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धारा 295-ए आईपीसी | हुकमनामा की कानूनी वैधता की जांच करेगा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, आरोपी को अंतरिम अग्रिम जमानत
धारा 295-ए आईपीसी | हुकमनामा की कानूनी वैधता की जांच करेगा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, आरोपी को अंतरिम अग्रिम जमानत

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि वह 'हुकमनामा' की कानूनी वैधता और कानून के किसी भी अन्य प्रावधानों की जांच करेगा, जो किसी व्यक्ति को अनुयायी के रूप में सिख धर्म का प्रचार करने से रोकते हैं।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"हुकमनामा की कानूनी पवित्रता और कानून के किसी भी अन्य प्रावधान के संबंध में सवाल, जो किसी भी व्यक्ति को एक अनुयायी के रूप में सिख धर्म का प्रचार करने से रोकता है, किसी भी तरह से उस विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या अपमान करना होगा, इसकी जांच की आवश्यकता है।" उक्त...

मरने से पहले दिया गया बयान दोषसिद्धि का एकमात्र आधार तभी हो सकता है जब यह सुसंगत होः कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को राहत दी
मरने से पहले दिया गया बयान दोषसिद्धि का एकमात्र आधार तभी हो सकता है जब यह सुसंगत होः कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को राहत दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक हत्या के दोषी की दोषसिद्धि को इस आधार पर खारिज कर दिया कि मरने से पहले दिया गया बयान संदिग्ध था।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहाः ‘‘मृत्युपूर्व बयान दोषसिद्धि का एकमात्र आधार हो सकता है, बशर्ते कि यह सुसंगत हो। जब अभियोजन पक्ष के गवाहों के अनुसार मरने से पहले दिए गए बयान की सामग्री अपीलकर्ता की भूमिका की तुलना में एक दूसरे से भिन्न हो, तो उसके खिलाफ अपराध का पता लगाने के लिए ऐसे सबूतों पर भरोसा करना खतरनाक होगा।’’ निचली अदालत...

सीपीसी | जम्मू-कश्मीर में लिखित बयान दाखिल करने के लिए 120 दिन की अवधि अनिवार्य, कोर्ट के पास इसे बढ़ाने का अधिकार नहीं: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
सीपीसी | जम्मू-कश्मीर में लिखित बयान दाखिल करने के लिए 120 दिन की अवधि अनिवार्य, कोर्ट के पास इसे बढ़ाने का अधिकार नहीं: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908, जहां तक ​​जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में इसकी प्रयोज्यता है, प्रतिवादी को लिखित बयान दर्ज करने के लिए अधिकतम 120 दिनों की अवधि प्रदान करता है, जिसमें विफल रहने पर प्रतिवादी लिखित बयान दर्ज करने का अधिकार खो देता है। उसके बाद कोर्ट लिखित बयान को किसी भी प्रकार से रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति नहीं देगी।बेंच ने कहा कि यह अवधि नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 में एक संशोधन के मद्देनजर अनिवार्य प्रकृति...

हैदराबाद गैंगरेप: तेलंगाना हाईकोर्ट ने किशोर के खिलाफ बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने के मजिस्ट्रेट के फैसले को रद्द किया, कहा- पूरा आकलन एक दिन में किया गया
हैदराबाद गैंगरेप: तेलंगाना हाईकोर्ट ने किशोर के खिलाफ बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने के मजिस्ट्रेट के फैसले को रद्द किया, कहा- पूरा आकलन एक दिन में किया गया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने जुबली हिल्स गैंगरेप मामले में एक किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दियाउल्लेखनीय है कि जून, 2022 में हैदराबाद स्थित जुबली हिल्स इलाके में एक कार में 17 साल की नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के आरोप में पांच नाबालिगों और एक वयस्क आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कथित तौर पर एक कार में पीड़िता का अपहरण किया था।जस्टिस जी अनुपमा चक्रवर्ती ने कहा,"यह स्पष्ट है कि एक दिन के भीतर पूरा मूल्यांकन किया गया। विद्वान मजिस्ट्रेट बोर्ड के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखेबाज़ वेबसाइट, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को उचित लाइसेंस के बिना जवान फिल्म की क्लिप स्ट्रीमिंग करने से रोका
दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखेबाज़ वेबसाइट, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को उचित लाइसेंस के बिना 'जवान' फिल्म की क्लिप स्ट्रीमिंग करने से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने विभिन्न धोखेबाज़ वेबसाइटों और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को आगामी फिल्म जवान से संबंधित किसी भी स्टिल या क्लिप को बिना उचित लाइसेंस के कॉपी, स्ट्रीमिंग या प्रदर्शित करने से रोक दिया है।बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान अभिनीत यह फिल्म 02 जून को रिलीज होने वाली है।जस्टिस सी हरि शंकर ने धोखेबाज़ वेबसाइटों और अन्य प्रतिवादी प्लेटफार्मों के खिलाफ दायर अपने मुकदमे में रेड चिलीज एंटरटेनमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें उन्हें फिल्म में कॉपीराइट के संबंध में...

परोपकारी सरोगेसी का अर्थ बाहरी व्यक्ति के माध्यम से सरोगेसी होना चाहिए, अधिनियम में आनुवांशिक रूप से संबंधित खंड परोपकार और तर्क, दोनों के खिलाफ: कर्नाटक हाईकोर्ट
परोपकारी सरोगेसी का अर्थ बाहरी व्यक्ति के माध्यम से सरोगेसी होना चाहिए, अधिनियम में 'आनुवांशिक रूप से संबंधित' खंड परोपकार और तर्क, दोनों के खिलाफ: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कि सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्‍ट, 2021 का यह प्रावधान कि एक सरोगेट मां को इच्छुक जोड़े से "आनुवांशिक रूप से संबंधित" होना अनिवार्य है, परोपकार और तर्क दोनों के खिलाफ है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,"धारा 2(1)(जेडजी) में आया शब्द "आनुवांशिक रूप से संबंधित" का आशय केवल यह हो सकता है कि सरोगेसी के जर‌िए पैदा होने वाला बच्चा आनुवंशिक रूप से इच्छुक जोड़े से संबंधित होना चाहिए। ऐसा ना होने पर, आनुवंशिक रूप से संबंधित शब्दों का कोई अर्थ नहीं होगा...।"इस प्रकार, पीठ ने...

हाईकोर्ट ने पीएम मोदी पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर कांग्रेस के छात्र नेता को परीक्षा देने से रोकने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को रद्द किया
हाईकोर्ट ने पीएम मोदी पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर कांग्रेस के छात्र नेता को परीक्षा देने से रोकने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग में कथित संलिप्तता को लेकर पीएचडी छात्र और एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव लोकेश चुघ को एक साल के लिए परीक्षा देने से रोकने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को रद्द कर दिया।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने "प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन" के फैसले को रद्द कर दिया और विश्वविद्यालय में चुघ का प्रवेश बहाल कर दिया।अदालत ने कहा,“अदालत 10 मार्च, 2023 के विवादित आदेश को बनाए रखने में असमर्थ है। विवादित आदेश को रद्द किया जाता...

रामनवमी हिंसा- कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को ट्रांसफर की
रामनवमी हिंसा- कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को ट्रांसफर की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पिछले महीने राज्य में रामनवमी समारोह के दौरान हुई हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंप दी है।एक्टिंग चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की बेंच ने राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर प्राथमिकी, मामले के कागजात, जब्त सामग्री, सीसीटीवी फुटेज आदि एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा,"हमें विश्वास है कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत एसिड की बोतलें और पेट्रोल बम आदि का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस को...

गुजरात हाईकोर्ट ने अनिवार्य इंटर्नशिप के बिना स्थायी पंजीकरण की मांग करने वाली फिलीपींस -वापसी मेडिकल ग्रेजुएट की याचिका पर नोटिस जारी किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अनिवार्य इंटर्नशिप के बिना स्थायी पंजीकरण की मांग करने वाली फिलीपींस -वापसी मेडिकल ग्रेजुएट की याचिका पर नोटिस जारी किया

गुजरात हाईकोर्ट ने फिलीपींस में चिकित्सा का अध्ययन करने वाले कुल 46 भारतीयों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) विनियम, 2021 के तहत 12 महीने की इंटर्नशिप के बिना स्थायी पंजीकरण के लिए गुजरात मेडिकल काउंसिल को निर्देश जारी करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।जस्टिस वैभवी डी नानावती की सिंगल जज बेंच ने राज्य सरकार, नेशनल मेडिकल काउंसिल और गुजरात मेडिकल काउंसिल को 26 अप्रैल के लिए नोटिस जारी किया।अदालत ने कहा,"पूर्वोक्त प्रस्तुतियां पर...

दिल्ली हाईकोर्ट के आईपी डिवीजन ने एफिशिएन्सी बढ़ाई, एक साल में 2000 आईपीएबी मामलों में से 600 का निस्तारण किया : जस्टिस प्रतिभा एम सिंह
दिल्ली हाईकोर्ट के आईपी डिवीजन ने एफिशिएन्सी बढ़ाई, एक साल में 2000 आईपीएबी मामलों में से 600 का निस्तारण किया : जस्टिस प्रतिभा एम सिंह

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने बुधवार को कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के समर्पित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डिवीजन ने दक्षता हासिल की है और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अपीलीय ट्रिब्यूनल (आईपीएबी) से प्राप्त 2000 मामलों में से 600 मामलों का एक साल में निस्तारण किया गया।न्यायाधीश वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डे के अवसर पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थीं। जस्टिस सिंह ने इस कार्यक्रम में "आईपी डिवीजन का एक साल" शीर्षक से रिपोर्ट पेश की।दिल्ली हाईकोर्ट के आईपी डिवीजन का गठन जुलाई 2021 में किया...

ट्रायल कोर्ट ने विकीपीडिया पर भरोसा करके गलती की, मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा: मद्रास हाईकोर्ट ने एनआईए कोर्ट का आदेश रद्द किया
ट्रायल कोर्ट ने विकीपीडिया पर भरोसा करके गलती की, मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा: मद्रास हाईकोर्ट ने एनआईए कोर्ट का आदेश रद्द किया

मद्रास हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA Act) के तहत आरोपी व्यक्ति की रिहाई की याचिका खारिज करने वाले एनआईए कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए दोहराया कि अदालतों को कानूनी विवाद समाधान में विकिपीडिया जैसी भीड़-स्रोत वेबसाइटों का उपयोग करने से बचना चाहिए।जस्टिस एम सुंदर और जस्टिस निर्मल कुमार की खंडपीठ ने एसर इंडिया मामले और हेवलेट पैकर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी विवाद समाधान में विकिपीडिया जैसे स्रोतों का उपयोग करके अदालतों के खिलाफ...

क्या सेक्स वर्कर्स के क्लाइंट्स पर आईपीसी की धारा 370 या 370ए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है? आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच फैसला करेगी
क्या सेक्स वर्कर्स के क्लाइंट्स पर आईपीसी की धारा 370 या 370ए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है? आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच फैसला करेगी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने कानूनी सवाल पर खंडपीठ के फैसले के लिए संदर्भ दिया कि क्या यौनकर्मियों के क्लाइंट पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370 और 370ए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।अदालत ने कहा,"रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मामले को माननीय चीफ जस्टिस के समक्ष उपयुक्त पीठ के गठन के लिए रखे, जिससे यह तय किया जा सके कि 'क्या, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 की धारा 3 से 7 के तहत अपराधों के लिए दर्ज मामले में क्लाइंट पर भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की धारा...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उत्पीड़न के आरोपों पर दर्ज एफआईआर में युवा कांग्रेस प्रमुख श्रीनिवास बीवी को अंतरिम राहत से इनकार किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उत्पीड़न के आरोपों पर दर्ज एफआईआर में युवा कांग्रेस प्रमुख श्रीनिवास बीवी को अंतरिम राहत से इनकार किया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी की उस याचिका में कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें पार्टी से निष्कासित नेता द्वारा श्रीनिवास बी वी के खिलाफ दायर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि श्रीनिवास ने उनका अपमान किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।जस्टिस अजीत बोरठाकुर ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़ित महिला के बयान सहित केस डायरी का अवलोकन करना याचिकाकर्ता की अंतरिम प्रार्थना पर विचार करने से पहले न्यायोचित निर्णय...

बलात्कार पीड़िता की गवाही की पुष्टि पर जोर देना नारीत्व का अपमानः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की याचिका खारिज की
बलात्कार पीड़िता की गवाही की पुष्टि पर जोर देना नारीत्व का अपमानः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि एक महिला या एक लड़की जिसके साथ बलात्कार हुआ है, सह-अपराधी या सहयोगी नहीं है और उसकी गवाही की पुष्टि पर जोर देना नारीत्व का अपमान है। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने आगे कहा कि एक बलात्कार पीड़िता की एकमात्र गवाही के आधार पर एक अभियुक्त को बिना किसी अन्य पुष्टि के दोषी ठहराया जा सकता है, बशर्ते कि ऐसी पीड़िता का सबूत आत्मविश्वास को प्रेरित करे और प्राकृतिक व सत्य प्रतीत हो। इसके साथ ही अदालत ने एक बलात्कार के अभियुक्त की तरफ से दायर उस अपील को...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पूर्वव्यापी नाम और लिंग परिवर्तन को सक्षम करने के लिए शिक्षण संस्थानों को निर्देशित करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पूर्वव्यापी नाम और लिंग परिवर्तन को सक्षम करने के लिए शिक्षण संस्थानों को निर्देशित करने का आदेश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को अपने रिकॉर्ड में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पूर्वव्यापी नाम और लिंग परिवर्तन को सक्षम करने के लिए निर्देश जारी करे।जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के पास ऐसे परिवर्तनों के लिए अपनी वेबसाइटों पर एक फॉर्म होना चाहिए, यानी नाम में बदलाव और लिंग में बदलाव को ध्यान में रखते हुए।अदालत ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के एक पूर्व छात्र की याचिका का निस्तारण...

एनडीपीएस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद धारा 36ए (4) के तहत हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
एनडीपीएस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद धारा 36ए (4) के तहत हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि एनडीपीएस मामले में एक बार चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद, अभियुक्तों की हिरासत को 180 दिनों से अधिक बढ़ाने का आदेश लागू नहीं होता है। अदालत ने कहा कि एक याचिकाकर्ता को हिरासत के विस्तार के उक्त आदेश को ऐसे समय में चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है जब यह अस्तित्व में नहीं है। जस्टिस अजय कुमार गुप्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा:"वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं ने जांच पूरी होने से पहले हिरासत की अवधि बढ़ाने के आदेश का विरोध नहीं किया। जांच...

भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कला या व्यंग्य के लिए सेलिब्रिटी के नाम, छवियों का उपयोग करने की अनुमति ; प्रचार के अधिकार का उल्लंघन नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट
भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कला या व्यंग्य के लिए सेलिब्रिटी के नाम, छवियों का उपयोग करने की अनुमति ; प्रचार के अधिकार का उल्लंघन नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कला, व्यंग्य, समाचार या संगीत के लिए सेलिब्रिटी के नाम या छवियों का उपयोग संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के एक पहलू के रूप में स्वीकार्य होगा और सेलिब्रिटी के प्रचार के अधिकार का उल्लंघन नहीं करेगा।यह देखते हुए कि विशिष्ट कानून के अभाव में प्रचार के अधिकार को भारत में पूर्ण अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता है, जस्टिस अमित बंसल ने कहा,"बौद्धिक संपदा अधिकार, जैसे ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और पेटेंट, जिनका भारत में वैधानिक...

समर ड्रेस कोड: मद्रास हाईकोर्ट ने हर साल अप्रैल से जून के बीच वकीलों के लिए ब्लैक रोब्स वैकल्पिक किया
समर ड्रेस कोड: मद्रास हाईकोर्ट ने हर साल अप्रैल से जून के बीच वकीलों के लिए ब्लैक रोब्स वैकल्पिक किया

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि हर साल 1 अप्रैल से 30 जून के बीच वकीलों के लिए गाउन पहनना ऐच्छिक होगा। रजिस्ट्रार जनरल ने एक सर्कुलर में कहा कि कॉलर बैंड और काला कोट अभी भी अनिवार्य है। इस आशय का अनुरोध मद्रास बार एसोसिएशन के सचिव द्वारा किया गया था। अनुरोध पर विचार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों वाली पूर्ण अदालत ने अब ड्रेस कोड में ढील देने का प्रस्ताव किया है।भीषण गर्मी में वकीलों को राहत देने के लिए राज्य भर के सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों को भी सर्कुलर भेजा गया है।सर्कुलर में...

मध्यस्थता अधिनियम का उल्लंघन होता है तो पार्टी किसी भी स्तर पर मध्यस्थ की नियुक्ति को चुनौती दे सकती है: मद्रास हाईकोर्ट
मध्यस्थता अधिनियम का उल्लंघन होता है तो पार्टी किसी भी स्तर पर मध्यस्थ की नियुक्ति को चुनौती दे सकती है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि अगर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के प्रावधानों का कोई उल्लंघन होता है तो एक पक्ष किसी भी स्तर पर मध्यस्थ की नियुक्ति को चुनौती दे सकता है।कोर्ट ने कहा कि भले ही अवार्ड देनदार ने मध्यस्थता की कार्यवाही में भाग लिया हो या, एकमात्र मध्यस्थ की नियुक्ति की जानकारी होने के बाद, धारा 13 के संदर्भ में उक्त नियुक्ति को चुनौती देने में विफल रहा हो, यह उसे A&C एक्ट की धारा 12(5) के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए धारा 34 के तहत उक्त नियुक्ति को चुनौती देने के...

निचली अदालतों द्वारा तथ्यों और कानून पर गलत निष्कर्ष अनुच्छेद 227 के तहत अदालत में जाने का औचित्य नहीं दे सकता है जब तक कि निचली अदालतों के आदेश के कारण न्याय का स्पष्ट गर्भपात न हुआ हो: जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट
निचली अदालतों द्वारा तथ्यों और कानून पर गलत निष्कर्ष अनुच्छेद 227 के तहत अदालत में जाने का औचित्य नहीं दे सकता है जब तक कि निचली अदालतों के आदेश के कारण न्याय का स्पष्ट गर्भपात न हुआ हो: जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत निचली अदालत द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एक विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों द्वारा तथ्यों और कानून पर गलत निष्कर्ष अनुच्छेद 227 के तहत अदालत में जाने का औचित्य नहीं दे सकता है जब तक कि निचली अदालतों द्वारा पारित आदेश के कारण न्याय का स्पष्ट गर्भपात न हुआ हो।अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को उस क्षेत्र के सभी न्यायालयों और...