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कश्मीरी पंडितों के संगठन ने पुनर्वास की मांग के ल‌िए हाईकोर्ट में याचिका दायर की, कहा सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के जीवन की रक्षा करने में विफल

Avanish Pathak
27 Jun 2022 1:50 PM GMT
Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
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कश्मीरी पंडितों के संगठन कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के समक्ष एक पत्र याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि घाटी में धार्मिक अल्पसंख्यकों को आतंकवादियों से सीधे खतरा है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

KPSS कश्मीर के 272 गांवों में रहने वाले 808 परिवारों का एक समूह है, जिन्होंने 1990 के दशक में उग्रवाद की चरम के बाद भी कश्मीर घाटी नहीं छोड़ी थी। इसकी अध्यक्षता कश्मीरी पंडित कार्यकर्ता संजय टिक्कू कर रहे हैं।

केपीएसएस ने अपनी याचिका में उनके समुदाय के खिलाफ हिंसा बढ़ने के बावजूद उन्हें घाटी छोड़ने की अनुमति नहीं देने में सरकार की कथित असंवेदनशीलता की निंदा की है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार कश्मीर घाटी में रह रहे धार्मिक अल्पसंख्यकों के जीवन को सुरक्षित करने में विफल रही है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि घाटी में रहने वाले स्थानीय धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगभग बारह हमले किए गए हैं, यह उन पर किए गए हमलों से अलग है, जो रोजी-रोटी कमाने के लिए कश्मीर आए थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि लक्षित हत्याओं के अलावा, कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादी संगठन द्वारा कई धमकी भरे पोस्टर और पत्र जारी किए गए हैं जिसमें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि वे धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से कश्मीरी पंडितों / हिंदुओं को मार डालेंगे, जो घाटी में रह रहे हैं।

अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए, याचिकाकर्ताओं ने आगे कहा कि कथित लक्षित हत्याओं ने उनमें और अधिक भय और दहशत पैदा कर दी है और आरोप लगाया है कि सरकार उनके जीवन की रक्षा करने में विफल रही है।

याचिका में आगे कहा गया है:

"यह कि जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत है, क्योंकि एक तरफ, केंद्र शासित प्रदेश / केंद्रीय प्रशासन धार्मिक अल्पसंख्यकों के जीवन की रक्षा करने में विफल है और दूसरी ओर उन्हें कश्मीर घाटी छोड़ने नहीं दे रहा है ताकि वे अपने जीवन की रक्षा कर सकें।"

इस गंभीर मामले में अदालत के हस्तक्षेप की प्रार्थना करते हुए संस्था ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह बताने के लिए अदालत से भी अपील की है कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा के लिए उन्होंने किस तरह की नीति और तंत्र बनाया है।

अंत में, याचिकाकर्ता ने अदालत से 8 जून, 2020 से हुई सभी लक्षित हत्याओं की जांच करने और कथित चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश देने की प्रार्थना की है। यह भी आग्रह किया गया है कि हाईकोर्ट की निगरानी में निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक एसआईटी का गठन किया जाए।

मामले की सुनवाई 4 जुलाई 2022 को होनी है।

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