मुख्य सुर्खियां
रोजगार की शर्तें नियोक्ता के कार्यों के न्यायिक पुनर्विचार की मांग के कर्मचारियों के अधिकार को नहीं छीन सकती: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक फैसले में कहा कि कि एक नियोक्ता रोजगार की ऐसी शर्तें नहीं लगा सकता है, जो कर्मचारियों से नियोक्ता के कार्यों के न्यायिक पुनर्विचार कराने के उनके अधिकार को छीनने का प्रभाव डालती हो।अदालत ने माना कि न्यायिक पुनर्विचार का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त महत्वपूर्ण अधिकार है और रोजगार का कोई भी नियम और शर्त, जो किसी व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रवर्तन के लिए कानूनी उपायों की तलाश करने से रोकती हैं, शून्य हैं।अदालत ने 24 नवंबर, 2016 को क्षेत्रीय...
धारा 22 एसआरए | विशिष्ट अदायगी के लिए सिविल कोर्ट डिक्री को पूर्ण प्रभाव देने के लिए सहायक राहत प्रदान कर सकती है: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में निष्पादन न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को बरकरार रखा, जिसमें प्रतिवादी / डिक्री धारकों के पक्ष में विशिष्ट आदयगी के लिए एक डिक्री पारित करने, कब्जे की डिलीवरी का आदेश देने के बाद वाद अनुसूची संपत्ति में उठाए गए अवैध ढांचे को हटाने का निर्देश दिया गया था।यह देखा गया कि विशिष्ट अदायगी के लिए डिक्री को इस तरह से विफल नहीं किया जा सकता है और सिविल कोर्ट के पास डिक्री को पूर्ण प्रभाव देने के लिए सहायक राहत देने की शक्ति है।यह टिप्पणी जस्टिस चिलाकुर सुमलता की ओर से की...
आंशिक छूट के मामले में निलंबन अवधि को 'पूरी तरह से अनुचित' नहीं माना जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने एक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसके निलंबन की अवधि को इस आधार पर 'नियमित' माना जाना चाहिए कि याचिकाकर्ता को चार्जशीट किया गया था और उसके खिलाफ आरोपों से केवल आंशिक रूप से बरी किया गया था।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने कहा,"केवल जब कोई कर्मचारी आंशिक रूप से बरी हो जाता है, तो क्या प्राधिकरण को इस सवाल का फैसला करने की आवश्यकता होगी कि क्या निलंबन को पूरी तरह से अनुचित माना जा सकता है और क्या उसे वेतन और भत्ते का ऐसा अनुपात दिया जाना...
कर्नाटक हाईकोर्ट के जज ने एसीबी चीफ के खिलाफ आदेश पारित करने पर सिटिंग जज से मिली ट्रांसफर की धमकी को लिखित आदेश में दर्ज किया
कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एचपी संदेश, जिन्होंने पिछले हफ्ते खुलासा किया था कि उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) प्रमुख सीमांत कुमार सिंह एडीजीपी के खिलाफ आदेश पारित करने के लिए स्थानांतरण की अप्रत्यक्ष धमकी मिली थी, उन्होंने सोमवार को एक लिखित आदेश में धमकी दर्ज की।जस्टिस संदेश ने अपने आदेश में दर्ज किया कि एक जुलाई को पूर्व चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी को विदाई देने के लिए हाईकोर्ट की ओर से आयोजित विदाई रात्रिभोज समारोह के दरमियान उन्हें एक मौजूदा जज ने ट्रांसफर की अप्रत्यक्ष धमकी दी...
निजी अंगों में किसी भी चोट के बिना 9 साल के बच्ची के साथ बार-बार यौन गतिविधि संभव नहीं: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बलात्कार की सजा को खारिज किया
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बलात्कार आरोपी के खिलाफ निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि योनि/जननांग में किसी भी चोट के बिना 9 साल के बच्ची के साथ बार-बार यौन गतिविधि संभव नहीं है।कोर्ट ने यह पाते हुए कि अपीलकर्ता को झूठा फंसाने के लिए बयान देने के लिए अभियोक्ता को सिखाया गया हो सकता है, जस्टिस एमए चौधरी की खंडपीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अनंतनाग की ओर से इशफाक अहमद खान नामक आरोपी के खिलाफ धारा 376 (2) (i) आरपीसी के तहत पारित दोषसिद्धि आदेश...
प्रत्यर्पण अधिनियम | जिस मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में गिरफ्तार किया गया, वही मजिस्ट्रेट जांच नहीं कर सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि केंद्र सरकार को प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से निपटने के लिए किसी भी मजिस्ट्रेट को चुनने की स्वतंत्रता है। हालांकि, ऐसा मजिस्ट्रेट वह नहीं होना चाहिए जिसके अधिकार क्षेत्र में भगोड़ा पकड़ा गया है।जस्टिस आर विजयकुमार ने रोसिलिन जॉर्ज बनाम भारत संघ और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जहां अदालत ने निम्नानुसार कहा था:अधिनियम की धारा 5 से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार किसी भी मजिस्ट्रेट को जांच करने का निर्देश दे सकती है, बशर्ते...
मानवाधिकार आयोग केवल मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 18 के तहत मुआवजे की 'सिफारिश' कर सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Human Rights Act), 1993 की धारा 18 मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) को केवल 'सिफारिश' करने का अधिकार देती है न कि मुआवजे का निर्देश देने का। विशेष रूप से प्रावधान "जांच के दौरान और बाद में" आयोग द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का प्रावधान करता है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा की एकल पीठ ने कहा,"धारा 18 में जांच के दौरान और बाद में कदम उठाने का प्रावधान है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि आयोग ने जांच करने में चूक की...
'केवल भगवान ही इस तरह के वकीलों को बचा सकता है': केरल हाईकोर्ट ने वकील द्वारा अपने ही मुवक्किल के हितों के खिलाफ तर्क के बाद कहा
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वकील अपने मुवक्किलों के हित में काम करने के लिए बाध्य हैं और उन्हें ऐसे हितों के खिलाफ बहस करने से बचना चाहिए।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने निर्णय को पढ़ने के बाद उक्त टिप्पणी की। इस निर्णय में कहा गया था कि जब तक अधिनियम लागू रहता है, तब तक राज्य में जिम्नेजियम चलाने के लिए केरल प्लेस ऑफ पब्लिक रिजॉर्ट एक्ट, 1963 के तहत लाइसेंस आवश्यक है।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा,"वकील का कर्तव्य है कि वह अपने मुवक्किल के हितों का ख्याल रखे और उसे विशेष मामले के सटीक...
कर्नाटक उपभोक्ता फोरम ने बायजूस को 'उचित लर्निंग ऐप' प्रदान करने में विफलता पर छात्र को फीस वापस करने का आदेश दिया
जिला उपभोक्ता फोरम ने 10 मई को जारी एक पक्षीय आदेश में थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड को, जो बायजूस (Byju's) का लर्निंग ऐप प्रदान करता है, एक छात्र की फीस वापस करने का निर्देश दिया है। इसमें आरोप लगाया कि एड-टेक कंपनी ने छात्र को उचित लर्निंग ऐप प्रदान नहीं किया और एक टैब दी गई, जो शुरू में किए गए वादे से सस्ता था।फोरम ने कहा,"मामले में छात्र को उचित ऐप उपलब्ध नहीं प्रदान किया गया और न ही किए गए वादे के मुताबिक टैब प्रदान किया गया।"इस प्रकार इसने कंपनी को शिकायतकर्ता मधुसूदन बी द्वारा भुगतान किए...
हिंदू विवाह अधिनियम | कमाने की क्षमता रखने वाला पति पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता नहीं मांग सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता रखने वाला सक्षम व्यक्ति पत्नी से तलाक पर स्थायी गुजारा भत्ता की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस जे एम खाजी की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता की मांग करने वाले टी.सदानंद पई द्वारा दायर अपील खारिज कर दी।पीठ ने कहा,"अपीलकर्ता सक्षम शरीर वाला व्यक्ति है और उसके पास कमाने की क्षमता है। इसलिए फैमिली कोर्ट ने अपीलकर्ता द्वारा अधिनियम की धारा 25 के तहत दायर याचिका खारिज कर दी।"अपीलकर्ता-पति के अनुसार,...
अपराध की गंभीरता कानूनी सबूत से अधिक नहीं हो सकतीः गुजरात हाईकोर्ट ने POCSO के आरोपी को बरी करने को सही ठहराया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत एक आरोपी को बरी करने के फैसले के खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस एसएच वोरा और जस्टिस राजेंद्रन सरीन की पीठ ने कहाः ''यहां इस मामले में यह ध्यान देने योग्य है कि एक तरफ शिकायतकर्ता ने प्रतिवादी आरोपी के खिलाफ अपनी पीड़ित बेटी का यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और केवल 3 से 4 दिनों की अवधि के बाद ही उसने अपने ही पति के खिलाफ भी अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। शिकायतकर्ता द्वारा दो...
गुजरात हाईकोर्ट ने कृषि उपज बाजार में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की सीआईडी जांच की मांग वाली याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कृषि उपज बाजार में "लाखों रुपये" की कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में सीआईडी (आर्थिक अपराध विंग) या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जैसी विशेष एजेंसी द्वारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस निरजार देसाई ने कहा कि शिकायतकर्ता (आवेदक) अपना अधिकार स्थापित नहीं कर सका और वह यह नहीं बता सका कि आवेदन में नामित व्यक्तियों द्वारा किए गए कथित अपराधों से वह कैसे व्यथित है।शिकायतकर्ता ने कपडवांज कृषि उपज मंडी समिति द्वारा अनियमितताओं का आरोप लगाया और कहा कि आज...
केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामलों में मोनसन मावुंकल की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को कुख्यात फेक एंटीक डीलर मोनसन मावुंकल द्वारा उन मामलों के बैच की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जहां कई महिलाओं ने उस पर यौन शोषण का आरोप लगाया है।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामलों में आदेश सुरक्षित रख लिया। इन मामलों में से एक मामला पोक्सो मामला है।मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट रंजीत बी. मारार पेश हुए।महिलाओं में शामिल नर्स द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, उसके साथ बलात्कार करने से पहले धमकी दी गई अगर उसने उनकी बात...
मुंबई कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जमानत देने से इनकार किया
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) को पुलिस ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है।यह आदेश स्पेशल जज एसएच ग्वालानी ने पारित किया, जिन्होंने राकांपा नेताओं के सह-आरोपी संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे को डिफ़ॉल्ट जमानत देने से भी इनकार कर दिया। डिफ़ॉल्ट जमानत की मांग वाली याचिका पर राकांपा नेता ने दलील दी कि चार्जशीट अधूरा है।सीबीआई ने देशमुख और अज्ञात अन्य के खिलाफ 21 अप्रैल, 2021 को...
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट | शिकायतकर्ता को उस परिसर पर आरोपी का "विशेष कब्जा" साबित करना होगा जहां से ड्रग्स बरामदगी हुई है: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत शिकायतकर्ता को उस परिसर पर आरोपी का "विशेष कब्जा" साबित करना होगा जहां से ड्रग्स बरामदगी हुई है।न्यायमूर्ति के. सुरेंदर की ओर से यह टिप्पणी आई,"परिसर के अनन्य कब्जे के संबंध में प्रतिवादी/अभियुक्त के खिलाफ उचित संदेह से परे साबित करना शिकायतकर्ता का बाध्य कर्तव्य है, जिसमें विफल होने पर अभियोजन प्रतिवादी/अभियुक्त की पृष्ठभूमि में परिसर के बारे में किसी भी जानकारी से पूरी तरह से इनकार करने में विफल रहता है और जब...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 139 | जिस आईओ ने दस्तावेज जमा किये, सामग्री के संबंध में उससे क्रॉस एक्ज़ामिनेशन नहीं किया जा सकता : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 139 का हवाला देते हुए जांच अधिकारी (आईओ) से क्रॉस एक्ज़ामिनेशन (प्रति परीक्षण) की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उक्त आईओ ने भ्रष्टाचार के मामले में याचिकाकर्ता-आरोपी के खिलाफ दस्तावेज एकत्र किए थे।प्रावधान में कहा गया कि किसी दस्तावेज़ को पेश करने के लिए बुलाया गया व्यक्ति केवल इस तथ्य से गवाह नहीं बन जाता है कि वह इसे पेश करता है। फिर जब तक उसे गवाह के रूप में नहीं बुलाया जाता है तब तक उससे क्रॉस एक्ज़ामिनेशन नहीं की जा सकती...
LGBTQ+ पर्सन के लिए "कन्वर्जन थेरेपी" को पेशेवर कदाचार के रूप में माना जाना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमिशन को निर्देश दिए
मद्रास हाईकोर्ट ने LGBTQ+ कम्युनिटी के उत्थान के लिए कई दिशा-निर्देश जारी करते हुए नेशनल मेडिकल कमिशन को "कन्वर्जन थेरेपी" को पेशेवर कदाचार के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।अदालत ने पहले भी इससे संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें कमिशन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि स्टेट मेडिकल काउंसिल्स अपने नियमों में कन्वर्जन थेरेपी को कदाचार के रूप में अधिसूचित करें ताकि कमिशन के नियमों और काउंसिल के नियमों में निरंतरता हो।जस्टिस आनंद वेंकटेश ने शुक्रवार को जब मामला सुनवाई के...
[सीपीसी आदेश VII नियम 11] नुकसान की मात्रा का फैसला ट्रायल के बाद ही किया जा सकता है, वाद को खारिज करने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सीपीसी के आदेश VII नियम 11 के तहत एक वाद को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि इसमें दावा किए गए नुकसान की मात्रा प्रदान नहीं की जा सकती है।न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि वादी को दिए जाने वाले हर्जाने की मात्रा का फैसला सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए, एक ट्रायल आवश्यक होगा और इसलिए, वादपत्र को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि वादपत्र में दावा की गई क्षति की मात्रा प्रदान नहीं की जा सकती है।पीठ ने यह भी दोहराया कि सीपीसी के आदेश VII नियम 11 के...
पति और उसके परिवार के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज करना जिसके परिणामस्वरूप गिरफ्तारी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, क्रूरता के बराबर: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति द्वारा अपील की अनुमति दी जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act), 1955 की धारा 13 के तहत विवाह के विघटन के लिए उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।जस्टिस मीनाक्षी आई मेहता की पीठ ने कहा कि प्रतिवादी-पत्नी ने याचिकाकर्ता के साथ क्रूरता की है, इसलिए याचिकाकर्ता के लिए अब उसके साथ रहना असंभव होगा।अदालत ने आगे कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि पत्नी लगातार...
'अतीत में कभी भी, बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की कार्य क्षमता इतनी कम नहीं हुई': एडवोकेट्स एसोसिएशन ने कानून मंत्री से रिक्तियों को भरने का आग्रह किया
औरंगाबाद में बॉम्बे हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (Bombay High Court Advocate's Association) ने केंद्रीय कानून मंत्री को संबोधित पत्र में हाईकोर्ट में शीघ्र नियुक्तियों की मांग की है, अगर सरकार जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो वकीलों द्वारा विरोध की अप्रत्यक्ष चेतावनी दी गई है।उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति में कथित देरी के बारे में पत्र में कहा गया,"वादियों को पता नहीं है कि वास्तविक समस्या क्या है और हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में अत्यधिक देरी के लिए कौन जिम्मेदार...


















