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दिशा सालियान मौत मामला: हत्या की FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका से जस्टिस आशीष चव्हाण अलग हुए
दिशा सालियान मौत मामला: 'हत्या' की FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका से जस्टिस आशीष चव्हाण अलग हुए

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस आशीष चव्हाण ने बुधवार को दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।सतीश सालियान ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी बेटी दिशा सालियान ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उसकी हत्या की गई। उन्होंने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की।हालांकि जस्टिस आशीष चव्हाण ने मामले की सुनवाई से अलग होने का फैसला किया। अदालत ने इस चरण पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं...

राजस्थान सरकार ने UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाया पैनल, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगे अध्यक्षता
राजस्थान सरकार ने UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाया पैनल, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगे अध्यक्षता

राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' (RUCC) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) इस कमेटी के मेंबर-सेक्रेटरी होंगे।इसकी घोषणा संसदीय कार्य, कानून और कानूनी मामलों, कानूनी सलाह और न्याय विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढम ने 22 जून, 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।5 सदस्यों वाली इस कमेटी में अन्य सदस्यों...

जो माँ अपने पति के प्रति पवित्र कर्तव्यों को पूरा नहीं करती, उसके साथ बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं: पुणे कोर्ट
जो माँ अपने पति के प्रति 'पवित्र कर्तव्यों' को पूरा नहीं करती, उसके साथ बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं: पुणे कोर्ट

पुणे फैमिली कोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक महिला से उम्मीद की जाती है कि वह शादी की कसमें निभाए, अपने पति का शारीरिक और भावनात्मक रूप से ख्याल रखे, उसके लिए प्रार्थना करे और उसकी भलाई चाहे। अगर वह पति के प्रति इन 'पवित्र' कर्तव्यों को पूरा नहीं करती है, तो बच्चे का भविष्य उसके साथ 'सुरक्षित' नहीं है।फैमिली कोर्ट के इंचार्ज जज गणेश घुले ने 16 मई को एक आदेश जारी कर एक नाबालिग लड़के की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी। उन्होंने माँ के खिलाफ कुछ बातें कहीं, खासकर यह कि वह अपने पति के प्रति अपने 'पवित्र'...

जज का काम किसी को खुश करना नहीं, बल्कि न्याय करने में ही असली संतुष्टि: जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को कहा अलविदा
जज का काम किसी को खुश करना नहीं, बल्कि न्याय करने में ही असली संतुष्टि: जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को कहा अलविदा

बॉम्बे हाईकोर्ट से विदा लेते हुए जज जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने मंगलवार (23 जून) को कहा कि अपने काम से संतुष्टि पाने के लिए एक जज को अपनी पूरी क्षमता से काम करना चाहिए, न कि किसी को खुश करने या संतुष्ट करने की कोशिश करनी चाहिए।जस्टिस कंकनवाड़ी को 9 साल पहले हाईकोर्ट में प्रमोट किया गया था। वह कुल 34 साल तक जज रहने के बाद रिटायर हुईं।हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला जज रहीं जस्टिस कंकनवाड़ी ने अपने विदाई भाषण में कहा कि न्याय करना, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना और...

पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की। इसमें पश्चिम बंगाल सरकार के उस मेमोरेंडम को चुनौती दी गई, जिसमें 2011 से राज्य में जारी सभी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्रों का बड़े पैमाने पर दोबारा वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया।याचिका में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा 14 मई, 2026 को जारी मेमोरेंडम पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि इससे लगभग 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्र...

पैसेंजर ट्रेन में बम धमाका रेलवे एक्ट के तहत हादसा, रेलवे मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदाक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पैसेंजर ट्रेन में बम धमाका रेलवे एक्ट के तहत 'हादसा', रेलवे मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदाक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पैसेंजर ट्रेन में बम धमाके के पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए भारत सरकार (यूनियन ऑफ़ इंडिया) की ज़िम्मेदारी बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटना रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 124 के तहत "हादसे" की परिभाषा में आती है। [2026 LiveLaw (PH) 204]जस्टिस पंकज जैन ने कहा,"एक बार यह तय हो जाने के बाद कि ट्रेन में आग या धमाका 'हादसे' की परिभाषा में आता है तो भारत सरकार ट्रेन/रेलवे स्टेशन पर बम धमाके से हुई मौत के लिए मुआवज़ा देने की अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती।" कोर्ट ने भारत...

एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट
एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला को उस राज्य में आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उसकी शादी हुई है, बशर्ते वह उस राज्य के सक्षम अधिकारी से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे और उसे प्राप्त करे। [2026 LiveLaw (MP) 223]जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि महिला को उसके मूल राज्य द्वारा मूल रूप से जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किसी अन्य राज्य में आरक्षण पाने के लिए नहीं किया जा सकता है।बेंच ने कहा:"यदि किसी लड़की की जाति को दोनों राज्यों में आरक्षण का लाभ पाने के लिए अधिसूचित किया...

हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की मांग: तेलंगाना मूल के वकीलों को ही बनाया जाए जज
हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की मांग: तेलंगाना मूल के वकीलों को ही बनाया जाए जज

तेलंगाना हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने बुधवार (17 जून) को एक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें राज्य के मूल वकीलों के नामों पर जज के तौर पर नियुक्ति के लिए विचार करने की मांग की गई।एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. सुरेंद्र रेड्डी, उपाध्यक्ष डी.एल. पांडु, सचिव पी. श्रवण कुमार गौड़, संयुक्त सचिव पी. कृष्णा कीर्तना और बार के वरिष्ठ सदस्यों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।यह विरोध प्रदर्शन एक विशेष आम सभा में पारित प्रस्ताव के तहत आयोजित किया गया। इस प्रस्ताव में तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और कॉलेजियम...

केंद्र सरकार के पास पूरा प्लेटफॉर्म बंद करने का अधिकार, केवल सामग्री हटाने तक सीमित नहीं धारा 69ए: दिल्ली हाईकोर्ट
केंद्र सरकार के पास पूरा प्लेटफॉर्म बंद करने का अधिकार, केवल सामग्री हटाने तक सीमित नहीं धारा 69ए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग मंच टेलीग्राम की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69ए के तहत केंद्र सरकार के पास केवल किसी विशेष सामग्री को हटाने ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पूरे मध्यस्थ मंच को अस्थायी रूप से अवरुद्ध करने की भी शक्ति है।जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अधिनियम में "सूचना" की परिभाषा बहुत व्यापक है, जिसमें कोड, कंप्यूटर प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं। इसलिए किसी अनुप्रयोग या डिजिटल मंच को इस परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा...

काला हिरण फिल्म पर रोक की मांग: सलमान खान की याचिका पर 1 जुलाई को सुनवाई, फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं
काला हिरण फिल्म पर रोक की मांग: सलमान खान की याचिका पर 1 जुलाई को सुनवाई, फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर सलमान खान की उस याचिका पर सुनवाई 1 जुलाई तक के लिए स्थगित की, जिसमें उन्होंने अपनी कथित जीवन घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की। फिलहाल अदालत ने कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया।अवकाशकालीन पीठ की जस्टिस मधु जैन ने निर्देश दिया कि याचिका और उससे संबंधित सभी दस्तावेजों की पूर्ण प्रति फिल्म निर्माता पक्ष को उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद मामले को 1 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।सुनवाई के दौरान एक्टर...

CID द्वारा पूछताछ की अनुमति मांगे जाने पर वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने जताई आपत्ति, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को लिखा पत्र
CID द्वारा पूछताछ की अनुमति मांगे जाने पर वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने जताई आपत्ति, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को लिखा पत्र

सीनियर एडवोकेट और तृणमूल कांग्रेस सांसद Kalyan Bandopadhyay ने कलकत्ता हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल सीआईडी के एक अधिकारी ने उनसे एक आपराधिक मामले में पूछताछ करने की अनुमति मांगी, जबकि वह उसी मामले से संबंधित कार्यवाही में अधिवक्ता के रूप में पेश हो रहे हैं।अपने पत्र में बंद्योपाध्याय ने बार एसोसिएशन से अधिवक्ताओं की "गरिमा, सम्मान और विशेषाधिकार" की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है।पत्र के अनुसार, Sovandeb Chatterjee v. Speaker, West...

पगड़ी देने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती, मकान-मालिक अब भी बेदखली की मांग कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
'पगड़ी' देने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती, मकान-मालिक अब भी बेदखली की मांग कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदार द्वारा 'पगड़ी' (लंबे समय तक किरायेदारी के अधिकार पाने के लिए एक बार में दी जाने वाली रकम) का भुगतान करने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती और इससे मकान-मालिक और किरायेदार के बीच के बुनियादी रिश्ते में कोई बदलाव नहीं आता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा एक दुकान से जुड़े विवाद की सुनवाई कर रही थीं, जिसे 1 जनवरी, 2001 के किराये के समझौते के तहत अपीलकर्ता को किराये पर दिया गया।अपीलकर्ता का दावा था कि किराये के समझौते के अलावा, दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन...

एम्बेसडर होटल ने पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
एम्बेसडर होटल ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

एम्बेसडर होटल के मालिक ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। यह नोटिस दशकों पुराने मामले में अपीलीय अदालत के उस फैसले के तुरंत बाद जारी किया गया, जिसमें केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया गया। अदालत ने माना कि मालिक ने संबंधित प्रॉपर्टी पर पब्लिक होटल बनाकर और चलाकर सरकारी ग्रांट (अनुदान) की शर्तों का उल्लंघन किया।होटल के मालिक 'सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड' ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर तीस हजारी कोर्ट (सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट) के...

वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप: हाईकोर्ट ने CBI केस में हरियाणा पावर कंपनी के पूर्व फाइनेंस डायरेक्टर को दी ज़मानत
वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप: हाईकोर्ट ने CBI केस में हरियाणा पावर कंपनी के पूर्व फाइनेंस डायरेक्टर को दी ज़मानत

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के पूर्व डायरेक्टर (फाइनेंस) अमित दीवान को ज़मानत दी। यह मामला CBI के दो केस से जुड़ा है, जिनमें सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) से जुड़ी बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। [2026 LiveLaw (PH) 198]कोर्ट ने दो जुड़ी हुई याचिकाओं को मंज़ूरी देते हुए कहा कि आरोपी को कथित धोखाधड़ी से निजी फ़ायदा होने से जोड़ने वाले ठोस सबूतों के अभाव में ट्रायल से पहले लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस...

अगर सहमति हुई हो तो वकील क्लाइंट के लिए मिले मुआवज़े से अपनी बकाया प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
अगर सहमति हुई हो तो वकील क्लाइंट के लिए मिले मुआवज़े से अपनी बकाया प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर क्लाइंट और वकील के बीच यह सहमति हुई कि केस में मिले मुआवज़े की रक़म से प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट की जाएगी तो वकील ऐसा एडजस्टमेंट करने का हक़दार होगा, बशर्ते क्लाइंट तय फ़ीस का भुगतान साबित न कर पाए।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने वकील के ₹36,000 की प्रोफेशनल फ़ीस की वसूली के काउंटरक्लेम को मंज़ूरी देने वाला फ़ैसला बरकरार रखा और क्लाइंट की दूसरी अपील खारिज की।बेंच ने कहा,"सबूतों से पता चलता है कि वादी (क्लाइंट) को वकील को फ़ीस देनी थी, जिसका भुगतान उसने कभी नहीं किया। उनके...