मुख्य सुर्खियां
एनडीपीएस एक्ट| निजी वाहन के विपरीत सार्वजनिक परिवहन के मामले में "सचेत कब्जे" का मानक अलग: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 और 22 में निहित प्रावधानों में प्रयुक्त अभिव्यक्ति "कब्जा" (Possession) स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करती है कि सार्वजनिक परिवहन के मामले में सचेत कब्जे का मानक अलग होगा, यह निजी वाहन के से अलग होगा, जिसमें कुछ लोग एक दूसरे को जानते हों।जस्टिस संजय धर की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 439 के तहत न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया, और थाना यारीपोरा...
बी.एड. ग्रेजुएशन की "बैचलर डिग्री" नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना कि बी.एड. डिग्री यानी बैचलर ऑफ एजुकेशन ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं है, क्योंकि उक्त कोर्स उदाहरण के तौर पर तीन-वर्षीय एलएलबी कोर्स, आर्ट या साइंस की किसी भी ब्रांच में ग्रेजुएशन होने के बाद ही पढ़ा जा सकता है।कोर्ट ने माना कि बी.एड. डिग्री ग्रेजुएशन की न्यूनतम निर्धारित योग्यता वाले पदों के लिए ओवर-क्वालिफाइड हैं। इस प्रकार, अधिक योग्यता रखने के लिए उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार करना कानून में गलत नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने मुख्य प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक और अन्य बनाम अनित...
कारण बताओ नोटिस में व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि, समय, स्थान के कॉलम में "एनए" : झारखंड हाईकोर्ट ने अधिनिर्णय आदेश रद्द किया
झारखंड हाईकोर्ट ने अधिनिर्णय आदेश ((Adjudication Order)) को रद्द करते हुए माना कि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 के तहत जारी नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख, समय और स्थान के कॉलम में प्रतिवादियों द्वारा "एनए" के रूप में इंगित किया गया है, जिसका अर्थ है लागू नहीं।जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा कि अधिनिर्णय आदेश कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं है। यह आदेश जेजीएसटी अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों के गैर-अनुपालन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के गैर-अनुपालन के...
बचाव पक्ष के वकील को क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान "पूरी तरह सजग" रहना चाहिए, सीआरपीसी की धारा 311 "दोष ठीक करने" के लिए नहीं है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 311 गवाहों को वापस बुलाने का प्रावधान करती है, लेकिन इसका मतलब बचाव में "दोष ठीक करना" नहीं है। इस प्रकार, बचाव पक्ष के वकील को क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान "पूरी तरह से सजग" रहना चाहिए।यह टिप्पणी अभियोजन पक्ष के दो गवाहों को अतिरिक्त जिरह के लिए वापस बुलाने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए की गई।हाईकोर्ट ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई कार्यवाही में बचाव पक्ष के वकील को अभियुक्तों द्वारा सहायता प्रदान की गई इसलिए, यदि...
स्कूल शिक्षक का हेडमिस्ट्रेस पर मुकदमा दायर करना शिक्षक की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का कारण नहीं बन सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्राइवेट स्कूल केवल इसलिए स्कूल टीचर का वेतन नहीं रोक सकता कि उस टीचर ने स्कूल हेडमिस्ट्रेस के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।वर्तमान मामले में प्राइवेट स्कूल ने अपने सहायक शिक्षक के छठे वेतन आयोग के वार्षिक वेतन वृद्धि और लाभ को इस आधार पर रोक लिया कि उक्त टीचर ने स्कूल हेडमिस्ट्रेस पर मुकदमा दायर किया।जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने कहा:"याचिकाकर्ता को उपरोक्त...
खेल और शारीरिक गतिविधियां शिक्षा का अभिन्न हिस्सा, सभी स्कूलों में खेल के मैदान होने चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
सार्वजनिक और निजी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा के उचित निर्देश के लिए दिशा-निर्देशों का एक सेट तैयार करने की मांग वाली एक याचिका का निपटारा करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने स्कूलों में शारीरिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।अदालत ने राज्य को यह सुनिश्चित करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया कि शारीरिक शिक्षा को उचित महत्व दिया जाए और सभी स्कूलों में आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाए।समिति का गठन एक माह के भीतर सरकार द्वारा किया जाएगा और इसकी अध्यक्षता सरकार के सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग...
मद्रास हाईकोर्ट ने 23 जून को अन्नाद्रमुक में यथास्थिति बहाल के सिंगल जज के आदेश को रद्द किया
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने अन्नाद्रमुक पार्टी में 23 जून, 2022 को यथास्थिति बहाल करने के सिंगल जज के आदेश को रद्द किया।जस्टिस एम दुरईस्वामी और जस्टिस सुंदर मोहन की पीठ ने एडप्पादी पलानीस्वामी द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए आदेश पारित किया।अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश का आदेश कानून की पहुंच से बाहर है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है।यह प्रस्तुत किया गया कि 11 जुलाई को आयोजित सामान्य परिषद की बैठक, जिसमें ओ पनीरसेल्वम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से और...
"इस मोड़ पर संबंध खत्म करने से न्याय का उद्देश्य सफल नहीं होगा": मेघालय हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ पॉक्सो आरोप खारिज किए
मेघालय हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ अपनी नाबालिग पत्नी के साथ 'सहमति से' यौन संबंध रखने के लिए यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 ('POCSO Act') के तहत आरोपों को खारिज कर दिया है।जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की एकल पीठ ने कहा,"इस तथ्य के बावजूद कि उचित आपराधिक कार्यवाही को बहुत मजबूत और मजबूर परिस्थितियों के बिना कम नहीं किया जा सकता है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जड़ पर हमला करता है, विशेष रूप से अभियुक्त की अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों को अदालत में अपनी अंतर्निहित शक्तियों के प्रयोग में...
'फ़राज़' मूवी: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'बीएफआई' लंदन फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए फिल्म की प्रविष्टि दाखिल करने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बॉलीवुड फिल्म निर्माता हंसल मेहता और फिल्म 'फराज' (Faraaz Movie) का निर्माण करने वाले अन्य लोगों को बीएफआई लंदन फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए फिल्म की प्रविष्टि दाखिल करने की अनुमति दे दी।यह फिल्म बांग्लादेश के ढाका के होली आर्टिसन में 2016 में हुए आतंकवादी हमले पर आधारित है। वर्तमान याचिका उस परिवार की ओर से दायर की गई है, जिसने हमले में अपनी बेटियों को खो दिया था। परिवार को डर हैं कि फिल्म में उनकी बेटियों को गलत तरीके से दिखाया जा सकता है।जस्टिस...
विचाराधीन कैदियों की लंबी हिरासत से बचाने के लिए कारावास की तारीख के आधार पर सुनवाई की जानी चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में निचली अदालत के आदेश को उलटते हुए हत्या के दोषी को बरी कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामलों की त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कोर्ट ने कहा कि कैदियों को अपील दायर करने के लिए उचित सहायता की आवश्यकता है ताकि लंबे समय तक कैद से बचाया जा सके।जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने विचाराधीन कैदियों की निरंतर कैद के चिंताजनक पहलू और ट्रायल आयोजित करने में हुई देरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट को दोषियों की कैद की तारीख...
सिविल सेवा विनियमों के नियम 351-ए के तहत वसूली का आदेश केवल तभी दिया जा सकता है जब सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार को उसकी पेंशन से वसूली का आदेश देने के लिए सिविल सेवा विनियम के नियम 351-ए के तहत अधिकार प्राप्त है, हालांकि, ऐसा तभी किया जा सकता है जब यह स्थापित हो कि सरकार को कुछ वित्तीय नुकसान हुआ है।इसी के साथ जस्टिस आलोक माथुर की पीठ ने याचिकाकर्ता (सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता) को दोषी ठहराने और तीन साल की अवधि के लिए उसकी पेंशन से पांच प्रतिशत की कटौती की सजा देने के उत्तर प्रदेश सरकार का एक आदेश रद्द कर...
[सीआरपीसी की धारा 172(3)] आरोपी को केस डायरी एक्सेस करने का कोई अधिकार नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि एक आरोपी को 'केस डायरी' एक्सेस करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 172 (3) के तहत सख्त प्रतिबंध है। जस्टिस शशिकांत मिश्रा की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा, "इसलिए मामले को सभी संबंधितों द्वारा न केवल संबंधित अदालतों द्वारा बल्कि न्यायालय उप-निरीक्षक और संबंधित जांच अधिकारी के कार्यालय द्वारा भी पूरी गंभीरता से देखे जाने की आवश्यकता है, जिनकी हिरासत में केस डायरी रखी जानी चाहिए। जबकि दंड प्रक्रिया संहिता में प्रावधान है कि...
"गंभीर आर्थिक अपराध के मामले में जमानत से इनकार करने का कोई नियम नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 196 करोड़ रुपए कैश बरामद होने के मामले में बिजनेसमैन पीयूष जैन को जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन को उनके पास से कथित रूप से 196.57 करोड़ रुपये कैश बरामद होने के मामले में जमानत दी।उन्हें 10 लाख रुपये के निजी बॉन्ड भरने और इतनी ही राशि की दो विश्वसनीय जमानतदार पेश करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने पीयूष को जमानत दी क्योंकि यह नोट किया गया कि भले ही आरोप गंभीर आर्थिक अपराध में से एक है, लेकिन कहीं भी यह नियम नहीं है कि हर मामले में जमानत से इनकार किया जाना चाहिए...
सेशन कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ अपील हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष होगी, अगर लगातार कारावास की सजा 10 साल से अधिक : जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेशन कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ अपील हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के समक्ष होगी, जहां कारावास की सजा 10 वर्ष से अधिक है। हालांकि, अपील की सुनवाई और फैसला एकल न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा, यदि सजा 10 वर्ष से कम है। जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और जस्टिस मो अकरम चौधरी की बेंच ने आगे यह स्पष्ट किया कि जहां कई अपराधों के लिए एक ही फैसले में दी गई सजा को लगातार काटना है, जैसे कि यह कुल मिलाकर 10 साल की कैद से अधिक है, अपील एक डिवीजन...
दुमका स्कूल छात्रा की हत्या ने 'पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया': झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान लिया
झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका स्कूल छात्रा की मौत के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें एक स्कूली लड़की की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर लड़की के कमरे की खिड़की के बाहर से उस पर पेट्रोल डाला और उसे आग लगा दी। मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण की खंडपीठ ने कहा कि इस घटना ने न केवल झारखंड राज्य बल्कि पूरे देश के लोगों की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और कोर्ट ने मामले की निगरानी करने का निर्णय लिया।बेंच ने कहा," ...चूंकि यह एक जघन्य अपराध है जिससे सुबह 4 बजे...
तमिलनाडु बार काउंसिल ने विभिन्न अपराधों के लिए छह वकीलों को कानूनी प्रैक्टिस से निलंबित किया
तमिलनाडु और पुडुचेरी की बार काउंसिल ने हाल ही में विभिन्न अपराधों में शामिल होने पर विचार करते हुए छह वकीलों को कानून की प्रैक्टिस से निलंबित कर दिया। 1 सितंबर 2022 की अधिसूचना ने वकील के खिलाफ किसी भी अदालत, न्यायाधिकरण, या किसी अन्य प्राधिकरण में प्रैक्टिस करने से निषेधात्मक आदेश जारी किया। बार के इस प्रस्ताव के बारे में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री और भारत के सभी हाईकोर्ट को भी सूचित कर दिया गया है।इसे सभी जिला न्यायालयों, न्यायाधिकरणों, श्रम न्यायालयों, सरकार के मुख्य सचिव, सचिव (कानून...
रेल रोको प्रोटेस्ट : नागरिकों को सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध करने का अधिकार, बशर्ते प्रदर्शन के दौरान कोई अपराध कारित न किया जाए : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद की सजा संशोधित की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हमारे संविधान के तहत लोकतंत्र में, लोगों को सरकारी नीतियों/कार्रवाई/निष्क्रियता के खिलाफ विरोध करने का अधिकार है, बशर्ते विरोध प्रदर्शनकारी द्वारा अपराध कारित न हो। यह कहते हुए कोर्ट ने पूर्व- सांसद अन्नू टंडन और अन्य को 'रेल रोको प्रोटेस्ट' केस के सिलसिले में दी गई सजा संशोधित कर दी। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि ट्रेन को 15 मिनट तक रोके रखने के अलावा, प्रदर्शनकारियों द्वारा निजी और सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया और कुल...
'ऐसी टिप्पणियां करना एक फैशन बन गया है': मद्रास हाईकोर्ट ने स्टंट मास्टर कनाल कन्नन को सशर्त जमानत दी
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने गुरुवार को हिंदू मुन्नानी के पदाधिकारी और स्टंट मास्टर कनाल कन्नन को श्रीरंगम मंदिर के बाहर पेरियार की प्रतिमा को ध्वस्त करने की टिप्पणी मामले में सशर्त जमानत दी।जस्टिस जीके इलांथिरायन ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी कि वह एग्मोर कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसमें यह गारंटी दी जाएगी कि वह भविष्य में ऐसा कोई बयान नहीं देंगे।उन्हें चार सप्ताह की अवधि के लिए दो बार पुलिस के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया गया है।याचिकाकर्ता, जो हिंदू मुन्नानी...
[जन प्रतिनिधित्व अधिनियम] धारा 127A गैर-संज्ञेय अपराध निर्धारित करता है, पुलिस जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कहा है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127-ए (पैम्फलेट, पोस्टर आदि की छपाई पर प्रतिबंध) के तहत अपराध एक गैर-संज्ञेय अपराध है और इसलिए, पुलिस जांच की अनुमति सीआरपीसी की धारा 155 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा दी जानी चाहिए।जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने महंतेश कौजालगी नाम के व्यक्ति की याचिका को स्वीकार कर लिया और अधिनियम की धारा 127-ए के तहत उसके खिलाफ दायर आरोपपत्र को खारिज कर दिया।पीठ ने मामले को पुलिस अधिकारियों को दी जा रही जानकारी के...
सीआरपीसी की धारा 311 | मुकदमे में किसी भी पक्ष को गलतियां ठीक करने से रोका नहीं जा सकता, अभियोजन में गलती का लाभ अभियुक्त को जाना चाहिए: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट (Tripura High Court) ने हाल ही में देखा कि न्यायालय सीआरपीसी की धारा 311 के तहत आरोपी द्वारा दायर आवेदन की अनुमति दे सकता है और न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए किसी भी गवाह को फिर से बुलाने की अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकता है।जस्टिस अमरनाथ गौड़ ने कहा:"अभियोजन में कमी को अभियोजन मामले के मैट्रिक्स में निहित कमजोरी या गुप्त कील के रूप में समझा जाना चाहिए। इसका लाभ आम तौर पर मामले की सुनवाई में अभियुक्तों को जाना चाहिए, लेकिन पीड़ित पक्ष के प्रबंधन में दृष्टि इसे अपूरणीय कमी...












![[सीआरपीसी की धारा 172(3)] आरोपी को केस डायरी एक्सेस करने का कोई अधिकार नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट [सीआरपीसी की धारा 172(3)] आरोपी को केस डायरी एक्सेस करने का कोई अधिकार नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/07/15/500x300_396705-orissahighcourt.jpg)







