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केवल ईमेल और फॉर्म 16A नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है: फ्रीलांसिंग पर दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि फ्रीलांसिंग में मालिक-नौकर का कोई रिश्ता नहीं होता। फ्रीलांसर अपना मालिक खुद होता है। उसके पास अपने असाइनमेंट चुनने की क्षमता होती है, जिससे वह कई नियोक्ताओं के लिए भी काम कर सकता है।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि एक फ्रीलांसर वह होता है, जो किसी संगठन से संबद्ध या अधिकृत हुए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और इस प्रकार अंशकालिक, पूर्णकालिक या संविदा कर्मचारियों से अलग होता है।कोर्ट ने कहा, "फ्रीलांसर या फ्रीलांसिंग शब्द का प्रयोग मौजूदा दौर में एक ऐसे...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा की बर्खास्तगी पर रोक लगाने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को गुजरात के आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा की बर्खास्तगी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और केंद्र को बर्खास्तगी के खिलाफ उनकी याचिका पर जवाब देने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा, "हम इस स्तर पर बर्खास्तगी दिनांक 30.08.2022 के आदेश पर रोक लगाने या उस पर रोक लगाने के इच्छुक नहीं हैं।"सुप्रीम कोर्ट ने 19 सितंबर को वर्मा की बर्खास्तगी के आदेश को एक हफ्ते के लिए टाल दिया था और स्टे को जारी रखने या नहीं करने पर...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO पीड़ित की गवाही की समय पर रिकॉर्डिंग की मांग वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की समिति से संपर्क करने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को पोक्सो अधिनियम को उचित रूप से लागू करने की मांग करने वाले एक जनहित याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपने सुझावों के साथ पॉक्सो मामलों पर हाईकोर्ट की समिति से संपर्क करे। याचिका में विशेष रूप से विशेष अदालतों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई कि पोक्सो अधिनियम की धारा 35(1) के तहत नाबालिग पीड़िता की गवाही एक महीने के भीतर दर्ज की जाए। पॉक्सो मामलों की देखरेख करने वाली एडहॉक कमेटी में जस्टिस रेवती मोहिते डेरे,जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस भारती डांगरे...
पॉक्सो अपराधों के लिए आधा आजीवन कारावास 10 साल: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दोषी को उम्र कैद की आधी सजा सुनाई, जिसे 10 साल की सजा भुगतनी होगी।अदालत से कोल्हापुर जेल अधीक्षक ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) मामले में दोषी को "आधा आजीवन कारावास" की सजा सुनाने वाले हाईकोर्ट के 2018 के आदेश की व्याख्या की मांग की थी।जस्टिस सारंग कोतवाल ने कहा कि चूंकि पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास को परिभाषित नहीं किया गया, इसलिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 57 के तहत आजीवन कारावास की परिभाषा लागू होगी।उक्त धारा में...
अगर पहली जमानत याचिका को खारिज करने का कारण समाप्त हो गया है तो कोर्ट दूसरी अग्रिम जमानत याचिका पर विचार कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि अगर पहली जमानत याचिका को खारिज करने का कारण समाप्त हो गया है तो अदालत दूसरी अग्रिम जमानत याचिका पर विचार कर सकती है।इसके साथ ही जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने अनुराग दुबे नाम के एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी, जिस पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149 और 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है।उसकी पहली जमानत याचिका को अदालत ने इस तथ्य के मद्देनजर खारिज कर दिया था कि सीआरपीसी की धारा 82 के तहत एक उद्घोषणा जारी करके उसे भगोड़ा घोषित किया गया था।हालांकि,...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएलएसए को 12 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को मुआवजे के भुगतान के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सचिव, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, बहराइच को 12 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को मुआवजा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। पीड़िता की अवांछित गर्भावस्था को इस महीने की शुरुआत में हाईकोर्ट के आदेश के बाद समाप्त कर दिया गया था।जस्टिस अत्ताउर्रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने डीएलएसए के सचिव को इस मामले को जिला प्राधिकरण के साथ उठाने और पीड़ित या उसके परिवार को मुआवजे की प्रचलित योजना यानि यूपी पीड़ित मुआवजा योजना, 2014, के अनुसार भुगतान के लिए...
मामले 'पुराने और बासी', अपराधों और निर्वासन आदेश के बीच कोई लाइव लिंक नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निर्वासन आदेश को रद्द किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जिन मामलों को प्राधिकरण ने फैसले के लिए ध्यान में रखा था, वे पुराने और बासी थे और ऐसे अपराधों प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कोई कोई लाइव लिंक नहीं है।जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा,"यह स्पष्ट है कि निर्वासन का आदेश (Order of Externment) एक सामान्य उपाय नहीं है और इसे संयम से और असाधारण परिस्थितियों में इसका सहारा लिया जाना चाहिए। निर्वासन का आदेश पारित करने से एक व्यक्ति के...
कसेंट डिक्री का उपयोग सेल डीड के पंजीकरण और स्टाम्प शुल्क के भुगतान से बचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दीवानी अदालतों को आगाह किया कि उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए कि बिक्री विलेखों के पंजीकरण या स्टांप शुल्क का भुगतान करने से बचने के लिए कंसेंट डिक्री की मांग न की जाए।जस्टिस संजीव कुमार ने कहा,"मिलीभगत से ली गई डिक्री को बिक्री विलेख के लिए एक लबादे के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। ऐसे कई मौके हो सकते हैं जहां पक्ष एक-दूसरे की मिलीभगत से कानून के उल्लंघन में और...
एससी/एसटी एक्ट| धारा 3(1)(यू) के तहत अपराध तभी आकर्षित होगा जब यह सदस्यों के खिलाफ 'समूह के रूप में' किया जाए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा एक प्रोफेसर की शिकायत पर जांच का आदेश न देने के फैसले के खिलाफ दर्ज याचिका को खारिज करते हुए हाल ही में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 3 (1) (यू) तभी लागू होती है, जब कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के खिलाफ एक समूह के रूप में दुष्प्रचार करने का प्रयास कर रहा हो।धारा 3 (1) (यू) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ शत्रुता, घृणा या द्वेष की भावनाओं को बढ़ावा देने के प्रयास करने वाले किसी...
हाईकोर्ट परिसर के आसपास ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान संयुक्त बैठक में करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों-पुलिस अधिकारियों से कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के वकीलों के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों को वाहनों की पार्किंग के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक कारकों के कारण हाईकोर्ट परिसर के आसपास यातायात की भीड़ की समस्या को हल करने के लिए संयुक्त बैठक आयोजित करने के लिए कहा।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने दोनों पक्षों से मिलने और इस मुद्दे पर चर्चा करने और सर्वसम्मत निर्णय लेने की अपेक्षा की, जो हाईकोर्ट परिसर में वकीलों, वादियों और अन्य लोगों के प्रवेश और बाहर जाने को प्रभावित करने वाले यातायात की समस्या के कारकों को हल कर सकता...
'आप दूसरों के अधिकार का अतिक्रमण क्यों कर रहे हैं': बॉम्बे हाईकोर्ट ने नॉन वेज फूड के विज्ञापन पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने नॉन वेज फूड के विज्ञापन पर बैन लगाने की मांग वाली जैन धार्मिक संस्थाओं की याचिका पर कहा कि आप दूसरों के अधिकार का अतिक्रमण क्यों कर रहे हैं।कोर्ट ने कहा,"कोई कानून नहीं है जो इसे प्रदान करता है। आप हमें कानून बनाने के लिए कह रहे हैं और संविधान के अनुच्छेद 19 के उल्लंघन के बारे में क्या? आप दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण क्यों कर रहे हैं?"चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता पी बेंच ने याचिकाकर्ता तीन ट्रस्टों को याचिका वापस लेने की स्वतंत्रता दी और कहा कि बेहतर विवरण...
पीएमएलए मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यवाही के हस्तांतरण के खिलाफ सत्येंद्र जैन की याचिका पर ईडी का जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पिछले सप्ताह एक विशेष अदालत से दूसरे न्यायाधीश को धन शोधन मामले में उनके खिलाफ कार्यवाही को चुनौती दी गई है।जस्टिस योगेश खन्ना ने भी जांच एजेंसी को याचिका पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया दाखिल करने का आदेश दिया, जबकि मामले को 28 सितंबर को अंतिम निपटान के लिए पोस्ट किया।अदालत ने कहा,"जारी नोटिस किया जाए। मामले में संक्षिप्त जवाब दाखिल किया जाए। 28 सितंबर को अंतिम निपटान के लिए मामला सूचीबद्ध किया...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने मामले में मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत 5 साल की जेल की सजा सुनाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत 23 साल पुराने एक मामले में 5 साल जेल की सजा सुनाई।साथ ही, जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने वर्ष 1999 में दर्ज एक मामले में गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत अंसारी को आरोपों से बरी करने के एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा पारित 2020 के आदेश को रद्द कर दिया।हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने अंसारी को बरी करने में घोर गलती की थी क्योंकि वह एक गैंगस्टर है और...
राज्य वैधानिक कर्तव्यों को लागू नहीं कर सकता, जिनके पास लागू करने योग्य कानूनी अधिकार नहीं है: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह राज्य के कानूनी वैधानिक कर्तव्यों को लागू करने के लिए रिट अधिकार क्षेत्र के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता है, जिनके पास नागरिकों के लिए कोई समान लागू करने योग्य कानूनी अधिकार नहीं है।जस्टिस माइकल ज़ोथनखुमा ने टिप्पणी की कि यदि अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का दायरा इस हद तक विस्तारित किया जाता है तो न्यायालयों में मामलों की बाढ़ आ जाएगी।कोर्ट ने कहा,"यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह एक आदर्श दुनिया नहीं है। कई चीजें जो राज्य और उसके...
CET 2022: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य को रिपीटर कंडिडेट के लिए अंकों के सामान्यीकरण पर विचार करने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए इंजीनियरिंग और तकनीक में ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए रिपीटर-स्टूडेंट को सीईटी रैंकिंग प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई संशोधित पद्धति को शुक्रवार को स्वीकार कर लिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने कहा,"सुनवाई के दौरान, यूजीसीईटी शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 के लिए सेकेंड पीयूसी बैच 2021 के अंकों के मूल्यांकन के लिए दूसरी विधि के संबंध में पक्षकारों के वकीलों के बीच आम सहमति विकसित की गई,...
NEET 2022: राजस्थान हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन की मांग वाली याचिका पर एनटीए से जवाब मांगा
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक कुमार गौर ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (अंडरग्रेजुएट) 2022 में उम्मीदवार के अंकों के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश की मांग करने वाली याचिका पर जवाब मांगा है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने कुल 720 अंकों में से केवल 395 अंक प्राप्त किए हैं, जो उसके द्वारा की गई मैनुअल गणना के विपरीत है, जिसमें वह 400 से अधिक अंक प्राप्त कर रहा है।याचिका में कहा गया कि एनटीए ने याचिकाकर्ता के अंकों की गणना करने में घोर गलती की,...
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट कर्मचारियों के लिए लाभकारी कानून, यह अन्य कानूनों को ओवरराइड करता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में दोहराया कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 की व्याख्या कर्मचारियों के पक्ष में की जानी चाहिए और यह अन्य सभी वैधानिक कानूनों को ओवरराइड करता है।कोर्ट ने बीड डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य (2006) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें यह माना गया था "ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम एक लाभकारी कानून है। जब कानून के उद्देश्य के संबंध में दो विचार संभव हो तो कानून एक सामाजिक कल्याण कानून होने का प्रयास करता है,...
बॉम्बे हाईकोर्ट में नॉन वेज फूड के विज्ञापन पर बैन लगाने की मांग वाली जनहित याचिका दायर
नॉन वेज फूड के विज्ञापन पर बैन लगाने की मांग करते हुए तीन जैन धार्मिक धर्मार्थ ट्रस्टों ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में जनहित याचिका दायर की।याचिका में कहा गया है कि इस तरह का प्रचार शांति से रहने के अधिकार का पूरी तरह से उल्लंघन है।याचिका में कहा गया है,"जो नॉन वेज फूड खाना चाहते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन शाकाहारी लोगों के घरों में नॉन वेज फूड का विज्ञापन दिखाना उचित नहीं है और यह संवैधानिक और मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है।"इस मामले में याचिकाकर्ता आत्मा कमल...
दुख का विषय है कि सत्र न्यायालयों ने छोटे-मोटे मामलों में जमानत याचिकाओं को रूटीन तरीके से खारिज कर दिया: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में साधारण मामलो में सेशन कोर्ट द्वारा जमानत आवेदनों को न्यायिक विवेक का प्रयोग किए बिना और नियमित तरीके से जमानत आवेदन को खारिज करने के रवैये की आलोचना की। जस्टिस सुरेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह बहुत ही दुख का विषय है कि साधारण मामलों में जमानत आवेदनों में, सत्र अदालतें आरोपियों को जमानत देने से इनकार करती हैं, जिससे उन्हें राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ता है।न्यायालय 60 वर्षीय व्यक्ति रुद्र दत्त शर्मा द्वारा दायर अग्रिम जमानत आवेदन पर विचार कर रहा था,...
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ित और दुर्व्यवहार का शिकार होने वाली 28 वर्षीय महिला को 2.5 लाख रुपए का मुआवजा दिया
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को 28 वर्षीय महिला को 2,50,000/- रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था, जिसे अक्टूबर, 2021 में हिरासत में प्रताड़ित किया गया था।चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस एस जी चट्टोपाध्याय की पीठ प्रियाशी दत्ता (देबनाथ) को हिरासत में यातना के संबंध में समाचार रिपोर्ट पर हाईकोर्ट द्वारा लिए गएक स्वत: संज्ञान मामले से निपट रही थी।संक्षेप में मामलाअदालत के समक्ष राज्य-वकील ने तर्क दिया कि पुलिस लॉकअप में पीड़िता को हिरासत में प्रताड़ित करने का कोई सबूत नहीं...

















