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सार्वजनिक अनुबंध में अधिक धन की संभावना अनुबंध को समाप्त करने के लिए एकमात्र मानदंड नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली ने हाईकोर्ट ने हरियाणा में दो टोल प्लाजा पर चल रहे अनुबंधों के निर्वाह के दौरान उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रह के लिए नए सिरे से बोली आमंत्रित करने के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि केवल अधिक धन की संभावना सार्वजनिक अनुबंध में अनुबंधों को समाप्त करने का एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता। विशेष रूप से जो अनुबंध निश्चित अवधि के लिए होते हैं।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि...
एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का 'पर्याप्त' अनुपालन किया गया है या नहीं, यह जमानत में नहीं बल्कि ट्रायल में तय किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत के चरण में केवल यह देखा जाना चाहिए कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के प्रावधानों का प्रथम दृष्टया अनुपालन किया गया है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह ठीक-ठीक पता नहीं लगाया जा सकता है कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का अनुपालन किया गया है या नहीं क्योंकि ऐसा केवल परीक्षण के दरमियान ही किया जा सकता है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने इस आधार पर एनडीपीएस अभियुक्त की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि तलाशी और बरामदगी के समय एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं...
'प्रशासनिक पक्ष पर ध्यान आकर्षित करने वाला मामला': यूपी की अदालतों में कागज के तर्कसंगत उपयोग की मांग वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश में सभी न्यायालयों/न्यायिक मंचों में न्यायिक फाइलिंग में कागज के तर्कसंगत उपयोग के मुद्दे ने कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ अदालतों में डबल-प्रिंटेड ए4 पेपर के इस्तेमाल का आग्रह किया गया था।न्यायालय ने, हालांकि, इस संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने के लिए याचिकाकर्ताओं का स्वागत किया है। उल्लेखनीय है कि जनहित याचिका 2020...
एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायतकर्ता को विशेष रूप से यह दावा करना चाहिए कि मुख्तारनामा धारक को विवादित लेनदेन की जानकारी है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर (मुख्तारनामा धारक) के जरिए निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दायर की गई शिकायत पूरी तरह से कानूनी और सक्षम है।हालांकि, मुख्तारनामा धारक किसी शिकायत की सामग्री को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष शपथ पर गवाही दे सकता है और सत्यापित कर सकता है, जब उसने भुगतानकर्ता/धारक के एजेंट के रूप में लेन-देन को देखा हो या लेनदेन के बारे में उचित ज्ञान हो।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता को शिकायत में स्पष्ट रूप से बताना...
सार्वजनिक आवंटन प्रक्रिया में विचार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि पर आवश्यक योग्यता होनी चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दोहराया
गुवाहाटी हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने हाल ही में उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि सार्वजनिक आवंटन प्रक्रिया (Public Allotment Process) में विचार के लिए आवश्यक योग्यता रखने की तिथि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है और उसके बाद नहीं।अदालत ने देखा,"माननीय सुप्रीम कोर्ट ने रेखा चतुर्वेदी बनाम राजस्थान यूनिवर्सिटी, 1993 के मामले में (3) SCC 168 निर्धारित किया है कि जहां तक पात्रता का संबंध है, उसी तिथि को प्राप्त/धारण किया जाना चाहिए। विज्ञापन और बाद की तारीख में इसे रखने से कोई...
भारत में कानून दो अलग-अलग रेस्तरां की सजावट में समानता के आधार पर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में निषेधाज्ञा प्रदान करने की अनुमति नहीं देता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि भारत में कानून केवल दो अलग-अलग रेस्तरां की सजावट में समानता के आधार पर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में निषेधाज्ञा प्रदान करने की अनुमति नहीं देता।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि सजावट, परिसर के लेआउट, मेनू कार्ड या ऐसे रेस्तरां के कर्मचारियों की वर्दी के संबंध में भारतीय कानून में विशिष्टता का कोई दावा उपलब्ध नहीं है।अदालत ने कहा,"इस देश में कानून केवल इस आधार पर निषेधाज्ञा देने की अनुमति नहीं देता है कि दो अलग-अलग संस्थाओं के रेस्तरां की सजावट, लेआउट या समान दिखने...
Subway शब्द 'Sub', 'SUBERB' पर विशिष्टता का दावा नहीं कर सकता, जो फोनेटिक रूप से 'Subway' के समान नहीं है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए की गई प्रार्थना खारिज करते हुए कहा कि Subway 'SUB' शब्द पर किसी भी विशिष्टता का दावा नहीं कर सकता, खासकर जब सबमरीन सैंडविच परोसने वाले भोजनालयों के संदर्भ में उपयोग किया जाता।जस्टिस सी हरि शंकर ने फैसला सुनाया कि सबमरीन सैंडविच से निपटने वाले रेस्टोरेंट के संदर्भ में "SUB" शब्द "पब्लिसिटी ज्यूरिस" है।अदालत ने कहा,"इसलिए कोई विशिष्टता याचिकाकर्ता द्वारा अपने रजिस्टर्ड Subway ट्रेडमार्क के पहले भाग यानी "SUB" पर दावा नहीं किया जा सकता। वादी सभी...
लोकपाल के रूप में पुनर्नियुक्त रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की पेंशन सैलरी से नहीं काटी जा सकती: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में विचार किया कि क्या हाईकोर्ट के एक जज, जिसे सेवानिवृत्ति के बाद लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया है, की पेंशन उसके वेतन से काटी जा सकती है। कोर्ट ने सवाल का नकारात्मक उत्तर दिया।जस्टिस अनु शिवरामन ने इस संबंध में कहा,"पंचायत राज अधिनियम के प्रावधान और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के लिए लोकपाल (शिकायतों और सेवा शर्तों की पूछताछ) नियम, 1999 के नियम काफी स्पष्ट हैं क्योंकि प्रावधान में विशेष रूप से कहा गया है कि लोकपाल के रूप में नियुक्त व्यक्ति हाईकोर्ट के जज के बराबर...
तकनीकी आधार पर मातृत्व लाभ से इनकार नहीं करना चाहिए, महिला को मातृत्व और रोजगार के बीच पेंडुलम की तरह झूलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक अस्थायी कर्मचारी को मातृत्व लाभ का भुगतान करने के लिए संगठन को निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम जैसे कल्याणकारी कानून को केवल तकनीकी आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।पीठ ने कहा,“केवल व्याख्या और तकनीकी के आधार पर कल्याणकारी कानून और लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि कानून की व्याख्या प्रवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उदार होनी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठे तथ्य पेश करने, भौतिक तथ्य छुपाकर याचिका दायर करने वाले व्यक्ति पर एक लाख रूपए का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसे व्यक्ति पर एक लाख रूपए का जुर्माना लगाया, जिसने झूठे तथ्य पेश किए हुए और मामले के भौतिक तथ्यों को छिपाते हुए रिट याचिका दायर की।जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता (आसिफ खालिक) को दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के पास जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ता ने अपनी फर्म मैसर्स अम्ब्रेला कॉर्पोरेशन से संबंधित फैक्ट्री मशीनों को अपने कब्जे में लेने के लिए अदालत का रुख किया, जिसे प्रतिवादी नंबर दो द्वारा...
सुनिश्चित करें कि कैदी अपनी भाषा में KIOSK का उपयोग कर सकें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य को जेलों के अंदर KIOSK लगाने का निर्देश दिया, जिससे कैदियों को अपने मामलों की स्थिति जानने में मदद मिलेगी। अदालत ने कहा कि भले ही अदालत के पहले के निर्देश के अनुसार केंद्रीय कारागार पुझाल में इस तरह के KIOSK लगाए गए, लेकिन केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा ही उपलब्ध है, जिसे समझने में कैदियों को कठिनाई होती है।जस्टिस सुंदर मोहन ने इस प्रकार अधिकारियों को अंग्रेजी और तमिल में भाषाओं को बदलने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से संपर्क करने का निर्देश दिया ताकि...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में समानता के आधार पर अभियुक्त को जमानत दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को यह देखते हुए जमानत दे दी कि उसके और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन उसके खिलाफ कथित प्रत्यक्ष कार्य अन्य अभियुक्तों के समान है, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।कोर्ट ने कहा,"जांच अधिकारी द्वारा दायर चार्जशीट में याचिकाकर्ता सहित सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। माना जाता है कि वर्तमान याचिकाकर्ता के खिलाफ कथित ओवरट एक्ट आरोपी नंबर 2 और 3 के समान है। यह विवाद में नहीं है। आरोपी नंबर 2 और 3 पहले से ही जमानत पर छूटे हुए...
कानून का गलत प्रयोग विकृति की ओर नहीं ले जा रहा; मध्यस्थता के फैसले को रद्द नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि केवल इसलिए कि मध्यस्थ ने डॉट इन डोमेन नेम डिस्प्यूट रिजोल्यूशन पॉलिसी (.INDRP) को गलत तरीके से लागू किया था, उक्त पॉलिसी के तहत डोमेन नामों पर विवाद का निर्णय करते समय विकृति के अभाव में फैसले को रद्द नहीं किया जा सकता है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह की पीठ ने कहा कि मध्यस्थ ने निर्णय में वाक्यांश, पार्टी अपने दावे को "संदेह से परे" साबित करने में विफल रही, का प्रयोग किया है, इसे कानूनी वाक्य 'उचित संदेह से परे' के बराबर नहीं माना जा सकता, जैसा कि में क्रिमिनल...
मद्रास हाईकोर्ट ने आरोपों से बरी करने के बाद 8 महीने के लिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मुआवजा देने का निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य को ऐसे व्यक्ति को अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसे अवैध रूप से 8 महीने से अधिक समय तक जेल में बंद रखा गया, जबकि अदालत ने उसे हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था।जस्टिस सुंदर मोहन ने कहा कि चूंकि उस व्यक्ति को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं था, इसलिए उसने अपील को प्राथमिकता नहीं दी। इस तरह उसे अपने बरी होने की जानकारी नहीं थी। इस प्रकार, न्यायालय के लिए ऐसे व्यक्तियों की सहायता के लिए आना आवश्यक है।इस अदालत ने आगे पाया कि याचिकाकर्ता के बेटे को अपने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस चंद्रचूड़ की सीजेआई के रूप में नियुक्ति के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में नियुक्ति के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज की।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि याचिका पुनर्विचार के रूप में प्रच्छन्न अपील है और यह पुनर्विचार के दायरे में नहीं आती है।पीठ ने कहा,"याचिकाकर्ता रिकॉर्ड के सामने स्पष्ट रूप से कोई त्रुटि दिखाने में सक्षम नहीं है। 30 नवंबर, 2022 को पारित किए गए आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। याचिका खारिज की जाती है।”याचिकाकर्ता...
शिवसेना में विभाजन | चुनाव आयोग एकनाथ शिंदे की याचिका के सुनवाई योग्य होने के मुद्दे पर फैसला करेगा
भारत के चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के नाम "शिवसेना" और प्रतीक "धनुष और तीर" को लेकर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच शिवसेना पार्टी के भीतर विभाजन से उत्पन्न मुद्दे को चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) के पैराग्राफ 15 के तहत आदेश, 1968 दिनांक 10 जनवरी, 2023 को सुनवाई हुई।उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और ईसीआई के अध्यक्ष को अवगत कराया कि उन्होंने शिंदे गुट द्वारा दायर याचिका की सुनवाई योग्यता के मुद्दे पर प्रारंभिक मुद्दे के रूप में विचार करने के लिए आवेदन दायर किया।...
हाईकोर्ट ने सड़कों पर जनसभाएं आयोजित करने पर रोक लगाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले पर रोक लगाई
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में सार्वजनिक सड़कों पर जनसभाओं के आयोजन पर रोक लगाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले पर रोक लगाई।जस्टिस बट्टू देवानंद और जस्टिस डॉ वी आर के कृपा सागर की खंडपीठ ने कहा,"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और संबंधित वकीलों द्वारा प्रस्तुत किए गए सबमिशन पर सावधानीपूर्वक विचार करने के साथ-साथ कोर्ट के समक्ष संबंधित वकीलों द्वारा रखे गए केस कानून के अवलोकन पर, इस कोर्ट की प्रथम दृष्टया राय में, आक्षेपित G.O. Rt नंबर 1...
दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया से पीएचडी दाखिले में नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा, साक्षात्कार के अंक देने के बाद बाद 'विचार-विमर्श की प्रक्रिया' पर सवाल उठाया
पीएचडी कार्यक्रम में साक्षात्कार के नतीजों की घोषणा के बाद "गुणात्मक मूल्यांकन" करने की एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि उसे "उम्मीद और अपेक्षा" है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया शैक्षणिक अध्यादेश और विनियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सख्ती से प्रवेश प्रक्रिया का आयोजन करेगा।सेंटर में आयोजित पीएचडी प्रवेश कार्यक्रम में विफल रहे एक उम्मीदवार को राहत देने से इनकार करते हुए जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि साक्षात्कार के अंक प्रदान...
पेंशन प्राप्त करने की पात्रता से छह महीने पहले निर्माण श्रमिकों के आवेदन स्वीकार करने पर विचार करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह पेंशन प्राप्त करने की पात्रता पाने से छह महीने पहले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के आवेदन स्वीकार करने पर विचार करे।जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि चूंकि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट 1996 और रूल्स उस समय अवधि के बारे में मौन हैं, जिस दरमियान श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पेंशन स्वीकृत की जानी चाहिए। यदि उन्हें पेंशन प्राप्त करने के लिए पात्र होने से छह महीने पहले आवेदन जमा...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (09 जनवरी, 2023 से 13 जनवरी, 2023) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।केरल सेवा नियम | कर्मचारी को सीमित अवधि के लिए नियुक्त किए जाने पर पेंशन का कोई दावा नहीं: केरल हाईकोर्ट केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब एक कर्मचारी को सीमित अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है तब केरल सेवा नियमों के नियम 4 और नियम 14ई (ए) के अनुसार पेंशन के लिए कोई दावा स्वीकार्य नहीं होगा। कोर्ट...

















