मुख्य सुर्खियां
स्कूल की रसोई की दीवार गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत, उड़ीसा हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने स्कूल की रसोई की दीवार गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत के मामले में पिता को 10 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है।जस्टिस एस. मुरलीधर की पीठ ने कहा कि लड़की की मौत पूरी तरह से अनावश्यक और परिहार्य है और ऐसा नहीं होता अगर राज्य द्वारा लागू किए जाने वाले सभी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन किया जाता।अदालत ने टिप्पणी की,"स्कूल परिसर में रसोई के निर्माण के लिए दोषपूर्ण सामग्री का उपयोग करने में राज्य के अधिकारियों की लापरवाही पहले ही जांच के दौरान स्थापित...
'पेनिस पर चोट की अनुपस्थिति अभियोजन के मामले पर अविश्वास करने के लिए पर्याप्त नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 5 साल की लड़की के साथ बलात्कार मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा की पुष्टि की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने 5 साल की बच्ची के साथ बलात्कार मामले (Rape Case) में दोषी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि पेनिस पर चोट की अनुपस्थिति अभियोजन के मामले पर अविश्वास करने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस जी एस अहलूवालिया और जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि अपराध एक अक्षम्य कृत्य है और इसलिए, नाबालिग लड़कियों के लिए एक सुरक्षित समाज प्रदान करने के लिए, यह आवश्यक है कि इस प्रकार के कृत्य से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।पूरा मामलाअभियोजन पक्ष के...
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस रेवती डेरे ने 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ी एक याचिका पर आरोपी द्वारा आपत्ति जताने पर सुनवाई से खुद को अलग किया
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की जज, जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने 2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले (Malegaon Blast Case) के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया, जब याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई और कहा कि जस्टिस डेरे ने 2011 में एक सह-आरोपी के खिलाफ अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया था।अदालत के आदेश में कहा गया,"जिस खंडपीठ की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे सदस्य हैं, उसके समक्ष नहीं।"जस्टिस डेरे और जस्टिस शर्मिला देशमुख की पीठ को आरोपी समीर कुलकर्णी द्वारा निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ...
शमशेरा फिल्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने यशराज फिल्म्स को रजिस्ट्री के पास 1 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त के साथ ओटीटी पर रिलीज की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने यशराज फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को 22 अगस्त तक रजिस्ट्रार जनरल के पास 1 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म शमशेरा (Shamshera) की रिलीज की अनुमति दी।कोर्ट ने यह आदेश बिक्रमजीत सिंह भुल्लर द्वारा दायर एक मुकदमे में दिया, जिसमें दावा किया गया था कि फिल्म साहित्यिक कृति 'कबू ना छेड़ें खेत' की कॉपीराइट का उल्लंघन है।जस्टिस ज्योति सिंह ने परिस्थितियों की समग्रता के साथ-साथ इस तथ्य पर विचार करने के बाद आदेश पारित किया कि फिल्म पहले ही...
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दायर भरण-पोषण याचिका को रेस ज्यूडिकाटा द्वारा कवर किया गया, परिस्थितियों में बदलाव का दावा करने वाला पक्ष सीआरपीसी 127 के तहत आगे बढ़ सकता हैः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि जब भी कोई पक्ष सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण देने का आदेश दिए जाने के बाद परिस्थितियों में बदलाव का दावा करता है, तो उसके पास उचित सहारा संहिता की धारा 125 के तहत नई याचिका दायर करने के बजाय संहिता की धारा 127 के तहत राहत मांगना होगा। रेस ज्यूडिकाटा का सिद्धांत (पूर्वन्याय) पर जोर देते हुए, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि उक्त सिद्धांत को समान मुद्दों के संबंध में मुकदमेबाजी की बहुलता को रोकने के लिए विकसित किया गया है और जो मुकदमे में अंतिमता सुनिश्चित...
आदेश 39 नियम 7 सीपीसी | आयुक्त की रिपोर्ट "अंतिम शब्द" नहीं है और पार्टियों की आपत्तियों के अधीन है: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि आयुक्त की नियुक्ति का उद्देश्य सीमित है और आयुक्त की रिपोर्ट अंतिम शब्द नहीं है क्योंकि यह उन आपत्तियों के अधीन है, जिन्हें पक्षकारों द्वारा सूट में लिया जा सकता है।जस्टिस पुनीत गुप्ता की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसमें याचिकाकर्ता-वादी ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत निचली अदालत द्वारा आयुक्त की नियुक्ति को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जब प्रतिवादी ने इस तथ्य को स्वीकार किया था...
नॉन जॉइनिंग ड्यूटी रिक्तियों को नई रिक्तियों के रूप में माना जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केरल राज्य और अधीनस्थ सेवा नियमों (विशेष नियम) के भाग III के संशोधन के बाद लोक सेवा आयोग (पीएससी) में निवारक अधिकारी के पद पर उत्पन्न होने वाली नॉन जॉइनिंग ड्यूटी (एनजेडी) की रिक्तियां को संशोधित नियमों के अनुसार भरना होगा न कि पूर्ववर्ती नियमों के अनुसार।जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी ने यह भी दोहराया कि सलाह के अनुसार ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं करने वाले उम्मीदवार की सलाह के कारण उत्पन्न होने वाली रिक्ति को एक नई रिक्ति के रूप में...
जज परिभाषित क्षेत्राधिकार से आगे नहीं बढ़ सकते और न्याय के प्रशासन अपनी सनक के अनुसार नहीं चला सकते: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि धारा 107 और 108 सहपठित आदेश 43 नियम 2 सीपीसी एक अपीलीय अदालत को ट्रायल कोर्ट के समक्ष मौजूद मुकदमे की स्क्रिप्ट को बदलने और एक नई तथ्य स्थिति पैदा करने और किसी दिए गए दीवानी मुकदमे में अपने स्वयं के धारणा-आधारित परिणाम को आगे बढ़ाने का अधिकार नहीं देता।जस्टिस राहुल भारती की खंडपीठ अनुच्छेद 227 के तहत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके समक्ष यह प्रश्न था कि एक अपीलीय अदालत, आदेश 43 नियम 1(आर) सीपीसी के तहत अपने अधिकार क्षेत्र...
2007 के सेवा नियमों के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना को बरकरार रखा है, जिसने 'जनहित में' उठाए गए कदम का हवाला देते हुए एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को उनकी सेवा से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था।इस तरह की अधिसूचना की पुष्टि करते हुए, चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने यह भी माना कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति एक सजा नहीं है; इस प्रकार, ऐसी सेवानिवृत्ति को अधिसूचित करने से पहले संबंधित अधिकारी की पूर्व सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।कोर्ट ने कहा,"अब यह...
'राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के मामलों की निगरानी के लिए स्पेशल कमेटी गठित करें ताकि नशीली दवाओं की तस्करी को खत्म किया जा सके': मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया
मणिपुर हाईकोर्ट (Manipur High Court) ने राज्य सरकार को राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के मामलों की निगरानी के लिए स्पेशल कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया है, जिसमें जिला स्तर पर उप-समितियों का गठन किया गया है ताकि नशीली दवाओं की तस्करी को खत्म किया जा सके।जस्टिस एम. वी. मुरलीधरन की पीठ ने कहा कि मणिपुर राज्य जिसे गहनों की भूमि/कंगलीपाक या मीटीलीपाक कहा जाता है, मादक पदार्थों के परिवहन, तस्करी और बिक्री के अवैध कृत्यों के खतरे का सामना कर रहा है।पूरा मामलापीठ अनिवार्य रूप से एक सहायक उप-निरीक्षक की...
डॉ अम्बेडकर संविधान निर्माता हैं, सभी सरकारी लॉ कॉलेजों में उनका चित्र लगाएं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेजों में डॉ बीआर अम्बेडकर का चित्र लगाने की आवश्यकता पर बल दिया है। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने निदेशक, कानूनी अध्ययन, चेन्नई को सभी सरकारी लॉ कॉलेजों में डॉ अम्बेडकर के चित्रों की स्थापना के लिए एक परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश कानून के छात्र के निलंबन के खिलाफ दायर याचिका पर दिया है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,"डॉ अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता हैं। वह सामाजिक मुक्ति के प्रतीक हैं। उनकी विद्वता अद्वितीय है। वह कानून के हर छात्र के लिए...
मणिपुर हाईकोर्ट ने 'एचसी (सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन) रूल, 2022' की अधिसूचना जारी की
मणिपुर हाईकोर्ट ने एडवोकेट एक्ट, 1961 की धारा 16(2) सहपठित धारा 34(1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के साथ मणिपुर हाईकोर्ट (सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन) रूल, 2022 ('HC (Designation Of Senior Advocates) Rules 2022') की अधिसूचना जारी की।उक्त रूल में प्रावधान है कि हाईकोर्ट किसी एडवोकेट को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित कर सकता है। रूल के मुताबिक हाईकोर्ट की राय में उसकी क्षमता के आधार पर और बार में खड़े होने के कारण उक्त एडवोकेट इस तरह के...
अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद सेप्टीसीमिया के कारण घायल पीड़ित की मौत हुई तो आरोपी पर लग सकता है हत्या का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिलने के 13 दिन बाद घायल व्यक्ति की मौत के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत दंडनीय हत्या के अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया जा रहा है, अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में हत्या के अपराध से इंकार नहीं किया जा सकता है।याचिकाकर्ता/आरोपी द्वारा उठाए गए तर्कों को खारिज करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा-...मेरी राय में ट्रायल कोर्ट ने कुछ भी गलत नहीं किया...
एक ऐसा व्यक्ति जो अदालत के सामने पेश नहीं होता, वह एडवोकेट नहीं हो सकता, भले ही बार काउंसिल में उसका इनरोलमेंट हो : गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने दोहराया कि एक वकील जो अदालतों के सामने पेश नहीं होता है और खुद को "एडवोकेट" के रूप में नामित नहीं कर सकता है, भले ही वह बार काउंसिल में नामांकित हो।कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट अधिनियम और बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, एक बार रोजगार की शर्तों के लिए एक वकील को अदालतों के सामने याचना करने और पेश होने की आवश्यकता नहीं होती है, तो रोजगार की इस अवधि के दौरान, किसी व्यक्ति को 'एडवोकेट' नहीं कहा जा सकता है क्योंकि वह एक एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस नहीं कर रहा...
केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पर स्वप्ना सुरेश द्वारा लगाए आरोपों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें विधायक केटी जलील (K T Jaleel), मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (CM Pinarayi Vijayan) और सरकार के खिलाफ कथित रूप से झूठी जानकारी फैलाने के लिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।जस्टिस ज़ियाद रहमान ए ए की पीठ ने प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली स्वप्ना सुरेश की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह अंतिम रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र होंगी।सोने की तस्करी मामले में...
लोक रक्षक भर्ती | कोर्ट आंसर की की शुद्धता का पता नहीं लगा सकता, इसे विशेषज्ञों पर छोड़ देना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना कि एग्जाम आंसर की (Key) की शुद्धता का पता लगाने का कार्य न्यायालय के लिए नहीं है। इसे क्षेत्र के विशेषज्ञों के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने लोक रक्षक (क्लास III) के पदों के लिए आयोजित परीक्षाओं की आंसर की की शुद्धता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा,"जो भी विकल्प चुना जाता है तो उसमें कुछ उम्मीदवारों को नुकसान होने की संभावना रहती है।" सिंगल जज बेंच ने दोहराया:"... जब परस्पर विरोधी विचार होते हैं तो न्यायाधीशों से यह उम्मीद नहीं की...
मद्रास हाईकोर्ट ने वर्दीधारी पुलिस अधिकारियों को अर्दली के रूप में नियुक्त करने की प्रथा को समाप्त करने में डीजीपी के प्रयासों की सराहना की
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य पुलिस से अर्दली व्यवस्था को हटाने के लिए तमिलनाडु के डीजीपी के प्रयासों की सराहना की।अदालत ने पहले डीजीपी को हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। इस हलफनामा में अदालत को उच्च अधिकारियों के आवास पर वर्दीधारी अधिकारियों को अर्दली के रूप में नियुक्त करने की औपनिवेशिक प्रथा को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में सूचित किया गया था।मामला गुरुवार को जब सामने आया तो डीजीपी सी. सिलेंद्र बाबू ने अदालत को बताया कि उच्च अधिकारियों से अंडरटेकिंग लिया जा रहा है कि वर्दीधारी...
"मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर आघात होगा": केरल हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय बलात्कार पीड़ित की 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने की अनुमति दी
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 14 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने की मांग को लेकर दायर रिट याचिका को अनुमति दी।जस्टिस वी.जी. अरुण ने रिट की अनुमति देते हुए मेडिकल बोर्ड की प्रेग्नेंसी की मेडिकल टर्मिनेशन की सिफारिश को नोट करते हुए कहा,"गर्भावस्था जारी रखने से लड़की के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट लग सकती है।"मामला 12.08.2022 को जब सुनवाई के लिए आया तो अदालत ने पीड़िता की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी के लिए याचिका दायर करने का...
"उसने इस्लाम अपनाया और बांग्लादेशी नागरिकता के लिए स्वेच्छा से आवेदन किया": मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता छोड़ने वाली बेटी के खिलाफ पिता की याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के सचिव को नागरिकता के त्याग की घोषणा दर्ज करने या अपनी बेटी को नागरिकता के त्याग का अनापत्ति प्रमाण पत्र/प्रमाण पत्र देने से रोकने की मांग की गई थी।कोर्ट ने कहा कि वह 25 साल की उम्र की बालिग लड़की है। साथ ही पिता द्वारा पूर्व में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रिकॉर्ड को देखते हुए अदालत ने कहा कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया है और स्वेच्छा से बांग्लादेशी नागरिकता के लिए आवेदन किया है।जस्टिस...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को COVID कठिनाइयों के कारण फीस जमा करने में विफल दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक छात्र की आर्थिक पृष्ठभूमि और COVID-19 महामारी के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करें, इस तथ्य के बावजूद कि वह स्कूल को फीस जमा करने में विफल रहा है।जस्टिस संजीव नरूला ने स्वीकार किया कि सामान्य परिस्थितियों में, परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए पूर्व शर्त के रूप में उपस्थिति मानदंड को पूरा किया जाना चाहिए।हालांकि, उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने कई परिवारों को प्रभावित किया है जिन्होंने...















