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यदि अभियोजन पक्ष हत्या के समय अभियुक्त की उपस्थिति साबित करने में विफल रहता है तो भारतीय साक्ष्य अधिनिय की धारा 114 के तहत कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट
यदि अभियोजन पक्ष हत्या के समय अभियुक्त की उपस्थिति साबित करने में विफल रहता है तो भारतीय साक्ष्य अधिनिय की धारा 114 के तहत कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि अभियोजन पक्ष अपराध के स्थान पर अभियुक्त की उपस्थिति को साबित करने में विफल रहता है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के अनुसार प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है और न्यायालय आरोपी को अपराध के कारणों का खुलासा करने का निर्देश देने के लिए अधिनियम की धारा 106 को लागू नहीं कर सकता है। जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस एस. रचैया की खंडपीठ ने उस आरोपी की तरफ से दायर अपील को आंशिक तौर पर स्वीकार कर लिया,जिसे अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास...

विशेषाधिकार प्राप्त संचार को कथित रूप से लीक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए वकील ने केरल कोर्ट का रुख किया
विशेषाधिकार प्राप्त संचार को कथित रूप से लीक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए वकील ने केरल कोर्ट का रुख किया

अभिनेता दिलीप से जुड़े मामलों में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच विशेषाधिकार प्राप्त संचार को कथित रूप से लीक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करने वाले वकील ने पहले बार काउंसिल ऑफ केरल से संपर्क किया था और अब अपनी शिकायत के साथ सत्र न्यायालय का रुख किया है।बार काउंसिल ने 24 अप्रैल को सर्वसम्मति से इस मुद्दे को राज्य सरकार के सामने उठाने का फैसला किया था।एडवोकेट वी. सेतुनाथ ने अतिरिक्त विशेष सत्र न्यायालय (एसपीई/सीबीआई) - III, एर्नाकुलम के समक्ष एक याचिका दायर...

कानून और जांच के तरीके सीखने के लिए एसएचओ को छह महीने के लिए ट्रैनिंग पर भेजें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए
कानून और जांच के तरीके सीखने के लिए एसएचओ को छह महीने के लिए ट्रैनिंग पर भेजें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court), ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में राज्य के डीजीपी को कानून और जांच के तरीके को सीखने के लिए कम से कम छह महीने के लिए एक पुलिस अधिकारी को ट्रैनिंग पर भेजने का निर्देश दिया है।अदालत ने नियमित आधार पर अपने अवलोकन के अनुसार उक्त निर्देश पारित किए कि पुलिस आरोपी व्यक्तियों द्वारा दिए गए इकबालिया बयानों के आधार पर उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत एकत्र करने का कोई प्रयास किए बिना ही आरोप पत्र दाखिल कर रही थी।याचिकाकर्ता सीआरपीसी की धारा 439 द्वारा पेश की गई जमानत...

अहंकारी, अस्वीकार्य आचरण: बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एडवोकेट को किसी भी मामले में अपनी पीठ के सामने पेश होने से मना किया
"अहंकारी, अस्वीकार्य आचरण": बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एडवोकेट को किसी भी मामले में अपनी पीठ के सामने पेश होने से मना किया

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस कुलकर्णी ने वकील को निर्देश दिया कि मध्यस्थता विवाद से संबंधित आवेदनों के समूह में वकील के "अस्वीकार्य" और "अहंकारी" आचरण के बाद उनके सामने किसी भी मामले में पेश न हों।अदालत ने वकील प्रेमल कृष्णन के करियर को देखते हुए उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही तो नहीं की लेकिन उनके लिखित माफी मांगने पर भविष्य में अपमानजनक आचरण को नहीं दोहराने का अंडरटेकिंग लिया।कोर्ट ने कहा,"इस तरह की माफी स्वीकार की जा रही है। हालांकि इस सावधानी के साथ कि एडवोकेट प्रेमलाल कृष्णन अपने...

रेलवे ट्रैक क्रॉसिंग में अपनी लापरवाही से होने वाली यात्री की मौत पर मुआवजा देने के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
रेलवे ट्रैक क्रॉसिंग में अपनी लापरवाही से होने वाली यात्री की मौत पर मुआवजा देने के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने माना कि रेलवे अधिनियम की धारा 124 ए के तहत रेलवे ट्रैक पार करने में अपनी लापरवाही से होने वाली यात्री की मृत्यु होने पर रेलवे क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी नहीं है।जस्टिस जी. अनुपमा चक्रवर्ती ने कहा कि मुआवजा तभी दिया जाएगा जब "अप्रिय घटना" का मामला बनता है।पीठ ने कहा,"मृतक के बेटे के मौखिक साक्ष्य से पता चलता है कि दुर्घटना मृतक द्वारा ट्रैक पार करने की लापरवाही का परिणाम थी। इसलिए, अपीलकर्ता रेलवे से किसी भी मुआवजे के हकदार नहीं हैं।"मामले के संक्षिप्त तथ्यमामले की सच्चाई...

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान न्यायिक सेवा: हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति वर्ग में क्षैतिज आरक्षण की मांग करने वाली विधवा की याचिका खारिज की

राजस्थान न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा के बाद तैयार की गई श्रेणीवार मेरिट सूची की वैधता को लेकर एक विधवा की चुनौती को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने खारिज किया है।याचिकाकर्ता एसटी वर्ग में विधवा के रूप में क्षैतिज आरक्षण का लाभ देकर उसे शामिल न करने पर व्यथित थी।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने खारिज करते हुए कहा,"उम्मीदवार के असफल घोषित होने के बाद...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रेम विवाह का मामला-इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसपी को यूपी पुलिस में चयनित लड़की के एजुकेशनल डॉक्यूमेंट पिता से प्राप्त करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उस विवाहित जोड़े को सुरक्षा देने का आदेश दिया है, जिसने लड़की के परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह किया है। इस तथ्य के मद्देनजर कि लड़की का चयन यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद के लिए हो गया है, हालांकि, उसके पिता उसे मूल शिक्षा दस्तावेज प्रदान नहीं कर रहे हैं, अदालत ने एसपी मुरादाबाद को निर्देश दिया है कि वह लड़की के पिता की कस्टडी से सभी दस्तावेज प्राप्त करें और उसके बाद उनको लड़की को सौंप दिया जाए। यह आदेश जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की पीठ ने जारी किया है। पीठ...

गुजरात हाईकोर्ट
निजी प्रकृति की आपराधिक कार्यवाही को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत रद्द किया जा सकता है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में वैवाहिक विवाद में पारित एफआईआर और दोषसिद्धि के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसमें शामिल अपराध गैर-गंभीर और निजी प्रकृति के है।जस्टिस इलेश वोरा की खंडपीठ ने दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 7 के साथ पठित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498 (ए), 323, 294 (बी), 506 (1) और 114 के तहत दर्ज एफआईआर पर अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, अहमदाबाद द्वारा पारित दोषसिद्धि का आदेश रद्द कर दिया।कोर्ट ने कहा,"कानून के स्थापित सिद्धांत के आलोक में ऐसा लगता है कि...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
आखिरी बार एक साथ देखे जाने का सबूत अपने आप में निर्णायक नहीं है कि मौत आरोपी के हाथों हुई है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में कहा था कि 'आखिरी बार साथ में देखे गए' के सबूत से यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि मौत आरोपी के हाथों हुई है।न्यायमूर्ति एसजी डिगे और न्यायमूर्ति साधना एस जाधव ने कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि आरोपी गणेश ने घटना के बाद मृतक संजय को छोड़ दिया था और यह तथ्य कि वे एक साथ थे, इस आरोप में यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मौत आरोपी के हाथों हुई है।अदालत एक फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जहां आरोपी, अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 302...

यदि दुर्घटना के समय मोटर वाहन पॉलिसी के अनुसार उपयोग के उद्देश्य के उल्लंघन में था तो बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
यदि दुर्घटना के समय मोटर वाहन पॉलिसी के अनुसार 'उपयोग के उद्देश्य' के उल्लंघन में था तो बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि दुर्घटना के समय वाहन बीमा पॉलिसी के नियमों और उद्देश्य के उल्लंघन में था।मामले के संक्षिप्त तथ्यमृतक पद्म ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक के यहां मजदूरी का काम करता था। एक दिन मृतक अन्य मजदूरों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली में एक गांव से दूसरे गांव जा रहा था कि ट्रैक्टर सड़क किनारे खाई में गिर गया जिससे मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई।बीमा कंपनी ने बयान दिया कि विचाराधीन वाहन एक...

एनडीपीएस मामलों में काल्पनिक गवाह: दिल्ली हाईकोर्ट ने एनसीबी, सीमा शुल्क विभाग और डीआरआई से रिकॉर्ड मांगा
एनडीपीएस मामलों में "काल्पनिक गवाह": दिल्ली हाईकोर्ट ने एनसीबी, सीमा शुल्क विभाग और डीआरआई से रिकॉर्ड मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और सीमा शुल्क विभाग को एनडीपीएस अधिनियम और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत मामलों का एक बयान अपने रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया, जिसमें पिछले 5 वर्षों के दौरान शहर के विभिन्न न्यायालयों में संबंधित विभाग द्वारा मुकदमा चलाया गया।यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने एनडीपीएस मामलों में अभियोजन पक्ष द्वारा "काल्पनिक गवाहों" का हवाला देने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"बार एसोसिएशनों द्वारा अवांछित हड़ताल के संबंध में उचित उपाय करेंगे": इलाहाबाद हाईकोर्ट को यूपी बार काउंसिल ने आश्वासन दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने आश्वासन दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करेगा कि बार-बार हड़ताल बुलाना, बहिष्कार के आह्वान और अदालत में सक्रिय कार्य से परहेज के प्रस्तावों पर रोक लगाई जाए।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ के समक्ष राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों की अनुपलब्धता या कमी के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले में अदालत की सहायता के लिए उत्तर प्रदेश की बार काउंसिल का प्रतिनिधित्व किया जा रहा था।बार काउंसिल ऑफ उत्तर...

दिल्ली दंगा: कोर्ट ने दुकान में तोड़फोड़, डकैती के आरोपी को बरी किया; कोर्ट ने कहा- दोषी ठहराने के लिए रिकॉर्ड में कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं है
दिल्ली दंगा: कोर्ट ने दुकान में तोड़फोड़, डकैती के आरोपी को बरी किया; कोर्ट ने कहा- दोषी ठहराने के लिए रिकॉर्ड में कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं है

दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने बुधवार को दिल्ली दंगों के एक मामले के संबंध में एक नूर मोहम्मद @ नूरा को सभी आरोपों से बरी कर दिया, यह देखते हुए कि उसे दोषी ठहराने के लिए रिकॉर्ड पर कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं है। (एफआईआर 129/2020 खजूरी खास थाने में दर्ज)अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने धारा के तहत आरोपित नूरा को बरी कर दिया। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 147, 148, 454, 392, 436 और 149 के तहत 31 अगस्त, 2021 को आरोप तय किए गए थे।अभियोजन पक्ष का यह मामला था कि नूरा एक गैरकानूनी...

संविदा के संबंध के अभाव में पक्षकारों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
संविदा के संबंध के अभाव में पक्षकारों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि संविदा के संबंध (Privity Of Contract) के अभाव में मध्यस्थता के लिए संदर्भित (Referred) नहीं किया जा सकता।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की एकल पीठ ने माना कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के तहत 'पक्ष' शब्द को मध्यस्थता समझौते के संबंध में एक निश्चित अर्थ दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों के बीच के विवादों को ही मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है और अनुबंध के संबंध के अभाव में किसी तीसरे पक्ष को मध्यस्थता में शामिल नहीं किया...

सरकार द्वारा गैर-प्रतिबंधित संगठन की जिहादी बैठकों में केवल भाग लेना प्रथम दृष्टया यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट
सरकार द्वारा गैर-प्रतिबंधित संगठन की 'जिहादी' बैठकों में केवल भाग लेना प्रथम दृष्टया यूएपीए के तहत 'आतंकवादी कृत्य' नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में अल-हिंद समूह के कथित सदस्य सलीम खान को जमानत दी। सलीम खान के कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की सूचना थी।जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस एस. रचैया की खंडपीठ ने कहा,"यूए(पी)ए की अनुसूची के तहत प्रतिबंधित संगठन नहीं होने वाले समूह की बैठकों में केवल भाग लेना और अल-हिंद समूह का सदस्य बनना, प्रशिक्षण सामग्री खरीदना और सह-सदस्यों के लिए रहने का प्रबंध करनाअपराध नहीं है, क्योंकि यह यूए(पी)ए अधिनियम की धारा 2 (के) या धारा 2 (एम) के...

यदि संदिग्ध परिस्थितियां नहीं हैं तो नगर प्राधिकरण द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र को महत्व दिया जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
यदि संदिग्ध परिस्थितियां नहीं हैं तो नगर प्राधिकरण द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र को महत्व दिया जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को नाबालिग घोषित करने के आवेदन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन यह संदिग्ध परिस्थितियों से घिरा नहीं होना चाहिए।कोर्ट ने कहा कि भले ही माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के प्रस्ताव के संबंध में कोई विवाद नहीं होगा और याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित वकील द्वारा भरोसा किया जाएगा कि निगम या नगर...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
सीआरपीसी की धारा 125- पति के पास पर्याप्त साधन होने के कारण पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य, वह पारिवारिक जिम्मेदारी से नहीं भाग सकताः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में कहा गया है कि यदि पति के पास पर्याप्त साधन हैं, तो वह अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है और वह अपनी नैतिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह भी कहा कि यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए अधिनियमित किया गया था कि महिलाओं और बच्चों को पति द्वारा भरण-पोषण प्रदान किया जाए ताकि उन्हें संभावित खानाबदोशी और निराश्रित जीवन से बचाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि,''सुप्रीम...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"यूपी सरकार के अधिकारियों के अवैध हिरासत की तरह प्रतीत होता है": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 82 वर्षीय लापता व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने उत्तर प्रदेश सरकार को 82 वर्षीय व्यक्ति को पेश करने का निर्देश दिया है, जो लगभग 11 महीने पहले, प्रयागराज के टीबी सप्रू अस्पताल से COVID की दूसरी लहर के दौरान लापता हो गया था, लगभग 11 महीने पहले अदालत के समक्ष पेश किया गया था।न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने भी प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि लापता व्यक्ति को प्रतिवादियों की अवैध हिरासत में रखा गया था।पीठ ने जोर देकर कहा,"प्रतिवादियों की ओर से कॉर्पस पेश करने में...

कलकत्ता हाईकोर्ट
"छह साल से सैलरी नहीं बढ़ी" : कलकत्ता हाईकोर्ट के लॉ क्लर्कों ने अपना वेतन बढ़ाने के लिए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा

कलकत्ता हाईकोर्ट के विधि लिपिक-सह-अनुसंधान सहायकों (Law Clerks-cum-Research Assistants) ने मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव को पत्र लिखकर सैलरी स्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग की है।पत्र में कहा गया है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हो रही है और उन्हें महंगाई में छूट के माध्यम से कुछ भी प्राप्त नहीं होता है।पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के रूप में उन्हें अपने वेतन पर ही गुज़ारा करना होगा जो पिछले 6 वर्षों से स्थिर है।यह ध्यान दिया जा सकता है कि कलकत्ता...

COVID-19 संकट के दौरान किताबें राहत प्रदान कर सकती थीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को किताब से इनकार करने के लिए जेल प्रशासन की आलोचना की
'COVID-19 संकट के दौरान किताबें राहत प्रदान कर सकती थीं': बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को किताब से इनकार करने के लिए जेल प्रशासन की आलोचना की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि महामारी के दौरान किताबों को जेल के कैदियों के लिए दवाओं और सब्जियों की तरह आवश्यक वस्तुओं के रूप में नहीं माना जाता। कोर्ट नेजेल अधिकारी कैदियों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में रखकर बुक पार्सल स्वीकार करने की अनुमति दे सकते थे, "लेकिन ऐसा नहीं हुआ।" हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव में वरिष्ठ पत्रकार गौतम नवलखा को हाउस कस्टडी से इनकार करने के आदेश पर सुनवाई के दौरान कहा।"COVID-19 महामारी अधिकांश लोगों के लिए संकट, अलगाव और घबराहट की अवधि थी। जेल में...