मुख्य सुर्खियां
न्यायालय अपर्याप्त/अपेक्षित स्टांप शुल्क स्वयं प्राप्त कर सकता है, जब्त किए गए समझौते को स्टांप कलेक्टर को भेजने की आवश्यकता अनिवार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में यह दोहराया कि एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत शक्ति का प्रयोग कर रहे न्यायालय के लिए बिना स्टांप के या अपर्याप्त स्टांप के समझौते को जब्त करना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह माना कि न्यायालय खुद स्टांप एक्ट, 1899 की धारा 35 के तहत कमी/अपेक्षित स्टांप शुल्क एकत्र कर सकता है, और स्टांप एक्ट की धारा 35 के प्रावधान (ए) के तहत अपेक्षित जुर्माने के साथ अपेक्षित स्टांप शुल्क जमा करने में सक्षम बना सकता है। जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने बिना स्टांप के/अपर्याप्त...
पत्नी का पति पर झूठे आरोप लगाना, पुलिस की लगातार धमकी देना क्रूरता : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी का पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठे आरोप लगाना और उन्हें पुलिस स्टेशन में बुलाए जाने की लगातार धमकी देना क्रूरता का कार्य है जो मानसिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ पति की तरफ से दायर अपील को स्वीकार कर लिया है। फैमिली कोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया था,जिसमें उसने पत्नी से क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मांग की थी। उनकी...
अविश्वास प्रस्ताव के कारण हटाए गए सरपंच खुद को हटाने के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए उपचुनाव लड़ सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर स्थित पीठ ने हाल ही में कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के कारण पद से हटा दिया गया एक सरपंच परिणामी रिक्ति को भरने के लिए आयोजित उप-चुनाव लड़ सकता है। जस्टिस एएस चंदूरकर और जस्टिस वृषाली वी जोशी की खंडपीठ ने कहा कि महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो ऐसे सरपंच को उनके स्वयं के निष्कासन के कारण आवश्यक उप-चुनाव लड़ने से रोक सके।कोर्ट ने कहा,“चुनाव लड़ने का अधिकार पूरी तरह से वैधानिक अधिकार है और ऐसा अधिकार उस क़ानून द्वारा शासित होता है,...
पीएम मोदी डिग्री मानहानि केस| अहमदाबाद कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर शीघ्र सुनवाई से इनकार किया
गुजरात के अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (अरविंद केजरीवाल) और आप सांसद संजय सिंह द्वारा दायर आपराधिक मानहानि शिकायत में ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें समन जारी करने के खिलाफ उनकी पुनर्विचार याचिका पर तेजी से सुनवाई करने मांग वाली याचिका खारिज कर दी।दोनों ने अपनी पुनर्विचार याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग की, जिसका उद्देश्य 29 अगस्त से पहले सुनवाई करना- जिस तारीख पर गुजरात हाईकोर्ट मुकदमे पर रोक लगाने और त्वरित पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के लिए उनकी याचिका पर सुनवाई...
बच्चों को कोचिंग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने कोचिंग सेंटरों को स्कूलों से जोड़ने की नीति की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को वह जनहित याचिका खारिज कर दी, जिसमें दिल्ली सरकार को कोचिंग सेंटरों को स्कूलों और कॉलेजों से जोड़ने के लिए नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने कहा कि अदालत दिल्ली सरकार को ऐसी नीति बनाने का निर्देश नहीं दे सकती। इस प्रकार, उसे मामले में प्रार्थना के अनुसार राहत देने का कोई कारण नहीं मिला।खंडपीठ ने कहा कि कोचिंग वैकल्पिक है, अनिवार्य नहीं। किसी भी बच्चे को कोचिंग सेंटरों में जाने के लिए मजबूर नहीं...
चश्मदीद ने घटना को ‘बलात्कार’ नहीं बताया,‘पीड़िता के विरोध’ की कोई चर्चा नहीं, क्या यह सहमति थी? : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को खारिज कर दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पीड़िता की गवाही पर अविश्वास करते हुए एक विवाहित महिला के साथ कथित बलात्कार करने के आरोपी एक व्यक्ति की सजा को पलट दिया है। जस्टिस अरुण देव चौधरी ने पीड़िता के बयानों में विसंगति देखी और यह भी आश्चर्य जताया कि क्या कृत्य सहमति से किया गया था क्योंकि चश्मदीद गवाह ने पीड़िता द्वारा कृत्य का प्रतिरोध करने के बारे में कोई बयान नहीं दिया है। पीठ ने कहा, ‘‘वह (चश्मदीद) सुबह लगभग 11 बजे पीड़िता के घर गई और उसने आरोपी और पीड़िता को अवैध कृत्य करते देखा और उन्हें अवैध कृत्य में शामिल...
समझौते के तहत आपसी सुलह से विवाद का समाधान नहीं हुआ: राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्बिट्रेटर नियुक्त किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के लिए मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत आवेदन की अनुमति दी। कोर्ट ने यह अनुमति इस आधार पर दी कि पक्षकारों के बीच हुआ पट्टा समझौता 'आपसी सुलह' द्वारा विवाद को हल करने के लिए सिस्टम प्रदान करता है। लेकिन प्रतिवादी ने इसमें भाग नहीं लिया और 'आपसी सुलह' के माध्यम से विवाद को हल करने का कोई प्रयास नहीं किया।जस्टिस अशोक कुमार गौड़ की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,“इस न्यायालय को आवेदकों के विद्वान वकील की दलील में दम नजर आया कि...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह-गुरुग्राम हिंसा के दौरान कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई मस्जिद के केयर टेकर को पुलिस सुरक्षा दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस मस्जिद के कार्यवाहक (Caretaker) को अस्थायी पुलिस सुरक्षा दी की, जिसे नूंह हिंसा के दौरान भीड़ द्वारा कथित तौर पर तोड़ दिया गया था। जस्टिस अनूप चितकारा ने स्थिति की संभावित गंभीरता को देखते हुए पंद्रह दिनों के लिए सुरक्षा दी, लेकिन स्पष्ट किया कि आदेश में मामले की योग्यता के आधार पर निर्णय नहीं लिया गया है।“अगर जीवन को ख़तरे की आशंका के आरोप सच साबित होते हैं तो इससे अपूरणीय क्षति हो सकती है। इस प्रकार, इस मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में यह...
'ट्रांसजेंडर जातिगत पहचान नहीं, हर व्यक्ति को आत्मनिर्णय की अनुमति होनी चाहिए': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा, "ट्रांसजेंडर जातिगत पहचान नहीं है और पुरुष/महिला लिंग वर्गीकरण के अनुरूप नहीं होने वाले लोगों सहित प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्णय की अनुमति दी जानी चाहिए।"चीफ जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने कहा कि बिहार सरकार ने 2022 के जाति सर्वेक्षण के लिए जाति गणना के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शामिल करके गलती की है।कोर्ट ने कहा कि समुदाय का कोई भी व्यक्ति ट्रांसजेंडरों को जाति के रूप में न मानने की मांग करते हुए राज्य सरकार को...
निर्णय के बाद की सुनवाई पूर्व-निर्णय की सुनवाई की प्रक्रियात्मक कमी को दूर कर सकती है- जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि "बेकार औपचारिकता सिद्धांत" उन मामलों में प्रासंगिक होगा, जहां किसी पक्ष के मामले में सार नहीं है या सफलता की संभावना कम है। ऐसे में प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों को लागू करने से परिणाम नहीं बदलेगा।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भी निर्णय के बाद की सुनवाई का सहारा लेने से प्रक्रियात्मक खामियां ठीक हो सकती हैं और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकती है।कोर्ट ने कहा,"जहां न्यायालय को लगता है कि पार्टी का मामला "वास्तविक सार"...
'लिंग परिवर्तन एक संवैधानिक अधिकार': लिंग परिवर्तन सर्जरी की अनुमति मांगने वाली महिला कांस्टेबल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि किसी व्यक्ति को सर्जिकल हस्तक्षेप के माध्यम से अपना लिंग बदलने का "संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त" अधिकार है, पिछले सप्ताह राज्य के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को एक महिला कांस्टेबल द्वारा लिंग बदलवाने की प्रक्रिया की अनुमति मांगने के लिए दायर एक आवेदन का निपटान करने का निर्देश दिया।जस्टिस अजीत कुमार की पीठ ने आगे कहा कि यदि आधुनिक समाज में हम किसी व्यक्ति में अपनी पहचान बदलने के इस निहित अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं तो हम "केवल जेंडर आईडेंटिटी डिस ऑर्डर...
अंतरिम भरण-पोषण/हिरासत आवेदनों पर 90 दिनों में निर्णय लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए फैमिली कोर्ट को निर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में किसी विशिष्ट नियम के अभाव में एक समय सीमा के भीतर विवाह और पारिवारिक मामलों से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए राष्ट्रीय राजधानी में फैमिली कोर्ट को कई निर्देश जारी किए हैं।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जब एक मुकदमा विधिवत स्थापित किया गया है तो प्रतिवादी को दावे का जवाब देने और 30 दिनों के भीतर बचाव का लिखित बयान दाखिल करने के लिए समन जारी किया जा सकता है।पीठ ने कहा कि ऐसा कोई समन तब जारी नहीं किया जाएगा जब...
लिखित प्रस्तुति कभी भी मौखिक तर्कों का स्थान नहीं ले सकतीं : जस्टिस उज्ज्वल भुइयां
हाल ही में नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित अपने अभिनंदन समारोह में बोलते हुए मौखिक सुनवाई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "हालांकि लिखित प्रस्तुतियां निस्संदेह बहुत उपयोगी हैं, लेकिन वे मौखिक तर्कों का विकल्प नहीं हो सकते।" इसी समारोह में हाल ही में नियुक्त किए गए जस्टिस एसवी भट्टी को भी सम्मानित किया गया।जस्टिस भुइयां ने एक न्यायाधीश के रूप में अपने शुरुआती दिन याद किये, "एक नए...
आयकर अधिनियम के अनुसार चेक धारक द्वारा ऋण को बही में दर्ज न करना एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत को खारिज करने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एकल न्यायाधीश के एक संदर्भ का उत्तर देते हुए कहा कि चेक धारक द्वारा चेक जारीकर्ता को दिए गए ऋण को बहीयों/आयकर रिटर्न में दर्ज करने में विफलता, परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई अधिनियम) की धारा 138 के तहत ऋण को अप्रवर्तनीय नहीं बना देगी। जस्टिस एएस चंदूरकर और जस्टिस वृषाली वी जोशी की खंडपीठ ने कहा कि चेक धारक के पक्ष में कानूनी रूप से लागू ऋण/देयता का अस्तित्व अधिनियम की धारा 139 के तहत माना जाता है, और ऐसी धारणा का खंडन करने का दायित्व आरोपी पर है।कोर्ट ने...
जब तक कानून सक्षम ना करे, सेवानिवृत्ति या इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट का दावा करने का अधिकार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि एक कर्मचारी, जिसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या अन्यथा, या इस्तीफे के जरिए अपनी नौकरी छोड़ी है, उसके पास अपनी छुट्टी को कैश (नकदीकरण) कराने का दावा करने का कोई निहित या अंतर्निहित अधिकार नहीं होता, जब तक कि किसी कानून, नियमों या सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले मानदंडों के जरिए ऐसे प्रावधान नहीं किए गए हैं।जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और जस्टिस सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील पर विचार करते हुए की। अपील में एकल न्यायाधीश के उस...
गुजरात हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यवाही में अतिरिक्त भाषा के रूप में 'गुजराती' के उपयोग की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका को 'गलत' मानकर खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को (तत्कालीन) राज्यपाल के 2012 के फैसले को लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई। उक्त फैसले में हाईकोर्ट के समक्ष अदालती कार्यवाही में अंग्रेजी के अलावा गुजराती भाषा के उपयोग को अधिकृत किया गया।इस जनहित याचिका में गुजराती भाषा के उपयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अक्टूबर 2012 के फैसले (प्रशासनिक पक्ष पर लिया गया) को भी चुनौती दी गई। उक्त याचिका पिछले साल सोशल...
कथित तौर पर यातायात में 'बाधा डालने' के वाले व्यक्ति को हिरासत में हिंसा का शिकार बनाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिन्होंने सड़क किनारे पार्किंग के मामूली मुद्दे पर कथित तौर पर लड़के को हिरासत में हिंसा का शिकार बनाया।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने राज्य की राजधानी के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों के काम न करने को लेकर भी चिंता व्यक्त की और पुलिस विभाग को इस संबंध में सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।अदालत ने यह आदेश पीड़ित द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इस याचिका...
आरएसएस मानहानि मामला: राहुल गांधी ने अपने भाषण की ट्रांसक्रिप्ट को साक्ष्य के रूप में पेश करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भिवंडी की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पदाधिकारी द्वारा दायर चल रहे मानहानि मामले में उनके कथित अपमानजनक भाषण की ट्रांसक्रिप्ट को 'सबूत' के रूप में पेश करने की अनुमति दी गई है। आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने गांधी पर 2014 में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए "झूठे और निराधार आरोप" लगाकर आरएसएस को...
लगभग 15 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार नहीं कहा जा सकताः दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में एक मुस्लिम व्यक्ति को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि लगभग 15 साल की पीड़ित बच्ची, जो उसकी पत्नी थी,के साथ शरीरिक संबंध बनाने को बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग की गवाही के मद्देनजर पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 6 के तहत व्यक्ति के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। पीड़िता का कहना है...
'जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला हो तो ऐसे अपराधों पर सिर झुकाने की जरूरत': मद्रास हाईकोर्ट ने बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी
मद्रास हाईकोर्ट ने साढ़े चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसले में कहा कि "ऐसे युग में जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला है, हमें दैनिक आधार पर ऐसे अपराधों के लिए अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए।"जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने कहा, "प्रत्येक लड़की को देवी का अवतार माना जाता है और जब तक यौन उत्पीड़न की इस बुराई को सख्त कानूनों और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ खत्म नहीं किया जाता, हमारा समाज कभी भी एक सुरक्षित समाज के रूप में विकसित नहीं हो सकता।"अपने आदेश...

















