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अहमदाबाद कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़, आरबी श्रीकुमार को 1 जुलाई तक गुजरात पुलिस हिरासत में भेजा
अहमदाबाद कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़, आरबी श्रीकुमार को 1 जुलाई तक गुजरात पुलिस हिरासत में भेजा

अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने रविवार को गुजरात दंगों के बड़े षड्यंत्र के मामले में कथित तौर पर सबूत गढ़ने के मामले में एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व एडीजीपी आरबी श्रीकुमार को 1 जुलाई तक गुजरात पुलिस की हिरासत में भेज दिया। गुजरात पुलिस ने शनिवार को उन्हें गिरफ्तार किया था। गुजरात एटीएस ने तीस्ता को मुंबई से हिरासत में लिया और उन्हें अहमदाबाद लाया गया, जबकि श्रीकुमार को गांधीनगर में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था।सुप्रीम कोर्ट के 2002 के गुजरात दंगों के मामले में प्रधानमंत्री...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ चुनाव संहिता उल्लंघन का मामला खारिज किया, आरपी एक्ट की धारा 126 पर फिर से विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया

गुवाहाटी हाईकोर्ट एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 में निहित प्रावधान पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, जो मतदान समापन से पहले की अड़तालीस घंटों की अवधि से संबंध‌ित है, जिस अवधि में सार्वजनिक सभाओं/ चुनाव प्रचार आदि पर प्रतिबंध है।जस्टिस रूमी कुमारी फूकन की खंडपीठ ने उक्त टिप्पणियों के साथ 2019 लोकसभा चुनावों के दरमियान असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के मामले दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।मामलासरमा और...

झारखंड हाईकोर्ट
धारा 41A सीआरपीसी के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेशी की सूचना जारी करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने पर विचार करें : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में झारखंड राज्य को धारा 41ए सीआरपीसी के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेशी का नोटिस जारी करने के संबंध में उचित दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार करने को कहा है ताकि झारखंड पुलिस को आदर्श पुलिस के रूप में संदर्भित किया जा सके।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट के 2018 के फैसले का भी उल्लेख किया [अमनदीप सिंह जौहर बनाम एनसीटी ऑफ दिल्ली और अन्य], जिसमें आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेश...

मद्रास हाईकोर्ट
आय को जानबूझकर छिपाने से निर्धारिती पर मुकदमा चलाया जा सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि निर्धारित समय के भीतर अपनी आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करके जानबूझकर अपनी आय छिपाने के लिए एक निर्धारिती पर मुकदमा चलाया जा सकता है, भले ही निर्धारिती की ओर से देर से जमा की गई रिटर्न को राजस्व अधिकारियों द्वारा स्वीकार किया जाता है और जिसके आधार पर मूल्यांकन आदेश पारित किया गया है।जस्टिस जी चंद्रशेखरन की एकल पीठ ने पाया कि निर्धारिती द्वारा आय को छिपाना और दबाना एक सर्वेक्षण ऑपरेशन के बाद ही सामने आया और निर्धारिती ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 के तहत एक...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने नसबंदी कराने के बाद भी गर्भवती हुई महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने नसबंदी कराने के बाद भी गर्भवती हुई महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा संचालित नसबंदी प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी गर्भवती हुई एक महिला को मुआवजे का आदेश दिया है। उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के लिए राज्य की आलोचना करते हुए, जस्टिस अरिंदम सिन्हा की एकल पीठ ने कहा,"राज्य ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है और यह नहीं कह सकता कि याचिकाकर्ता दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार यह बताने में चूक गई कि उसे ऑपरेशन के बाद मासिक धर्म नहीं आया...पैराग्राफ 4 और 6 की दलीलों का विश्लेषण राज्य का समर्थन नहीं करता है।"तथ्ययाचिकाकर्ता की 2 जनवरी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर रिकॉर्ड में कोई त्रुटि नहीं है तो वकील मुवक्किलों को मामले को दोबारा उठाने की सलाह न दें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गलती ना हो, ना ही ऐसा कोई कारण हो कि फैसले के बाद मामले को दोबारा आगे क्यों बढाया जाए, एक वकील को अपने मुव‌क्किल को मामले को आगे बढ़ाने की सलाह नहीं देनी चा‌‌हिए।जस्टिस डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ ने एक सिविल र‌िव्यू आवेदन का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की। आवेदन में संबंधित वकील ने अपने मुवक्किल को छह साल की अवधि के बाद मौजूदा रिव्यू आवेदन दाखिल करने की सलाह दी थी।मौजूदा मामले में सीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5...

दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ को मुंबई से हिरासत में लिया
दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ को मुंबई से हिरासत में लिया

सुप्रीम कोर्ट के 2002 के गुजरात दंगों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट की पुष्टि करने के एक दिन बाद कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को मुंबई में गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने उनके आवास से हिरासत में ले लिया है। तीस्ता को अहमदाबाद ले जाया जाना है।वह गुजरात दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश की जांच की मांग करने वाली याचिकाकर्ताओं में से एक थीं, जिस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।एफआईआर में गुजरात दंगों की साजिश के मामले में सबूत गढ़ने और झूठी कार्यवाही...

दावे जो समाधान योजना का हिस्सा नहीं थे, समाधान योजना के अनुमोदन के बाद उनका दावा नहीं किया जा सकता: एनसीएलटी, मुंबई
दावे जो समाधान योजना का हिस्सा नहीं थे, समाधान योजना के अनुमोदन के बाद उनका दावा नहीं किया जा सकता: एनसीएलटी, मुंबई

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई बेंच ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम रोहित फेरो टेक लिमिटेड के मामले में दायर एक आवेदन पर फैसला सुनाया है। फैसेले में कहा गया कि दावे या राहत जो संकल्प योजना का हिस्सा नहीं थे, का दावा उस संकल्प योजना के न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित होने के बाद नहीं किया जा सकता है। आदेश 14.06.2022 को पारित किया गया था। बेंच में रोहित कपूर (न्यायिक सदस्य) और हरीश चंदर सूरी (तकनीकी सदस्य) शामिल थे।तथ्यएनसीएलटी मुंबई बेंच (न्यायिक प्राधिकरण) द्वारा रोहित...

झारखंड हाईकोर्ट
एनआई एक्ट की धारा 139 के तहत अनुमान साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 में शामिल साक्ष्य के सामान्य नियम के समान : झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि एनआई एक्ट की धारा 139 के तहत अनुमान साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 में शामिल साक्ष्य के सामान्य नियम के समान है।जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने आगे कहा कि आरोपी को यह दिखाने का अधिकार है कि इस बात की संभावना है कि उसके खिलाफ दायर किया गया मामला सही नहीं है। हालांकि, यह चरण तभी आएगा जब शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम दृष्टया मामला स्थापित किया जाएगा।यह ध्यान दिया जा सकता है कि धारा 139 एनआई एक्ट में कहा गया है कि जब तक इसके विपरीत साबित नहीं होता है, यह माना जाना चाहिए कि...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
अगर मुकदमे की मूल प्रकृति प्रभावित नहीं हो रही है तो मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद वाद में संशोधन की अनुमति दी जा सकती है : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वादी के वादपत्र में संशोधन के अनुरोध पर ट्रायल शुरू होने के बाद भी विचार किया जा सकता है, यदि वाद का मूल स्वरूप नहीं बदला जाता है और प्रतिवादी पक्ष को कोई पूर्वाग्रह नहीं होता है।ज‌स्टिस सचिन शंकर मखादुम की सिंगल जज बेंच ने उक्त टिप्‍पणियों के साथ वादी द्वारा, पार्टिशन के एक मुकदमे में, मामले में वादी की आगे की जिरह तय होने के बाद, आदेश 6 नियम 17 के तहत दायर एक याचिका को अनुमति दी।कोर्ट ने कहा,"प्रस्तावित संशोधन वाद के मूल स्वरूप को नहीं बदलता है... केवल...

दिल्ली हाईकोर्ट
आयकर नोटिस का जवाब देने के लिए सिर्फ तीन दिनों का समय दिया गया: दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को मूल्यांकन अधिकारी के पास वापस भेजा

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने मामले को कर निर्धारण अधिकारी को वापस भेज दिया है, क्योंकि आयकर नोटिस का जवाब देने के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया था।याचिकाकर्ता/निर्धारिती ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148ए (बी) के तहत जारी नोटिस और निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए धारा 148ए (डी) के तहत पारित आदेश का विरोध किया।निर्धारिती ने तर्क दिया कि निर्धारिती (Assessee) को जवाब देने के लिए केवल तीन दिनों का समय दिया गया, जबकि जवाब देने की वैधानिक अवधि कम से...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, रेलवे मुआवजा अवॉर्ड में बच्चे भी मृतक मां के हिस्से के हकदार, उन्होंने खुद के हिस्से का मुआवजा पा लिया हो तो भी...:

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि बच्चे मुआवजे में अपना हिस्सा पाने के बाद भी, अपनी मां की ओर से रेलवे के मुआवजे के अवॉर्ड के निष्पादन की मांग कर सकते हैं।कोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्र‌िब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता-बेटे अपनी मृतक मां और दादी को दिए गए मुआवजे को पाने के पात्र नहीं हैं। उन्होंने रेलवे दुर्घटना में अपने पिता की मृत्यु के बाद पहले ही मुआवजे का अपना हिस्सा प्राप्त कर चुके हैं।जज ने कहा, "मैं मानता हूं, अपीलकर्ता लक्ष्मीबाई और इंदुबाई के कारण ‌‌दिए गए...

बार काउंसिल ऑफ इंडिया
एलएलबी एडमिशन के लिए एग्जाम- यूनिवर्सिटी के नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों से ऊपर होंगे: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के जज, जस्टिस वैभवी डी. नानावती की एकल पीठ ने माना कि एलएलबी कोर्स में एडमिशन के लिए परीक्षा और परिणाम के मामले में यूनिवर्सिटी के नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों पर प्रबल होंगे।इस मामले में हाईकोर्ट ने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के नियमों को बरकरार रखा, जो उन मामलों में एलएलबी कोर्स में एडमिशन पर रोक लगाते हैं, जहां ग्रेजुएट ने एक भी प्रयास में अपनी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी।संक्षेप में मामले के तथ्य यह हैं कि याचिकाकर्ता बीकॉम की परीक्षा में बैठा और सात विषयों में से दो...

मद्रास हाईकोर्ट
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर निर्धारित प्रक्रिया से बंधा: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में थेनी जिले के जिला कलेक्टर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कलेक्टर ने मानवविज्ञानी की रिपोर्ट और उप-कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के आधार पर सामुदायिक प्रमाण पत्र की वास्तविकता पर निर्णय दिया था।जस्टिस एसएस सुंदर और जस्टिस एस श्रीमती की खंडपीठ ने कहा,सामुदायिक स्थिति के संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए विद्वान एडवोकेट द्वारा उठाए गए विशिष्ट तर्कों को छोड़ दें, यह तथ्य कि जिला कलेक्टर ने ऊपर उल्लिखित दो सरकारी आदेशों के तहत अपेक्षित प्रक्रिया का पालन किए बिना...

जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों की मान्यता रद्द हो रही है : हाईकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया
जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों की मान्यता रद्द हो रही है : हाईकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शुक्रवार को इस साल 15 अप्रैल को सरकार द्वारा शिक्षा नियमों में किए गए संशोधन के कारण मान्यता रद्द करने वाले निजी स्कूलों पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।पीठ ने इन संशोधनों को चुनौती देने वाले ऐसे निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट जफर शाह को सुनने के बाद जस्टिस मोक्ष खजूरिया काजमी ने आदेश दिया,"याचिकाकर्ताओं ने इस स्तर पर अंतरिम राहत के लिए प्रथम दृष्टया मामला...

Gujarat High Court
दत्तक लेने के विलेख को चुनौती न होने पर रजिस्ट्रार दत्तक पिता के नाम पर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार दत्तक पिता के नाम पर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए बाध्य है, जहां आवेदक के दत्तक विलेख का कोई खंडन नहीं है।जस्टिस एएस सुपेहिया ने 'निधि' की मां द्वारा दायर याचिका सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी, जिसमें निधि के जन्म प्रमाण पत्र में अपने दूसरे पति/निधि के दत्तक पिता का नाम शामिल करने की मांग की गई थी।पीठ ने कहा कि रजिस्ट्रार अदालत के फैसले पर जोर नहीं दे सकता, क्योंकि दत्तक ग्रहण के संबंध में हिंदू दत्तक ग्रहण और...

मामूल लेने ने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करें: मद्रास हाईकोर्ट
'मामूल' लेने ने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करें: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तीन साल के लिए वेतन के समयमान में तीन चरणों में कटौती की सजा के आदेश को चुनौती देने वाली सेवानिवृत्त उप-निरीक्षक की याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने और इस तरह लोगों के कल्याण को प्रभावित करने पर चिंता व्यक्त की।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम का विचार था कि जब भी रिश्वत प्राप्त करने का पता चलता है तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए। इन अपराधों को बिना किसी नरमी या गलत सहानुभूति के निपटाया जाना चाहिए।कोर्ट ने...

प्रतिवादी ने जब उत्तर नहीं दिया तो पक्षकारों को बातचीत करने के लिए नहीं कहा जा सकता, इस आधार पर परिसीमा अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती: तेलंगाना हाईकोर्ट
प्रतिवादी ने जब उत्तर नहीं दिया तो पक्षकारों को बातचीत करने के लिए नहीं कहा जा सकता, इस आधार पर परिसीमा अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों को बातचीत करने के लिए नहीं कहा जा सकता है जब प्रतिवादी ने आवेदक के पत्रों का जवाब नहीं दिया हो। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता को लागू करने की परिसीमा अवधि को ऐसे परिदृश्य में नहीं बढ़ाया जाएगा।जस्टिस के लक्ष्मण की एकल पीठ ने माना कि परिसीमा अवधि तब शुरू होगी जब भुगतान की देयता पक्षकार द्वारा विवादित हो और केवल पत्र लिखने से परिसीमा अवधि का विस्तार नहीं होगा।कोर्ट ने आगे कहा कि केवल इसलिए कि पक्षकार ने अपने नामित मध्यस्थ को नियुक्त किया है, यह स्वीकार...