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उदयपुर में 26 आदेशों के माध्यम से 506 घंटे के लिए इंटरनेट शटडाउन: राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
उदयपुर में 26 आदेशों के माध्यम से 506 घंटे के लिए इंटरनेट शटडाउन: राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्षेत्र के संभागीय आयुक्त द्वारा बार-बार पारित किए जा रहे "इंटरनेट शटडाउन" आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।आरोप लगाया गया कि अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से कम से कम 26 शटडाउन आदेश के माध्यम से उदयपुर डिवीजन में लगभग 506 घंटे के लिए इंटरनेट एक्सेस को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उक्त आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा गया था कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही इंटरनेट शटडाउन का सहारा लिया जाना चाहिए।एक्टिंग चीफ...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
केवल कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने से डिसीप्लिनरी अथॉरिटी को कदाचार के लिए जांच शुरू करने से वंचित नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि केवल इसलिए कि किसी कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त हो सकती है, वह कंपनी के डिसीप्लिनरी अथॉरिटी, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसीएल) को वर्तमान मामले में जांच शुरू करने से नहीं हटाएगा।जस्टिस यशवंत वर्मा ने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।इस याचिका में उस आरोप पत्र को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आचरण अनुशासन...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
[80 साल की वृद्ध महिला का रेप-मर्डर केस] "रिश्ता गवाह की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मंगलवार को कहा कि संबंध गवाह की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है क्योंकि परिवार के सदस्यों की गवाह के रूप में परीक्षण करने पर कानून में कोई रोक नहीं है।कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि संबंधित गवाह के साक्ष्य पर भरोसा किया जा सकता है बशर्ते वह भरोसेमंद हो।जस्टिस सुनीत कुमार और जस्टिस विक्रम डी. चौहान की खंडपीठ ने वर्ष 2006 में एक 80 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार और हत्या करने वाले एक आरोपी को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए यह...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम वनगमन मार्ग का निर्माण करने और ऐसे सभी स्थानों को जोड़ने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की जहां भगवान राम ने वन गमन के दौरान रात में विश्राम किया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'राम वनगमन मार्ग' का निर्माण करने और ऐसे सभी स्थानों को जोड़ने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की जहां भगवान राम ने 'वन गमन' के दौरान रात में विश्राम किया था

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी, जिसमें राज्य सरकार को ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार 'राम वनगमन मार्ग' का निर्माण करने और ऐसे सभी स्थानों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी जहां भगवान राम ने वन यात्रा (Ban Gaman) के दौरान रात में विश्राम किया था।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जे जे मुनीर की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता, एक राजनीतिक व्यक्ति द्वारा उठाए गए मुद्दे को रिट याचिका में तय नहीं किया जा सकता है। इसलिए...

झारखंड हाईकोर्ट
किसी भी कानून के अभाव में 'मानवीय आधार' पर नियुक्ति को किसी भी दस्तावेज से उचित नहीं ठहराया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि 'मानवीय नियुक्ति' को सही ठहराने के लिए, केवल कानून के प्रावधान को दिखाने की जरूरत है जो ऐसी नियुक्ति की अनुमति देता है; और कानून का कोई अन्य दस्तावेज ऐसा करने की शक्ति के अभाव में इसे उचित नहीं ठहरा सकता है।जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने याचिकाकर्ता के इस तर्क में कोई योग्यता नहीं पाई कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ बचाव नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें आवश्यक दस्तावेज पेश करने का अवसर नहीं दिया गया था।उन्होंने टिप्पणी की,"याचिकाकर्ता को "मानवीय आधार" की अपनी नियुक्ति को...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
आरोपी को नोटिस नहीं दिया गया था, इसलिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने का आदेश वापस लिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में जमानत रद्द करने के अपने एक आदेश को वापस ले लिया, जिसे एकतरफा पारित किया गया था। आदेश में कहा गया था कि जिसे जमानत दी गई थी, उसे विधिवत नोटिस नहीं दिया गया था और इसलिए वह उक्त आवेदन को चुनौती देने के लिए अदालत के सामने पेश नहीं हो सका।जस्टिस आनंद पाठक दरअसल धारा 482 सीआरपीसी के तहत एक आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे आवेदक ने आक्षेपित आदेश, जिसके तहत धारा 439 (2) सीआरपीसी के तहत उसकी जमानत रद्द कर दी गई थी, को वापस लेने के लिए दायर किया...

COVID-19 महामारी के दौरान गंगा में कितनी लाशें तैर रही थीं? एनजीटी ने बिहार और यूपी सरकार से पूछा
COVID-19 महामारी के दौरान गंगा में कितनी लाशें तैर रही थीं? एनजीटी ने बिहार और यूपी सरकार से पूछा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य की सरकारों से COVID-19 महामारी के दौरान, गंगा नदी पर तैरती लाशों की संख्या के साथ-साथ इस साल 31 मार्च तक दोनों राज्यों में नदी के किनारे पर दफन किए गए शवों के बारे में रिपोर्ट मांगी।जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट सदस्य डॉ अफरोज अहमद की खंडपीठ पत्रकार संजय शर्मा द्वारा दायर जनहित आवेदन पर फैसला सुना रही थी। इस आवेदन में यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने की मांग की गई कि COVID-19​ ​​​से संक्रमित शवों के निपटान के...

नीतिगत मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों में स्वास्थ्य और योग विज्ञान को अनिवार्य बनाने की याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार किया, स्टेटस रिपोर्ट मांगी
'नीतिगत मामला': दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों में स्वास्थ्य और योग विज्ञान को अनिवार्य बनाने की याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार किया, स्टेटस रिपोर्ट मांगी

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार किया, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को "स्वास्थ्य और योग विज्ञान" को आठवीं कक्षा तक के स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस सचिन दत्ता की खंडपीठ का विचार था कि यह एक "नीतिगत निर्णय" है जिसमें कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।जस्टिस सांघी ने मौखिक...

पति के साथ काफी मानसिक क्रूरता हुई : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पति के पक्ष में दिया गया तलाक का आदेश बरकरार रखा
''पति के साथ काफी मानसिक क्रूरता हुई'' : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पति के पक्ष में दिया गया तलाक का आदेश बरकरार रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में फैमिली कोर्ट के फैसले और डिक्री के खिलाफ एक महिला की तरफ दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसके तहत शादी को भंग करने की मांग करने वाली उसके पति की याचिका को अनुमति दे दी गई थी। फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक की डिक्री दी थी। जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस अशोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में, पत्नी के कृत्यों से पति के साथ काफी मानसिक क्रूरता हुई है और इस प्रकार, अदालत ने पत्नी की तरफ से दायर अपील को खारिज कर...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी को नॉन डोमिसाइल कैटेगरी के कैंडिडेट को राज्य इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी को नॉन डोमिसाइल कैटेगरी के कैंडिडेट को राज्य इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को नॉन डोमिसाइल कैटेगरी के कैंडिडेट को राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा, 2021 के लिए आवेदन करने और उपस्थित होने की अनुमति देने का निर्देश दिया।जस्टिस एस ए धर्माधिकारी और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने एमपीपीएससी को नॉन डोमिसाइल कैटेगरी के कैंडिडेट्स के रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में पर्याप्त संशोधन करने का निर्देश दिया,पक्षकारों के एडवोकेट्स द्वारा दी गई उक्त दलीलों को ध्यान में रखते हुए तथा सभी संबंधितों...

अनुच्छेद 235 के तहत हाईकोर्ट जिला न्यायाधीश की सेवा समाप्त नहीं कर सकता या रैंक में कमी की कोई सजा नहीं दे सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
अनुच्छेद 235 के तहत हाईकोर्ट जिला न्यायाधीश की सेवा समाप्त नहीं कर सकता या रैंक में कमी की कोई सजा नहीं दे सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने हाल ही में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत, जो अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालयों को नियंत्रण प्रदान करता है, पूर्व जिला न्यायाधीश की सेवाओं को समाप्त नहीं कर सकता है या रैंक में कमी की कोई सजा नहीं दे सकता है।यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 311(1) के तहत नियुक्ति प्राधिकारी होने के नाते राज्यपाल के पास है। हालांकि, अनुच्छेद में "नियंत्रण" शब्द हाईकोर्ट को पूछताछ और अनुशासनात्मक नियंत्रण करने की शक्ति देता है और इस तरह की सजा लगाने की...

हनुमान चालीसा केस के बारे में मीडिया से बात नहीं की: नवनीत राणा और रवि राणा ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का विरोध किया, राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत लाभ का दावा किया
हनुमान चालीसा केस के बारे में मीडिया से बात नहीं की: नवनीत राणा और रवि राणा ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का विरोध किया, राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत लाभ का दावा किया

सांसद नवनीत राणा और उनके पति विधायक रवि राणा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackery) के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का जाप करने के लिए उनके खिलाफ राजद्रोह (Sedition) की प्राथमिकी में जमानत की शर्तों के उल्लंघन से इनकार किया है।मुंबई की स्पेशल कोर्ट के समक्ष एक हलफनामे में दंपति ने दावा किया कि वे केवल न्यायिक हिरासत में 12 दिनों की अपनी न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान बीएमसी द्वारा उनके घर के बाहर पोस्ट किए गए नोटिस के बारे में बात कर रहे थे।उन्होंने राजद्रोह पर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में बर्गर किंग के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में बर्गर किंग के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा दी

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में प्रतिवादियों के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में 'बर्गर किंग' के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वे इसके पंजीकृत ट्रेडमार्क का दुरुपयोग कर रहे हैं और 'बर्गर किंग' ट्रेडमार्क को शामिल करने वाले डोमेन नामों को पंजीकृत करने में भी संलग्न हैं और इनकी अनुमति और प्राधिकरण के बिना फर्जी वेबसाइटों का संचालन किया जा रहा है।जस्टिस ज्योति सिंह ने इस प्रकार प्रतिवादियों को विज्ञापन देने, किसी भी सामान या...

मद्रास हाईकोर्ट ने चाइल्ड कस्टडी मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार पर निर्णय लेने के लिए फुल बेंच का गठन किया
मद्रास हाईकोर्ट ने चाइल्ड कस्टडी मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार पर निर्णय लेने के लिए फुल बेंच का गठन किया

मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी ने चाइल्ड हिस्ट्री एंड गार्जियनशिप मैटर्स पर परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 के तहत निर्णय लेने के लिए ओरिजनल साइड पर हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र से संबंधित प्रश्न की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों की फुल बेंच का गठन किया है।फुल बेंच का हिस्सा बनने वाले पांच जजों में जस्टिस पी.एन. प्रकाश, जस्टिस आर महादेवन, जस्टिस एम सुंदर, जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और जस्टिस एए नक्किरन हैं।फुल बेंच का संदर्भ जस्टिस एए नक्कीरन, जस्टिस पीएन प्रकाश और जस्टिस...

गुजरात हाईकोर्ट
मतदाता सूची में नाम का जोड़ना/नाम हटाना असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप की आवश्यकता हो : गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाना संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के असाधारण क्षेत्राधिकार का आह्वान करने वाली "असाधारण परिस्थिति" नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को नियम 28 के तहत चुनाव याचिका दायर करके वैधानिक उपाय का लाभ उठाना चाहिए।जस्टिस बीरेन वैष्णव और जस्टिस संदीप भट्ट की पीठ ने एकल न्यायाधीश द्वारा की गई निम्नलिखित टिप्पणियों की पुष्टि की,"एक बार चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह न्यायालय...

केरल हाईकोर्ट
पति के पॉवर ऑफ अटॉर्नी होल्डर की असुविधा पत्नी द्वारा मांगे गए ट्रांसफर से इनकार का आधार नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना है कि पति के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर की असुविधा फैमिली कोर्ट (चाहे पुरुष हो या महिला) के समक्ष लंबित मामले में पत्नी द्वारा मांगे गए ट्रांसफर से इनकार करने का कारण नहीं है।जस्टिस ए बधरुद्दीन ने कहा कि एक पॉवर ऑफ अटॉर्नी की नियुक्ति के जर‌िए एक प्र‌िंसिपल ने अपने मामले का संचालन करने के लिए एक एजेंट की नियुक्ति किया है और ऐसा एजेंट प्रतिवादी के लिए और उसकी ओर से प्रतिवादी के मामले को लड़ने ओर यात्रा करने में सक्षम कोई भी हो सकता है।कोर्ट ने कहा, " किसी को भी एक एजेंट की...

धारा 100 सीपीसी | कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न वह है, जो पार्टियों के बीच मामले में निर्णय को प्रभावित करता है: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दूसरी अपील का दायरा समझाया
धारा 100 सीपीसी | "कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न" वह है, जो पार्टियों के बीच मामले में निर्णय को प्रभावित करता है: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दूसरी अपील का दायरा समझाया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि दूसरी अपील उन मामलों में होगी, जिनमें कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हो। कोर्ट ने समझाया कि 'कानून के प्रश्न' से पहले 'महत्वपूर्ण' शब्द मामले में शामिल हितों को संदर्भित नहीं करता, न ही सामान्य महत्व के कानून के प्रश्नों को संदर्भित करने करता, बल्‍कि पार्टियों के बीच मामले में निर्णय पर कानून के प्रश्न के प्रभाव या परिणाम को संदर्भित करता है।जस्टिस देवाशीष बरुआ ने कहा,''कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न'' का अर्थ न केवल सामान्य महत्व का 'कानून का महत्वपूर्ण...