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मोटर वाहन अधिनियम : अनाधिकारिक या गैर-अनाधिकारिक दावाकर्ता अधिनियम के प्रावधानों के तहत बीमाकर्ता पर देयता का दावा नहीं कर सकता: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि मालवाहन/मालगाड़ी से यात्रा कर रहे माल मालिक का अपवाद छोड़कर यात्रा कर रहे किसी अन्य व्यक्ति (भले ही वह 'मुफ्त यात्रा कर रहा हो या पैसे देकर') की मौत या दिव्यांगता से संबंधित दावे में मोटर वाहन अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों के इस्तेमाल के जरिये बीमाकर्ता को देयता के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस एम ए चौधरी की एक पीठ उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता-बीमा कंपनी ने एक दावा याचिका में विद्वान एमएसीटी,...
घरेलू हिंसा अधिनियम | डीवी एक्ट की धारा 12 के तहत कार्यवाही को आपराधिक शिकायत दर्ज करने के बराबर नहीं माना जा सकता: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम (डीवी एक्ट) की धारा 12 के तहत कार्यवाही को आपराधिक शिकायत दर्ज करने या अभियोजन शुरू करने के बराबर नहीं माना जा सकता है, इसलिए पति और उसके रिश्तेदारों आदि से प्रतिक्रिया पाने के बाद एक मजिस्ट्रेट का सम्मन जारी करने के बाद आदेश को रद्द करना या कार्यवाही को समाप्त करना उसके अधिकार क्षेत्र के भीतर है।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा,"विद्वान मजिस्ट्रेट अगर पति और उसके रिश्तेदारों के जवाब को देखने के बाद पाता है...
यौनकर्मियों के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए लॉ स्टूडेंट की जनहित याचिका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत संघ और राज्य सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) याचिका पर राज्य सरकार और भारत संघ को नोटिस जारी किया। उक्त याचिका में यौनकर्मियों के लिए सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता जया पांडेय द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर याचिका पर राज्य और केंद्र सरकारों से जवाब मांगा, जो पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज यूनिवर्सिटी में छात्र हैं।अदालत के समक्ष उसने केंद्र और राज्य सरकार को यह...
सार्वजनिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गठित नगर निगम वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि बुनियादी सार्वजनिक वस्तुओं की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से गठित नगर निगम वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने 80 वर्षीय महिला के घर के पुनर्निर्माण के कारण सड़क के स्तर से नीचे जाने के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की खिंचाई करते हुए यह टिप्पणी की। इससे याचिकाकर्ता की संपत्ति को नुकसान हुआ।महिला और साथ ही एमसीडी दोनों ने एकल न्यायाधीश द्वारा 12 फरवरी, 2020 को पारित आदेश को...
सीआरपीसी की धारा 125 | मुस्लिम पति जब तक तलाक का सही उच्चारण और उचित रूप से संचार नहीं करता, तब तक पत्नी के भरण पोषण के अपने दायित्व से नहीं बच सकता: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मुस्लिम पति को अपनी पत्नी को तलाक देने के आधार पर उसके भरण-पोषण के अपने दायित्व से बचने के लिए न केवल यह दिखाना होगा कि तलाक मुस्लिम कानून के अनुसार वैध रूप से सुनाया गया है, बल्कि उसे यह भी दिखाना होगा कि उक्त तलाक की सूचना पत्नी को दे दी गई है।जस्टिस संजय धर की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बडगाम द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। इस आदेश में जम्मू-कश्मीर सीआरपीसी की धारा 488 (सीआरपीसी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए ऊंटों के परिवहन के दौरान कानून का पालन करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे और साथ ही गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के उद्देश्य से शहर में ऊंटों को ले जाते समय पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (पशुओं का परिवहन) नियम, 2020 में संशोधन करे।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ सीमा सुरक्षा बल...
मद्रास हाईकोर्ट ने यौन हिंसा के पीड़ितों की पहचान उजागर करने से मीडिया पर रोक लगाई
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मुकदमे के दौरान यौन शोषण और यौन हिंसा के पीड़ितों के नाम, उनके परिवार के विवरण और गवाह या पीड़ितों के बयान से संबंधित कोई सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया।अदालत ने कहा कि इस तरह के विवरण प्रकाशित करने से पीड़ित पर डराने-धमकाने वाला प्रभाव पड़ेगा और इसके परिणामस्वरूप अपराधी फ्री हो जाएंगे। इस प्रकार, भले ही मीडिया रेटिंग के आधार पर फलता-फूलता है, लेकिन उसे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।जस्टिस धंदापानी ने...
केरल हाईकोर्ट ने एनडीएमए को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली मौतों से संबंधित पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने को कहा
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने गुरुवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को COVID-19 टीकाकरण के बाद के प्रभाव के कारण मृत्यु के मामलों की पहचान करने और पीड़ितों के आश्रितों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने के लिए नीति या दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया।जस्टिस वी. जी. अरुण ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां टीकाकरण के बाद के प्रभावों के कारण व्यक्तियों के मरने का संदेह है, ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ऐसे मामलों की पहचान...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने देर रात सुनवाई की, कथित अवैध निर्माण के विध्वंस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कथित अतिक्रमण से संबंधित एक मामले की सुनवाई के लिए शनिवार को रात 9:10 बजे कार्यवाही की। हाईकोर्ट ने यह देखा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को उसके कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित नोटिस नहीं दिया गया है, इसलिए अदालत ने इसके विध्वंस के खिलाफ अंतरिम राहत दी।जस्टिस सुबोध अभयंकर की पीठ ने प्रतिवादी अधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता का मकान तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई।प्रतिद्वंदी की दलीलों पर उचित विचार करने और...
एकपक्षीय नियुक्त आर्बिट्रेटर द्वारा पारित अवॉर्ड नॉन-एस्ट, यह एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत याचिका की सुनवाई के लिए बाधा नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एकतरफा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा पारित अवॉर्ड नॉन-एस्ट (non-est) है, इसलिए यह एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत याचिका की सुनवाई के लिए बाधा नहीं हो सकता।जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने कहा कि अवॉर्ड पारित करने से नॉन-एस्ट कार्यवाही पवित्र नहीं हो जाती और केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता ने अधिनियम की धारा 14 के तहत एकतरफा नियुक्ति को चुनौती नहीं दी थी, यह उसे स्वतंत्र मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए कोर्ट से अपील करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता है।तथ्यपार्टियों ने छह सितंबर, 2014...
एससी/एसटी एक्ट | अग्रिम जमानत आवेदन केवल स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर किया जा सकता है, हाईकोर्ट के समक्ष नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत कथित अपराधों के मामलों में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन केवल स्पेशल कोर्ट या एक्ट के तहत गठित एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर किया जा सकता है न कि हाईकोर्ट के समक्ष।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अपराधों के लिए जमानत देने के लिए हाईकोर्ट का न तो धारा 438 सीआरपीसी के तहत समवर्ती क्षेत्राधिकार है और न ही धारा 482 सीआरपीसी के तहत मूल क्षेत्राधिकार है और केवल...
जनता में बेबुनियाद आरोपों के आधार पर जजों की शिकायत करने और उन्हें बदनाम करके उन पर हावी होने की मानसिकता विकसित हो गई हैः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सिविल केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आम जनता में जजों की शिकायत करने और निराधार आरोपों पर उन्हें बदनाम करने की मानसिकता विकसित हो गई है।याचिकाकर्ता मोहम्मद सरफराज ने पीठासीन अधिकारी, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के खिलाफ आरोप लगाकर मामले को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), नगीना, जिला-बिजनौर की अदालत से बिजनौर की जजशिप में किसी अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी।जिला जज ने इस संबंध में याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज...
गणेश चतुर्थी| अधिकारियों को शांति बनाए रखनी चाहिए ताकि धार्मिक उत्सवों का स्वतंत्र रूप से आयोजन हो सकेः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा है कि प्रशासनिक अधिकारी कानून-व्यवस्था और शांति बनाने रखने की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त नहीं कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धार्मिक प्रथाओं और उत्सवों का स्वतंत्र रूप से आयोजन हो सके और यह सार्वजनिक शांति में बिना किसी हस्तक्षेप के हो सके।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को लोगों की आस्था के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिए, उन्हें अपने निर्णयों में मेलजोल दिखाने की आवश्यकता है।इसके...
लखीमपुर खीरी हिंसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी अंकित दास को मेडिकल ग्राउंड पर 15 दिनों की अंतरिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा के आरोपी अंकित दास को मेडिकल ग्राउंड पर अल्पकालिक जमानत (Short-term bail) दी है। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने संबंधित अदालत/मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए एक व्यक्तिगत बांड और समान राशि में प्रत्येक में दो जमानत दाखिल करने पर 15 दिनों के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।दास उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिन पर 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या का आरोप है। दास पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास के भतीजे हैं।माना जा...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (29 अगस्त, 2022 से 2 सितंबर, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।निवारक निरोध आदेश के खिलाफ बंदी के प्रतिनिधित्व पर विचार न करना संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निवारक निरोध आदेश के खिलाफ एक बंदी के प्रतिनिधित्व हिरासतकर्ता प्राधिकारी द्वारा विचार नहीं करना,...
स्पेशल जज (पोक्सो) कटक में अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए, परिवार को हत्या का संदेह
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) कटक श्री सुभाष कुमार बिहारी शुक्रवार को सीडीए के सेक्टर-9, कटक में अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए।न्यायाधीश पिछले दो दिनों से छुट्टी पर थे और शुक्रवार को उन्हें अपनी ड्यूटी पर वापस आना था। कथित तौर पर वह अदालत नहीं आए, बल्कि अपनी छुट्टी बढ़ाने की मांग की।इसके बाद उन्हें उनके आवास में लटका पाया गया, जिसके बाद उन्हें कटक के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि डॉक्टर ने उन्हें 'मृत लाया' घोषित कर दिया। पुलिस को शक...
आरोपी ट्रायल कोर्ट से अभियोजन एजेंसी को यह निर्देश देने के लिए नहीं कह सकता है कि विशेष साक्ष्य का एक हिस्सा जुटाया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक आरोपी ट्रायल कोर्ट से अभियोजन एजेंसी को यह निर्देश देने के लिए नहीं कह सकता है कि विशेष साक्ष्य का एक हिस्सा जुटाया जाए, जो उसके पक्ष में हो सकता है।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी महिला प्रकोष्ठ, पुलिस आयुक्त लखनऊ सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संरक्षण की मांग की गई थी।दरअसल, ठाकुर के खिलाफ धारा 120 बी, 167, 195...
केवल संसद ही एससी लिस्ट में किसी जाति को शामिल कर सकती है: 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित करने के यूपी सरकार के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग की 17 उप-जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता देने या स्वीकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा केवल संसदीय कानून के जरिए ही किया जा सकता है।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर ने कहा है,"संविधान के अनुच्छेद 341 के प्रावधान संसद द्वारा बनाए गए कानून को छोड़कर संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 द्वारा प्रदान की गई राज्य में अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी जाति या समूह को...
निवारक निरोध आदेश के खिलाफ बंदी के प्रतिनिधित्व पर विचार न करना संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निवारक निरोध आदेश के खिलाफ एक बंदी के प्रतिनिधित्व हिरासतकर्ता प्राधिकारी द्वारा विचार नहीं करना, संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत ऐसे बंदी के अधिकारों का उल्लंघन है।जस्टिस संजीव कुमार ने कहा,"मेरा सुविचारित मत है कि निरोध का आक्षेपित आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है, इसमें उसकी मां द्वारा उसकी ओर से किए गए अभ्यावेदन पर प्रतिवादियों द्वारा विचार नहीं किया गया है। प्रतिवेदन करने के लिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति का अधिकार और सक्षम...
नार्को एनालिसिस: राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को अपने बचाव के समर्थन में स्वेच्छा से नार्को टेस्ट से गुजरने की अनुमति देने का निर्देश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह पत्नी की दहेज हत्या के आरोपी पति-याचिकाकर्ता को अपने बचाव के समर्थन में स्वेच्छा से नार्को एनालिसिस टेस्ट कराने की अनुमति दे और इस तरह उसे साक्ष्य में दर्ज करे।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा,"भले ही नार्को एनालिसिस टेस्ट परिणाम पर पूर्ण बाध्यकारी प्रभाव न हो, यह निश्चित रूप से कानून द्वारा मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक तकनीक है। इसका उपयोग अभियोजन एजेंसियों के साथ-साथ न्यायालयों द्वारा जांच के दौरान मुख्य साक्ष्य का समर्थन और...


















