मुख्य सुर्खियां
कम CIBIL स्कोर के आधार पर स्टूडेंट को एजुकेशन लोन देने से इनकार नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि कम CIBIL (क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड) स्कोर के आधार पर एक स्टूडेंट को एजुकेशन लोन देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने बैंकों को एजुकेशन लोन के लिए किए गए आवेदनों पर विचार करते समय 'मानवीय दृष्टिकोण' अपनाने को कहा।कोर्ट ने कहा,"छात्र कल के राष्ट्र निर्माता हैं। उन्हें भविष्य में इस देश का नेतृत्व करना है। केवल इसलिए जिस स्टूडेंट ने एजुकेशन लोन के लिए आवेदन किया है, उसका सिबिल स्कोर कम, इस आधार पर बैंक को एजुकेशन लोन के लिए किए...
अटारी चेक पोस्ट पर 102 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी: दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यापारी को दी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने श्री बालाजी ट्रेडिंग कंपनी के मालिक को उस मामले में जमानत दे दी है, जिसमें मुलैठी (मुलेठी) अफगानिस्तान से पिछले साल पंजाब के अमृतसर में अटारी बॉर्डर पर जा रहे एक ट्रक में 102.136 और 0.648 किलोग्राम हेरोइन रोकी गई।अदालत ने कहा,"प्रथम दृष्टया आकलन पर ... इस न्यायालय की सुविचारित राय है कि यह विश्वास करने के लिए उचित आधार है कि याचिकाकर्ता का दोष साबित नहीं किया जा सकता है और आगे यह दिखाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं है कि उसके द्वारा कोई अपराध करने की संभावना है।"अदालत ने...
ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने के चरण में "मिनी ट्रायल" आयोजित करके अभियुक्त को डिस्चार्ज नहीं कर सकता: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया कि अभियुक्त के खिलाफ आरोप तय करने के स्तर पर अदालत न तो रिकॉर्ड पर लाई गई सामग्री की विस्तार से जांच कर सकती है और न ही अभियुक्त के खिलाफ अपराध को स्थापित करने के लिए सामग्री की पर्याप्तता की जांच कर सकती है।जस्टिस राजेश ओसवाल विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार-विरोधी) के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें प्रतिवादी को उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, संवत, 2006 की धारा 5 (1) (डी) और धारा 5(2) सपठित आरपीसी की...
धारवाड़ और कलाबुरगी में कर्नाटक हाईकोर्ट की स्थायी पीठों के खिलाफ वकील की याचिका खारिज
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को धारवाड़ और कलाबुरगी (पहले गुलबर्गा) में हाईकोर्ट की स्थायी पीठों की स्थापना के आदेश को असंवैधानिक घोषित करने करने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया।जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस के एस हेमलेखा की खंडपीठ ने कहा कि पीठों ने वास्तव में सभी क्षेत्रों के लिए "वितरणात्मक न्याय" प्रदान किया है। इस प्रकार, याचिका बिल्कुल भी सार्वजनिक हित में नहीं है।खंडपीठ ने कहा,"धारवाड़ और कालाबुरागी में पीठों की स्थापना उत्तर कर्नाटक के जरूरतमंद नागरिकों को उनके दरवाजे पर...
'पत्नी की हत्या केवल इसलिए की गई क्योंकि उसने उनके अवैध संबंधों का कड़ा विरोध किया': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति और उसकी प्रेमिका की दोषसिद्धि बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति और उसकी प्रेमिका को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा और सजा को बरकरार रखा, जिसने 2011 में अपनी पत्नी को केवल इसलिए मार डाला क्योंकि वह उनके अवैध संबंधों की प्रबल विरोधी थी। जस्टिस कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की पीठ ने कहा कि ऐसे व्यक्ति किसी भी तरह की उदारता के हकदार नहीं हैं क्योंकि वे समाज में एक काला धब्बा हैं।न्यायालय ने फैसले के अपने ऑपरेटिव हिस्से में निष्कर्ष निकाला," अभियोजन पक्ष के गवाह-3 का यह कथन कि...
काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामला - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाओं के एक समूह में अपने आदेश सुरक्षित रखने के महीनों बाद कुछ स्पष्टीकरण मांगे, 14 जुलाई को सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह ज्ञानवापी मस्जिद-काशी विश्वनाथ मंदिर मुद्दे से संबंधित याचिकाओं के एक समूह में अपना आदेश सुरक्षित रखने के महीनों बाद इस मामले में पक्षकारों से कुछ स्पष्टीकरण मांगे। जस्टिस प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने ने 26 मई को कुछ समय के लिए पक्षकारों को सुनने के बाद मामले को 14 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।खंडपीठ के समक्ष एक अन्य याचिका अंजुमन मस्जिद समिति (जो ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करती है) की है , जिसमें वाराणसी कोर्ट के 2021 के उस आदेश को चुनौती दी गई...
यूपी स्कॉलरशिप घोटाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईजिया एजुकेशनल ग्रुप के वीपी को मेडिकल आधार पर अंतरिम अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 500 करोड़ रुपए के राज्य छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी हाइगिया एजुकेशनल ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट, सैयद इशरत हुसैन जाफरी को मेडिकल आधार पर अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए इस तथ्य को ध्यान में रखा कि जाफरी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी की आशंका के कारण उचित इलाज नहीं करा पा रहे हैं ।पीठ ने निदेशक एसजीपीजीआई लखनऊ से एक मेडिकल बोर्ड गठित कर उनकी जांच करने और तीन सप्ताह के भीतर...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी के निर्देश पर नाबालिग पीड़िता को उसके घर छोड़ने वाले व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो केस खारिज किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी के निर्देश पर नाबालिग पीड़िता को उसके घर छोड़ने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता-आरोपी न तो अपराध की योजना बनाने और न ही अपराध करने में शामिल था। कोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अन्य आरोप नहीं लगाया गया है और कहा," आरोप आरोपी नंबर 1 से 4 के खिलाफ है जो कथित रूप से अपराध के कमीशन का हिस्सा रहे...
बीमाधारक की स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में भौतिक तथ्यों को दबाने पर जीवन बीमा पॉलिसी को निरस्त किया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि बीमाधारक की स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में भौतिक तथ्यों को दबाने पर जीवन बीमा पॉलिसी को निरस्त किया जा सकता है।जस्टिस सतीश निनन ने आगे कहा कि दावेदार के लिए ये तर्क देना खुला नहीं होगा कि किसी और ने उसकी ओर से प्रस्ताव फॉर्म भरा था, और ये कि झूठे विवरणों का उल्लेख करने के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"यह मानते हुए या स्वीकार करते हुए कि प्रस्ताव फॉर्म प्रस्तावक द्वारा नहीं बल्कि प्रतिवादी के एजेंट/कर्मचारी सहित किसी अन्य व्यक्ति द्वारा...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिंगायत आरक्षण का विरोध करने वाले याचिकाकर्ता को पिछड़ा आयोग की अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को श्रेणी 2ए के लिए उपलब्ध आरक्षण कोटा में पंचमसाली लिंगायत उप-संप्रदाय को शामिल करने का विरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को इस विषय पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अंतरिम रिपोर्ट दी जाए।चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वराले और जस्टिस एम जी एस कमल की खंडपीठ ने अपने अदालत अधिकारी को याचिकाकर्ता राघवेंद्र डीजी और एडवोकेट जनरल को अंतरिम रिपोर्ट की कॉपी देने का आदेश दिया। इसने याचिकाकर्ता को अतिरिक्त आधारों और परिणामी प्रार्थनाओं के साथ 2 सप्ताह के...
ध्वनि प्रदूषण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अज़ान के लिए लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल करने वाले मस्जिद ट्रस्ट को पक्षकार बनाने के लिए कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांदिवली में गौसिया मस्जिद ट्रस्ट को लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ एक रिट याचिका में प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश आरडी धानुका और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ, कांदिवली पूर्व के ठाकुर गांव की निवासी वकील रीना रिचर्ड द्वारा दायर एक अंतरिम याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पुलिस को गौसिया मस्जिद द्वारा दिन में कई बार लाउडस्पीकरों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।ट्रस्ट और राज्य...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज की, कदाचार के आरोपों को 'बेहद गंभीर' बताया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसमें 2021-22 के लिए आबकारी नीति के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने आदेश सुनाया। कोर्ट ने 11 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।जस्टिस शर्मा ने कहा,"आरोप प्रकृति में बहुत गंभीर हैं कि आबकारी नीति साउथ ग्रुप के इशारे पर उन्हें अनुचित लाभ देने के इरादे से बनाई गई थी। इस तरह का आचरण आवेदक के कदाचार की ओर इशारा करता है जो...
प्रतिनिधित्व करने के लिए उचित अवसर के साथ लोक सेवक की सभी एसीआर प्रविष्टियां उसके पास भेजी जानी चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में सभी प्रविष्टियां, प्रतिकूल प्रविष्टियों सहित उसे इसके खिलाफ प्रतिनिधित्व करने के उचित अवसर के साथ सूचित किया जाना चाहिए।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता ने उत्तरदाताओं से उन्हें 8 अप्रैल, 2022 से एडिशनल डीआईजी के पद पर पदोन्नत करने के लिए निर्देश मांगा, जिस तारीख को उनके जूनियर्स को वर्ष 1998-1999 से एक प्रतिकूल...
महिलाओं को शिक्षा के अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता के बीच चयन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश से वंचित होने के बाद मास्टर ऑफ एजुकेशन (एमईडी) पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अटेंडेंस में छूट की मांग करने वाली एक महिला उम्मीदवार को राहत दी है। और कहा कि महिलाओं को शिक्षा के अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा,"संविधान ने एक समतावादी समाज की परिकल्पना की है जहां नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं, और समाज के साथ-साथ राज्य भी अपने अधिकारों की अभिव्यक्ति की अनुमति देगा।...
मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल के पास कोर्ट के सामान सभी शक्तियां हैं, हालांकि सीपीसी और साक्ष्य अधिनियम की कठोर प्रक्रियाओं से बंधे नहीं हैं: जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत गठित ट्रिब्यूनल गवाहों को बुलाने और उनकी जांच करने, उनसे क्रॉस एक्जामिनेशन करने और दस्तावेजों के प्रकटीकरण का आदेश देने की क्षमता के साथ अदालत की तरह सभी शक्तियां रखता है। हालांकि, यह सिविल प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम में उल्लिखित कठोर प्रक्रियाओं से बाध्य नहीं है।जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा बीमा कंपनी द्वारा उल्लिखित कुछ गवाहों को सम्मन किए बिना दावा याचिका की अनुमति...
विलंबित भुगतान पर ब्याज के भुगतान पर रोक लगाने वाला क्लॉज आर्बिट्रेटर को एक्ट की धारा 31(7) के तहत ब्याज देने की मंजूरी पर रोक नहीं लगाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अनुबंध में जो क्लॉज विलंबित भुगतानों पर ब्याज के भुगतान पर रोक लगाता है, आर्बिट्रेटर को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (ए&सी एक्ट) की धारा 31(7) के तहत ब्याज देने से प्रतिबंधित नहीं करता।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा कि उक्त शर्त केवल अनुबंधित पक्ष पर विलंबित भुगतान पर ब्याज का दावा करने के लिए प्रतिबंध लगाती है। चूंकि ब्याज प्रकृति में प्रतिपूरक है, इसलिए अनुबंध में इस तरह के क्लॉज द्वारा आर्बिट्रेटर की शक्तियों को कम नहीं किया जाता।पीठ ने निष्कर्ष...
पत्नी द्वारा पति पर आरोप लगाते हुए दायर किया गया आपराधिक मामला, उसके तलाक के नोटिस के बाद दर्ज होने पर ससुराल वालों की क्रूरता अपना महत्व खो देती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में महिला द्वारा अपने ससुराल वालों और पति के अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ क्रूरता और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) रद्द कर दी।कलाबुरगी पीठ में बैठे जस्टिस एस राचैय्या की एकल न्यायाधीश पीठ ने मामला रद्द करने की याचिका की अनुमति देते हुए कहा,"पति द्वारा तलाक का नोटिस प्राप्त करने के बाद पत्नी द्वारा दायर आपराधिक मामला पति और ससुराल वालों के खिलाफ क्रूरता, दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपना महत्व खो देता है।"मामले में याचिकाकर्ता उस...
बच्चों के खिलाफ यौन हमले बढ़ रहे हैं, सभी मामलों की रिपोर्ट नहीं की जा सकती; अपराधियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों में खतरनाक और चौंकाने वाली वृद्धि हुई है।जस्टिस संजय कुमार सिंह की पीठ ने यह देखते हुए कि सभी यौन हमले रिपोर्ट नहीं किए जा रहे हैं, इस प्रकार कहा,"...यह इस कारण से है कि बच्चे बलात्कार के कृत्य से अनभिज्ञ हैं और प्रतिरोध करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए वे 'लालची जानवरों' के लिए आसान शिकार बन जाते हैं, जो लड़कियों और बच्चियों को लुभाने की बेईमान, धोखेबाज और कपटी कला का प्रदर्शन करते हैं।"गौरतलब है कि कोर्ट ने आगे कहा कि...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सीईओ के खिलाफ पंजाब में दर्ज एफआईआर पर लगाई रोक
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने आईएएस कैडर के अधिकारी और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीआईओ) अंशुल गर्ग के खिलाफ दर्ज एफआईआर में पंजाब पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर रोक लगा दी।गर्ग की परित्यक्ता पत्नी ने पटियाला के महिला पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन पर दहेज मांगने, सहमति के बिना बच्चे का जबरन गर्भपात कराने और धोखा देने सहित कई अपराधों का आरोप लगाया गया।व्यथित गर्ग ने अपनी पत्नी की प्रभावशाली पृष्ठभूमि पंजाब में कैबिनेट रैंक वाले...
वकील न्यायिक प्रक्रिया के शक्तिशाली स्तंभ हैं, मुवक्किल के प्रति उनके कर्तव्य का सभी को सम्मान करना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वकील न्यायिक प्रक्रिया का एक आवश्यक और शक्तिशाली स्तंभ हैं और मुवक्किल के प्रति उनके कर्तव्य का सभी को सम्मान करना चाहिए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कानूनी प्रतिनिधित्व के मूलभूत सिद्धांतों में से एक यह है कि वकीलों को व्यक्तिगत पक्षपात या पूर्वाग्रहों को अपने क्लाइंट के प्रति अपने पेशेवर दायित्वों को प्रभावित करने या हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो कि निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए है।अदालत ने कहा,"उन्हें अपने...


















