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"सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने दें": स्कूलों में धार्मिक कपड़े और अन्य एसेसरीज प्रतिबंधित करने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने कहा

LiveLaw News Network
25 April 2022 8:42 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने दें: स्कूलों में धार्मिक कपड़े और अन्य एसेसरीज प्रतिबंधित करने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने कहा
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मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को स्कूल शिक्षा विभाग को स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक कपड़े और सामान पहनने से छात्रों को प्रतिबंधित करने का निर्देश देने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।

जस्टिस एम दुरईस्वामी और जस्टिस टी.वी थमिलसेल्वी की पीठ हिंदू मुनेत्र कड़गम के नेता अधिवक्ता के गोपीनाथ द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी।

पीठ ने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए वह इस स्तर पर इस पर विचार करने की स्थिति में नहीं है।

पृष्ठभूमि

अपनी याचिका में गोपीनाथ ने तर्क दिया कि तमिलनाडु में सरकार 1960 के दशक से ड्रेस कोड का पालन कर रही है। इसे एक ही स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के बीच एकरूपता बनाए रखने और छात्रों के बीच किसी भी अंतर से बचने के उद्देश्य से पेश किया गया था।

राज्य ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के नियमन के लिए विभिन्न कोड और नियम भी बनाए हैं। उनमें से एक "नर्सरी और प्राथमिक विद्यालयों के लिए नियमन संहिता" है जिसमें अध्याय IV नियम 14 (ii) लड़कों और लड़कियों के लिए विशिष्ट ड्रेस कोड बताता है। इस नियम के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को स्कूल में पढ़ने वाले सभी छात्रों के लिए ऐसा ड्रेस कोड रखना होगा। हालांकि, हकीकत कुछ और है।

उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर स्कूलों में छात्र एक्सेसरीज जैसे ऐड-ऑन, हिजाब जैसे ओवर ड्रेस और अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहनते हैं। गोपीनाथ ने दावा किया कि भले ही संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म का अधिकार प्रदान करता है, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष राज्य में यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, धर्म के ऐसे अधिकार से अन्य नागरिकों को प्रभावित नहीं होना चाहिए और यह परिसर के अंदर एकरूपता की मर्यादा को खराब नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि देश में विशेष रूप से स्कूली छात्रों के बीच धार्मिक दंगों को उछालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके लिए किसी भी व्यक्ति को धर्म, संस्कृति आदि के नाम पर कोई ऐसा कार्य करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो।

केस शीर्षक: के. गोपीनाथ बनाम स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक और अन्य

केस नंबर: 2022 का डब्ल्यू.पी नंबर 10447

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