा कि आर्य मंदिर संस्था किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवा सकती है?जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस एम.आर. फड़के की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की प्रकृति में दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया,प्रतिवादी नंबर छह के अधिवक्ता से प्रश्न पर कोई जवाब नहीं दिया गया कि संहिताबद्ध कानून या...
ई-फाइलिंग वर्जन 3.0 के तहत ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ों की हार्ड कॉपी दाखिल करने की आवश्यकता नहीं : उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने मंगलवार को अधिसूचित किया कि ई-फाइलिंग से संबंधित मामलों को कारगर बनाने की दृष्टि से जब भी हाईकोर्ट में ई-फाइलिंग वर्जन 3.0 के माध्यम से कोई मामला ई-फाइल किया जाता है तो ई-फाइल किए गए दस्तावेजों की हार्डकॉपी दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।इसके अलावा यह स्पष्ट किया गया कि यदि किसी ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ या उसके किसी हिस्से के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो संबंधित अधिवक्ता या वादी स्वयं संबंधित ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ के मूल को दर्ज करेंगे।हाईकोर्ट के...







![[भरण-पोषण भत्ता का भुगतान न होना] मजिस्ट्रेट सीआरपीसी धारा 421 के तहत जुर्माना लगाए बिना गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट [भरण-पोषण भत्ता का भुगतान न होना] मजिस्ट्रेट सीआरपीसी धारा 421 के तहत जुर्माना लगाए बिना गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/04/21/500x300_415431-allahabadhighcourt.jpg)
![[एससी/एसटी एक्ट] जब अपराध कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है, तो कोर्ट को अग्रिम जमानत देने का अधिकार है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [एससी/एसटी एक्ट] जब अपराध कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है, तो कोर्ट को अग्रिम जमानत देने का अधिकार है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in//356287-chhattisgarh-hc-2.jpg)










