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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- गवाहों के बयानों में मामूली विरोधाभास के आधार पर पूरे अभियोजन पक्ष को खारिज नहीं किया जा सकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने लगभग 30 वर्ष पुराने मारपीट के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अधीनस्थ अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को आंशिक रूप से पलट दिया। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने आरोपी मंगलाल को गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराया। हालांकि, घटना वर्ष 1996 की होने और लगभग तीन दशक बीत जाने को ध्यान में रखते हुए उसे कारावास की सजा देने के बजाय सदाचार परिवीक्षा का लाभ प्रदान किया। अदालत ने घायल को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।राज्य बनाम मंगलाल प्रकरण में राज्य...

सावरकर मानहानि केस: सत्यकी सावरकर ने 'निगरानी' का आरोप लगाया, राहुल गांधी के वकील के निजी ज़िंदगी के बारे में पूछने पर आपत्ति जताई
दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर के पोते (भाई के पोते) सत्यकी सावरकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में अपनी चल रही 'क्रॉस-एग्जामिनेशन' (जिरह) पर आपत्ति जताई और आशंका जताई कि उनका लगातार पीछा किया जा रहा है या उन पर नज़र रखी जा रही है।सत्यकी ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया। आरोप है कि गांधी ने यूनाइटेड किंगडम में एक भाषण के दौरान सावरकर की बदनामी की। उस भाषण में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि उन्होंने और...

दिल्ली कोर्ट ने 2018 के मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी को नया समन जारी किया
दिल्ली कोर्ट ने सोमवार (12 अक्टूबर) को 2018 के मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी को नया समन जारी किया।यह मामला विकास संस्कृतिायन की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया कि राठी ने एक वीडियो पोस्ट किया था जो मानहानि करने वाला था।शिकायतकर्ता का आरोप है कि जर्मनी में रहने वाले राठी ने 'बीजेपी आईटी सेल पार्ट II' नाम का एक वीडियो पब्लिश और सर्कुलेट किया, जिसमें शिकायतकर्ता पर कई झूठे आरोप लगाए गए।साकेत कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (साउथ ईस्ट) राहुल जैन ने राठी को नया समन जारी...

न्यायिक समीक्षा के सीमित आधार और 20 साल की देरी: हाईकोर्ट ने अंबेडकर नगर निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (जिसमें अलापुर निर्वाचन क्षेत्र को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित करना भी शामिल है) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।बेंच ने कहा कि याचिका न्यायिक हस्तक्षेप के लिए आधार स्थापित करने में विफल रही और इसे परिसीमन आदेश पारित होने के लगभग दो दशक बाद दायर किया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग द्वारा पारित आदेश की न्यायिक समीक्षा केवल दो सीमित...

अडानी मानहानि केस: पत्रकार रवि नायर की अतिरिक्त सबूत पेश करने की अर्ज़ी पर सुनवाई से हाईकोर्ट जज ने खुद को अलग किया
गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस.वी. पिंटो ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को पत्रकार रवि नायर की उस अर्ज़ी पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड द्वारा दायर मानहानि केस से जुड़े अतिरिक्त सबूत रिकॉर्ड पर लाने की उनकी अर्ज़ी को खारिज कर दिया था।अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड ने आपराधिक मानहानि का केस दायर करते हुए आरोप लगाया कि रवि नायर ने ऐसे कई ट्वीट प्रकाशित और प्रसारित किए जिनमें झूठे और मानहानि करने वाले बयान है, जिनका...

जनगणना 2027: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी के लिए प्राइवेट स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगने वाले आदेशों पर रोक लगाई
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों द्वारा जारी उन दो आदेशों पर रोक लगाई, जिनमें जनगणना 2027 की ड्यूटी के लिए प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगी गई। यह रोक सिर्फ़ प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (unaided) स्कूलों पर लागू होती है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक, 1 सितंबर 2026 और 7 सितंबर 2026 के आदेश "प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के मामले में...

बिहार पेंशन नियमों के तहत रिटायरमेंट के बाद 4 साल से पुरानी गड़बड़ी के लिए विभागीय कार्यवाही पर रोक: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की जाती है तो बिहार पेंशन नियमों का नियम 43(b) ऐसी कार्यवाही शुरू करने से रोकता है, अगर वह घटना कार्यवाही शुरू होने से चार साल से ज़्यादा पहले हुई हो।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच उमेश कुमार वर्मा की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही, बाद में उसे बिहार पेंशन नियमों के नियम 43(b) के तहत बदलने, जांच की कार्यवाही और उनकी पेंशन से 75% कटौती के आदेश को...

जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के प्रमुख उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया।इसी तरह की एक याचिका वकील स्वाति मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की।चिब ने यह अर्ज़ी अपनी उस लंबित याचिका के तहत दायर की, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के अनुरोध पर फिर से विचार करने की मांग की गई। इस याचिका में मांग की गई कि सुरक्षा, ट्रैफिक और...

SIR के खिलाफ वोटरों की शिकायतें सुनेगा मदन लोकुर आयोग, 15 अक्टूबर को दिल्ली में पहली जनसुनवाई
लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) द्वारा गठित पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाला स्वतंत्र आयोग 15 अक्टूबर को दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शिकायतों पर पहली सार्वजनिक सुनवाई करेगा।यह जनसुनवाई नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में सुबह 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित होगी। आयोग अब SIR से प्रभावित मतदाताओं की गवाही सुनेगा और उनके अनुभवों तथा शिकायतों को औपचारिक रूप से दर्ज करेगा।SIR की संवैधानिक वैधता और प्रक्रिया की होगी जांचआयोग का गठन...

'जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु में अनुमति क्यों नहीं?' RSS मार्च पर मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रूट मार्च निकालने की अनुमति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सवाल किया कि जब संगठन जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्रों में भी मार्च निकाल सकता है, तो तमिलनाडु पुलिस उसे हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों करती है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“अगर वे (RSS) जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु पुलिस उन्हें हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों...

जंतर-मंतर पर 'बिना इजाज़त घुसने' का आरोप: कोर्ट ने CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियातन गिरफ़्तार) किया था।CJP के एक और नेता अजिंक्य शिंदे को पर्सनल बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।जानकारी के लिए बता दें कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफ़ाई किए जाने के एक दिन बाद वहां घुसने की कोशिश करने के आरोप में दिल्ली...

दिल्ली हाईकोर्ट का अधिकारियों को निर्देश: उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे को उनके खिलाफ जारी LOC के बारे में जानकारी दें
दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी को चार हफ़्ते के अंदर बताएं कि क्या उनके खिलाफ जारी कोई 'लुक आउट सर्कुलर' (LOC) अभी भी लागू है या नहीं।जस्टिस विमल कुमार यादव ने अनमोल अंबानी की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। अंबानी ने यह याचिका अपने खिलाफ जारी किसी भी लागू LOC की जानकारी पाने के लिए दायर की थी।कोर्ट को ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन की ओर से पेश केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की ओर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को भोजपुरी एक्ट्रेस और मॉडल आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे की याचिका को रिकॉर्ड पर लिया। मधु दुबे ने मार्च 2023 में वाराणसी के एक होटल के कमरे में अपनी बेटी की मौत की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच कराने की मांग की थी।जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की बेंच ने कहा कि यह तर्क कि एक्ट्रेस की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी, गलतफहमी पर आधारित है।बेंच ने आगे कहा कि मृतक का शव न होने की स्थिति में घटना के तरीके या मौत के कारण की आगे जांच...

स्ट्रक्चरल ऑडिट के बिना सिर्फ़ 'देखकर की गई जांच' के आधार पर गिराने का आदेश नहीं दिया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट की धारा 348 और 349 के तहत किसी इमारत को खाली करने और गिराने का आदेश सिर्फ़ देखकर या वर्चुअल जांच के आधार पर नहीं दिया जा सकता। इसके लिए ज़रूरी तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों द्वारा स्ट्रक्चरल जांच जैसी संबंधित तकनीकी जानकारी का होना ज़रूरी है।(तत्कालीन) चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो MCD के आदेशों के खिलाफ़ दायर की गईं। MCD ने दो इमारतों में रहने वालों को जगह खाली...

अगर विधवा बहू अपना खर्च खुद नहीं उठा सकती तो ससुर का यह 'पवित्र कर्तव्य' है कि वह उसका खर्च उठाए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई विधवा बहू अपनी कमाई, संपत्ति या अपने दिवंगत पति की संपत्ति से अपना खर्च नहीं उठा सकती तो उसके ससुर का यह "पवित्र कर्तव्य" है कि वह उसका खर्च उठाए।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) के तहत कानूनी व्यवस्था विधवा बहू को भरण-पोषण पाने की हकदार मानती है, जिसमें रहने की जगह और आश्रय भी शामिल है।कोर्ट एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें एक दिवंगत व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों ने एक आदेश के खिलाफ अपील की थी। इस...

'अवध बार को लोकतांत्रिक व्यवहार में मिसाल कायम करनी चाहिए': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बार चुनाव की अपील की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से हों। कोर्ट ने कहा कि बार को समाज के लिए लोकतांत्रिक व्यवहार की मिसाल कायम करनी चाहिए।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि चुनावों में ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के उच्चतम मानक दिखने चाहिए।बेंच ने कहा,"कानूनी बिरादरी से उम्मीद की जाती है कि वे समाज के लिए मार्गदर्शक बनें और दूसरों के लिए मिसाल कायम...

कपड़े-बर्तन धुलवाने पर बहू ने ससुराल वालों पर किया केस, हाईकोर्ट ने कहा- IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ FIR रद्द करते हुए कहा कि ससुराल वालों का बहू से कपड़े और बर्तन धोने जैसे घर के काम करवाना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A के तहत क्रूरता नहीं माना जाएगा और इस आरोप पर उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।कोल्हापुर बेंच में बैठे जस्टिस अभय मंत्री ने शिकायतकर्ता महिला के उस आरोप पर गौर किया, जिसमें कहा गया कि उसका पति उसे कल्याण-बदलापुर में अपनी एक बहन (शिकायतकर्ता की ननद) के घर ले गया था, जहाँ उससे घर के काम करने के लिए कहा गया। जज को इन आरोपों...

पूर्व सीएम माणिक सरकार के खिलाफ भड़काऊ भाषण का मामला: हाईकोर्ट नेFIR रद्द करने से किया इनकार
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ राजनीतिक भाषण देने के मामले में दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की और जांच की ज़रूरत है।कोर्ट ने कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच ज़रूरी है कि क्या कथित बयानों से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 192, 353(1)(b) और 61(1) के तहत अपराध बनते हैं या नहीं।जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ और जस्टिस बिस्वजीत पालित की डिवीज़न बेंच ने कहा:"पूरी चर्चा और माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को ध्यान...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने SC-ST आरक्षण बढ़ाने वाला कानून रद्द किया, कहा- 50% की सीमा का उल्लंघन असंवैधानिक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए शिक्षा संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरियों में आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। कानून के तहत एससी आरक्षण 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और एसटी आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया गया था। इससे राज्य में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया था।चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने कहा कि कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बाध्यकारी...

हाईकोर्ट्स में बढ़ रहा है भगवाकरण, खास विचारधारा से जुड़े लोगों के नाम जज के तौर पर आसानी से मंजूर हो जाते हैं: जस्टिस के. चंद्रू
मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस के. चंद्रू ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया और कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में भगवाकरण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अलिखित व्यवस्था बन गई है, जिसके तहत एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों के नामों को मंजूरी मिल जाती है, जबकि अन्य लोगों के नामों की सूची अटकती रहती है।एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म की ओर से आयोजित 'हू विल जज द जजेज' विषय पर संगोष्ठी में बोलते हुए जस्टिस चंद्रू ने जजों की नियुक्ति के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं बनाए जाने...
