मुख्य सुर्खियां
केंद्र ने 11 वकीलों की पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की
केंद्र सरकार ने 11 वकीलों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश को अधिसूचित किया है। ये नाम इस प्रकार हैं1. निधि गुप्ता,2. संजय वशिष्ठ,3. त्रिभुवन दहिया,4. नमित कुमार,5. हरकेश मनुजा,6. अमन चौधरी,7. नरेश सिंह,8. हर्ष बंगर,9. जगमोहन बंसल,10. दीपक मनचंदा, और11. आलोक जैनकॉलेजियम ने 25 जुलाई, 2022 को हुई अपनी बैठक में इनके नामों की सिफारिश की थी।
"गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमे से लाभ नहीं मिलना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाने पर याचिकाकर्ता पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमेबाजी से लाभ नहीं मिलना चाहिए, हाल ही में एक याचिकाकर्ता पर 25,000 / - रुपए का जुर्माना लगाया। इस याचिकाकर्ता ने अदालत से भौतिक तथ्यों को छुपाया कि उसने पहले दो अग्रिम जमानत आवेदन दायर किए थे और अदालत के आदेश का पालन नहीं किया था। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की पीठ ने विकास कुमार उर्फ विकास अग्रहरी (याचिकाकर्ता) पर जुर्माना लगाया , जिसने आईपीसी की धारा 417, 376, 504, 506 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की...
धर्म परिवर्तन के बाद माता-पिता की जाति/धर्म का लाभ उठाना दंडनीय: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 पारित किया
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने शनिवार (12 अगस्त) को हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया, जो राज्य के 2019 के धर्मांतरण विरोधी कानून को और अधिक कठोर बनाने का प्रयास करता है। विधेयक अन्य बातों के साथ-साथ सामूहिक धर्मांतरण, विवाह के लिए धर्म छुपाना, धर्मांतरण के बाद भी माता-पिता की जाति/धर्म का लाभ लेने आदि को दंडित करता है। यह बिल किसी व्यक्ति के लिए जो अन्य धर्म में परिवर्तित होने की इच्छा रखता है, कम से कम एक महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह घोषणा...
यूपीकेएसजेडपी अधिनियम | पंचायत कार्यालय में इस्तीफा नोटिस मिलने पर क्षेत्र पंचायत के निर्वाचित सदस्य का पद खाली माना जाएगा : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यू.पी. क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961, के तहत क्षेत्र पंचायत के एक निर्वाचित सदस्य के बारे में यह माना जाएगा कि उन्होंने क्षेत्र पंचायत के कार्यालय में उनके इस्तीफे की सूचना प्राप्त होने की तारीख से अपना पद खाली कर दिया है। जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने आगे कहा कि एक सदस्य का इस्तीफा नोटिस क्षेत्र पंचायत के कार्यालय में प्राप्त होते ही उसमें रिक्ति प्रभावी हो जाती है, है।बुलंदशहर के गुलावथी की क्षेत्र...
उड़ीसा हाईकोर्ट के दो न्यायिक अधिकारियों ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली
भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की सूचना जारी किए जाने के बाद दो वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने शनिवार दोपहर उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में शपथ ली । जस्टिस गौरीशंकर शतपथी ने उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वे राज्य के 9वें सबसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी रहे और वर्ष 2011 में ओडिशा सुपीरियर न्यायिक सेवा में शामिल हुए। उन्होंने पिछले दस वर्षों के दौरान जिला न्यायाधीश के कैडर में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे हाईकोर्ट में पदोन्नत होने से पहले निदेशक, ओडिशा न्यायिक अकादमी...
तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में 74 लाख से अधिक मामले निपटाए, 2022 लोक अदालतों के निपटान के आंकड़े 2.2 करोड़ के पार हुए
राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के तत्वावधान में देश भर के कानूनी सेवा प्राधिकरणों और जस्टिस उदय उमेश ललित, कार्यकारी अध्यक्ष, नालसा और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। दिल्ली को छोड़कर सभी 35 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में 13 अगस्त 2022 को लोक अदालत का आयोजन किया गया। दिल्ली में फुल ड्रेस रिहर्सल के कारण लोक अदालत स्थगित की गई है। अब इसका आयोजन 21 अगस्त'22 को किया जाएगा । रिपोर्ट के अनुसार 74 लाख से अधिक मामलों का...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (8 अगस्त, 2022 से 14 अगस्त, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।धारा 106 साक्ष्य अधिनियम उचित संदेह से परे मामले को साबित करने के कर्तव्य से अभियोजन को मुक्त नहीं करता है: इलाहाबाद हाईकोर्टइलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया है कि इस बात के पुख्ता सबूत के अभाव में कि हत्या का आरोपी मृतक के साथ प्रासंगिक समय पर घर में था, साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के प्रावधानों को उस पर यह...
राज्यपाल से मंजूरी के बाद पंजाब सरकार ने 'एक विधायक, एक पेंशन' योजना लागू करते हुए अधिनियम अधिसूचित किया
पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को पंजाब राज्य विधानमंडल सदस्य (पेंशन और चिकित्सा सुविधाएं विनियमन) अधिनियम, 2022 नामक एक अधिनियम को अधिसूचित किया, जो राज्य में 'एक विधायक, एक पेंशन' योजना लागू करता है।मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्विटर पर घोषणा की कि 30 जून को राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को राज्यपाल की सहमति मिल गई है। अधिनियम पंजाब राज्य विधानमंडल सदस्य (पेंशन और चिकित्सा सुविधाएं विनियमन) अधिनियम, 1977 में संशोधन करता है।अधिनियम में प्रावधान है...
कब्जे के लिए वाद - मामले में प्रतिवादी की कमजोरी स्वामित्व के सबूत के अभाव में वादी के केस को स्वचालित रूप से मजबूत नहीं करती : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि यदि वादी कब्जे और निषेधाज्ञा के मामले में अदालत को अपने अधिकार, स्वामित्व या हित के बारे में संतुष्ट करने में विफल रहता है तो वह उस पर कब्जा या उसके खिलाफ अनिवार्य निषेधाज्ञा नहीं मांग सकता।जस्टिस अलका सरीन की पीठ ने प्रतिवादी-प्रतिवादियों द्वारा स्थापित मामले में आगे कमजोरी को जोड़ा कि वादी-अपीलकर्ताओं द्वारा स्थापित मामले को स्वचालित रूप से मजबूत नहीं करेगा।अदालत मंदिर और उसके अध्यक्ष की ओर से निचली अपीलीय अदालत के आदेश के खिलाफ नियमित दूसरी अपील पर सुनवाई...
कोर्ट फीस एक्ट की धारा 7(i) | मनी सूट में कोर्ट फीस दावा की गई राशि के अनुसार देय है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोर्ट फीस एक्ट, 1870 की धारा 7 (i) के अनुसार, रुपए के लिए किए गए वाद में दावा की गई राशि के अनुसार कोर्ट फीस देय है। उक्त वाद में क्षतिपूर्ति या भरण पोषण की बकाया राशि, या समय-समय पर देय अन्य राशियों के वाद शामिल हैं।धन के लिए वाद में क्षतिपूर्ति या भरण पोषण की बकाया राशि, वार्षिकी या समय-समय पर देय अन्य राशियों के लिए वाद शामिल है, वहां कोर्ट फीस एक्ट की धारा 7 (i) में यह बताया गया कि देय कोर्ट फीस की राशि की गणना कैसे की जानी चाहिए। इस प्रकार, यह...
धारा 106 साक्ष्य अधिनियम उचित संदेह से परे मामले को साबित करने के कर्तव्य से अभियोजन को मुक्त नहीं करता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया है कि इस बात के पुख्ता सबूत के अभाव में कि हत्या का आरोपी मृतक के साथ प्रासंगिक समय पर घर में था, साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के प्रावधानों को उस पर यह समझाने के लिए लागू नहीं किया जा सकता है कि मृतक की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई थी।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी की खंडपीठ ने एटा के सत्र न्यायाधीश के 2003 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने आईपीसी की धारा 302 के तहत राज किशोर उर्फ पप्पू को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा का आदेश दिया...
लोन फ्रॉड| जब कर्जदार के 'विलफुल डिफॉल्टर' के रूप में घोषणा पर अदालत ने रोक लगाई तो बैंक आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड ब्रांच द्वारा स्टील हाइपरमार्ट इंडिया और इसके संस्थापक के खिलाफ 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि कंपनी की 'विलफुल डिफॉल्टर' के रूप में घोषणा पर अदालत ने रोक लगा दी थी और मामला इंडियन बैंक की समीक्षा समिति के समक्ष लंबित है।कोर्ट ने टिप्पणी की,"यदि बैंक के अनुसार मूल पर पुनर्विचार करना है तो यह शायद ही उचित ठहराया जा सकता है कि अंतरिम आदेश के...
सजा बढ़ाने के लिए सीआरपीसी की धारा 372 के तहत अपील सुनवाई योग्य नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि आरोपी को दी गई सजा को बढ़ाने के लिए सीआरपीसी की धारा 372 के तहत दायर अपील सुनवाई योग्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि धारा 372 सीआरपीसी के तहत 'पीड़ित' को अधिकार प्रदान किया गया है [जैसा कि सीआरपीसी की धारा 2 डब्ल्यू (डब्ल्यूए) के तहत परिभाषित किया गया है] तीन आधारों पर अपील दायर की जा सकती है।(i) जब आरोपी व्यक्ति (व्यक्तियों) को बरी कर दिया गया हो।(ii) जब आरोपी व्यक्ति (व्यक्तियों) को कम अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो।(iii) जहां न्यायालय ने अपर्याप्त मुआवजा लगाया...
सीबीआई जांच के आदेश ने पुलिस के वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने का अधिकार छीन लिया, इसे नियमित रूप से पारित नहीं किया जाना चाहिए: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने सरकारी स्कूल शिक्षक के ट्रांसफर में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश देने वाले एकल पीठ के आदेश पर "बिना शर्त" रोक लगा दी।जस्टिस बिवास पटनायक और जस्टिस रवि कृष्ण कपूर की पीठ ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश या निर्देश नियमित रूप से या किसी पक्ष की आशंका पर पारित नहीं किया जाने चाहिए।पीठ ने कहा,"यह असाधारण उपाय है और इसे संयम, सावधानी से और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही प्रयोग किया जाना चाहिए। सीबीआई पर ऐसे आदेश...
गुजरात हाईकोर्ट ने बड़े भाई से माता-पिता की कस्टडी की मांग करने वाले छोटे बेटे की 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका को अनुमति दी
गुजरात हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर सुनवाई करते हुए बूढ़े और बीमार माता-पिता की कस्टडी उनके छोटे बेटे को सौंप दी है। याचिका में प्रतिवादी बड़े भाई द्वारा माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें अवैध कस्टडी में रखने का आरोप लगाया था।जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस संदीप भट्ट की खंडपीठ ने प्रतिवादी के आचरण पर आश्चर्य व्यक्त किया, जिसने वकीलों के चैंबर में अपनी मां को "खलनायक" करार दिया।खंडपीठ ने कहा,"प्रतिवादी नंबर तीन द्वारा अपनी मां के बारे में इस...
"कोई भी आरोपी सुधार में असमर्थ नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धारा 304 भाग एक आईपीसी के तहत दी गई आजीवन कारावास की सजा को 10 वर्ष तक की सजा के रूप में संशोधित किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा, "...कोई भी आरोपी सुधार में असमर्थ नहीं है। इसलिए, उन्हें सामाजिक धारा में वापस लाने के लिए सुधार का एक अवसर देने के सभी उपायों को लागू किया जाना चाहिए।"कोर्ट ने इन्हीं टिप्पणियों के साथ आईपीसी की धारा 304 पार्ट 1 के तहत दोषी करार दिए गए एक आरोपी की सजा में सुधार किया।जस्टिस डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस अजय त्यागी की पीठ ने जोर देकर कहा कि हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली में अंतर्निहित सुधारात्मक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाते...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने CLAT-PG रैंकिंग के माध्यम से IOCL लॉ ऑफिसर की नियुक्ति बरकरार रखी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) द्वारा CLAT-PG रैंकिंग के माध्यम से सीनियर लॉ ऑफिसर के पदों को भरने के लिए पिछले महीने जारी विज्ञापन को बरकरार रखा।जस्टिस माइकल ज़ोथनखुमा की एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि नियोक्ता को अच्छी तरह से पता होगा कि उन्हें किस प्रकार के उम्मीदवार की आवश्यकता है। नियोक्ता में उम्मीदवार के लिए आवश्यक योग्यता निर्धारित करने में कोई भेदभाव या मनमानी नहीं है।कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि मानदंड अवसर की समानता खंड का उल्लंघन है, जैसा कि संविधान के...
केरल हाईकोर्ट ने भारत में 5 साल से अधिक समय तक बिना वीजा के रहने वाले लिट्टे समर्थक को जमानत देने से इनकार किया
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को श्रीलंकाई आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से सहानुभूति रखने वाले संदिग्ध व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया। उक्त संदिग्ध व्यक्ति पर भारत में बिना वीजा के रहने, भारत और विदेशों में लिट्टे की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए प्रतिबंधित हथियार और वस्तुओं की खरीद की साजिश रचने का आरोप है।जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस सी. जयचंद्रन की खंडपीठ ने संदिग्ध व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए कहा कि गवाहों के बयानों ने स्पष्ट रूप से स्थापित किया कि वह...
पति की संपत्ति न होने पर स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण का फरमान लागू नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में डिक्री धारक-पत्नी की निष्पादन याचिका खारिज करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। निचली ने उक्त पत्नी की याचिका को इस तथ्य के आधार पर खारिज कर दिया कि वह निर्णय-देनदार/पति के स्वामित्व वाली संपत्तियों या संपत्तियों को रिकॉर्ड में नहीं ला सकती।न्यायालय ने कहा कि पति उन संपत्तियों का मालिक नहीं है जिनकी सूची निष्पादन न्यायालय को प्रस्तुत की गई है, इसलिए इसे अटैच नहीं किया जा सकता।जस्टिस अलका सरीन की पीठ ने आगे कहा कि इस न्यायालय के समक्ष भी डिक्री...
मालवानी बिल्डिंग ढहने का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने परिवार के 9 सदस्य खोने वाले मालिक को जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के मालवानी इलाके में इमारत के मालिक को जमानत दे दी। उक्त इमारत पिछले साल गिर गई थी। इस हादसे में इमारत के मालिक के परिवार के 9 सदस्यों की मौत हो गई थी।जस्टिस भारती डांगरे ने इस महीने की शुरुआत में मोहम्मद रफीक सिद्दीकी को जमानत देते हुए कहा,"आवेदक को किसी भी मामले में जल्दबाजी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप इमारत गिरी। उसने खुद अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है। उसे मुकदमे के परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, जब अभियोजन पक्ष...


















