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गुजरात हाईकोर्ट ने बड़े भाई से माता-पिता की कस्टडी की मांग करने वाले छोटे बेटे की 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका को अनुमति दी

Shahadat
13 Aug 2022 7:46 AM GMT
गुजरात हाईकोर्ट ने बड़े भाई से माता-पिता की कस्टडी की मांग करने वाले छोटे बेटे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अनुमति दी
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गुजरात हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर सुनवाई करते हुए बूढ़े और बीमार माता-पिता की कस्टडी उनके छोटे बेटे को सौंप दी है। याचिका में प्रतिवादी बड़े भाई द्वारा माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें अवैध कस्टडी में रखने का आरोप लगाया था।

जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस संदीप भट्ट की खंडपीठ ने प्रतिवादी के आचरण पर आश्चर्य व्यक्त किया, जिसने वकीलों के चैंबर में अपनी मां को "खलनायक" करार दिया।

खंडपीठ ने कहा,

"प्रतिवादी नंबर तीन द्वारा अपनी मां के बारे में इस तरह के शब्दों के बोलने से न्यायालय के साथ-साथ चैंबर में मौजूद याचिकाकर्ता के एडवोकेट और एपीपी की अंतरात्मा को झकझोर दिया।"

अदालत ने प्रतिवादी द्वारा माता-पिता के साथ उसके दुर्व्यवहार को देखते हुए कस्टडी सौंपने से पहले 10 दिनों की ट्रांजिशन पीयरेड देने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा,

"आम तौर पर इस न्यायालय ने याचिकाकर्ता को माता-पिता की कस्टडी सौंपने के लिए प्रतिवादी नंबर तीन को कुछ समय दिया होगा। हालांकि, माता-पिता के साथ हुए दुर्व्यवहार की सीमा को देखते हुए हम यह उचित समझते हैं कि माता-पिता की कस्टडी याचिकाकर्ता को सौंप दी जाए। बड़े बेटे द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का खुलाता पहले कॉर्पस नंबर दो द्वारा किया गया। फिर इस न्यायालय ने भी अपने माता-पिता के साथ प्रतिवादी नंबर तीन का आचरण देखा है।"

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका छोटे बेटे ने प्रतिवादी नबंर तीन बड़े बेटे के खिलाफ दायर की थी। याचिकाकर्ता के पिता लकवा के साथ-साथ कैंसर से भी पीड़ित हैं। वह बिस्तर पर पड़े हैं। याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि माता-पिता 2002 से 2019 तक उसके साथ रह रहा था। हालांकि, प्रतिवादी नंबर तीन के यहां जाने पर माता-पिता ने दुर्व्यवहार की शिकायत की और याचिकाकर्ता द्वारा उन्हें वापस अपने पास ले जाने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रतिवादी नंबर तीन के खिलाफ दुर्व्यवहार के लिए पुलिस शिकायत भी दर्ज की। इसके बाद जनवरी, 2022 में याचिकाकर्ता प्रतिवादी नंबर तीन के घर गया और कथित तौर पर माता-पिता को कस्टडी में ले लिया।

बेंच ने कहा कि जब पुलिस ने माता-पिता के बयान दर्ज करने के लिए प्रतिवादी नंबर तीन से संपर्क किया तो उसने उनके खराब स्वास्थ्य के आधार पर बात कराने से इनकार कर दिया। प्रतिवादी नंबर तीन भी माता-पिता को पेश करने में विफल रहा। इसके बजाय व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बना रहा।

वर्तमान सुनवाई में माता-पिता के साथ बातचीत करने पर बेंच ने पाया कि प्रतिवादी नंबर तीन के परिवार के सदस्य दंपति के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने याचिकाकर्ता के घर पर रहने की इच्छा भी व्यक्त की। याचिकाकर्ता ने बेंच को यह भी आश्वासन दिया कि वह अपने पिता-पिता की शारीरिक स्थिति से अवगत है। वह मेडिकल अटेंडेंट और दवाओं आदि की व्यवस्था सहित पिता के इलाज और देखभाल के लिए सभी व्यवस्था करने के लिए तैयार है। उसने यह भी कहा कि वह इस वचन पत्र पर हस्ताक्षर करने को भी तैयार है कि उसे अपने माता-पिता की संपत्तियों में कोई दिलचस्पी नहीं है।

केस नंबर: आर/एससीआर.ए/7772/2022

केस टाइटल: जयेश मनहरलाल गांधी बनाम गुजरात राज्य

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