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'जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला हो तो ऐसे अपराधों पर सिर झुकाने की जरूरत': मद्रास हाईकोर्ट ने बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी
मद्रास हाईकोर्ट ने साढ़े चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसले में कहा कि "ऐसे युग में जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला है, हमें दैनिक आधार पर ऐसे अपराधों के लिए अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए।"जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने कहा, "प्रत्येक लड़की को देवी का अवतार माना जाता है और जब तक यौन उत्पीड़न की इस बुराई को सख्त कानूनों और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ खत्म नहीं किया जाता, हमारा समाज कभी भी एक सुरक्षित समाज के रूप में विकसित नहीं हो सकता।"अपने आदेश...
साल 2021 में हुए पुलिस गोलीबारी का मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने आदिवासी की मौत की नए सिरे से जांच का निर्देश दिया, विधवा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के मामले की फिर से जांच करने का निर्देश दिया। ब्रह्मदेव सिंह को जून, 2021 में लातेहार जिले में माओवादी होने के संदेह में सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर मार डाला था। सिंह के परिवार को मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये का भुगतान करें।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने उपरोक्त आदेश सिंह की विधवा जीरामनी देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसने मामले की सीबीआई जांच की मांग की।जस्टिस द्विवेदी ने कहा,"क्लोजर रिपोर्ट... विवेक में...
जिस व्यक्ति का नाम एफआईआर में नहीं, लेकिन आगे की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया, वह सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत मांग सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालत द्वारा अपराध का संज्ञान लेने के बाद आगे की जांच की प्रक्रिया में गिरफ्तार किया गया व्यक्ति सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत वैधानिक जमानत (Default Bail) के लिए आवेदन दायर कर सकता है, यदि वह 90 दिन से अधिक समय तक हिरासत में रहा हो और पूरक आरोप पत्र दायर नहीं किया गया हो।अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 309(2) के तहत पाए गए शब्द "आरोपी यदि हिरासत में है," उसमें केवल वे लोग शामिल हैं, जो मामले का संज्ञान लेने के समय अदालत के समक्ष थे, न कि वे आरोपी जिन्हें...
दिल्ली दंगा मामला: अदालत ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के लिए पांच लोगों के खिलाफ आरोप तय किए
दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले में पांच लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने अंकित, सौरभ शर्मा, रोहित, राहुल कुमार और सचिन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 148, 149, 188, 380, 427, 435/436 और धारा 450 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप तय किए।अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता अली अहमद और दो पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान से पता चलता है कि गैर...
महिलाओं द्वारा आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग "कानूनी आतंकवाद" को उजागर करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को पत्नी (प्रतिवादी नंबर 2) द्वारा अपने पति और ससुराल वालों (याचिकाकर्ताओं) के खिलाफ घरेलू हिंसा, हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी के विभिन्न मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दायर दो आपराधिक शिकायतों को खारिज कर दिया।जस्टिस सुभेंदु सामंत की एकल पीठ ने यह देखते हुए कि रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल साक्ष्य, साथ ही गवाहों के बयान, घटनाओं के प्रतिवादी नंबर 2 के वर्जन से मेल नहीं खाते, आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।पीठ ने कहा,“दोनों मामलों में शारीरिक और मानसिक यातना का...
मोटर दुर्घटना - ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस न होने पर भी बीमाकर्ता थर्ड पार्टी को मुआवजा देगा, वाहन मालिक से वसूली कर सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक बीमा कंपनी मोटर वाहन दुर्घटना में थर्ड पार्टी के दावे को संतुष्ट करने के लिए उत्तरदायी है, भले ही बीमाकृत वाहन के ड्राइवर ने पॉलिसी के नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया हो। इसमें कहा गया है कि बीमा कंपनी बाद में वाहन के मालिक से मुआवज़े की राशि वसूल कर सकती है। इस मामले में दावा याचिकाकर्ताओं ने मृतक की पत्नी और बच्चे होने के नाते मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत 16,00,000/-रुपये के मुआवजे का दावा करते हुए याचिका दायर की।मामले के संक्षिप्त तथ्य...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार की नाबालिग पीड़िता को 'शुभकामनाएं' देते हुए 25+ सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को एक नाबालिग सामूहिक बलात्कार पीड़िता की गर्भावस्था की मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति दी, जो कि चिकित्सीय गर्भावस्था समाप्ति अधिनियम, 1971 के तहत 24 सप्ताह की वैधानिक सीमा से अधिक हो गई थी। पहले के अवसर पर न्यायालय ने कहा था कि वर्तमान मामला 1971 अधिनियम के तहत परिकल्पित अपवाद के अंतर्गत आता है, जिसमें गर्भावस्था को जारी रखने की स्थिति में मां के जीवन को खतरा हो सकता है और 25+ सप्ताह की गर्भवती नाबालिग लड़की के लिए गर्भपात की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक मेडिकल...
देवी दुर्गा के खिलाफ एफबी पर टिप्पणी पोस्ट करने के 'नाबालिग' आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी, सितंबर 2022 से जेल में बंद था
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक नाबालिग को जमानत दे दी, जिस पर अपने फेसबुक अकाउंट पर देवी दुर्गा के खिलाफ टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप है। उसकी हाई स्कूल की मार्कशीट और आधार कार्ड का अवलोकन करते हुए, जिसमें उसका जन्म वर्ष जनवरी 2006 दिया गया है, जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने उसे जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। उसे सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था।नाबालिग आरोपी पर आईपीसी की धारा 298, 505 (i) (सी) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे 27 सितंबर, 2022 को इस...
पितृत्व अवकाश से इनकार अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे के जीवन के अधिकार का उल्लंघन; मद्रास हाईकार्ट ने कहा, इस विषय पर कानून की जरूरत
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पितृत्व अवकाश कानून की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी ने एक फैसले में एक पुलिस अधिकारी को राहत प्रदान की, जबकि विभाग की ओर से उसके खिलाफ परित्याग का आदेश पारित किया गया था। उसकी पत्नी गर्भवती थी और उसे अपनी पत्नी की देखभाल करनी थी।कोर्ट ने फैसले में बच्चे की प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल के दिनों में पिता और मां दोनों की भूमिका के महत्व की चर्चा की।कोर्ट ने कहा कि एकल परिवारों की चुनौतियों के कारण, नीति निर्माताओं के लिए जैविक/दत्तक माता-पिता के...
'सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा की करुण मांग': उड़ीसा हाइकोर्ट ने 7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी की सजा बरकरार रखी
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में सात वर्षीय बच्ची से बलात्कार के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा।जस्टिस संगम कुमार साहू की सिंगल जज बेंच ने अपराध को 'जघन्य' करार देते हुए कहा, “वर्तमान मामले में, पीड़िता ने किसी भी समय घटना को छुपाने की कोशिश नहीं की; बल्कि उसने तुरंत इसकी सूचना अपने माता-पिता को दी। पीड़ित की ओर से इस तरह का आचरण सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा के विलापपूर्ण मांग को प्रकट करता है, जो न केवल प्रासंगिक है बल्कि अपीलकर्ता के खिलाफ भी आरोप लगाने वाला है।''घटना के समय...
पूर्व पत्नी आईपीसी की धारा 498ए के तहत केवल विवाह के दौरान हुए कथित उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत अपराध से संबंधित आरोपों पर एक महिला द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है, बशर्ते कि वह अपनी शादी के दरमियान हुए उत्पीड़न और क्रूरता की घटनाओं का दावा करे। जस्टिस जितेंद्र दोशी ने कहा, "...आईपीसी की धारा 498ए के तहत अपराध के आरोप तलाकशुदा पत्नी के कहने पर भी लगाए जा सकते हैं, बशर्ते कि वह उन उत्पीड़नों और क्रूरताओं की घटना का आरोप लगाए, जिनका सामना उन्हें शादी के दरमियान करना पड़ा था।”कोर्ट ने कहा,“महिला आईपीसी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएमएलए के तहत 'रिपोर्टिंग संस्थाओं' में सीए को शामिल करने के खिलाफ याचिका पर केंद्र का जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी या कॉस्ट अकाउंटेट को "रिपोर्टिंग संस्थाओं" की परिभाषा में शामिल करने और उन पर अन्य दायित्व डालने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से रुख मांगा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा को मामले में उचित निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया और इसे 04 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।यह याचिका पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रजत...
कानूनी तौर पर विवाहित न होने के बावजूद दूसरी पत्नी मृत पति के सेवा संबंधित दावों को सुरक्षित करने की हकदारः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना है कि दूसरी पत्नी अपने मृत पति के सेवा और टर्मिनल लाभों को पाने की हकदार है, भले ही उसे ‘‘कानूनी रूप से विवाहित पत्नी’’ का दर्जा प्राप्त न हो। जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस के. मनमाधा राव की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि, ‘‘हमारा विचार है कि ऐसे मामलों में, भले ही यह पाया जाए कि पहली शादी के अस्तित्व के दौरान किए गए इस विवाह के लिए दूसरी पत्नी को पत्नी का दर्जा प्राप्त नहीं है, फिर भी मृत पति के सेवा लाभ और सेवा संबंधित दावों को सुरक्षित करने की हकदार है। न्यायालयों...
नूंह विध्वंस: रहवासियों ने किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट होने के लिए समय देने के 2020 के आदेश की अवमानना का आरोप लगाते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह के निवासियों द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता रहवासियों के घर इस महीने की शुरुआत में एक अतिक्रमण अभियान में कथित तौर पर ध्वस्त कर दिए गए थे।याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के अधिकारियों ने जानबूझकर 2020 के न्यायालय के आदेश की अवज्ञा की, जिसमें नूंह-मेवात के उपायुक्त को कब्जा लेने से पहले निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्देश दिया गया था।आदेश में कहा गया है, "जब तक उनका प्रतिनिधित्व तय नहीं हो...
डायबिटीज ‘उपचार योग्य’ है, यह पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण के भुगतान से बचने का बहाना नहींः कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनंत कुमार केजी नामक एक व्यक्ति द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। फैमिली कोर्ट ने उसे अपनी अलग रह रही पत्नी को मासिक भरण-पोषण के रूप में 10,000 रुपये देने का निर्देश था। जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की पीठ ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह डायबिटीज और संबंधित बीमारियों से पीड़ित है, इसलिए वह पिछले तीन वर्षों से अपने नाबालिग बच्चे के पालन-पोषण के लिए मासिक भरण-पोषण राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। ...
दिल्ली-एनसीआर एड्रेस वाले आधार कार्ड के आदेश को वापस लेने की अधिसूचना चार सप्ताह में प्रकाशित करें: हाईकोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को अपनी वेबसाइट पर अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया, जिसने 13 अप्रैल को जारी पूर्व अधिसूचना को वापस ले लिया। वापस ली गई अधिसूचना में भविष्य में नामांकन के लिए दिल्ली या एनसीआर क्षेत्र के एड्रेस वाले आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया था।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने वकीलों के संगठन को अगली अधिसूचना जारी करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।अदालत ने एडवोकेट रजनी कुमारी द्वारा अधिसूचना...
टूलकिट मामला : दिशा रवि ने पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने वाली जमानत शर्त में संशोधन की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
साल 2021 के "टूलकिट मामले" में आरोपी क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर जमानत की शर्त में संशोधन की मांग की है। दिशा रवि पर ज़मानत की शर्त लगाते हुए कहा गया है कि उन्हें विदेश यात्रा से पहले हर बार अदालत से पूर्व अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आदेश सुरक्षित रख लिया और कहा कि इसे आज शाम चार बजे सुनाया जाएगा।रवि को दिल्ली पुलिस ने 13 फरवरी, 2021 को उनके बेंगलुरु स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें 23 फरवरी, 2021 को ट्रायल कोर्ट...
मोटर वाहन दुर्घटना - पॉलिसी धारक के परिवार के सदस्य को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्लेम में मुआवज़ा नहीं मिल सकता : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस वी गोपाल कृष्ण राव ने मोटर दुर्घटना दावा मामले में कहा कि उल्लंघन करने वाले वाहन के मालिक का बेटा थर्ड पार्टी नहीं है और उसे थर्ड पार्टी के बीमा क्लेम के तहत बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा नहीं दिया जा सकता।तथ्यात्मक मैट्रिक्सदावेदार लॉरी के क्लीनर के रूप में कार्यरत है और लॉरी चालक द्वारा लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं। याचिकाकर्ता ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दोषी वाहन के मालिक और बीमाकर्ता के खिलाफ मुआवजे और...
खेड़ा पिटाई कांड: घटना के वीडियो की गुणवत्ता खराब होने के कारण 14 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 4 की पहचान की गई- अदालत की रिपोर्ट
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बताया कि पिछले साल गुजरात के खेड़ा में मुस्लिम पुरुषों को सार्वजनिक रूप से पीटने की घटना के वीडियो खराब गुणवत्ता के हैं और आरोपियों की पहचान में बाधा उत्पन्न करते हैं।गुजरात हाईकोर्ट को नडियाद सीजेएम चित्रा रत्नू की रिपोर्ट में हालांकि घटना में आरोपी 14 पुलिसकर्मियों में से 4 की पहचान की गई। इसमें स्थानीय अपराध शाखा निरीक्षक, उप-निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं।जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस एमआर मेंगडे की खंडपीठ ने जुलाई में सीजेएम को घटना से संबंधित पेन ड्राइव...
जब बर्थ सर्टिफिकेट बनाया जाता है तो पासपोर्ट एंट्री उसके अनुरूप होनी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि पासपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन त्रुटियां हो सकती हैं और जब बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) तैयार किया गया है तो पासपोर्ट एंट्री बर्थ सर्टिफिकेट के अनुरूप होनी चाहिए।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने इस प्रकार कहा:“यह सच है कि पासपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज है और आवेदक को आवेदन के समय सही विवरण देना होगा। लेकिन कभी-कभी त्रुटियां हो जाती हैं। याचिकाकर्ता ने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी अपना बर्थ सर्टिफिकेट संलग्न किया और उससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता का जन्म...




















