मुख्य सुर्खियां
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के मुस्लिम बहुल शहर में बकर-ईद पर कुर्बानी करने की अनुमति दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 10 जुलाई मनाई जाने वाली बकर-ईद के अवसर पर हरिद्वार से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित मुस्लिम बहुल शहर मैंगलोर में जानवरों की कुर्बानी की अनुमति देने के राज्य सरकार के आदेश के संचालन पर रोक लगा दी।अदालत ने कहा कि सरकारी आदेश का उद्देश्य हिंदू समुदाय की भावना को शांत करना प्रतीत होता है, क्योंकि हरिद्वार को प्राचीन काल से पवित्र शहर माना जाता है।खंडपीठ ने कहा,"हालांकि, हमारे विचार में उक्त आदेश अस्थायी रूप से मैंगलोर शहर (हरिद्वार शहर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर...
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर हत्याकांड के बाद भड़काऊ व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड करने वाले वकील के क्लर्क को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने वकील के उस क्लर्क को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की, जिसने उदयपुर हत्याकांड पर व्हाट्सएप में "उदयपुर में धार्मिक युद्ध शुरू हो गया है, ब्रावो सूअरों को खत्म करो।" मैसेज फॉरवर्ड किया था।याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए और धारा 153ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए प्रतिवादी नदीम कादिर की सूचना पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। उसने याचिका में आगे जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा की भी मांग की।याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि उपरोक्त मैसेज "फॉरवर्ड"...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ब्रेन ट्यूमर सर्जरी बताकर आंखों के ऑपरेशन लिए पैरोल अवधि बढ़ाने की मांग करने वाले कैदी की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कैदी की रिट याचिका खारिज कर दी। जिसने याचिका में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के लिए पैरोल की अवधि बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन वास्तव में उसे आंखों की सर्जरी करवानी थी।याचिकाकर्ता ने पैरोल अवधि इस आधार पर बढ़ाने की मांग की थी कि उसे ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी करवानी है, लेकिन जांच एजेंसी द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की आंखों की सर्जरी होनी है न कि ब्रेन ट्यूमर की।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने अवलोकन किया,"जाहिर है कि जांच...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) याचिका खारिज कर दी, जिसमें राज्य सरकार को यूपी राज्य के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।यह कहते हुए कि सर्विस मामलों में, कोई जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता पूरी तरह से अजनबी है और राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवा की शर्तों में बदलाव की...
[मोटर दुर्घटना] वास्तविक नुकसान के मुआवजे में रिपेयर के लिए स्पेयर पार्ट्स का मूल्य शामिल है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने गुरुवार को मोटर दुर्घटना (Motor Accident) दावों की अपील की अनुमति देते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना के दावों में दावेदार 'वास्तविक नुकसान' के लिए मुआवजे का हकदार है, जिसमें स्पेयर पार्ट्स का मूल्य भी शामिल है।जस्टिस बधारुद्दीन ने कहा कि दावेदार वाहन की रिपेयरिंग के लिए खर्च किए गए स्पेयर पार्ट्स के मूल्य के मुआवजे का हकदार है जो मोटर दुर्घटना के परिणामस्वरूप क्षतिग्रस्त हो गया है।पीठ ने कहा कि ऐसे मामले में दावेदार वास्तविक नुकसान के लिए मुआवजे का हकदार है जिसमें...
ट्रायल कोर्ट पार्टियों के बीच विवादों के आधार पर "अतिरिक्त मुद्दे" तय कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने ट्रायल कोर्ट (Trail Court) के आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका पर विचार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट पक्षकारों के बीच विवादों के आधार पर "अतिरिक्त मुद्दे" तय कर सकता है।ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादियों के प्रतिकूल कब्जे की याचिका के संबंध में एक अतिरिक्त मुद्दा तैयार करने के लिए आवेदन की अनुमति दी गई थी।यदि प्रतिवादियों ने एक विशेष याचिका ली है जो वादी द्वारा विवादित थी और ट्रायल कोर्ट ने महसूस किया कि इस संबंध में पक्षकारों के मुद्दे पर इस...
श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर के रूप में नियुक्ति की मांग वाली 71 वर्षीय व्यक्ति की याचिका खारिज की
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने केंद्र सरकार के 71 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर इन चीफ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्हें मानदेय के आधार पर श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र (Sri Ram Janma Bhumi Trust) में चीफ इंजीनियर के रूप में नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भारत सरकार द्वारा फरवरी 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्थापित एक ट्रस्ट है।जस्टिस एसजी पंडित की एकल पीठ ने डॉ. एस.पी. रघुनाथ द्वारा...
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए साक्ष्य की रिकॉर्डिंग किसी भी पक्ष का अधिकार नहीं, अनुमति कोर्ट का विवेकाधिकार: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि दीवानी मुकदमों में, जहां जटिल मुद्दे शामिल हो, अदालत को एक पक्ष को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए साक्ष्य पेश करने की अनुमति देने में सतर्क रहना चाहिए और यह कि केवल विलंब, खर्च या असुविधा एक वादी को महत्वपूर्ण ऑक्यूलर साक्ष्यों को पेश करने की अनुमति देने का एक वैकल्पिक तरीका नहीं हो सकता है। जस्टिस सचिन शंकर मखादुम की सिंगल जज बेंच ने टीजी वीरप्रसाद और अन्य द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में 28 मार्च के ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। उस...
सेक्स संबंध के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्र सरकार के वकील को जमानत देते हुए माना कि सेक्स संबंध के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार के अपराध का गठन करने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्सिट बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि दो इच्छुक वयस्क सहमति से बनने वाले यौन संबंध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के दायरे में आने वाले बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएंगे, जब तक कि यौन संबंध के लिए ली गई सहमति, धोखे से या गलत बयानी द्वारा से न ली गई हो।कोर्ट ने कहा,"भले ही दो इच्छुक भागीदारों के बीच यौन संबंध...
'महाराष्ट्र राज्य के हर जिले में फैमिली कोर्ट स्थापित किया जाए': बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) से राज्य के हर जिले में फैमिली कोर्ट (Family Court) स्थापित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।जस्टिस अनिल के मेनन और जस्टिस मकरंद एस कार्णिक की खंडपीठ एक व्यवसायी तुषार गुप्ता की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि फैमिली कोर्ट एक्ट के तहत 10 लाख की आबादी वाले इलाके में एक फैमिली कोर्ट होना चाहिए। लेकिन राज्य में फैमिली कोर्ट की गंभीर कमी है।गुप्ता एक लॉ स्टूडेंट हैं और...
बाद में रिश्तों में खटास आने से रेप का मामला नहीं बनेगा: केरल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील की जमानत याचिका पर कहा
केरल हाईकोर्ट ने केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्र सरकार के वकील को जमानत देते हुए माना कि एक पुरुष के खिलाफ बलात्कार के आरोप केवल इसलिए नहीं लगाया जा सकता है कि क्योंकि उसके और एक महिला के बीच संबंध समय के साथ खराब हो गए थे।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि रिश्ते समय के साथ विकसित हुए हैं और आजकल युवाओं का रोमांटिक रिश्तों पर एक अलग दृष्टिकोण है, लेकिन यह तथ्य कि यह रिश्ता नहीं चल रहा है, बलात्कार के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा।"बाद में रिश्ते में खटास आने को बलात्कार नहीं माना...
'जघन्य अपराध नहीं': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आईपीसी धारा 498-ए के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की अनुमति दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में पक्षकारों के बीच आपसी सहमति के आधार पर वैवाहिक विवाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498-ए और धारा 406 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका की अनुमति दी।जस्टिस दीपक सिब्बल की पीठ ने कहा कि तय राशि का भुगतान पत्नी को पूरी तरह से कर दिया गया है और पक्षकारों को उक्त समझौते के आधार पर आपसी सहमति से तलाक दे दिया गया है।वर्तमान याचिका जब इस न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आई तो याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता द्वारा पूरी...
आरोपी की मेडिकल जांच नहीं होने से ऐसे चश्मदीद गवाहों पर संदेह नहीं किया जा सकता, जिनका समर्थन मेडिकल साक्ष्य से होता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि घटना के बाद आरोपी का मेडिकल परीक्षण न करने के एक मात्र आधार पर मेडिकल साक्ष्य द्वारा समर्थित चश्मदीद गवाहों के साक्ष्य पर संदेह नहीं किया जा सकता। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने बलात्कार के आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी, जिसे निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बेंच ने साथ ही पीड़ित को मुआवजे के रूप में 25,000 / - रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।संक्षेप में मामलाएक श्रवण कुमार मौर्य को आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय अपराध का...
[POCSO Act] दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट्स से पीड़ित बच्चों के आवेदन का इंतजार किए बिना उन्हें अंतरिम मुआवजा देने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि स्पेशल कोर्ट्स को बाल पीड़ितों को जल्द से जल्द अंतरिम मुआवजा देने के लिए कार्रवाई शुरू करनी चाहिए और इसके लिए आवेदन दायर करने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।जस्टिस जसमीत सिंह कई याचिकाओं पर विचार कर रहे थे, जिसमें पूर्ववर्ती पीठ ने पीड़ितों को अंतरिम मुआवजा देने के उद्देश्य से डीएसएलएसए को यौन अपराधों से संबंधित प्राथमिकी की आपूर्ति की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की मांग की थी।अदालत को अवगत कराया गया कि जब अंतरिम मुआवजे के लिए विशेष अदालत के...
वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम बनाम सीपीसी | वाणिज्यिक सूट में लिखित बयान दाखिल करने में देरी को माफ करने की शक्ति काफी अलग: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया है कि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम लिखित बयान दाखिल करने की अवधि से संबंधित प्रावधानों में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाता है और जहां तक वाणिज्यिक वादों का संबंध है, लिखित विवरण दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की न्यायालय की शक्ति में बदलाव लाता है।सीपीसी के आदेश VIII नियम 1 में कहा गया है कि लिखित बयान सम्मन की तामील की तारीख से तीस दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना है, ऐसा न करने पर न्यायालय द्वारा 90 दिनों से अधिक की देरी (समन की तामील की तारीख से) को माफ नहीं किया जा सकता...
[NEET-UG 2021] तकनीकी खराबी के कारण गलती से सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों के पक्ष में कोई निहित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एनईईटी-यूजी (NEET-UG) परीक्षा 2021 के संबंध में तीन उम्मीदवारों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई अधिकार नहीं है जो उनके पक्ष में निहित हो क्योंकि उन्हें तकनीकी खराबी के कारण गलती से "सफल" घोषित कर दिया गया था।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा,"विचार के लिए यह सवाल उठता है कि क्या याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अधिकार निहित है, जिन्हें तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से सफल उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था। इस प्रश्न का उत्तर नकारात्मक होना चाहिए, क्योंकि किसी भी...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्नी की विवाह रद्द करने की याचिका खारिज की, पत्नी ने किया था नशीला पदार्थ देकर विवाह कराने का दावा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि धोखाधड़ी के आधार पर विवाह को रद्द करने की याचिका धोखाधड़ी का पता चलने के एक साल के भीतर पेश की जानी चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला को मामले में राहत देने से इनकार कर दिया। महिला का दावा था कि उसे दिसंबर 2011 में नशीला पदार्थ देकर उसके विवाह स्थल से उसका अपहरण कर लिया गया था।जस्टिस केआर श्रीराम और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने कहा कि "कोई भी समझदार व्यक्ति उसके बयान पर विश्वास नहीं करेगा" कि मुंबई जैसे शहर में एक शिक्षित स्वतंत्र महिला को प्रसाद...
गैर-बाध्यकारी मध्यस्थता समझौते के आधार पर ए एंड सी अधिनियम की धारा 8 को लागू नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि पक्षकारों के बीच समझौते से 'गैर-बाध्यकारी' मध्यस्थता का रास्ता बना, हालांकि पक्षकारों का मध्यस्थता समझौता करने का कोई इरादा नहीं था, इस कारण उक्त समझौते को मध्यस्थता समझौता नहीं कहा जा सकता।जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ ने माना कि चूंकि समझौते में संबंधित खंड के तहत पक्षकार सिविल कोर्ट के समक्ष मुकदमेबाजी शुरू करने के लिए स्वतंत्र है, इसलिए, उक्त खंड स्पष्ट रूप से एक मध्यस्थता समझौते से अलग हो गया। इस कारण याचिकाकर्ता द्वारा दायर वसूली का मुकदमा निचली अदालत...
पेंशन योजना का दावा सेवा में आने की तिथि से किया जा सकता है, नियमित नियुक्ति की स्वीकृति की तिथि से नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि शिक्षकों के पेंशन लाभों पर विचार करते समय प्रासंगिक तिथि वह तिथि होगी जिस दिन शिक्षक ने सेवा में प्रवेश किया था, न कि वह तिथि जिस पर वास्तव में नियुक्ति की पुष्टि हुई थी। जस्टिस एस वैद्यनाथन और जस्टिस एन माला ने वी वसंती बनाम तमिलनाडु राज्य के फैसले पर भरोसा किया, जहां इसी तरह के तथ्यों पर, अदालत ने माना था कि शिक्षकों की सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से शुरू होती है, न कि अनुमोदन की तारीख से, भले ही मौद्रिक लाभ प्रशिक्षण पूरा होने की तारीख से ही मिलना शुरू हो...






![[मोटर दुर्घटना] वास्तविक नुकसान के मुआवजे में रिपेयर के लिए स्पेयर पार्ट्स का मूल्य शामिल है: केरल हाईकोर्ट [मोटर दुर्घटना] वास्तविक नुकसान के मुआवजे में रिपेयर के लिए स्पेयर पार्ट्स का मूल्य शामिल है: केरल हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/07/09/500x300_425075-385630-motor-accidents-01.jpg)










![[NEET-UG 2021] तकनीकी खराबी के कारण गलती से सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों के पक्ष में कोई निहित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट [NEET-UG 2021] तकनीकी खराबी के कारण गलती से सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों के पक्ष में कोई निहित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/08/11/500x300_398351-neetmedical.jpg)
